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पशुपालन ने बनाया गृहणी को स्वाबलंबी

परिचय

श्रीमती बन्तो  रानी पत्नी श्री महिंद्र कुमार गाँव गढ़ी खजूर जिला करनाल में पिछड़ी जाति से एक गरीब महिला है। उनके पति को शराब पीने की आदत थी और वह अपने घर का खर्च चलाने में असमर्थ थी। इन्होने सोचा कि क्यों न मैं ही कुछ काम करूं।

प्रशिक्षण से जानी पशुपालन की बारीकियां

यह अर्पणा ट्रस्ट मधुबन के द्वारा बनाये गये सहायता समूह से जुड़ व भैंस रखकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने की इच्छा  जताई। इन्होने कृषि विज्ञान केंद्र रा.डे.अनु.सं., करनाल से वर्ष 1999 में वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन में प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण में श्रीमती बन्तो रानी ने पूरी रूचि व उत्साह के साथ भाग लिया। प्रशिक्षण के तुरंत बाद श्रीमती बन्तो ने ऋण की किस्ते चुकाई व घर का खर्च चलाने में भी मदद मिली। समय-समय पर ये इस केंद्र से पशुओं की समस्याओं के बारे में समाधान के लिए सम्पर्क में रहती है। ये निरंतर अच्छी नस्ल की दुधारू भैसन रखती है।

जीवन में आया बदलाव

दूध बेचकर हुई आई से श्रीमती बन्तो ने अपने घर के लिए टेलीविजन, रसोई गैस, मोबाईल फोन भी खरीद लिया है। अपने तीन बच्चों को भी स्कूल में पढ़ा रही है। इनकी आर्थिक व सामजिक स्थिति में बहुत सुधार आया है और इनके पति ने शराब पीना भी छोड़ दिया है जिससे ये और इनका परिवार सुखी जीवन व्यतीत कर रहा है।

स्त्रोत: कृषि विभाग, झारखण्ड सरकार

 



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