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फलों की खेती

आम, अमरुद एवं लीची

आम

अमरुद

लीची

मिट्टी

दोमट एवं बलुई दोमट, जीवांश की प्रचुर मात्रा युक्त तथा अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी

हर प्रकार की मिट्टी, जिसमें जीवाश अधिक हो तथा उचित जल निकास की व्यवस्था हो।

जीवांशु युक्त गहरी दोमट बलुई अम्लीय मिट्टी में चूना डालना आवश्यक है।

उन्नत प्रभेद

  1. मई-जून में पकने वाला: मिठुआ, बम्बई, एलफांजो, जरदालू, सुंदर प्रसाद, गुलाब ख़ास।
  2. जून में पकने वाला: लंगड़ा (मालदी), दशहरी, कुष्णभोग, हिमसागर, प्रभाशंकर, बेनजीर, महमूद बहार, मुनकुरा।
  3. जुलाई में पकने वाला: तैमुरिया, सिपिया, फजली, पहाड़पुर, सिंदुरिया, मल्लिका, आम्रपाली।
  4. अगस्त में पकने वाला: बथुआ, समरबहिश्त, चौसा, कातकी, बारहमसिया, लतरा।

इलाहाबाद सफेदा एवं लखनऊ-49 छोटानागपुर के लिए अत्यंत उपयोगी है।

मई के प्रथम पक्ष में पकने वाली: अझौली, ग्रीन, दशी, अर्ली, बेदाना। मई के द्वितीय पक्ष में पकने वाली: देहरा, रोज, शाही, रोज सेंटेड, स्वर्ण रूपा तथा बेदाना, मई के अंत तथा जून में पकने वाली: कसबा, पूर्वी, चाईना एवं लेट बेदाना।

प्रसार विधि

साटा, चश्मा एवं बीज द्वारा।

गुटी, चश्मा एवं बीज

गुटी

पौधा रोपण तरीका

समतल भूमि के लिए वर्गाकार/ आयाताकार ढलुआ जमीन के लिए कन्टूर ।

समतल भूमि के लिए वर्गाकार आयताकार, ढलुआ जमीन के लिए कन्टूर।

ढलुआ जमीन के लिए – कन्टूर, समतल भूमि के लिए – वर्गाकार/ आयताकार।

पौधों के बीच की दूरी

कलमी: 8-10 मी., आम्रपली: 5 मी. X 5 मी.

6 x 6 मी.

10 x 10 मी. उपजाऊ मिट्टी में 19 x 19 मी. अन्य मिट्टी में। बेदाना स्वर्ण रूपा किस्मों को 8 8 मी. दूरी पर।

गड्ढे का आकार

अप्रैल-मई

अप्रैल-मई

अप्रैल-मई

पौधा लगाने का समय

जून-अगस्त

जून-जुलाई

जून-अगस्त

गड्ढा भरते समय खाद

गोबर की खाद-10 किग्रा., करंज की खली-2 किग्रा., डी.ए.पी. 1 किग्रा., एप.ओ.पी. 500 ग्रा., लिन्डेन धूल-5 प्रतिशत- 100 ग्रा. ।

गोबर की खाद-8 किलो, करंज की खली-1 किग्रा., डी.ए.पी. 750 ग्रा., एम.ओ.पी. 400 ग्रा., लिन्डेन धूल-5 प्रतिशत -75 ग्राम तथा चूना।

गोबर की खाद-10 किग्रा., करंज की खली-2 किग्रा., सि.सु.फ़ॉ. 1 किलो, एम.ओ.पी. 500 ग्राम, चूना-10 किग्रा., लिन्डेन धूल- 100 ग्रा.

खाद एवं उर्वरक की मात्रा (प्रति पौधा/वर्ष)

पहले वर्ष 10 किलो गोबर खाद, 200 ग्राम यूरिया, 150 ग्रा. एस.एस.पी., 100 ग्रा. एम.ओ.पी. प्रति पौधा प्रति वर्ष समान अनुपात में 10 वर्षो तक खाद की मात्रा बढ़ाएं।

एक वर्ष के पौधे के लिए गोबर खाद 10 किग्रा., यूरिया 250 ग्रा., एस.एस.पी. 375 ग्रा., तथा एम.ओ.पी. 100 ग्राम। समान अनुपात में खाद की मात्रा 5 वर्ष तक बढ़ाते जायें।

प्रारंभ में 10 किग्रा. खाद, 150 ग्रा. यूरिया, 150 ग्रा. सि.सु.फ़ॉ., 100 ग्रा. एम.ओ.पी./ प्रति पौधा/ वर्ष देना चाहिए। तत्पश्चात पौधे की बढ़वार के साथ मात्रा में वृद्धि करते रहना चाहिए। प्रति वर्ष 2 किग्रा. करंज खली दें।

अन्तर्वर्ती फसल

सब्जी, केला, पपीता, अनार, अमरूद एवं औषधीय फसलें।

पपीता, सब्जी, औषधीय पौधे।

अमरुद, शरीफा, पपीता, दलहन एवं सब्जियाँ।

सिंचाई

छोटे पौधों में सर्दी के मौसम में 15-20 दिनों के अंतराल पर तथा गर्मी में 10 दिनों के अंतराल पर एवं फल देने वाले पौधों में अप्रैल-मई में 10 दिनों पर।

सर्दियों में 20-25 एवं गर्मी में 10-15 दिनों पर।

मार्च-मई माह में 8-10 दिनों के अंतराल पर।

पौधा संरक्षण

पौधा संरक्षण अनुच्छेद देखें।

पौधा संरक्षण अनुच्छेद देखें।

पौधा संरक्षण अनुच्छेद देखें।

उपज

5 साल (2-4 किग्रा.)

10 साल (40-50 किग्रा.)

40 साल (120-150 किग्रा.)

बीज पौधे से – 100 किग्रा. प्रति पौधा प्रति वर्ष, कलमी से – 250 किग्रा. प्रति पौधा प्रति वर्ष।

15 वर्ष के बाद 80-100 किग्रा. प्रति वृक्ष।

शुद्ध लाभ रु./हें./वर्ष

40-50 हजार

40-50 हजार

75-80 हजार

नींबू प्रजातीय फल , पपीता एवं अंगूर

नींबू प्रजातीय फल

पपीता

अंगूर

मिट्टी

दोमट, कंकड़ीली तथा उचित जल निकासी वाली।

बलुई दोमट, अच्छे जल निकास युक्त एवं जैविक तत्वों से भरपूर।

प्राय: सभी प्रकार की मिट्टी में खेती सम्भव। परन्तु झारखंड की जलवायु प्रतिकुल होने के कारण अच्छी किस्मों में फलन बहुत कम होता है एवं स्वाद भी अच्छा नहीं होता है।

उन्नत प्रभेद

संतरा: नागपुर, दार्जिलिंग, खासी, किन्नों, कुर्ग। स्वीट ऑरेंज: मौसमी, माल्टा ब्लड रेड, जाफा, वैलेशिया लेट, वाशिंगटन नेमल ऑरेंज। लेमन: गंधराज, यूरेका, आसाम, इटालियन। कागजी नींबू: बनारसी, नेपाली, पुरबी, कागजी कलान। मीठा नींबू: शरबती। ग्रेप फ्रूट: सहारनपुर, मार्श सीडलेस, मार्श पिंक, रूबी, डंकन, फोस्टर एवं ट्रम्फ। गलगल या चकोतरा: गुलाबी या सफेद गूदेवाला।

पूसा मैजेस्टिक, पूसा ड्वार्फ, पूसा नन्हा, पूसा जायंट, पूसा डिलिशस, कुर्ग हनीडियू, सी. ओ.-1, सी.ओ.-2, वाशिंगटन, सोलो, सिलोन, हवाई, मधु।

परलेट, ब्यूटी सीडलेस, थॉमसन सीडलेस, पूसा सीडलेस, बंगलोर, खलीली, गुलाबी, अनाबेशाही, अर्काश्याम, अर्काहंस, अर्काकंचन, अर्कावती, पूसा नवरंग आदि मुख्य हैं। अगात वृष्टि वाले क्षेत्रों में परलेट जैसी अगात किस्मों का चयन करना चाहिए। पकते समय वर्षा या नम मौसम होने से फल खट्टे रह जाते हैं।

