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झारखण्ड राज्य में धान की उन्नत खेती

परिचय

झारखण्ड राज्य में धान की खेती वर्ष 2007 में लगभग 16 लाख हेक्टेयर में की गयी थी तथा इसकी औसत उपज 18क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी। 16 लाख हैक्टर में से करीब 3 लाख हैक्टर में उपराऊ (टाड़) जमीन में गोड़ा धान की सीधी बुवाई की जाती है, तथा 7 लाख हैक्टर मध्यम जमीन (टांड़ 3 तथा दोन 3) में रोपाई द्वारा, तथा शेष 6 लाख हैक्टर नीची जमीन (दोन 2 व दोन 1) में भी रोपाई द्वारा खेती की जाती है।

अनुशंसित किस्म

टाँड़ जमीन (सीधी बुवाई) : बिरसा गोड़ा 102, बिरसा धान 108, बिरसा विकास धान 109, बिरसा विकास धान 110 तथा वन्दना; मध्यम जमीन (रोपाई) : बौनी किस्मे IR36, IR 64, ललाट; सुगंधित धान (रोपाई) : BR10 (Low input) तथा बिरसामती; नीची जमीन (रोपाई) : स्वर्णा (MTU7029), तथा सम्भा महसुरी (BPT5204); संकर धान (रोपाई) 6444; मध्यम व नीची जमीन (Low Input) बिरसा धान 202तथा राजश्री।

धान की सीधी बोआई

टांड़ जमीन में जुताई कर 15 से 30 जून तक छिटकवा विधि (100 किलो प्रति हैक्टर) या हल के पीछे (80 किलो प्रति हैक्टर) की दर से बुआई करें। बुआई के 15 दिन पहले खेत में सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट 5 क्विंटल प्रति हैक्टर की दर से समान रूप से बिखेर दें। बुआई के पहले एवं अंतिम जुताई के समय 20 किलो स्फुर (120 किलो सिंगल सुपरफास्फेट) तथा 20 किलोपोटाश (50 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) खाद का प्रयोग करें। सीधी बुआई में नेत्रजन खाद का व्यहवार बुआई के समय न करें।

पौधशाला की तैयारी

मई-जून में प्रथम वर्षा के बाद, पौधशाला के लिए चुने हुए खेत की दो बार जुताई करें। खेत में पाटा चला कर जमीन को समतल बनायें। पौधशाला सूखे या कदवा विधि द्वारा तैयार की जाती है। कदवा वाले खेत में बढ़वार अच्छी होती है। पौधशाला ऊँची, समतल, तथा 1 मीटर चौड़ाई की होनी चाहिए। पानी की निकासी के लिए 30 सेंटीमीटर चौड़ाई की नाली बना दें। खेत की अंतिम तैयारी से पूर्व 100 किलोग्राम गोबर की सड़ी खाद तथा नेत्रजन, स्फुर, व पोटाश, 500:500:500 ग्राम प्रति 100 वर्ग मीटर की दर से डालें । प्रति हेक्टेयर क्षे6 में रोपाई हेतु 1000 वर्ग मीटर उन्नत प्रभेद की रोपाई के लिए पौधशाला, तथा 750 वर्ग मीटर संकर धान की पौधशाला के लिए, एवं श्री विधि में 2350 वर्ग मीटर क्षेत्र पौधशाला कीजरूरत पड़ती है। संकर धान तथा श्री तकनीकी में 20 ग्राम बीज प्रति वर्ग मीटर में, तथा उन्नत किस्मों के लिए 50 ग्राम बीज प्रति हैक्टर में अंकुरित बीज डालते हैं। सूखे विधि में 1 मीटर चौड़ी पौधशाला में लाईन निकालकर सूखे बीज को बोते हैं तथा सड़ी गोबर की खादया कम्पोस्ट या वर्मीकम्पोस्ट से ढंक देते हैं। सिंचाई के लिए नालियों  में पानी भरते हैं। कदवा किए गये खेत में अंकुरित बीज को समान रूप से बिखेर देते हैं।

बीज दर

सीधी बुआई 100 किलोग्राम छिटकवा विधि, 80 किलोग्राम हल के पीछे लाईन में प्रति हैक्टर। रोपाई : 50 किलोग्राम उन्नत प्रभेद (बडा दाना), 40 किलोग्राम उन्नत प्रभेद (मध्यम व छोटा दाना), 15 किलोग्राम संकर धान, एवं 5 किलोग्राम श्री (SRI) विधि में प्रति हैक्टर बीज दर लगता है।

