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यांत्रिकी विधि द्वारा खरपतवार नियंत्रण

यांत्रिकी विधि द्वारा खरपतवार नियंत्रण

परिचय

नींदा नियंत्रण, कृषि कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण कार्य है। नींदा नियंत्रण के यंत्र मुख्यत: नींदा नाशक विधि के अनुसार उपयोग में लाए जाते हैं। यांत्रिकी खरपतवार नियंत्रण विधि के द्वारा फसलों की निंदाई सबसे सरल एवं कृषकों द्वारा आसानी से समझने वाले विधि है। मनुष्यों द्वारा चलाए जाने वाले निंदाई यंत्र, कृषि निंदाई कार्य में अत्यंत प्रभावशाली पाए गए हैं। किन्तु यांत्रिकी निंदाई यंत्रों के उपयोग में निंदाई कार्य धीमी गति से हो पाता है एवं कृषि मजदूरों की आवश्यकता अधिक होती है। अत: जिन स्थानों पर मजदूरी की दर सस्ती है एवं निंदाई के समय मजदूरों की उपलब्धता आसानी से हो जाती है, वहां पर यांत्रिकी विधि अधिक प्रचलित है। यांत्रिकी नींदा नियंत्रण में उपयोग किए जाने वाले यंत्रों के प्रकार एवं विवरण इस प्रकार हैं। मनुष्य शक्ति द्वारा चलित यंत्र, पशुओं द्वारा चलाए जाने वाले यंत्र एवं ट्रैक्टर या इंजन द्वारा चलित यंत्र की श्रेणियों में निंदाई यंत्रों को उनके ऊर्जा के स्त्रोतों के आधार पर विभाजित किया गया है। यांत्रिकी खरपतवार नियंत्रण में मुख्य रूप से उपयोग किए जाने वाले यंत्र इस प्रकार है जैसे की खरपी, हंसियेनुमा खरपी, हंसिया, फावड़ा, खींचकर चलाए जाने वाले निंदाई यंत्र, आगे-पीछे चलाए जाने वाले निंदाई यंत्र, पहियेदार निंदाई, यंत्र, पशु चलित नींदा यंत्र, इंजन चलित निंदाई यंत्र इत्यादि।

खुरपी या खुरपीनुमा यंत्र

छोटे औजार या निंदाई यंत्रों का उपयोग हाथ द्वारा निंदाई की सहायता हेतु यंत्र मुख्य रूप से हाथ में पकड़कर नींदा को उखाड़ने एवं काटने हेतु उपयोग में लाए जाते हैं। जैसे की अधिकांशत: उपयोग की जाने वाली खुरपी एवं खुरपीनुमा यंत्र। इस प्रकार के यंत्रों को मनुष्य द्वारा झुककर अथवा बैठकर निंदाई के कार्य में लाए जाते हैं। इसमें निंदाई कार्य एकदम साफ़-सुथरा होता है, परन्तु इन यंत्रों की कार्यक्षमता बहुत कम पाई गई है। इसलिए कई परिस्थितियों में इन यंत्रों के द्वारा व्यवसायिक निंदाई कार्य कराना संभव नहीं हो पाता है। परन्तु छोटे क्षेत्रों में एवं खेतों में इस प्रकार के यंत्र काफी उपयोगी एवं बहुत प्रभावशील पाए गए हैं। इन यंत्रों के द्वारा पौधों के बीच उगने वाले खरपतवार को भी आसानी से निकाला जा सकता है। अलग-अलग प्रान्तों में एवं विभिन्न आकार प्रकार की डिज़ाइन (आकृति) वाली खुरपी एवं खुरपीनुमा यंत्र कृषकों के द्वारा उपयोग में लाए जाते है। जैसे की निंदाई खुरपी, (वीडिंग हुक) खुरपी, हसियेनुमा खुरपी, पंजा (फोर्क) या निंदाई पंजा (वीडिंग फोर्क) इत्यादि।

इन यंत्रों की कार्य विशेषताएं निम्न हैं।

  1. ये मानव चलित औजार हैं।
  2. इन यंत्रों की कार्यक्षमता 0.005 हेक्टेयर प्रति घंटा (50 वर्ग मीटर) लगभग पाई गई है।
  3. इन यंत्रों का प्रयोग मनुष्य बैठकर या झुककर निंदाई कार्य में लाता है।
  4. इन यंत्रों के द्वारा निंदाई कार्य में समय की अधिक आवश्यकता पड़ती है।
  5. फावड़ा, दातेदार कुदारी फावड़ा