प्रसार विधि

गुटी, चश्मा

बीज, उत्तक संवर्ध्दित पौधे

बीज, उत्तक संवर्ध्दित पौधे

बाग़ का प्रकार

समतल भूमि: वर्गाकार/ आयताकार, ढलुआ-कन्टूर

समतल भूमि: वर्गाकार/ आयताकार/ ढलुआ: कन्टूर।

समतल भूमि: वर्गाकार/ आयताकार/ ढलुआ: कन्टूर।

पौधों के बीच की दूरी

5 x 5 मीटर, कम फैलाव के लिए। 6 x 6 मीटर, ज्यादा फैलाव के लिए।

पौधों के बीच की दूरी: 1.8 x 1.8 मी.

2.5 x 2.5 मीटर शीर्ष प्रणाली के द्वारा, 3 x 3 मीटर निफिन प्रणाली के द्वारा, 4-6 x 4-6 मीटर कुंज प्रणाली के द्वारा।

गड्ढा खोदने एवं पौधा लगाने का समय

मई-जून और जुलाई-अगस्त

मई एवं जून तथा सितम्बर एवं अक्टूबर

जनवरी-फरवरी

गड्ढे का आकार

60 x 60 x 60 सें.मी.

60x 60 x 60 सें.मी.

60 x 60 x 60 सें.मी.

गड्ढे भरते समय खाद की मात्रा

गोबर की खाद: 7-8 किग्रा., करंज खली-1 किग्रा., डी.ए.पी.-1 किग्रा., म्यूरिएट ऑफ़ पोटाश-400 ग्रा, चूना-1.5 किग्रा., लिन्डेन धूल-100 ग्रा.

गोबर की खाद-7 किग्रा., करंज खली: 1.0 किग्रा., डी.ए.पी.-1.55 किग्रा., म्यूरिएट ऑफ़ पोटाश-1/2 किग्रा.लिन्डेन धूल-50 ग्राम।

गोबर की खाद 8-10 किग्रा., एस.एस.पी.-1 किग्रा., एम.ओ.पी.-1/2 किग्रा., करंज की खली-1 किग्रा., चूना-250 ग्राम, लिन्डेन धूल-50 ग्राम।

खाद की मात्रा (प्रति पौधा/ वर्ष )

यूरिया 650 ग्राम, एस.एस.पी. 1.5 किग्रा. और एम.ओ.पी. 500 ग्रा. (विकसित पौधे के लिए)

यूरिया 400 ग्रा. (3 महीने के अंतराल पर चार भागों में), एस.एस.पी. 1.2 किग्रा. एम.ओ.पी. 350 ग्राम।

प्रारंभ में 15 किग्रा. गोबर खाद, 200 ग्राम यूरिया, 1 किग्रा. एस.एस.पी.तथा 175 ग्राम एम.ओ.पी. दें। पाँच वर्षों तक खाद की मात्रा बढ़ाते जायें।

सिंचाई

फल विकास के समय आवश्यकतानुसार सिंचाई करें।

इसमें सिंचाई की अधिक आवश्यकता होती है। अत: इसे कुएं, तालाब या नदी के पास ही लगाना चाहिए।

मार्च से मई तक फल विकास के समय आवश्यकतानुसार सिंचाई करें।

उपज (प्रति पौधा प्रति वर्ष)

कट्टा नींबू 1500-1600 फल, मीठा नींबू 350-400 करें।

30-150 फल प्रति पौधा

25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर

शुद्ध लाभ (रु./हें./वर्ष)

