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फसल चक्र बदल कर अधिक लाभ कमाएं

फसल चक्र बदल कर अधिक लाभ कमाएं

परिचय

श्री नरेंद्र कुमार गाँव मुरादगढ़ जिला करनाल का युवा किसान है, जिसने बी.ए. तक की शिक्षा प्राप्त की है। रोजगार न मिलने के कारण वह अपना परम्परागत खेती का व्यवसाय करने लगा। उसके पास 11 एकड़ जमीन है। उसके पिताजी हमेशा परम्परागत तरीके से धान व गेहूँ फसल चक्र को अपना रहे थे। इस फसल चक्र की उत्पादन लागत अधिक होने कारण उनकी कुल आय रु. 2,000 से रु.25.000 थी।

दो फसल चक्रों के बीच बढ़ाई अपनी आमदनी

श्री नरेंद्र कुमार कुछ नया करने व अपनी आय बढ़ाने के लिए अप्रैल 2003 में कृषि विज्ञान केंद्र के सम्पर्क में आया। उसने कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह पर अप्रैल से गेहूँ काटने के बाद मूंग की फसल ली और सितम्बर के प्रथम सप्ताह में तोरिया की फसल की बीजाई की। इसके बाद उसने दिसम्बर में पछेती गेंहूँ की फसल की बुआई की। इस फसल में उसकी उत्पादन लागत भी कम हुई और दाल वाली फसल के लेने से भूमि का सुधार भी हुआ। साथ-साथ धान की फसल न लेने से पानी की भी बचत हुई जो कि प्रति वर्ष एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। इस प्रकार उसकी कुल आय 35,000 रूपये प्रति एकड़ प्राप्त हुई जो कि परम्परागत फसल चक्र से लगभग 10,000 रु. अधिक थी। इसके बाद वह इस फसल चक्र को प्रति वर्ष अपना रहा है। उसको देखते हुए उसके दूसरे किसान साथियों ने भी इसको अपनाना शुरू का दिया है।

स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार

 



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