फावड़ा दातेदार कुदारी फावड़ा (स्पेड, प्रोन्गड स्पेड) एवं चोपिंग स्पेड आते हैं। इस प्रकार के निंदाई यंत्रों का कार्य झटके से या दबाव (इम्पैक्ट) के सिद्धांत पर आधारित होता है। इन यंत्रों में सीधी ब्लेड तथा घुमावदार दांते वाली (प्रोन्गड) ब्लेड होती है। नींदा के पौधे खुदाई, कटाई एवं जड़-सहित उखाड़ने के प्रक्रिया के द्वारा हटाए जाते हैं। इन निंदाई यंत्रों के उपयोग मनुष्य द्वारा झुककर ही किया जाता है। इस प्रकार के निंदाई यंत्रों के कार्य प्राय: धीमा एवं थकाने वाला होता है। इस प्रकार के यंत्रों की कार्य विशेषताएं निम्न हैं।

  1. ये निंदाई यंत्र मानव चलित हैं।
  2. इस प्रकार के निंदाई यंत्र बहुवर्षीय खरपतवारों एवं कठिन परिस्थितयों में खरपतवारों को जड़ सहित निकालने में अधिक उपयोगी होते हैं।
  3. ये निंदाई यंत्र, निंदाई कार्य में अधिक सक्षम एवं उपयोगी पाए गए हैं।
  4. खींचकर चलाए जाने वाले लम्बे हत्थे के निंदाई यंत्र (पुल-टाइप वीडर)

इन यंत्रों के द्वारा खींचकर निंदाई कार्य किया जाता है। इन यंत्रों में प्रयुक्त होने वाला हत्था लम्बा होता है। ताकि खड़े-खड़े इन यंत्रों के उपयोग से निंदाई कार्य किया जा सके। लम्बे हत्थे के कारण इन यंत्रों के द्वारा अधिक दूरी तक निंदाई कार्य करने की क्षमता इनमें पाई गई है। इस प्रकार के यंत्रों की ब्लेड मुख्य रूप से सीधी ब्लेड, व्ही आकार वाली ब्लेड, स्वीप आकार वाली ब्लेड या साधारण समतल (प्लेट) आकार की होती है। चूँकि इस प्रकार के निंदाई यंत्र हल्के होते हैं, अत: इन से निंदाई कार्य फसल की प्रारंभिक अवस्था में अधिक उपयुक्त पाया गया है। इस प्रकार के निंदाई यंत्र मुख्यत: सीधी ब्लेड वाले हैंण्ड हो, व्ही आकृति वाले हैण्ड हो, 3-फालीय हैण्ड कल्टीवेटर आते हैं। सीधी ब्लेड वाले हैण्ड हो तब अधिक उपयोगी पाए गए हैं जब मिट्टी भुरभुरी हो एवं खरपतवार की अवस्था छोटी हो। 3-फालीय हैण्ड कल्टीवेटर मिट्टी मे अधिक गहराई तक निंदाई कार्य कर सकते हैं। खींचकर चलाए जाने वाले निंदाई यंत्रों की निम्न कार्य विशेषताएं है।

  1. ये मानव चलित यंत्र है एवं उनका उपयोग क्यारियों में बोई गई फसल के लिए अधिक उपयोगी होता है।
  2. इस प्रकार के यंत्रों की कार्य क्षमता 0.1 से 0.2 हेक्टेयर प्रतिदिन (8 घंटों में) लगभग पाई गई है।
  3. इन यंत्रों की कीमत रूपये 150/- के लगभग होती है।
  4. इन यंत्रों का वजन 1.5 से 2.0 किग्रा. के लगभग होता है।

    आगे-पीछे चलाए जाने वाले निंदाई यंत्र (पशु-पुल वीडर)

पशु-पुल निंदाई यंत्र खींचकर चलाए जाने वाले निंदाई यंत्रों के समरूप बनावट के होते हैं। मुख्य अंतर उनकी घास काटने वाली ब्लेड की बनावट एवं कार्य करने के तरीके में होता है। इन यंत्रों की ब्लेड में घास काटने वाली धारदार किनारी ब्लेड के दोनों तरफ यानि आगे व पीछे होती है। बज निंदाई यंत्र को आगे व पीछे खींचकर चलाया जाता है तब नींदा के पौधे दोनों ही समय पर कटते जाते हैं। ये यंत्र नींदा की छोटी अवस्था में अधिक उपयोगी पाए गए हैं। मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए तथा मिट्टी अधिक सख्त नहीं हो। इस प्रकार के निंदाई यंत्रों में स्वीश-हो, डच हो, ड्रा वीडर इत्यादि आते हैं। इन यंत्रों की कार्य विशेषताएं निम्न प्रकार होती हैं।