30-35 हजार

40-50 हजार

50 से 60 हजार

नारियल, आँवला एवं अनार

नारियल

आँवला

अनार

मिट्टी

जीवांश युक्त बलुई मिट्टी, जिसमें जल निकास की सुविधा हो।

पथरीली, रोमट एवं क्षारीय मिट्टी

दोमट एवं बलुई दोमट

उन्नत प्रभेद

लंबी पश्चिमी तटीय लंबा, पूर्व तटीय लंबी, लक्षद्वीप-साधारण, लक्षद्वीप माइक्रो, बोनॉलिम लंबी। बौना-चावक्काट ओरंज बौना, गंगा बोदाम, मलयन हरा बौना, मलयन पीला बौना। संकर-केरा शंकर, चन्द्र शंकरा, चन्द्र लक्षा, लक्ष गंगा, वी.एच.सी.-1, वी.एच.सी-2

चकिया, कृष्ण, कंचल, एन.ए.-6 एवं एन.ए.-71

बेदाना, गणेश, ज्योति, रूबी, डोलका, मृदुला आदि।

प्रसार विधि

बीज फल

बीज, चश्मा, साटा आदि

कटिंग एवं गुटी

बाग़ के प्रकार

समतल भूमि में वर्गाकार, त्रिभुजाकार तथा झुलआ जमीन में कन्टूर।

वर्गाकार

वर्गाकार

पौधों के बीच की दूरी

7.0 मी. X 7.0 मी.

8.0 मी. X 8.0 मी.

4-5 मी. X 4-5 मी.

गड्ढे का आकार

1 मी. X 1 मी.

1 मी. X 1 मी.

60 सें.मी. x 60 सें.मी.

गड्ढे खोदने का समय

अप्रैल-मई

अप्रैल-मई

मई

पौधा लगाने का समय

जुलाई-अगस्त

जुलाई-अगस्त

जुलाई

गड्ढा भरते समय खाद की मात्रा (प्रति गड्ढा)

गोबर खाद 15-20 किलो, फ्युराडोन-3 जी. 15-20 ग्रा. को मिट्टी में मिलाया जाता है।

गोबर खाद 10 किग्रा., करंज/ नीम खली 2 किग्रा., सि.सु.फा. 1 किग्रा., म्यूरिएट ऑफ़ पोटाश 400 ग्रा., लिन्डेन धूल 100 ग्राम।

गोबर खाद 7-8 किग्रा., करंज/ नीम खली-1 किग्रा., सिं.सु.फा. ½ किग्रा., म्यूरिएट ऑफ़ पोटाश ¼ किग्रा., लिन्डेन धूल 50 ग्राम।

खाद की मात्रा (प्रति प्रौढ़ वृक्ष)

यूरिया ½ किग्रा. एस.एस. पी. 1 किग्रा. एम.ओ.पी. ½ किग्रा।

प्रारंभिक 5 वर्षो तक 10 किग्रा. गोबर खाद, 100 ग्रा. यूरिया, 250 ग्रा. सिं.सु.फा. 80-100 ग्रा. एम.ओ.पी. । फलन दे रहे प्रौढ़ वृक्षों में 50 किग्रा. गोबर खाद 300-400 ग्रा. यूरिया, 800-1000 ग्रा. सिं.सु.फा. एवं 300-400 ग्रा. एम.ओ.पी/वृक्ष/ वर्ष।

100 ग्राम यूरिया, 200 ग्रा. एस.एस.पी. एवं 75 ग्रा. एम.ओ.पी. दें। खाद की मात्रा प्रति वर्ष समानुपात में 4 वर्ष तक बढ़ाते रहें।

सिंचाई

गर्मी के दिनों में आवश्यकतानुसार

छोटे पौधों में आवश्यकतानुसार

अक्टूबर से जनवरी तक 10-15 दिनों के अंतराल पर

फलन

बौनी किस्में 3-4 वर्षा में, लम्बी किस्में 7-8 साल में।

कायिक प्रवर्धित 3-4 वर्ष में तथा बीजें 6-8 वर्ष।

3 वर्षा से आरम्भ एवं 25 वर्ष तक

उपज

150-200 नारियल प्रति वृक्ष प्रति वर्ष

8-10 वर्ष (80-100 किग्रा./वृक्ष) 20 वर्ष से अधिक (200-250 किग्रा. / वृक्ष) ।

100-120 फल प्रति वृक्ष/ वर्ष।

शुद्ध लाभ (रु./ हें./वर्ष)

