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पॉपुलर ट्री की खेती में लगे किसान

पॉपुलर ट्री की खेती में लगे किसान

समृद्धि की नयी इबारत

पॉपुलर ट्री की खेती मधेपुरा़ जिले के सिंहेश्वर प्रखंड के भवानीपुर में की जा रही है। पॉपुलर की लकड़ी से क्रिकेट का बल्ला, विकेट, कैरमबोर्ड, उसकी गोटी, दियासलाई आदि सामान बनाया जाता है। हालांकि बिहार में खेल सामग्री निर्माण की फैक्टरी नहीं होने के कारण राज्य में पॉपुलर का बाजार प्लाइवुड फैक्टरी तक ही सीमित है। भवानीपुर पंचायत में पॉपुलर की खेती व पौधारोपण के जरिये किसान समृद्धि की नयी इबारत लिख रहे हैं।।यहां के एक युवा किसान नौ वर्ष पहले ‘पॉपुलर’ का पौधा लगाया और उन्हें बेच कर अच्छी आय प्राप्त करने का जरिया बनाया। मात्र छह वर्ष में पेड़ की ऊंचाई 60 फुट और मोटाई चार फुट तक हो जाती है। इस कारण पॉपुलर का पौधा किसानों के बीच काफी पॉपुलर होता जा रहा हैं।भवानीपुर गांव में घुसते ही खेतों की मेड़ पर लगे पॉपुलर के लंबे और सीधे पेड़ झूम-झूम कर स्वागत करते हैं।यहां के युवा किसान गुड्डू सिंह पेशे से शिक्षक भी हैं।नौ वर्ष पहले एक सौ पेड़ लगाया था, आज इसकी संख्या करीब पांच हजार है और 10 एकड़ जमीन में है। गुड्डू कहते हैं। कि जब उन्होंने इसका पौधा लगाया था, तो लोगों ने मजाक उड़ाया था। घर में भी लोगों को समझाना पडा़ अब स्थिति यह है कि आसपास के गांवों में भी पॉपुलर के पेड़ खूब नजर आ रहे हैं।

खेल सामग्री के साथ जैविक खाद

वैसे तो पॉपुलर की खपत खेल सामग्री उत्पादन में हैं। लेकिन बिहार में खेल सामग्री निर्माण की फैक्ट्री या उद्यम नहीं होने के कारण राज्य में पॉपुलर का बाजार प्लाईवुड फैक्ट्री ही हैं। गुड्डू बताते हैं। कि पॉपुलर की लकड़ी आम लकड़ियों की तरह ही 300 रुपये क्विंटल बिक रहीहैं। जबकि राज्य सरकार के निर्देश पर आठ सौ रुपये प्रति क्विंटलकीमत निर्धारित की गयी हैं। अगर सरकार के निर्देशों को लागू किया जाये तो किसानों को और मुनाफा होगा़ दो हजार पौधे लगाने पर छह साल बाद इसकी कीमत अस्सी लाख रुपये होगी। इतने पौधे के लिए केवल दो एकड़ ही जमीन की जरूरत पड़ती है। पॉपुलर कम समय में तैयार होकर लागत से कई गुणा फायदा देता हैं। दो एकड़ में एक हजार पौधे लगते हैं। पौधे उद्यान विभाग से अनुदान पर मिलताहैं। एक हजार पौधे पर 20 हजार खर्च आता है, जो उद्यान विभाग से अनुदान रूप में मिल जाता हैं। साल भर की सिंचाई पर पांच हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च होता हैं।वहीं, सीधे तने, बहुत कम पत्ते व पंक्ति में लगाये जाने के कारण बीच की जगह में धान और गेहूं की फसल भी लगायी जा सकती हैं।ये वृक्ष सघन नहीं होते, इस कारण इनसे होकर धूप अच्छी तरह खेतों में आती है। साथ ही इन पौधों के खेतों में लगे रहने से फसल को नाइट्रोजन भी भरपूर मिलता है। वहीं, प्लाइवुड मिल में इसके बुरादे से जैविक खाद तैयार किया जा सकता है।

स्त्रोत: संदीप कुमार,स्वतंत्र पत्रकार,पटना बिहार।



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