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कृषि ऋण

परिचय (क्या करें?)

  • किसान अपने आपको सूदखोरों के चंगुल से बचाने के लिए बैंकों से कृषि ऋण की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।
  • किसानों की फसल ऋण व सावधि ऋण जरूरतों को पूरा करने के लिए यह सुविधा देश भर में फैले वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण  बैंकों और सहकारी री संस्थाओं के विशाल नेटवर्क के जरिए उपलब्ध है।
  • बैंक ऋण का समय से भुगतान सुनिश्चित करें।
  • किसानों को अपने ऋण का समुचित ब्यौरा रखना चाहिए।
  • बैंक ऋण का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए करें, जिसके लिए ऋण लिया गया है।

क्या पायें ?

किसानों को ऋण सुविधा

क्र. सं

ऋण सुविधा

सहायता का पैमाना

1.

ब्याज सहायता समर्थक/प्रतिभूति की आवश्यकता रहित ऋण

प्रति वर्ष 7% ब्याज की दर से रू. 3 लाख तक फसल ऋण। सही समय पर ऋण चुकता करने पर किसानों के ब्याज पर आर्थिक सहायता के रूप में 4%से 3% तक ब्याज पर छूट।

एक लाख रूपये तक के कृषि ऋण के लिए किसी समर्थक प्रतिभूति की आवश्यकता नहीं है।

2.

किसान क्रेडिट कार्ड

किसान फसल सुविधा क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ले सकते हैं। ऋण सीमा किसान द्वारा जोती गई जमीन और बोई फसल पर निर्धारित की जाती है। किसान क्रेडिट कार्ड से 3 से 5 साल के लिए बैध होता है। किसानों की दुर्घटना में मृत्यू/अशक्तता को कवर किया जाता है। फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल ऋण को भी कवरेज दिया जाता है।

3

निवेश ऋण

सिंचाई, कृषि मशीनीकरण, भूमि विकास रोपण,बागवानी एवं कटाई  प्रबंधन इत्यादी में निवेश के लिए भी किसानों को ऋण की सुविधा उपलब्ध है।

कृषि के लिए मूल्य नीति

न्यूनतम सहायता मूल्य (एमएसपी) के अंतर्गत तिलहनों, दलहनों एवं कपास की खरीद के लिए मूल्य सहायता योजना. (पीएसएस)

स्कीम का नाम

उद्देश्य

लाभार्थी

क्रियान्वयन एजेंसी

स्कीम के अंतर्गत कवर होने वाले उपज

उत्पादकों को होने वाले लाभ

सहायता का पैमाना

मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस)

प्रति वर्ष रबी एवं खरीफ दोनों फसल मौसम में भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे मूल्य गिरने की स्थिति में तिलहन, दलहन एवं कपास उत्पादकों को लाभाकरी/सुनिश्चित मूल्य उपलब्ध कराना

देश सभी तिलहन, दलहन एवं कपास उत्पादक

i) केंद्रीय एजेंसिया; नैफेड एवं लघु कृषक कृषि व्यापर संघ (एसएफ एसी)

ii) राज्य एजेंसियां: राज्य सहकारी विपणन/उपज संघ और केन्द्रीय एजेंसियों द्वारा राज्य स्तर पर नियुक्त कोई अन्य संगठन

iii) प्राथमिक एजेंसियां : ग्रामीण स्तर पर सहकारी विपणन समितियाँ, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), किसान उत्पादक कंपनियां, (एफपीसी)

अरहर (तुवर) मूंग, उड़द, कपास, मूंगफली छिलकेवाली, सूरजमुखी बीज, सोयाबीन, तिल, तिल्लीबीज, चना मसूर (लेटिल) रेपसीड/सरसों, कुसूम तोरिया, कोपरा.

मूल्य समर्थन योजना के प्रचालन से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी उपज विशेष का बाजार मूल्य, न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे गिरने की स्थिति में किसान को न्यूनतम गारंटी मूल्य मिल सके।

i) किसान: किसी उपज विशेष का मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम होने पर किसानों को पूरा न्यूतम समर्थन मूल्य का भुगतान।

ii)  केन्द्रीय एजेंसियां: केन्द्रीय एजेंसियों को हुई हानि की भरपाई भारत सरकार द्वारा की जाती हैं। इसके अलावा कोपरा की खरीद पर 2.5% की दर से और तिलहन, दलहनों एवं कपास के लिए 1.5% की दर से सेवा शुल्क का भुगतान भी केन्द्रीय एजेसियों को किया जाता है।

iii)  राज्य एवं प्राथमिक एजेंसियां : स्टोर से भण्डारण तक हुए  सभी व्यय मिलकर न्यूनतम समर्थन मूल्य और प्रचलित मूल्य में हुए अंतर का भी भुगतान राज्य एजेंसियों को भारत सरकार/केंद्रीय एजेंसियों द्वारा किया जाता है। इसके अलावा गोदाम के बाहर 1: सेवा शुल्क का भी भुगतान किया जाता है।

किससे संपर्क करें ?

1. संयूक्त सचिव (सहकारिता), कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि भवन नई दिल्ली – 1.

2. राज्य की राजधानियों में स्थित नैफेड/ एसएफएसी के क्षेत्रीय कार्यालय ।

3. सहकारी विपणन/उत्पाद संघ के जिला स्तर के कार्यालय।

4. तहसील स्तर पर सहकारी विपणन समितियों और ब्लॉक स्तर पर एफपीओ / एफपीसी।

कब संपर्क करें?

तिलहन/दलहन और कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य भारत सरकार द्वारा जून और अक्टूबर माह में (वर्ष में दो बार) रबी और खरीफ फसल की बुआई के पूर्वघोषित किए जाते हैं। जिससे किसान इन फसलों की बुआई के लिए अच्छी तरह निर्णय ले सकें। कटाई के समय किसान, क्षेत्र में प्रचलित बाजार मूल्य की तुलना भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ कर सकते हैं। यदि बाजार, मूल्य के साथ कर सकते हैं। यदि बाजार मूल्य, न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम हो तो वह खरीद प्रक्रिया से संबंधित उपरोक्त प्राधिकारियों से तुरंत संपर्क कर सकते हैं।

 

स्त्रोत: कृषि,सहकारिता और किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार



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