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मक्का

मक्का की विभिन्न किस्में

उन्नत प्रभेद: खरीफ मौसम के लिए

(क) प्रभेद का नाम

सुआन कम्पोजिट-1

एच.क्यू.पी.एम.-1

बिरसा मकई-1

(संकुल किस्म) कंचन (संकर किस्म)

बिरसा विकास मक्का-2

(ख)          तैयार होने का समय

100 दिन

80-85 दिन

70-80 दिन

(ग)           विशेष गुण

संकुल किस्म, दाना पुष्ट चमकीला, नारंगी रंग, उभरा हुआ। पत्रलांछन रोधी, रबी के लिए भी उपयुक्त।

दाना पुष्ट, पीला रंग

संकुल किस्म, दाना पीला पुष्ट चमकीला, पत्र लांछण रोधी, बरी के लिए उपयुक्त, ज्यादा गुणवत्ता वाली किस्म, उपज 40-45 क्विं./हे.

(घ)           औसत उपज

40-45 क्विं./हें. (खरीफ)

60-80 क्विं./हे. (रबी)

35-40 क्विं./हें. (खरीफ)

40-45 क्विं./हे.

संकर किस्म के बीज को प्रति वर्ष बदल देना चाहिए जबकि संकुल किस्म के बीज को 2-3 वर्ष तक उपयोग लाया जा सकता है।

कृषि कार्य

(क)   जमीन की तैयारी

  1. खेत की तैयारी के समय प्रति हेक्टेयर 100 से 150 क्विं. गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट व्यवहार करें।
  2. जमीन जुताई इतनी करें की मिट्टी भुरभुरी हो जाये।
  3. बुआई से एक माह पहले चूने का व्यवहार कर अम्लीय दूर करें।
  4. दीमक के लिए अंतिम जुताई के समय 25 किलो/हें. लिन्डेन धूल का प्रयोग करें।

(ख)   बुआई का समय: मी के अंतिम सप्ताह से जून के अंत तक।

(ग)   बीज दर: 20 किलो प्रति हेक्टेयर।

(घ)   दूरी: कतार से कतार 75 सें.मी., पौधा से पौधा 25 सें.मी. ।

(ङ)   बीज बोने की गहराई: 3-4 सें.मी. । खेत में नमी रहने पर बुआई करें।

(च)   उर्वरक का प्रयोग: 120:60:40 किग्रा.एन.पी. के प्रति हें.

उर्वरक

बोने के समय

बुआई के 30 दिनों के बाद समय

धनबाल के समय

नाइट्रोजन

36 किग्रा. (80 कि.यूरिया/हें.)

30 किग्रा. (65 कि. यूरिया/हें.)

30 किग्रा.(65 कि. यूरिया/हें.)

फ़ॉस्फोरस

60 किग्रा. (130 कि.डी.ए.पी./हें.)

 

 

पोटाश

40 किग्रा. (68 कि. म्यूरिएट ऑफ़ पोटाश/हें.)

 

 

 

खाद को कुंड में डालकर मिला लें, तब बीज बोयें।

(छ)   जल निकास: समुचित जल निकास का प्रबंध आवश्यक है। फूल आने के समय सूखे की स्थिति में सिंचाई की जरूरत है।

(ज)   खरपतवार: बीज बोने के दो-तीन दिनों के अंदर 2 कि. एट्राटाफ को 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें अथवा 10-15 दिनों के अंतराल पर निकाई-गुड़ाई करें।

(झ)   निकाई-गुड़ाई: मक्का की कतारों के अंदर ‘हो’ चलाकर कोड़नी करें। प्रथम टॉप-ड्रेसिंग के बाद कतार पर मिट्टी चढ़ाये।

(ञ)   कटनी: खरीफ मौसम की फसल को मोचा निकलने के 35-40 दिन के बाद बाल के परिपक्व हो जाने पर कटनी करें।

स्त्रोत एवं सामग्रीदाता: कृषि विभाग, झारखण्ड सरकार

 



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