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राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (एनएलआरएमपी) के अंतर्गत राज्यों/संघ राज्यों क्षेत्र संबंधी दिशा-निर्देश

राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (एनएलआरएमपी) के अंतर्गत राज्यों/संघ राज्यों क्षेत्र संबंधी दिशा-निर्देश

परिचय

राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (एनएलआरएमपी) का क्रियान्वयन 2008-09 से भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।

2. इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए राज्यों और संघ राज्य प्रशासनों को विस्तृत दिशा निर्देश और तकनीकी मैनुअल जारी किए गए हैं। इसके अलावा, कार्यक्रम की निगरानी और प्रभावी प्रबंधन के लिए राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासनों तथा अन्य संबंधित एजेंसियों को प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस), वार्षिक कार्य योजना/विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तथा राज्य संदर्श योजना के फार्मेट भी परिचालित किए गए हैं। एमआईएस को ऑनलाइन भी कर दिया गया है।

3. इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन के दिशा-निर्देशों में यह परिकल्पना की गई है कि राज्य/संघ राज्य क्षेत्र, एनएलआरएमपी के क्रियान्वयन के लिए एक नोडल विभाग की पहचान करेंगे। यह नोडल विभाग समग्र एनएलआरएमपी की देखरेख के लिए आगे एक कार्यक्रम प्रबंधन यूनिट (पीएमयू) बनाएगा जिसका प्रभारी कम से कम सचिव स्तर का अधिकारी होगा। यह पीएमयू सभी संबंधित विभागों तथा क्रियान्वयक विभाग की विभिन्न यूनिटों के मध्य समन्वय सुनिश्चित करेगा। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक कार्यकलाप के लिए अधिकारियों तथा विक्रेता ओं, यदि हों, के कर्तव्य और जिम्मेदारियां जहां तक संभव हो दिशा-निर्देशों के सामंजस्य में विस्तार से सूचीबद्ध की जाएंगी और उसकी सूचना भूमि संसाधन विभाग को भी दी जाएगी। जहां अपेक्षित हो, समझौता ज्ञापन/करारों पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। पीएमयू यह अवश्य सुनिश्चित करें कि लक्ष्यों और समय सीमाओं तथा वास्तविक एवं वित्तीय उपलब्धियों की नियमित आधार पर निगरानी की गई है और यथा अपेक्षा भूमि संसाधन विभाग और अन्य एजेंसियों को ऑनलाइन डाटा भेजा गया है। दिशा-निर्देशों में उल्लिखित उपरोक्त कार्यों के अलावा, चूंकि पीएमयू में तकनीकी कार्मिक होते हैं अत: यह कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निम्नलिखित कार्य कर सकती है:

(i) कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों और भूमि संसाधन विभाग द्वारा समय-समय पर दिए गए तकनीकी मार्गदर्शन के अनुसार एनएलआरएमपी के तहत परियोजना/परियोजनाएं क्रियान्वित करना।

(ii) भूमि अभिलेखों के प्रबंधन के लिए कार्यनीतियां, नीतियां और योजनाएं तैयार करना।

(iii) आईटी प्रचालित भूमि अभिलेख प्रबंधन और सम्बद्ध सेवाओं के लिए प्रशासनिक, वित्तीय, कानूनी और तकनीकी ढांचे को अंतिम रूप देना।

(iv) मानकों को अंतिम रूप देना।

(v) प्रक्रियाओं और री-इंजीनियरिंग को सरल बनाना।

4. दिशा-निर्देशों के प्रावधानों के अनुसार, उल्लिखित कार्य निष्पादित करने और केन्द्रीय निधियों को राज्य की संचित निधि के माध्यम से भेजने के बजाए सीधे पीएमयू को अंतरित करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में पीएमयू को राजस्व विभाग के तहत पंजीकृत सोसायटियों के रूप में गठित किया जाए। तदनुसार, प्रत्येक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में पंजीकृत सोसायटी सृजित कने का प्रस्ताव है। ऐसी सोसायटी के लिए दो स्तरीय ढांचे का प्रस्ताव है (क) शासी निकाय, और (ख) सोसायटी का कार्यालय जिनकी संरचना इस प्रकार होगी:

शासी निकाय

प्रधान सचिव/सचिव, राजस्व विभाग

पदेन अध्यक्ष

आयुक्त, सर्वेक्षण व्यवस्थापन/निदेशक, - भूमि अभिलेख

पदेन सदस्य सचिव

 

सचिव/सदस्य, राजस्व बोर्ड

पदेन सदस्य

सचिव, पंजीकरण विभाग

पदेन सदस्य

सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग

पदेन सदस्य

 

सचिव, शहरी विकास विभाग

पदेन सदस्य

सचिव, विधि विभाग

पदेन सदस्य

सचिव, वित्त विभाग

पदेन सदस्य

सचिव, आयोजना विभाग

पदेन सदस्य

महानिरीक्षक, पंजीकरण

पदेन सदस्य

मंडल आयुक्त 2 (चक्रानुक्रम से)

पदेन सदस्य

राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी, एनआईसी

पदेन सदस्य

एनएलआरएमपी के तहत शामिल जिलों - के जिला मजिस्ट्रेट

विशेष अतिथि

 

सोसायटी का कार्यालय

 

प्रधान सचिव/सचिव, राजस्व विभाग

पदेन मुख्य कार्यकारी

 

अधिकारी आयुक्त, सर्वेक्षण व्यवस्थापन/निदेशक, - भूमि अभिलेख

पदेन सदस्य

पंजीकरण विभाग का प्रतिनिधि

पदेन सदस्य

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में एनआईसी का एनएलआरएमपी का समन्वयक

पदेन सदस्य

दूर संवेदी, हवाई फोटोग्राफी, भारतीय सर्वेक्षण, भारतीय वन सर्वेक्षण, सी-डैक, भारतीय मृदा एवं भूमि उपयोग सर्वेक्षण और एनआरएससी से संबंधित एजेंसियों से दो विशेषज्ञ

पूर्णकालिक परामर्शदाता

सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित एजेंसियों से दो विशेषज्ञ

पूर्णकालिक प्रोग्रामर

 

 

सहायक स्टाफ

लेखाकार

01

सहायक

01

डीईओ

01

चपरासी

 

01

 

5. शासी निकाय अपेक्षा के अनुसार समय-समय पर और पदेन सदस्यों को शामिल कर सकता है। इसकी बैठक तिमाही में एक बार अवश्य की जानी चाहिए और यह अपनी बैठकों और अपेक्षा के अनुसार कार्यालय की बैठकों में विशेष अतिथियों को भी आमंत्रित कर सकता है।

6. परामर्शदाताओं, प्रोग्रामरों, सहायक स्टाफ के लिए वित्तपोषण और सोसायटी के कार्यालय के खर्चे भूमि संसाधन विभाग द्वारा राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को उपलब्ध करवाए जाने हैं। पूर्णत: अनुबंधित/प्रतिनियुक्ति आधार पर रखे गए निम्नलिखित सहायक स्टाफ का वित्तपोषण और सोसायटी के कार्यालय के खर्चे भूमि संसाधन विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष सोसायटी को अपने वार्षिक खर्चे पूरा करने के लिए उपलब्ध करवाएं जाएंगे:

(i) भूमि अभिलेखों के रखरखाव/सर्वेक्षण/पुनर्सर्वेक्षण/डिजिटीकरण/जीआईएस के क्षेत्रों में कम से कम 10 वर्ष के अनुभव प्राप्त परामर्शदाता- प्रति परामर्शदाता प्रति वर्ष अधिकतम 6 लाख रूपए की दर से सर्वेक्षण/पुनर्सर्वेक्षण के लिए एक और भू-कर मानचित्रों के जीआईएस/डिजिटीकरण के लिए 1 अर्थात प्रति सोसायटी 2

(ii) लिखित एवं स्थानिक डाटा के समेकन, पंजीकरण और अंत:संयोजकता के कम्प्यूटरीकरण सहित भूमि अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण के क्षेत्र में कम से कम 5 वर्ष का अनुभव प्राप्त प्रोग्रामर-प्रति प्रोग्रामर प्रतिवर्ष अधिकतम 3.00 लाख रूपए की दर से प्रति सोसायटी 2

(iii) प्रतिवर्ष 10.20 लाख रूपए की एकमुश्त राशि की दर से एक लेखाकार, एक सहायक, एक डाटा प्रविष्टि ऑपरेटर।

