मिट्टी बलुई दोमट एवं मटियार दोमट मिट्टी में इन फसलों की खेती सफलता पूर्वक की जाती है। उन्नत प्रभेद कददू : डोली सफ़ेद, पूसा मंजरी, पूसा मेघदूत एवं स्थानीय किस्म। करैला : पूसा दो मौसमी मिथिला पसंद, कोयबंटूर लौंग ग्रीन, रांची स्थानीय, आरका हरित। कोहड़ा : कोहड़ा सी.ओ. १, लाल कोहड़ा गयोब फर्केक्सन बड़ा गोल आरका चन्दन, आरका सूर्यमुखी। खीरा : स्ट्रेट -८ जापानी लौंग, पूसा सयोग, बालम खारा, पूना खीरा। झिगनी : पूसा नसदार, सतपुलिया, स्थानीय किस्में। नेनुआ : पूसा चिकनी लौंग ग्रीन, लौंग हवैइत, स्थानीय किस्में। बीज बोने का समय (क) मुख्यतः : जून – जुलाई (ख) गरमा फसल : दिसम्बर – जनवरी। बीज दर प्रति हेक्टेयर : ४-६ किलोग्राम। लगाने की बिधि खेतों के थालों में प्रति थाला २-३ पुष्ट बीज सीधे बोये जाते हैं। कोंहड़ा एवं कददू : २.५ से ३.०० मीटर की दूरी पर नेनुआ : २.५ से ३.०० मी. की दूरी पर खीरा, करैला, झिगनी : १.५ से २.० मी. की दूरी पर खाद की मात्रा क्विंटल /हेक्टेयर गोबर खाद यूरिया सिंगल सु फा. ग्यु पो १. कददू,कोहड़ा,नेनुआ २००-२५० २-२.५ ३.५-४.०० १.० २. करैला, खीरा,झिगनी १५०-२०० १-१ ५२-०० ०.८ उपज प्रति हेक्टेयर : १५०-२०० क्विंटल। कोंहड़ा : २००-२५० क्विंटल नेनुआ : १२५ – १५० क्विंटल खीरा, करैला,झींगी : ८० – १२ क्विंटल। कैसे बढ़ाए खीरे का उत्पादन? देखिए यह विडियो स्त्रोत: सब्जी उत्पादन की उन्नत कृषि प्रणाली प्रसार शिक्षा निदेशालय, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची।