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पंगेसियस सूचि का प्रेरित प्रजनन

पंगेसियस सूचि का प्रेरित प्रजनन

परिचय

पंगेसियस का स्ट्रिपिंग द्वारा प्रजनन सर्वप्रथम 1995 में कराया गया | भारत के साथ-साथ अन्य दशों में पंगेसियस का स्पान एवं बीज उत्पादन के लिए प्रेरित प्रजनन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है | इस प्रजाति की मादा तीसरे वर्ष में लैंगिक परिपक्वता प्राप्त कर लेती है, परन्तु अधिकांश नर दूसरे वर्ष ही परिपक्व हो जाते हैं | औसतन एक मादा प्रति किलोग्राम शारीरिक वजन की दर से करीब एक लाख अंडे देती है | इनका प्रजनन काल मई-जून महीना होता है | अंडे चिपकने वाले होते हैं | प्रजनन के लिए कृत्रिम हारमोन के इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी मात्रा निम्न है :

क्रम

हार्मोन

नर

मादा

1

ओवाप्रिम

0.1 – 0.2 ml/kg

0.3 – 0.4 ml/kg

2

ओवाटाइड

0.1 – 0.2 ml/kg

0.4 – 0.5 ml/kg

प्रजनन प्रक्रिया

इंजेक्शन देने के बाद नर और मादा को अलग रखा जाता है | 8-12 घंटे के बाद स्ट्रिपिंग विधि द्वारा अण्डों को निषेचित किया जाता है | मादा के अंडों को पहले एक सूखे ट्रे में इक्कठा किया जाता है | इसके बाद नर से स्ट्रिपिंग कर प्राप्त मिल्ट को किसी पक्षी के पंख के द्वारा अण्डों में अच्छी तरह मिलाया जाता है एवं उसमें पानी मिलाया जाता है, जिससे निषेचन की क्रिया पूरी हो जाती है |

सामान्यत: 10 लाख अण्डों को निषेचित करने के लिये 1 मी.ली. मिल्ट पर्याप्त होता है | मिल्ट को अण्डों के साथ मिलाने के बाद पानी का छिड़काव शुक्राणुओं को सक्रिय करने के लिए बहुत जरुरी होता है, ताकि शुक्राणु अण्डों के माइक्रोपाइल (छिद्र) से अन्दर जा कर निषेचन की प्रक्रिया पूरी कर सके | पंगास के 1 किग्रा में अण्डों की संख्या औसतन 16 लाख होती है | निषेचित अंडे 22-24 घंटे में हैच कर जाते हैं तथा इसके बाद 24 घंटों में हैचलिंग से जुड़ा हुआ योल्क शैक अवशोषित हो जाती है | अण्डों के हैचिंग के लिए पानी की गुणवत्ता बहुत ही महत्वपूर्ण होती है | जल में घुलित आक्सीजन की मात्रा >5ppm तथा ph का मान 7.5 के आस-पास अच्छा माना जाता है | जल में आयरन या क्लोरिन अधिक मात्रा हैचिंग की परक्रिया को हानि पंहुचा सकती है | अत: पंगास का प्रजनन एवं जीरा उत्पादन के लिए स्थान का चयन करने से पहले इन बातों का ध्यान रखना बहुत ही आवश्यक है |

 

स्त्रोत: मत्स्य निदेशालय, झारखण्ड सरकार



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