आम की देखभाल आम की तैयार हो रही प्रजातियों को समय पर बाजार भेजने की व्यवस्था करें एवं जुलाई के आखिरी सप्ताह में आम के नये पौधों को लगाएं। फल तुड़ाई के बाद वृक्षों की कटाई-छंटाई करें। सूखी व रोगी टहनियों को काटकर जला दें। प्रजाति आम की प्रजाति आम्रपाली, दशहरी, लंगड़ा, रामकेला, चाैसा, अमरूद की प्रजाति इलाहाबादी सफेदा व सरदार, आंवला की प्रजाति नरेन्द्र आंवला-4, नरेन्द्र आंवला-7, फ्रांसिस, कृष्णा, चकेया, केला की प्रजाति बसराई,ड्वार्फ, हरी छाल, रोबस्टा, कोठिया, मालभोग, बेर की प्रजाति जे.जी.-2, वलायती, उमरान, कैथली, सनोर-2, लीची की बेदाना, मुजफ्फपुर, कलकतिया, देहरादून, रोजसेन्टेड तथा पपीता की प्रजातियां पूसा नन्हा, पूसा डिलीसियस वाशिंगटन, हनीड्यू आदि प्रमुख हैं। कीट की रोकथाम आम में शाखा कीट की रोकथाम के लिए मोनोक्रोटाेफाॅस (36 ई.सी.) की 125 मि.मी. अथवा डाई-मेथोएट (30 ई.सी.) 150 मि.मी. मात्रा को 100 लीटर पानी में घोलकर 15 दिनों के अंतराल पर पेड़ों पर छिड़काव करें। आम व लीची में रेडरस्ट तथा शूट मोल्ड रोग की रोकथाम के लिए ब्लाइटाॅक्स 0.3 प्रतिशत (100 ग्राम दवा 100 लीटर पानी में घोलकर) या काॅपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यू.पी. 0.3 प्रतिशत (3 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर) पेड़ों पर छिड़काव करें। रेडरस्ट तथा शूट मोल्ड रोग की रोकथाम आम व लीची में रेडरस्ट तथा शूट मोल्ड रोग की रोकथाम के लिए ब्लाइटॉक्स 0.3 प्रतिशत (100 ग्राम दवा 100 लीटर पानी में घोलकर) या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यू.पी. 0.3 प्रतिशत (3 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर) पेड़ों पर छिड़काव करें। अंगूर में फल तोड़ने के बाद मानोक्रोटोफॉस 0.04 प्रतिशत (40 मि.ली. प्रति 100 लीटर पानी) तथा ब्लाइटाक्स 0.3 प्रतिशत (300 ग्राम प्रति 100 लीटर पानी) का छिड़काव करें। अन्य फल आंवले के बागों में एफिस की रोकथाम के लिए मोनोक्रोटोफॉस 0.04 प्रतिशत का घोल बनाकर पौधों पर छिड़काव करें। अमरूद, आंवला, लीची, केला, आम, पपीता, जामनु, कटहल, नींबू एवं बेर के नये बाग लगाने का उपयुक्त समय है। लीची में गूटी बांधने का कार्य करें। बेर में मिलीबग कीट की रोकथाम के लिए मोनोक्रोटोफॉस 36 ई.सी. 1.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। पुष्प व सुगंध वाले पौधों का प्रबंधन फूलों के खेतों में वर्षा का पानी निकालने का इंतजाम करें। पौधों में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई कर खरपतवारों को समय-समय पर निकालते रहें। रजनीगंधा, ग्लोडियोलस में आवश्यकतानुसार सिंचाई, निराई-गुड़ाई करें। पोषक तत्वों के मिश्रण का 15 दिनों के अंतराल पर छिडक़ाव करें रजनीगंधा केस्पाइक (पुष्प डंडियों) को समय-समय पर तोड़ें। ग्लोडियोलस की फसल में जल निकास की व्यवस्था करें। ग्लैडियोलस, गेंदे तथा चाइना एस्टर में फूल आना आरंभ होने के समय कारनेशन में भी फूल आते हैं। गुलदाउदी में शीर्ष नोचन करें। जरबेरा के पुराने पौधों को विभाजित करके लगाएं। नर्गिस के बल्ब का भंडारण करें। गेंदे को बीजोत्पादन के लिए खेतों में लगाएं। स्त्राेत: राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012