(iv) कम्प्यूटर (हाईवेअर और सॉफ्टवेअर), फर्नीचर एवं जुड़नारों तथा कार्यालय उपस्करों की खरीद के लिए एक बारगी व्यय- 5.00 लाख रूपए।

(v) शासी निकाय/सोसायटी की बैठकों, पीएमयू द्वारा आयोजित की जाने वाली जिला स्तरीय/राज्य स्तरीय कार्यशालाओं पर टीए/डीए व्यय, वाहन को भाड़े पर लेने आदि सहित कार्यालय व्यय के लिए आवर्ती व्यय- प्रतिवर्ष 6.00 लाख रूपए।

7. पीएमयू के परामर्शदाताओं, प्रोग्रामरों और सहायक स्टाफ के लिए प्रथम वर्ष का आवर्ती और गैर-आवर्ती अनुदान इस प्रकार होगा:

क्रम संख्या

व्यय की मद

प्रति वर्ष राशि संख्या

(लाख रूपए में)

1.

दो परामर्शदाताओं (सर्वेक्षण/पुनर्सर्वेक्षण और भू-कर मानचित्रों के जीआईएस/डिजिटीकरण के लिए 1-1), दो प्रोग्रामरों और अन्य सहायक स्टाफ पर व्यय

28.20

2.

शासी निकाय/सोसायटी की बैठकों, पीएमयू द्वारा आयोजित की जाने वाली जिला स्तरीय/राज्य स्तरीय कार्यशालाओं पर टीए/डीए व्यय, वाहन को भाड़े पर लेने

आदि सहित कार्यालय व्यय (राज्य सरकार के वित्त विभाग की परिभाषा के अनुसार)

6.00

3.

कम्प्यूटर, फर्नीचर एवं जुड़नारों की खरीद के लिए एक बारगी व्यय (गैर-आवर्ती)

5.00

 

योग

39.20

 

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र को एक वित्त वर्ष में एनएलआरएमपी के तहत व्यय की 10 प्रतिशत के बराबर राशि या उपरोक्त प्रस्तावित अनुदान, जो भी कम हो, की प्रतिपूर्ति की जाएगी।

8. सोसायटी अन्य स्रोतों जैसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और एजेंसियों, कार्पोरेट निकायों तथा एनएलआरएमपी में सहायता करने के इच्छुक अन्य संगठनों से वित्तपोषण प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र है।

9. राज्य सरकारें/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन अपनी-अपनी अपेक्षाओं के अनुसार सोसायटी के ढांचे में थोड़ा बदलाव करने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन, पीएमयू के परामर्शदाताओं, प्रोग्रामरों और अन्य सहायक स्टाफ के लिए आवर्ती और गैर-आवर्ती अनुदान वही रहेगा जैसा कि दिशा-निर्देशों में प्रावधान किया गया है।

10. सोसायटी को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकारें/ संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन एनएलआरएमपी की निगरानी में कार्यरत अपने स्टाफ को सोसायटी में रख सकते हैं।

ताकि राज्य स्तर पर एक ही एजेंसी द्वारा केन्द्रित निगरानी हो सके। लेकिन, सहायक स्टाफ और अन्य मदों के लिए भारत सरकार द्वारा किए जाने वाले वित्तपोषण की प्रथम वर्ष में अधिकतम राशि 39.20 लाख रूपए होगी जैसा कि उपरोक्त पैरा- 7 में दिया गया है।

11. 12वीं योजना के दौरान परामर्शदाताओं और सहायक स्टाफ के लिए सोसायटियों का वित्तपोषण जारी रखने की कोई भी वचनबद्धता देने से पहले सोसायटियों के कार्यनिष्पादन की समीक्षा 11 वीं योजना के अंत में यह सुनिश्चित करने के लिए की जाएगी कि क्या उनके सृजन से वह उद्देश्य पूरा हो गया है जिसके लिए इन्हें सृजित किया गया है।

