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गाय एवं भैंस में गर्म होने के लक्षण और गर्भाधान का समय

गर्मी के लक्षण

  1. बार-बार चीखना,
  2. दूध कम हो जाना,
  3. भूख कम हो जाना,
  4. बेचैन मालूम पड़ना,
  5. दूसरी गाय के ऊपर चढ़ना,
  6. दूसरी गाय के गर्म गाय पर चढ़ने के समय गर्म गाय का चुपचाप खड़ी रहना,
  7. बार-बार पेशाब करना,
  8. भगोष्ठ में सूजन,
  9. योनिस्त्राव (लसलसा, पारदर्शी, चमकदार) ।

गर्भाधान का समय

यदि गाय या भैंस सुबह में गर्म होती है तो उसी दिन शाम में गर्भाधान कराना चाहिए। अगर कोई गाय या भैंस एक दिन से ज्यादा गर्म रहती है तो उसे करीब बारह घंटे के अंतर पर दो बार गर्भाधान कराना लाभदायक होता है।

कृत्रिम गर्भाधान क्यों?

  1. छोटे पशुपालकों को साँढ़ पालने तथा उसमें होने वाले खर्चों से बचाव,
  2. प्राकृतिक गर्भाधान से होने वाली बीमारियों से बचाव,
  3. आयातित उत्तम नस्ल के साँढ़ों के वीर्य से भी गर्भाधान संभव,
  4. समय पर प्रजनन समस्याओं की पहचान,
  5. गर्म गाय की सही पहचान से सही समय पर गर्भाधान,
  6. छोटी गायों के भी पाल खिलाने में सुविधा,
  7. पाल देने के समय चोट लगने का कोई डर नही।

गायों में विभिन्न जांच क्यों?

  1. उचित समय पर पता लग जायेगा कि गाय गाभिन है या नहीं,
  2. गाभिन होने का पता लग जाने से गाय को संतुलित एवं पौष्टिक आहार दिया जा सकता है,
  3. अगर गाय गाभिन नहीं है तो बगैर समय बर्बाद किए उसका उचित इलाज किया जा सकता है,
  4. उचित समय पर दूध दुहना बंद किया जा सकता है,
  5. यह भी पता लग जाता है कि गाय कहीं अनजाने में तो पाल नहीं खा गई है,
  6. इस तरह समय पर गाभिन का पता लग जाना आर्थिक दृष्टिकोण से लाभदायक है।

गाय में प्रसव के समय ध्यान देने योग्य बातें

  1. प्रसव का समय नजदीक आने पर अच्छी तरह पचने वाला भोजन देना चाहिए,
  2. प्रसव के समय किसी व्यक्ति को जरुर मौजूद रहना चाहिए,
  3. प्रसव में ज्यादा देर होने पर पशुचिकित्सक की मदद लेनी चाहिए,
  4. गाय अपने बच्चे की नाभी नहीं काटे,
  5. गाय जेर नहीं खाने पाए,
  6. प्रसव के बाद दो दिन तक गाय के थन से पूरा दूध नहीं निकालें,
  7. प्रसव के थोड़ी देर बाद बच्चे को उसकी माँ का दूध जरुर पिलायें,
  8. प्रसव के बाद गाय को ज्यादा समय तक बैठने नहीं दें,
  9. प्रसव के बाद गाय को मक्खन, घी या तेल नहीं पिलायें।

स्त्रोत: कृषि विभाग, झारखंड सरकार

गायों में गर्भधारण से संबंधित समस्याएं



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