1-1.5 लाख

25-30 हजार

35-35 हजार

नाशपाती, सतालू, लोकाट, शरीफा एवं बेर

नाशपाती, सतालू एवं लोकाट

शरीफा

बेर

मिट्टी

कंकरीली एवं दोमट मिट्टी

बलुई दोमट एवं कंकरीली मिट्टी

दोमट एवं बलुई दोमट मिट्टी

उन्नत प्रभेद

नाशपाती: विलियम, कश्मीरी नख एवं पत्थर नख एवं नेतरहाट लोकल, सतालू: शरबती, फ्लोरीडासन, अर्ली अम्बर, शान-ए-पंजाब, सफेदा, लोकाट: मैचलेस, सहारनपुर स्पेशल, टनाका।

साहेबगंज स्पेशल, चिरमोया एवं बाला नगर, अर्का सहन।

बनारसी एवं कड़ाका।

प्रसार विधि

चश्मा, कटिंग एवं गुटी

बीज या साटा

बीज, चश्मा, साटा आदि

बगीचे का आकार

ढलुआ – कन्टूर, समतल-वर्गाकार

समतल भूमि- वर्गाकार, ढलुआ- कन्टूर

समतल भूमि- वर्गाकार, ढलुआ- कन्टूर

पौधों के बीच की दूरी

5 5 मीटर

3-5 मीटर

4-6 मीटर

गड्ढे का आकार

0.75 मी. X 0.75 मी. X 0.7 मी.

0.75 मी. X 0.75 मी. X 0.7 मी.

0.75 मी. X 0.75 मी. X 0.7 मी.

गड्ढे खोदने का समय

सितम्बर-अक्टूबर

मई

मई

पौधा लगाने का समय

अक्टूबर-नवम्बर

जून-जुलाई

जून-जुलाई

गड्ढा भरते समय खाद की मात्रा (प्रति गड्ढा)

गोबर की खाद 7 किग्रा., एस.एस.पी. 750 ग्रा., एम.ओ.पी. 400 ग्रा. नीम या करंज की खली 1 किग्रा., लिन्डेन धूल 50 ग्राम

गोबर की सड़ी खाद 7 किग्रा., चूना 1 किग्रा., करंज खली 1 किग्रा., एस.एस.पी. 750 ग्रा., एम.ओ.पी. 400 ग्रा., लिन्डेन 50 ग्राम

गोबर की सड़ी खाद 8 किग्रा., चूना 1 किग्रा., करंज खली 1 किग्रा., एस.एस.पी. 750 ग्रा., एम.ओ.पी. 400 ग्रा., लिन्डेन 50 ग्राम

खाद की मात्रा (प्रति पौधा/वर्ष)

प्रारंभिक वर्ष में 5-6 किग्रा. गोबर खाद, 150 ग्रा. यूरिया, 200 ग्रा. सिं.सु.फा. एवं 100 एम.ओ.पी. दें एवं खाद की मात्रा को समानुपात में 10 वर्षो तक बढ़ाते जाएँ।

पौधों को 3 वर्षो तक 10 किग्रा. गोबर खाद, 1.5-2.0 किग्रा. करंज खली, 150 ग्रा. यूरिया, 150 ग्रा. सिं.सु.फा. एवं 150 ग्रा. एम.ओ.पी. देना चाहिए। इस मात्रा को धीरे-धीरे बढ़ाते रहना चाहिए। विकसित पौधों को 20-25 किग्रा. यूरिया, 0.8-1.0 किग्रा. सिं.सु.फा. एवं 400 ग्रा. एम.ओ.पी. देना चाहिए।

पौधों को 3 वर्षो तक 10 किग्रा. गोबर खाद, 1.5-2.0 किग्रा. करंज खली, 150 ग्रा. यूरिया, 150 ग्रा. सिं.सु.फा. एवं 150 ग्रा. एम.ओ.पी. देना चाहिए। इस मात्रा को धीरे-धीरे बढ़ाते रहना चाहिए। विकसित पौधों को 20-25 किग्रा. गोबर खाद, 3 किग्रा. करंज खली, 1 किग्रा. यूरिया 0.8-1.0 किग्रा., सिं.सु.फा. एवं 400 ग्रा.एम.ओ.पी. देना चाहिए।

उपज

30-40 टन/हें.

