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हरियाणा गाय नस्ल सुधार कार्यक्रम

परिचय

हरियाणा प्रदेश अपने पशुधन के लिए विश्वविख्यात है। प्रदेश का दुग्ध उत्पादन 74.42 लाख एवं  प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 773 ग्राम है। राज्य की हरियाणा नस्ल की गाय दूध तथा भारवाही दोनों कार्यों के लिए जानी जाती है। इस नस्ल की गायों को दुग्ध उत्पादन तथा बैलों को कृषि कार्य के लिए उपयोग में लाया जाता है। पिछले कुछ समय से कृषि कार्य में निरंतर मशीनीकरण के चलते हरियाणा नस्ल के बैलों की मांग कम होने के कारण, गायों के पालन का व्यवसाय उस गति से नहीं बढ़ पाया जिस गति से बढ़ना चाहिए था। देशी नस्ल की गाय हरियाणा एवं उसके उत्पाद जैसे दूध, घी, गोबर, गौ मूत्र, इत्यादि का महत्व प्राचीन समय से ही विख्यात है।

हरियाणा गाय पालने का महत्व

1.  गाय के दूध में वसा की मात्रा कम होती है जिसके कारण बच्चों एवं बूढों के लिए सुपाच्य होता है।

2.  गाय का दूध विटामिन डी, पोटाशियम एवं कैल्शियम का अच्छा स्रोत है जोकि हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है। इसके साथ ही गाय के दूध में कैरोटीन भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह कैरोटीन मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता को 115  प्रतिशत तक तक बढ़ाता है।

3.  गाय के दूध में विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जो आँखों में होने वाले रतोंधी रोग की रोकथाम के लिए आवश्यक है। इसके साथ विटामिन बी 12 व राइबोफ्लेविन भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक होता है।

4.  गाय का दूध ब्रेस्ट कैंसर से बचाव करता है और ब्लड-क्लोंटिंग, मांसपेशियों के सिकुड़न, रक्तचाप नियंत्रण तथा सेलमेमबरैन के कार्यों को सुचारू रूप से चलाने में भी सहायक होता है।

5.  गाय के दूध से  बनाई गई दही के वैक्टीरिया ऐसे पदार्थ की संरचना करते है जो लिवर की कोलेस्ट्रोल बनने को रोकता है। यह दही रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी उपयोगी होती है।

6.  गाय का दूध, देशी घी को श्रेष्ठ स्रोत माना गया है।

7.  गौ, मूत्र, गैस, कब्ज, दमा, मोटापा, रक्तचाप, जोड़ों का दर्द, मधुमेह, कैंसर आदि अनेक बीमारियों की रोकथाम के लिए बहुत उपयोगी होता है।

8.  देशी गाय के गोबर में लगभग तीन करोड़, क्रोस ब्रीड गाय के गोबर में 78 लाख तथा भैंसों के गोबर में कुछ लाख जीवाणु होते हैं जो भूमि की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाते है। वैज्ञानिक तौर पर देखा जाए तो एक गाय के गोबर व मूत्र से बनाई गई खाद से 25 एकड़ तक भूमि को उपजाऊ बनाया जा सकता है इसमें नाइट्रोजन, कार्बन, फास्फोरस, विटामिन, खनिज लवण, ऑर्गेनिक पदार्थ प्राचुर मात्रा में पाये जाते हैं।

9.  विदेशी नस्ल की गायों का दूध A – 1 के रूप में जाना जाता है और इसमें कैसोमोर्फिन नामक रासायन पाया जाता है जो विषैला होता है। अत: इन गायों का कच्चा दूध प्रयोग में नहीं लाया जाता जबकि देशी गाय का दूध A- 2 के रूप माना जाता है और इसमें इम्यूनो एसिड प्रोटीन पाई जाती है जो इन्सूयूलिन प्रोटीन के साथ जुड़ कर A- 2 दूध का निर्माण करती है। इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है जो विभिन्न बीमारियाँ की रोकथाम के लिए लाभदायक है।

हरियाणा नस्ल सुधार कार्यक्रम/योजना

हरियाणा नस्ल की गायों की उपयोगता व उसके महत्व को देखते हुए राज्य सरकार ने एक अनूठी योजना चलाई है। योजना के अंतर्गत, यदि कोई पशुपालक हरियाणा नस्ल की गाय पालता है और गाय का दुग्ध उत्पादन 1600 से लीटर 2000 प्रति ब्यांत है तो ऐसी गाय के पालक को 5000/- रूपये की प्रोत्साहन राशि तथा जिन पशुपालकों की गायों का दुग्ध उत्पादन 2000 लीटर प्रति ब्यांत से ज्यादा है, ऐसे गाय पालकों को 10000/- रूपये की प्रोत्साहन राशि हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड द्वारा दी जाएगी। केन्द्रीय योजना के अंतर्गत 1000 रू की राशि अलग से सहायता के रूप में दी जाएगी।

