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झारखण्ड की पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण

परिचय

झारखंड में पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण का अधिक महत्व है, क्योंकि कुल भौगोलिक क्षेत्र (7971400 हें.) में जनसंख्या 2.69 करोड़ का भार है। कुल वन क्षेत्र 28.4 प्रतिशत है। क्षेत्र के पारिस्थितिकी संतुलन के लिए इसे 33 प्रतिशत होना अति आवश्यक है। इसके अतिरिक्त यहाँ खनिज सम्पदा की प्रचुर मात्रा होने के कारण उत्खनन का भार बहुत अधिक है। छोटानागपुर मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्र है। इस सब कारणों से यहाँ की प्रमुख नदियों का जल प्रदूषित हो रहा है। अगर वायुमंडल की स्थिति की समीक्षा की जाये तो उसमें आर.एस.पी.एम. तथा एम.पी.एम. की मात्रा झारखण्ड के कुछ भागों को प्रभावित कर रही है।

अत: इस सब आपदाओं से प्राकृतिक संसाधनों को बचाने तथा बढ़ाने में पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण के ज्ञान का प्रसार जरूरी है। इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए विभाग कार्यरत है। किसान भाईयों को विशेष कर जंगलों में तथा उसके आसपास रहने वालों को प्राकृतिक संपदा के दोहन करने में संयम से काम लेना है। आने वाले समय में झारखंड के इस प्राकृतिक स्वरूप को बचाने तथा संवारने में हम सभी का योगदान रहेगा। इसके लिए पारिस्थितिकी का ध्यान रखें तथा जंगल के शुद्ध वातावरण, अप्रदूषित जल तथा वायु को कायम रखते हुए उन्नत कृषि तथा सुखी जीवन व्यतीत करने में योगदान दें।

पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण संतुलन हेतु किसान भाईयों से अनुरोध है कि

  • सभी परती भूमि पर वृक्षारोपण करें।
  • अपनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर वृक्षों की प्रजातियों का चुनाव करें।
  • भू एवं जल संरक्षण की समस्याओं से निपटने हेतु विशेषज्ञों से सलाह लेकर वृक्षारोपण करें।
  • स्त्रोत: कृषि विभाग, झारखंड सरकार



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