बीजोपचार

बीज को 12 घंटे तक पानी में भिगोयें तथा पौधशाला में बोआई से पूर्व बीज को कार्वेन्डाजिम (बैविस्टीन 50WP)फफूंदनाशी की 2 ग्राम मात्रा प्रति किलो बीज में उपचारित कर बोयें। पौधशाला अगर कदवा किए गए खेत में तैयार करनी है तब उपचारित बीज को समतल कठोर सतह पर छाया में फैला दें तथा भींगे जूट की बोरियों से ढंक दें। बोरियों के ऊपर दिन में 2-3 बार पानी का छिडकाव करें। बीज 24 घंटे बाद अंकुरित हो जायेगा। फिर अंकुरित बीज को कदवा वाले खेत में बिखेर दें।

बोआई का समय

खरीफ मौसम की फसल के लिए जून माह के प्रथम सप्ताह से अन्तिम सप्ताह तक बीज की बोआई करें। गरमा बुआई में मौसम में मध्य जनवरी से मध्य फरवरी तक बोआई करें।

पौधशाला की देखरेख

अंकुरित बीज की बोआई के 2-3 दिनों बाद पौधशाला में सिंचाई करें। इसके पश्चात् आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें। पौधशाला को खरपतवारों से मुक्त रखें। बिचड़ों की लगभग 12-15 दिनों की बढ़वार के बाद पौधशाला में दानेदार कीटनाशी कार्वोफुरॉन-3G, 250 ग्राम प्रति 100 वर्ग मीटर की दर से डालें।

खेत की तैयारी

संकर धान की खेती सिंचित व असिंचित दोनों जमीन में की जा सकती है। पहली वर्षा के बाद मई में जुताई के समय तथा खेत में रोपाई के एक माह पूर्व, गोबर की सड़ी खाद अथवा कम्पोस्ट 5 टन प्रति हेक्टेयर की दर से डालें। श्री विधि में 10 टन तक जैविक खाद का प्रयोग करते हैं। नीम या करंज की खली 5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से रोपाई के तीन सप्ताह पूर्व जुताई के समय खेत में मिला दें। रोपाई के 15 दिनों पूर्व खेत की सिंचाई एवं कदवा करें ताकि खरपतवार, सड़कर मिट्टी में मिल जायें। रोपाई के एक दिन पूर्व दुबारा कदवा करें तथा खेत को समतल कर रोपाई करें।

रोपाई

पौधशाला से बिचड़ों को उखाड़ने के बाद जड़ों को धोकर रोपाई से पूर्व बिचड़ों की ड़ों को क्लोरकपायरीफॉस (Cholorpyriphos) कीटनाशी के घोल (1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी) में पूरी रात (12 घंटे) डूबो कर उपचारित करें। रोपाई के लिए 15-20 दिनों की उम्र के बिचड़ों का प्रयोग करें। रोपाई पाटा लगाने के पश्चात् समतल की गयी खेत की मिट्टी में 2 से 3 सेंटीमीटर छिछली गहराई में करें। यदि खेत में जल-जमाव हो तो रोपाई से पूर्व पानी को निकाल दें। रोपाई से पूर्व रासायनिक खाद का व्यवहार करें। कतारों एवं पौधों के बीच की दूरी क्रमश: 20x15 सेंटीमीटर रखते हुए एक स्थान पर केवल एक या दो बिचड़े की रोपाई करें। कतारों को उत्तर-दक्षिण दिशा की ओर रखें।

रासायनिक उर्वरकों का उपयोग

टाँड़ जमीन में 40:20:20 किलो NPK, तथा रोपाई वाले ऊंची किस्म में 80:40:40 किलो NPK, तथा उन्नत बैनी किस्में 120:60:40 किलो NPK प्रति हैक्टर का व्यवहार करें। संकर धान में 150:75:90 किलो NPK प्रति हैक्टर का प्रयोग करें। अम्लीय भूमि में 3-4 क्विंटल प्रति हैक्टर की दर से चूने का प्रयोग करें। टाँड़ जमीन में नेत्रजन बुआई के 15 तथा 30 दिन बाद खरपतवार निकालने के पश्चात 20 किलो नेत्रजन (50 किलो यूरिया) का दो बार टॉपड्रेसिंग करें। रोपे गये धान में फास्फोरस (सिंगल सुपर फास्फेट) व पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश) तथा क चौथाई नेत्रजन का प्रयोग करें। नेत्रजन की शेष मात्रा दो या तीन बार किस्म की अवधि के अनुसार 3 तथा 6, या 3, 6 तथा 9 सप्ताह बाद यूरिया द्वारा टॉपड्रेसिंग करें। 125 दिन वाली किस्मों में दो बार तथा 145 दिन वाली किस्मों में 3 बार यूरिया का टॉपड्रेसिंग करें। DAP खाद के साथ जिप्सम व पोटाश खाद का प्रयोग अवश्य करें।