पशुपालक इस योजना का लाभ कैसे लें

सरकार द्वारा चलाई जा रही है इस योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालक अपनी हरियाणा नस्ल की गायों का पंजीकरण अपने चिकित्सक के पास करवाएं और दूध की उत्पादकता रिकॉर्ड करवाएं। पंजीकरण के लिए किसी भी प्रकार की कोई राशि देय नहीं है। दुग्ध मापन की पहली रिकार्डिंग गाय ब्याने के 5 से 25 दिनों के बीच करवाना अनिवार्य है  तदनोपरांत प्रति माह भी दुग्ध मापन करवाएं। विभागीय कर्मचारी दुग्ध मापन का कार्य किसान के घर द्वार पर करेगा और रिकॉर्ड रखेगा।

हरियाणा नस्ल के उत्तम सांड़ो की पहचान

राष्ट्रीय डेरी योजना के तहत उच्च कोटि के हरियाणा नस्ल के सांड़ो की पहचान के लिए राज्य के तीन जिलों भिवानी, रोहतक व झज्जर के 80 गांवों में यह प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इस प्रोग्राम के तहत, इन जिलों में 40 कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्त्ताओं का चयन किया गया है जो कि पशुपालकों के घर द्वारा पर कृत्रिम गर्भधान विधि द्वारा हरियाणा नस्ल सुधार की गतिविधिओं को कार्यान्वित कर रहे हैं। कृत्रिम गर्भाधान से जन्में उच्च कोटि की गायों के बछड़ों को सरकार नस्ल सुधार के लिए 10,000 रूपये की राशि तक खरीद करेगी। ऐसे बछड़ों को वैज्ञानिक ढंग से पाला जायेगा और सांड़ बनने पर हरियाणा राज्य में नहीं अपितु अन्य राज्यों को भी नस्ल सुधार के लिए दिए जायेंगे।

राष्ट्रीय डेयरी योजना की विशेषताएँ

राष्ट्रीय डेयरी योजना के अंतर्गत, आपके क्षेत्र में गाय/भैंस में घर पहुँच कृत्रिम गर्भाधान सेवा अब केवल एक फोन कॉल पर उपलब्ध है। इस योजना के अंतर्गत-

  • मानक संचालक प्रक्रिया का अनुकरण करते हुए प्रशिक्षित एवं अनुभवी तकनीशियन द्वारा विश्वसनीय तथा विश्वस्तरीय कृत्रिम गर्भाधान सेवा उपलब्ध कराई जाती है।
  • भारत सरकार द्वारा गठित केन्द्रीय निगरानी इकाई से प्रमाणित (ए) या (बी) श्रेणी के वीर्य उत्पादन केंद्र में उत्पादित उच्च गुणवता का वीर्य का उपयोग किया जाता है।
  • पशुओं की उत्पादकता वृद्धि हेतु अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित संतति परीक्षण (प्रोजेनी टेस्टिंग) तथा वंशावली चयन, (पेदिग्री सिलेक्शन) कार्यक्रमों के क्रियान्वयन द्वारा उच्च अनुवांशिक योग्यता के सांड़ो  का उत्पादन, क्षेत्रीय स्तर पर पशुपालकों की भागदारी से करने की योजना है। जिससे पशुओं के निरंतर विकास में मदद होगी तथा कृत्रिम गर्भाधान हेतु उच्च गुणवत्ता के वीर्य के मांग की पूर्ति होगी।

परीक्षण संबंधी कार्यक्रमों की जानकारी

1. संतति परिक्षण कार्यक्रम में प्रजनन हेतु प्रयुक्त किए गए सांड़ो का मूल्यांकन उनसे उत्पन्न संतति के दुग्ध उत्पादन के आधार पर किया जाता है। मूल्यांकन के आधार पर साँड़ उत्पन्न करने के लिए जाता है। जिससे आने वाली पीढ़ियों में बेहतर दुग्ध उत्पादन क्षमता सुनिश्चित की जा सकती है।

  • वंशावली चयन कार्यक्रम में देशी नस्लों राठी, साहिवाल, थारपारकर, है हरियाणा, गीर, मंक्राज, पंढरपूरी, जाफराबादी, नीली रावी, बन्नी इत्यादि के संरक्षण तथा विकास से उद्देश्य से इन नस्लों में कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देकर तथा दूध उत्पादन अभिलेखन (रिकार्डिंग) द्वारा उच्च उत्पादकता वाले पशुओं का चयन अगली पीढ़ी के सांड़ो के उत्पादन के लिए किया जाता है।

अत: सर्वोत्तम साँड़ के अचूक तथा विश्वसनीय चुनाव हेतु आपका निम्नाकिंत सहयोग अपेक्षित है।

