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बत्तख पालन

बत्तख पालन-एक रोज़गार

पहले घरों में अंडे के लिए पाले जाने वाले इस जीव के पालन को अब रोज़गार के रूप में देखा जा रहा है। पिछले दिनों से बत्तखों को घरों में विशेष रूप से पाला जा रहा है जो काफी फायदा भी देता है।

बत्तख पालन के लाभ

भारत में बड़ी संख्या में बत्तख पाली जाती हैं। बत्तखों के अण्डे एवं मांस लोग बहुत पसंद करते हैं, अतः बत्तख पालन व्यवसाय की हमारे देश में बड़ी संभावनाएँ हैं। बत्तख पालने के निम्नलिखित लाभ हैं-

  1. उन्नत नस्ल की बत्तख 300 से अधिक अण्डे एक साल में देती हैं।
  2. बत्तख के अण्डा का वजन 65 से 70 ग्राम होता है।
  3. बत्तख अधिक रेशेदार आहार पचा सकती हैँ। साथ ही पानी में रहना पसंद होने से बहुत से जलचर जैसे–घोंघा वगैरह खाकर भी आहार की पूर्ति करते हैं। अतः बत्तखों के खान-पान पर अपेक्षाकृत कम खर्च करना पड़ता है ।
  4. बत्तख दूसरे एवं तीसरे साल में भी काफी अण्ड़े देती रहती हैँ। अतः व्यवसायिक दृष्टि से बत्तखों की उत्पादक अवधि अधिक होती है।
  5. मुर्गियों की अपेक्षा बत्तखों की उत्पादक अवधि अधिक होती है।
  6. मुर्गियों की अपेक्षा बत्तखों में कम बीमारियाँ होती हैं।
  7. बहता हुआ पानी बत्तखों के लिए काफी उपयुक्त होता है, किन्तु अन्य पानी के स्त्रोत वगैरह में भी बत्तख पालन अच्छी तरह किया जा सकता है।

बत्तख पालन पर जानकारी

स्रोत: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय,काँके, राँची- 834006



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