100 फल प्रति वृक्ष

80-200 किग्रा. प्रति वृक्ष

शुद्ध लाभ (रु./हें./वर्ष)

30-33 हजार

20-25 हजार

30-35 हजार

सपाटू, फालसा, खिरनी, केंद्र, चिरौंजी , कटहल एवं जामुन

 

सपाटू

फालसा, खिरनी, केंद्र, चिरौंजी

कटहल एवं जामुन

मिट्टी

बलुई दोमट, लटेराइट एवं मध्यम

दोमट एवं कंकरीली

दोमट एवं बलुई दोमट

उन्नत प्रभेद

क्रिकेट बॉल, काली पत्ती

स्थानीय

कटहल: रोज सेंटेड, गुलाबी, रसदार एवं खजवा, चेस-1, चेस-2, बरमसिया आदि। जामुन: फलेना, कठ जामुन।

प्रसार विधि

साटा, ग्राफ्टिंग

बीज

बीज, कलिकायन

बगीचे का आकार

ढलुआ-कन्टूर, समतल-वर्गाकार

समतल भूमि – वर्गाकार, ढलुआ-कन्टूर

समतल भूमि वर्गाकार, ढलुआ-कन्टूर

गड्ढे का आकार

0.6 x  मी. x 0.6 मी. x  0.6 मी.

1 मी. x 1 मी. x 1 मी.

1 मी. x 1 मी. x 1 मी.

गड्ढा खोदने का समय

मई

मई

मई

गड्ढा भरने का समय

जून

जून

जून

पौधा लगाने का समय

जून-जुलाई

जून-जुलाई

जून-जुलाई

गड्ढा भरते समय खाद

गोबर खाद 8 किग्रा., करंज की खली 1 किग्रा., सिं.सु.फा. 750 ग्रा., एम.ओ.पी. 400 ग्रा., लिन्डेन 50 ग्राम।

गोबर की खाद 7 किग्रा., करंज खली 1 किग्रा., सिं.सु.फा. 750 ग्रा., एम.ओ.पी. 400 ग्रा., लिन्डेन धूल 50 ग्राम।

गोबर खाद 10 किग्रा., करंज खली 2 किग्रा., सिं.सु.फा. 1 किग्रा., एम.ओ.पी. ½ किग्रा., लिन्डेन 100 ग्रा.

खाद/पौधे/वर्ष

गोबर खाद 7 किग्रा., यूरिया 150 ग्रा., सिं.सु.फा. 150 ग्रा., एम.ओ.पी. 150 ग्रा. । इस मात्रा को धीरे-धीरे बढ़ाते रहना चाहिए। पूर्ण विकसित पौधों में 20-25 किग्रा., गोबर का खाद, 3 किग्रा. करंज खली, 1 किग्रा. यूरिया, 1 किग्रा. सिं.सु.फा.

प्रारंभ में गोबर खाद 5-6 किग्रा., 100 ग्रा. यूरिया, 125 ग्रा. सिं.सु.फा. एवं 100 ग्रा. म्यूरिएट ऑफ़ पोटाश दें। इस मात्रा को पौधे की आयु के साथ बढ़ाते जाएँ।

10 किग्रा. गोबर खाद, 100 ग्राम यूरिया, 200 ग्रा. सिं.सु.फा., 100 ग्राम एम.ओ.पी. जुलाई माह में देने के तत्पश्चात प्रति वर्ष खाद की मात्रा बढ़ाते जायें।

उपज

1500 फल प्रति वृक्ष

8-9 किग्रा./पौधा

100-150 फल/वृक्ष/ वर्ष

शुद्ध लाभ (रु./हें./वर्ष)

25-30 हजार

15-20 हजार

20-25 हजार

 

स्त्रोत: कृषि विभाग, झारखण्ड सरकार



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