1.  कृत्रिम गर्भाधान करते वक्त आपके पशु की पहचान हेतु कान में लागाया जाने वाला 12 अंकों का विशिष्ट बिल्ला (टैग) लगवाने में सहयोग करें। टैग के नंबर से सही जानकारी रखने में मदद होती है। अगर किसी कारणवश टैग निकल जाता है। या गिर जाता है तो अपने कृत्रिम गर्भाधानकर्ता को कहकर नया टैग लगवा लें। इससे अनुवांशिक विकास को निर्धारति करने हेतु सटीक और विश्वसनीय आंकड़ो का संग्रह करने में मदद मिलती है।

2.  इस कार्यक्रम में उत्पन्न होने वाली मादा पशुओं का तथा क्षेत्र में उपलब्ध अधिक दुग्ध उत्पादन क्षमता वाले पशुओं के दूध उत्पादन का अभिलेखन भी किया जाता है। अगर आपके पास अधिक दूध उत्पादन करने वाले पशु है तो उसे निकट के कृत्रिम गर्भाधान केंद्र पर पंजीकृत कराएँ।

3.  पशु के दूध की पहली रिकॉर्डिंग ब्याने के 5-25 दिन के अंतर की जाती है तथा उसके बाद लगभग एक माह के अंतराल से पूरे ब्यांत में 10 से 11 बार आती है। दूध रिकार्डिंग आपके घर पूर्व निर्धारित तिथि को सुबह तथा शाम दोनों वक्त का दूध नापने आते है।

4.  दूध रिकार्डिंग के दिन बछड़े को, पशु के थन से लगाकर दूध न पिलाएं इससे गलत रिकार्डिंग होगी। अगर जरूरी हो तो पवासने के लिए थन लगाने दे बाद में अलग कर  दें। रिकॉर्डिंग के बाद बछड़े को अलग से दूध पीला दें।

5.  दूध रिकार्डिंग के निर्धारित दिन अगर आपका पशु अस्वस्थ है तो दूध  को इसकी सूचना रिकॉर्डर को दें, जिससे दूध रिकार्डिंग पशु के स्वस्थ्य होने पर 2-4 दिन बाद की जा सके।

6.  सही तरीके से दूध की रिकॉर्डिंग करने से प्रजनन के लिए प्रयुक्त किए गए साँड़ का अचूक मूल्यांकन करने में मदद होती है अत: दूध रिकॉर्डिंग को अपने पशु की सही तरीके से रिकॉर्डिंग करने में सहयोग करें।

7.  वैज्ञानिक तरीके से संपुर्ण ब्यात के दूध उत्पादन की रिकॉर्डिंग करने से पशु का अधिक मूल्य प्राप्त हो सकता है।

8.  दूध रिकॉर्डिंग के दिन फैट, प्रोटीन तथा लैक्टोज की जाँच के लिए दूध रिकॉर्डिंग द्वारा दूध का नमूना लिया जाता है

9.  प्रत्येक रिकॉर्डिंग के पशु का दूध रिकॉर्डिंग कार्ड बनाया जाता है जिसमें दूध रिकॉर्डिंग सुबह – शाम का दूध उत्पादन अंकित करता है कार्ड को संभाल कर रखें।

10.  यथा संभव पूरे ब्यांत की रिकॉर्डिंग होने तक रिकॉर्डिंग के लिए गये पशु को न बेचें।

11.  दूध की रिकॉर्डिंग कार्यक्रम में सम्मिलित किए गए पशुओं में से न्यूतनम मानक उत्पादन संपादित करने वाले पशुओं का प्रजनन विशेष प्रमाणित साँड़ के सिमेन से बिना किसी अतिरिक्त मूल्य में किया जाता है। तथा पूरे ब्यांत को रिकॉर्डिंग के पश्चात् पशुपालक को प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिया जाता है।

12.  विशेष प्रमाणित साँड़ के सीमेन से पैदा हुई मादा, नि:संदेह  भविष्य में एक उत्कृष्ट दुधारू गाय/भैंस बनेगी, जिसके आप भाग्यशाली मालिक होंगे।

13.  अगर विशेष प्रमाणित सांड़ के सीमेन से किए गए कृत्रिम गर्भाधान से नर पैदा होता है तो उसकी डीएनए जाँच तथा रोगमुक्त होने की जाँच के पश्चात् प्रोजेक्ट द्वारा निर्धारित मूल्य तालिका के आधार पर खरीद लिया जाता है।

14.  कार्यक्रम के कारगर क्रियान्वयन के उद्देश्य से सुपरवाइजर तथा अन्य अफसरों द्वारा कार्यों का औचक निरीक्षण एवं सत्यापन किया जाता है। अत: सत्यापन हेतु आए पर्यवेक्षकों व अफसरों का सहयोग करें इससे आपको बेहतर सेवा उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।

15.  कार्यों के सत्यता की पुष्टि करने के उद्देश्य से खून के नमूने देने में आनाकानी न करें।

 

अधिक जानकारी हेतु निकट के कृत्रिम गर्भाधान केंद्र पर संपर्क करें।

स्त्रोत: राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड



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