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मौसम खेती परामर्श सेवा

परामर्श सेवा केंद्र

मौसम खेती परामर्श सेवा भारत सरकार (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग एवं राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र, नई दिल्ली) की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसमें किसानों को आगामी चार दिनों में मौसम में होने वाले बदलाव तथा इसके अनुकूल विभिन्न कृषि कार्यो को करने की सलाह दी जाती है। इस समय यह परियोजना भारत के विभिन्न राज्यों में 107 केन्द्रों पर कार्यरत है। झारखंड में राँची एवं दुमका में यह परियोजना कार्यरत है। इस परियोजना की कार्यप्रणाली, उद्देश्य एवं विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

कार्य प्रणाली

  1. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में मौसम खेती परामर्श सेवा समिति वर्ष 1995 से कार्यरत है, जिसकी बैठक सप्ताह में दो दिन (मंगलवार तथा शुक्रवार) होती है।
  2. प्रत्येक मंगलवार तथा शुक्रवार हो आगामी चार दिनों का मौसम पूर्वानुमान राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र, नई दिल्ली से प्राप्त होता है।
  3. प्राप्त मौसम पूर्वानुमान एवं खेती की स्थिति को ध्यान में रखकर, अनुभवी वैज्ञानिकों द्वारा किए गए परामर्श के आधार पर मौसम खेती परामर्श बुलेटिन तैयार किया जाता है तथा इस परामर्श बुलेटिन को विभिन्न माध्यमों द्वारा किसानों तक शीघ्र पहुंचाया जाता है।
  4. किसानों से मिलकर इस सेवा द्वारा मिलने वाले आर्थिक लाभ/हानि का आकलन किया जाता है।

उद्देश

  1. किसानों के लिए मौसम का मध्य अवधि (आगामी चार दिनों के लिए) पूर्वानुमान करना।
  2. मौसम आधारित फसल-प्रबंधन द्वारा उपज में बढ़ोतरी लाना।
  3. फसल को मौसम की प्रतिकूलता से बचाना एवं अनुकूल स्थिति का लाभ दिलाना।
  4. मौसम खेती परामर्श बुलेटिन द्वारा किसानों को नई-नई कृषि तकनीकों एवं मौसम के अनुसार कृषि कार्यों को सुनिश्चित करने की सलाह देना।

परामर्श बुलेटिन की विशेषताएँ

  1. आगामी चार दिनों के लिए मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराना, जो 80 प्रतिशत से अधिक सही होता है।
  2. खेतों की तैयारी एवं विभिन्न फसलों को लगाने के समय एवं विधि से संबंधित सलाह।
  3. खाद एवं उर्वरक के प्रयोग संबंधी सलाह (कितना, कब और कैसे प्रयोग करें?) ।
  4. जल एवं भूमि प्रबंध से संबंधित सलाह।
  5. रोग एवं कीटाणु के आक्रमण की आशंकाएँ तथा इससे बचाव एवं उपचार से संबंधित सलाह।
  6. फसल की कटाई, ओसाई एवं भण्डारण से संबंधित सलाह।
  7. सुखाड़ की स्थिति में वैकल्पिक फसल योजना किसानों को उपलब्ध कराना।
  8. पशुधन में होने वाले रोगों एवं उनके उपचार की जानकारी किसानों को उपलब्ध कराना।

गौरियाकरमा प्रक्षेत्र, हजारीबाग

राज्य सरकार द्वारा गौरियाकरमा (हजारीबाग) स्थित 900 हेक्टेयर भूमि बीज अनुसंधान एवं उत्पादन के लिए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय को अक्टूबर 2005 में स्थानांतरित की गई। यहाँ बड़े पैमाने पर बीज उत्पादन का कार्य प्रारंभ किया गया है, जिसका फलाफल राज्य के किसानों को मिलना प्रारंभ हो गया है। इस प्रक्षेत्र से किसानों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त हो रहे हैं।

  1. प्रदेश के किसानों को उत्तम गुणवत्ता वाली रबी, खरीफ एवं जायद फसलों के प्रमाणित बीज।
  2. आधार बीजों की आपूर्ति न केवल झारखंड प्रदेश बल्कि अन्य पड़ोसी राज्यों को भी।
  3. प्रक्षेत्र में स्थित तालाबों में मत्स्य बीज उत्पादन।
  4. बहुवर्षीय उद्यान लगाने हेतु प्रवर्धित सामग्री का उत्पादन एवं वितरण।
  5. किसानों को बीजोत्पादन करने हेतु प्रशिक्षित करना तथा बीज ग्राम योजना को प्रोत्साहन।
  6. सुगंधित, औषधीय पौधों की प्रवर्धन सामग्री की उपलब्धता तथा किसानों के लिए इसकी खेती हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना।

स्त्रोत: कृषि विभाग, झारखंड सरकार



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