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जीरो टिलेज पद्धति अपनाई, अधिक लाभ कमाया

जीरो टिलेज पद्धति अपनाई, अधिक लाभ कमाया

परिचय

श्री प्रदीप कुमार गाँव साम्भली जिला कर्नाला युवा किसान है, जिसने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की हुई है। वह बहुत परेशान, नौकरी की तलाश में भटक रहा था। उनकी कुल 8 एकड़ भूमि है तथा खेती में कुछ ख़ास मुनाफ नहीं हो रहा था। उसने अपनी खेती को ही व्यवसायिक रूप देने के इरादा किया तथा वह कृषि विज्ञान केंद्र, राष्ट्रीय डेरी अनुसन्धान करनाल के सम्पर्क में 2004 में आया। इन्होंने वर्ष 2004 में कृषि से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त किया।

प्रशिक्षण से प्राप्त की नवीनतम जानकारी

इस प्रशिक्षण में जीरो टिलेज की तकनीकी पर, दालों की काश्त एवं धान की फसल में उपयुक्त कीटनाशक व फुफुन्द नाशक दवाइयों व् संतुलित खाद के प्रयोग पर जानकारी दी गई।

श्री प्रदीप कुमार ने अपने खेत में गेहूँ की बीजाई जोरी टिलेज की पद्धति अपनाकर ली। उसने खेत की तैयारी में 1500 रूपये प्रति एकड़ बचा लिए जबकि पारम्परिक तरीके में खेत की तैयारी में ज्यादा खर्चा आता था। गेहूँ की फसल में उसे कुल आय रु.15, 000 प्रति एकड़ हुई। गेहूँ के बाद उसने साठी उड़द की फसल ली जिसमें उसे 15,000 प्रति एकड़ हुए। पुरे साल में उसे कुल 35,000 रूपये प्रति एकड़ प्राप्त हुए जबकि पारम्परिक खेती में उसे कुल 18,000 रूपये ही प्राप्त होते थे।

श्री प्रदीप का कहना है कि कृषि विज्ञानं केंद्र के सम्पर्क में आने के बाद उसकी आय में तो वृद्धि हुई है साथ में जमीन की उर्वरा शक्ति भी दाल वाली फसल के कारण बढ़ गई।

 

स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार



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