सिंचाई एवं निकाई-गुड़ाई

बिचड़ों की रोपाई के 5 दिनों बाद खेत की हल्की सिंचाई करें इसके बाद खेत में 5 सेंटीमीटर की ऊँचाई तक पानी दानों में दूध भरने के समय तक बनाये रखें। खाली स्थानों पर एवं मृत बिचड़ों की जगह पर रोपाई के 5 से 7 दिनों के अंतर पुन: बिचड़ों की रोपाई करें। लाईन में रोपी गयी फसल में खाद डालने के बाद रोटरी या कोनों वीडर का प्रयोग करें। यूरिया की टॉपड्रेसिंग करने से पहले निकाई गुड़ाई अवश्य करें।

कीट प्रबंधन

खेत में दानेदार कीटनाशी Carbofuran (Furadan) 3 जी (30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर) या Phorate 10 जी (10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर) बिचडों की रोपाई के 3 सप्ताह बाद डालें। इसके पश्चात् मोनोक्रोटोफॉस 36 ई.सी. (1.5 लीटर प्रति हैक्टर) या क्लोरपायरीफॉस 20 ई.सी. (2.5 लीटर प्रति हैक्टर) का 15 दिनों के अंतराल पर दो छिड़काव करें ताकि फसल कीटों के आक्रमण से मुक्त रहें। एक हैक्टर में छिडकाव के लिए 500 लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है। गंधी कीट के नियंत्रण के लिये इंडोसल्फान 4ब धूल या क्वीनालफॉस 1.5ब धूल की 25 किलोग्राम मात्रा का भुरकाव प्रति हेक्टेयर की दर से या मोनोक्रोटोफॉस 36 ई.सी. (1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर) का छिड़काव करें। उपरोक्त वर्णित दानेदार एवं तरल कीटनाशी के पयोग से साँढ़ा (gall midge) एवं तना छेदक कीटों की भी रोकथाम होगी। पत्र लपेटक (leaf folder) कीट की रोकथाम के लिए क्वीनालफॉस 25 ई.सी. (2 लीटर प्रति हेक्टेयर) का छिड़काव करें।

रोग प्रबंधन

कवक-जनित झोंका (Blast) तथा भूरी चित्ती रोगों की रोकथाम के लिए कार्बेन्डाजिम (बैविस्टीन 50WP) 0.1ब या ट्रूइसायक्लाजोल (0.06) का छिड़काव करें। फॉल्स स्मट (False Smut) रोग की रोकथाम के लिए बालियाँ निकलने से पूर्व प्रोपीकोनाजोल (Tilt) 0.1ब का दो छिड़काव, या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Blitox -50) 0.3ब का 10 दिन के अंतराल पर तीन छिड़काव करें। पत्रावरण अंगमारी (Sheath Blight) एवं जीवाणु-जनित रोगों के लिए खेत के पानी की निकासी करें तथा खेत में पोटाश की अतिरिक्त मात्रा (30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर) टॉपड्रेसिंग द्वारा डालें एवं नेत्रजन की बची किस्तों को बिलंब से डालें। सीथ ब्लाइट की रोकथाम के लिए हेक्साकोनाजोल (कोन्टाफ) 0.2ब या Validamycinका 0.25ब का छिड़काव करें।

फसल की कटाई, सुखाई एवं भंडारण

बालियों के 80 प्रतिशत दानें जब पक जायें तब फसल की कटाई करें। कटाई के पश्चात् झड़ाई कर एवं दानों को अच्छी तरह सुखाकर भण्डारण करें।

उपज क्षमता

उपराऊ धान : 30 क्विटल, मध्यम व नीची जमीन (ऊँची किस्म) : 40 क्विंटल; बौनी उन्नत किस्म : 60 क्विंटल तथा  संकर धान : 80 क्विंटल प्रति हैक्टर।

स्त्रोत: समेती, झारखंड



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