  1. ये मानव चलित यंत्र हैं तथा क्यारियों में बोई गई फसल के लिए अधिक उपयोगी होते हैं।
  2. इन यंत्रों के द्वारा निंदाई के समय ब्लेड में धार बनी रहना आवश्यक है।
  3. इन यंत्रों से 0.12 से 0.15 हेक्टेयर प्रतिदिन (8 घंटों में) का निंदाई कार्य लगभग होता है।
  4. इन निंदाई यंत्रों की कीमत रूपये 150/- के लगभग होती है।
  5. पहियेदार निंदाई यंत्र (पशु टाइप वीडर)

पहियेदार निंदाई यंत्र (पशु टाइप वीडर) में निंदाई कार्य निंदाई यंत्र को आगे की तरफ बढ़ाने अथवा धकेलने (पशु) की प्रक्रिया के निंदाई यंत्र में पहिया एक या दो पहिये, निंदाई रोलर, खूंटीदार पहिया या दांतेदार पहिया होता है। पहिया निंदाई कार्य के समय यंत्र को स्थिरता प्रदान करता है। यंत्र की ब्लेड नींदा के पौधों को जड़ के पास से काटती चलती है। यंत्र का पहिया निंदाई के समय निंदाई कार्य की एक समान गहराई बनाए रखता है। खूंटीदार एवं दांतेदार पहिया की खूंटी एवं दांते खरपतवार को काटने एवं मिक्स करने में मदद करते हैं। इन निंदाई यंत्रों के द्वारा अन्य निंदाई यंत्रों की तुलना में अधिक कार्यक्षमता के साथ निंदाई कार्य सम्पन्न किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त गीली धरती की फसलों में निंदाई कार्य के लिए निंदाई चक्र (वीडिंग रोल्स) लगाए जाते हैं। जिनमें घुमावदार टाइन या क्लाज लगे रहते हैं जो की नींदा के पौधों को उखाड़कर गीली मिट्टी में दबाते जाते हैं। गीली मिट्टी के निंदाई यंत्रों में आगे बढ़ने के लिए लोहे या लकड़ी की फ्लोट लगी रहती है। जो की गीली मिट्टी की सतह पर फिसलती जाती है। फ्लोट के द्वारा गीली मिट्टी में निंदाई यंत्र धंसता नहीं है। पहियेदार निंदाई यंत्रों में व्हील-हो, ट्वीन व्हील-हो, पेग टाइप एवं स्टार ड्राइलैंड वीडर, धान के लिए रोटरी पैडी वीडर या जापानीज पैडी वीडर इत्यादि आते हैं। पहियेदार निंदाई यंत्रों की कार्यविशेषताएं निम्न है।

  1. ये मानव चलित यंत्र हैं तथा क्यारियों में बोई गई फसल के लिए अधिक उपयुक्त हैं।
  2. इन यंत्रों की कार्यक्षमता 0.12 से 0.2 हेक्टेयर प्रतिदिन (8 घंटों में) लगभग पाई गई है।
  3. इन निंदाई यंत्रों की कीमत रूपये 300/- से 400 के लगभग होती है।

पशु-चालित निंदाई यंत्र

जब फसल क्यारियों में 45-60 सेमी. की दूरी पर बोई जाती है तब पशु-चालित निंदाई यंत्रों का उपयोग किया जाता है। मुख्य पशु-चालित निंदाई यंत्र एम.पी. डोरा, बारडोली हो, अकोला हो, त्रिफाली आदि  यंत्र पशु-शक्ति से खींचकर चलाए जाने वाले निंदाई यंत्र हैं। कृषकों के द्वारा पशु-चालित एक लाइन वाले हो विभिन्न प्रदेशों में अधिकांशत: उपयोग में लाए जाते हैं।

सीधी ब्लेड वाले एवं हल्की गोलाकार ब्लेड का उपयोग साधारणतया किया जाता है। फसल की क्यारियों की दूरी के अनुसार ब्लेड की चौड़ाई चुन ली जाती है। बहु-क्यारियों के निंदाई यंत्रों का उपयोग भी गुजरात एवं महाराष्ट्र में किया जाता है। ताकि निंदाई का कार्य समय पर पूरा किया जा सके। पशु-चालित टूलबार एवं मल्टी परपज टूल फ्रेम (पहियेदार) का उपयोग भी अधिक चौड़ाई में बोई गईफसलों में निंदाई कार्य के लिए किया जाता है। बहु-क्यारियों वाली टूल फ्रेम में स्टीयरेबल टूल बार का उपयोग किया जाता है।

