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सेम वर्गीय सब्जियाँ

भूमिका

ग्वारफली, बोदी (बोड़ा) एवं सेम की झारखण्ड में किस प्रकार से अनुशंसित कहती होती है, इसकी जानकरी दी गयी है।

बुवाई की प्रक्रिया

मिट्टी – उपजाऊ बलूई दोमट से मटियार दोमट इन फसलों की खेती के लिए अधिक उपयुक्त है।

उन्नत किस्में – ग्वारफली – पूसा सदाबाहर, पूसा मौसमी

बोदी – पूसा बरसाती, पूसा दो फसली, यार्ड लांग, राँची स्थानीय उजला एवं लाल, अर्का गरिमा, बिरसा श्वेता। गर्मा हेतु पूसा फाल्गुनी एवं पूसा फसली।

सेम – वेलवेट, सफेद चपटा, लाल चपटा, स्थानीय किस्में, बौनी किस्में, जे- 2।

लगाने की विधि – तैयार खेत में बीज सीधे बोये जाते हैं। बोदी एवं सेम थालों में प्रति थाला 2-3 बीज तथा ग्वारफली कतारों में बोते हैं।

बोने का समय

बरसाती फसल      : जून – जूलाई

गर्मा फसल         : जनवरी फरवरी

बीज दर

ग्वारफली एवं बोदी  : 6-7.2 किलो प्रति एकड़

गर्मा  बोदी         : 10-12 किलो प्रति एकड़

सेम               : 8-10 किलो प्रति एकड़

पौधों की दूरी

ग्वारफली           : कतार से कतार 50 सें. मी.

: पौधा से पौधा  30 सें. मी.

बोदी एवं सेम      : कतार से कतार 2 मीटर

: पौधा से पौधा 1.5 मीटर

खाद तथा उर्वरकों की मात्रा (प्रति एकड़) : ये सब्जियाँ दलहनी हैं। अत: इन्हें नाइट्रोजन की कम तथा स्फूर की अधिक आवश्यकता होती है। गोबर की सड़ी खाद 60-80 क्विंटल, यूरिया 40-60 किलो, सिंगल सुपर फास्फेट 140-160 किलो तथा म्यूरिएट ऑफ पोटाश 40 किलो। स्फूर तथा पोटाश वाले उर्वरक को बोते समय डालें। नेत्रजन वाले उर्वरक जैसे यूरिया का उपयोग 2- 3 किस्तों में देना चाहिए।

सिंचाई - गर्मी में 5-7 दिनों पर तथा बरसात में आवश्यक्तानुसार सिंचाई करें।

पौधा संरक्षण - लाही तथा फल छेदक कीड़ों में फसल को बचाने के लिए इंडोसल्फान (1 से 1.5 मि. ली. प्रति लीटर पानी में) का छिड़काव करें।

उपज (प्रति एकड़)

सेम              : 60 - 80 क्विंटल प्रति एकड़

बोदी              : 60 - 80 क्विंटल प्रति एकड़

ग्वारफली          :  20 - 25 क्विंटल प्रति एकड़

फ्रेंचबीन

भूमि – जैविक पदार्थों से भरपूर अच्छे जल निकास वाली बलूई दोमट मिट्टी इसके लिए उम्मत है। अम्लिक मिट्टी में उपज अच्छी नहीं होती है। अत: ऐसी मिट्टी को चुने में उपचारित करके सुधार कर लेना चाहिए।

उन्नत किस्में : झाड़ीदार किस्में : कांटेंडर, एस – 9, पूसा पार्वती, जैकट स्ट्रिंगलेस।

लत्तरदार किस्में : केंटकी वंडर, बिरसा प्रिया।

लगाने की विधि – अच्छी तरह से जोतकर तैयार किए गए खादयुक्त भूरभूरे और जमीन में फ्रेंचबीन के बीज सीधे कतारों में बोये जाते हैं। बरसाती खेती के लिए इन्हें मेड़ों पर बोते हैं तथा रबी मौसम में समतल क्यारियों में बोते हैं। झाड़ीदार किस्में बरसाती के लिए उपयुक्त नहीं होती।

बीज दर (किलो/एकड़) – झाड़ीदार किस्में : 32 – 36 लत्तरदार किस्में : 10-12

बीज बोने का समय – झाड़ीदार किस्में : अक्टूबर- नवंबर तथा जनवरी – फरवरी

लत्तरदार किस्में – मई – जून, सितंबर – अक्टूबर तथा जनवरी – फ़रवरी

पौधों की दूरी :

झाड़ीदार किस्में -                         : कतार से कतार 60 सें. मी.

: पौधा से पौधा  30 सें. मी.

लत्तरदार किस्में                           : खरीफ में कतार से कतार 75 सें. मी.

: पौधा से पौधा 75 सें. मी.

: रबी तथा जायद कतार से कतार 75 सें.मी.

: पौधा से पौधा 25 सें. मी.

खाद उर्वरक की मात्रा (प्रति एकड़) – गोबर की सड़ी खाद 80-100 क्विंटल, यूरिया – 44 किलो, सिंगल सुपर फास्फेट – 190 किलो म्यूरिएट ऑफ़ पोटाश – 52 किलो। दो भाग यूरिया, पूरा सिंगल सुपर फास्फेट तथा पूरा म्यूरिएट ऑफ पोटाश को खेत की तैयारी के समय देते हैं। बाकी एक भाग यूरिया को टॉप ड्रेसिंग के रूप में निकाई गुड़ाई तथा मिट्टी चढ़ाते समय देना चाहिए।

सिंचाई – आश्यकतानुसार 8-10 दिनों पर सिंचाई करें।

पौधा संरक्षण – फ्रेंचबीन में हरदा (कीट) नामक बीमारी लगती है। रोगग्रस्त पौधे सूखने लगते हैं। इनके नियंत्रण के लिए इंडोफिल एम – 45 का प्रयोग करना चाहिए।

उपज (क्विंटल/एकड़) - झाड़ीदार किस्में : 14-20, लत्तरदार किस्में : 40-60

कीटनाशकों के प्रयोग में बरती जाने वाली सावधानियाँ:

1. हमेशा पौध संरक्षण रसायन की अनूश्न्सित मात्रा का ही प्रयोग करें।

2. प्लाट/गमले में कीटनाशक आदि छिड़कने के बाद 4-5 डिंग तक सब्जी न लें।

3. प्रयोग करने से पहले सब्जी की अच्छी तरह धो लें।

4. कीटनाशकों को किसी सुरक्षित स्थान पर एवं बच्चों की पहुँच से बाहर रखें।

5. खाद्य पदार्थों या दवाईयों के पास ऐसे रसायन न रखें।

6. थैले को फाड़कर न खोले बल्कि चाकू या कैंची से काटकर खोलें।

7. लेबल को पढ़े और निर्माता के निर्देशों का सवाधानीपूर्वक पालन करें।

8. कृषि रसायनों का प्रयोग करने के बाद अपने हाथ धो लें।

 

स्रोत : रामकृष्णा मिशन आश्रम, राँची



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