12. भूमि संसाधन विभाग इसके द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार परिगणित परामर्शतदाताओं, प्रोग्रामरों और अन्य सहायक स्टाफ पर व्यय हेतु आवर्ती अनुदान जारी करेगा। लेकिन आबंटित राशि के भीतर सोसायटियां विशेषज्ञों, प्रोग्रामरों और स्टाफ की किस्म और संख्या में परिवर्तन करने के लिए स्वतंत्र होंगी। लेकिन प्रत्येक सोसायटी के लिए एक लेखाकार रखना अनिवार्य होगा जो यह सुनिश्चित करेगा कि व्यय का विवरण, सोसायटी के पदेन कार्यकारी अधिकारी के समक्ष अपेक्षित समयावधि में रख दिया गया है, जो इसे आगे भूमि संसाधन विभाग को भेजने के लिए जिम्मेदार होगा। लेखाकार प्रतिनियुक्ति पर सेवारत कर्मचारी या सोसायटी के अनुबंध के आधार पर कोई सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हो सकता है।

13. पीएमयू को निधियां जारी करने के सामान्य निबंधन एवं शर्ते:

क. प्रत्येक सोसायटी, निधि और कार्यक्रम निधि के रूप में केन्द्रीय अनुदान प्राप्त करने कि लिए एक स्वतंत्र बचत बैंक खाता खोलेगी। इस खाते का प्रचालन सोसायटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा किया जाएगा।

ख. निधियों को सोसायटी निधि और कार्यक्रम निधि के रूप में भूमि संसाधन विभाग द्वारा सीधे सोसायटी के खाते में जारी किया जाएगा।

ग. सोसायटी, सोसायटी निधि और कार्यक्रम कार्यकलापों के लिए इसे प्राप्त अनुदान का एक अलग अनुदान रजिस्टर रखेगी।

घ. परामर्शदाताओं, प्रोग्रामरों और सहायक स्टाफ को प्रतिनियुक्ति या अनुबंध आधार पर रखा जाना चाहिए और उनकी इस प्रकार नियुक्ति की अवधि तक उन्हें स्थायी रोजगार देने की कोई बाध्यता नहीं होगी। इसके अलावा, विभागों में कार्यरत सरकारी स्टाफ को केन्द्रीय निधियों से वेतन नहीं दिया जाएगा।

ङ. प्रत्येक सोसायटी को भूमि संसाधन विभाग द्वारा यथा निर्धारित परामर्शदाताओं, प्रोग्रामरों और स्टाफ पर व्यय और कार्यालय व्यय के लिए आवर्ती अनुदान मिलेगा।

च. यदि गैर-आवर्ती अनुदान का इसे मंजूर करने की तारीख से 3 वर्ष तक उपयोग नहीं होता है तो ऐसी अप्रयुक्त राशि को भूमि संसाधन विभाग को लौटाया जाना चाहिए।

छ. भूमि संसाधन विभाग की निधियों से किसी भी सूरत में वाहन की खरीद और निर्माण कार्यकलापों की अनुमति नहीं है।

ज. सोसायटी द्वारा इसकी निधियों, इनके उपयोग और नियुक्त किए गए कार्मिकों के विवरण का डाटा समय-समय पर भूमि संसाधन विभाग को भेजा जाएगा।

झ. उपस्कारों की खरीद, राज्य सरकार के प्रापण नियमों के अनुसार की जानी चाहिए। जब उपस्करों का उपयोग न हो रहा हो तो, इन्हें रखे जाने के उचित प्रबंधन किए जाने चाहिए।

ञ. आवर्ती और गैर-आवर्ती अनुदान की विभिन्न मदों के तहत मंजूर राशि का उपयोग उसी तरह किया जाना चाहिए जैसा कि भूमि संसाधन विभाग ने मंजूर किया है। इसका अन्य किसी रूप में कोई उपयोग किए जाने के लिए भूमि संसाधन विभाग की अनुमति लेनी होगी।

ट. सोसायटियां, एक वित्त वर्ष के लिए सोसायटी निधियों और कार्यक्रम निधियों के रूप में जारी निधियों के संबंध में पदेन मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित उपयोग प्रमाण पत्र आगामी वित्त वर्ष के 30 जून तक और प्रत्येक वर्ष लेखाओं का संपरीक्षित विवरण आगामी वर्ष के सितम्बर माह के अंत तक भूमि संसाधन विभाग को प्रस्तुत करेंगी।

स्त्रोत : ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार



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