पशु-चालित निंदाई यंत्रों में स्थिर टाइन में स्वीप, चौड़ी समतल स्वीप (डगफूट-स्वीप) एवं शांवेल आकार की ब्लेड लगाई जाती है। चौड़ी त्रिकोण आकार की ब्लेड हो का भी उपयोग पशु-चालित निंदाई यंत्रों में किया जाता है। त्रिकोण आकार वाली ब्लेड वाले पशु चालित हो मिट्टी को अधिक पलट देते हैं। सीधी ब्लेड वाले बखर का उपयोग भी निंदाई कार्य में अधिक सक्षम होता है।

इंजन चालित निंदाई यंत्र

कुछ इंजन चालित निंदाई यंत्रों का विकास भी निंदाई एवं गुड़ाई कार्य के लिए किया जाता है। इन यंत्रों में छोटा पेट्रोल या मिट्टी तेल या डीजल से चलने वाले इंजन का उपयोग किया जाता है, छोटे खेतों में इंजन चालित निंदाई यंत्रों के द्वारा निंदाई कार्य में निंदाई का खर्च मानव चालित निंदाई यंत्रों की तुलना में अधिक आता है। अत: इंजन चालित निंदाई यंत्रों की उपयोगिता बड़े खेतों के लिए अधिक उपयोगी एवं लाभदायक होती है। ट्रैक्टर चालित यंत्र जैसे की कल्टीवेटर का उपयोग भी निंदाई-गुड़ाई के कार्य के लिए किया जाता है। किन्तु ट्रैक्टर को चलाने के लिए फसल की बोनी अधिक अंतर से करनी पड़ती है। ट्रैक्टर के चालन के लिए खेत के शुरू में जगह भी छोड़नी पड़ती है ताकि ट्रैक्टर को मोड़ा जा सके। इंजन चालित निंदाई यंत्रों का उपयोग केवल शुष्क (अपलेंड) खेतों में किया जाता है।

यांत्रिकी नींदा नियंत्रण यंत्रों का रखरखाव

यांत्रिकी नींदा नियंत्रण यंत्रों का उपयोग मनुष्य शक्ति, पशु-शक्ति या इंजन द्वारा निंदाई (उखाड़ने या काटकर) के कार्य हेतु किया जाता है। अत: इनके रखरखाव में मुख्यरूप से निम्न कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण पाए गए हैं।

  1. पहला नींदा यंत्र के मुख्य काटने वाले भाग ब्लेड का यंत्र के अन्य भागों जैसे की फ्रेम में भली भांति स्थिर रूप से एवं ठीक प्रकार से फिट रहना। अक्सर कार्य करते-करते यंत्र का यह भाग फ्रेम में ढीला हो जाता है। जिसके कारण निंदाई का कार्य ठीक तरह से सम्पन्न नहीं हो पाता एवं निंदाई कार्य करने में कठिनाई भी होती है। कार्यक्षमता भी यंत्र की फलस्वरूप कम हो जाती है।
  2. दूसरा निंदाई यंत्र के मुख्य कार्यकारी भाग ब्लेड की धार का पैनापन घट जाता है। अक्सर कार्य करते-करते ब्लेड की धार खत्म हो जाती है जिसके फलस्वरूप निंदाई का कार्य कष्टप्रद एवं श्रम अधिक करना पड़ता है, अत: ब्लेड की धार तेज बनाकर रखना चाहिए।
  3. तीसरा निंदाई यंत्र में हत्थे की ऊँचाई कार्य करने वाले श्रमिक की ऊँचाई के अनुसार भली-भांति कम या अधिक करके एडजस्ट कर लेना चाहिए, ताकि निंदाई का कार्य सुविधा पूर्वक किया जा सके। इस प्रकार यंत्र की ऊँचाई उपयुक्त होने से निंदाई यंत्र की कार्यक्षमता अधिक हो सकती है।
  4. चौथा इंजन द्वारा चालित यंत्रों की देखभाल एवं रखरखाव में इंजन की देखभाल इन यंत्रों में मुख्य रूप से करनी चाहिए। इंजन में निर्देशित प्रकार एवं अनुपात में ईंधन एवं आयल का उपयोग करना चाहिए।

अंत में मुख्य बात यह है कि खरीफ या रबी मौसम के कार्य खत्म होने के उपरान्त इन यंत्रों का भंडारण भली-भांति शेड में करना चाहिए ताकि अगली फसल के समय उपयोग में यंत्र ठीक प्रकार से कार्य कर सके। धूप या बाहर खुले में रहने से लकड़ी, प्लास्टिक एवं धातु के भागों को नुकसान पहुंचता है।

स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार



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