भूमिका कृषि उपज और कतिपय अन्य वस्तुओं के भण्डागारण और उनसे संबंधित या उनके आनुषंगिक विषयों के प्रयोजन के लिए निगमों के निगमन और विनियमन का उपबंध करने के लिए अधिनियम 19 दिसम्बर, 1962 को भारत गणराज्य के तेरहवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हुआ । प्रारम्भिक संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ 1. (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भण्डागारण निगम अधिनियम, 1962 है। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है (1962 का 58) (3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे। 2. इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो:- परिभाषाएं (क) ‘कृषि उपज’ से वस्तुओं की निम्नलिखित श्रेणियों में किसी एक श्रेणी से अभिप्रेत है, अर्थात् (i) खाद्य तिलहनों सहित खाद्य पदार्थ; (ii) खली और अन्य सांद्रणों सहित पशुचारा; (iii) अपरिष्कृत रुई, चाहे ओटी गई हो या न ओटी गई हो, और बिनोला; (iv) अपरिष्कृत पटसन (v) वनस्पति तेल (ख) ‘समुचित सरकार’ से केन्द्रीय भंडारण निगम के संबंध में केन्द्रीय सरकार और राज्य भंडारण निगम के संबंध में राज्य सरकार से अभिप्रेत है; (ग) ‘केन्द्रीय भंडारण निगम’ से धारा 3 के अधीन स्थापित केन्द्रीय भंडारण निगम से अभिप्रेत है; (घ) ‘सहकारी समिति’ से सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1912 (1912 का 2) या किसी राज्य में फिलहाल प्रवृत्त सहकारी समितियों, जो कृषि उपज या किन्हीं अनुसूचित वस्तुओं का प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण, निर्यात या आयात करती है या बीमा व्यवसाय में हैं और इनमें सहकारी भूमि बंधक बैंक भी शामिल हैं, के संबंध में किसी अन्य कानून के अधीन पंजीकृत समिति या पंजीकृत मानी गई समिति से अभिप्रेत है; (घघ) ‘राष्ट्रीयकृत बैंक’ से बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की पहली अनुसूची में निर्दिष्ट किसी तदनुरूपी नए बैंक; या बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 की पहली अनुसूची में निर्दिष्ट किसी तदनुरूपी नए बैंक; अभिप्रेत है; (ड.) ‘अधिसूचित वस्तु’ से किसी वस्तु (कृषि उपज को छोड़कर), जिसे केन्द्रीय सरकार, सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए अधिसूचित वस्तु घोषित कर सकती है और ऐसी वस्तु जिसके संबंध में संसद को संविधान की सातवीं अनुसूची की तीसरी सूची में प्रविष्टि 33 द्वारा कानून बनाने की शक्ति है, अभिप्रेत है; (च) ‘निर्धारित’ से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित अभिप्रेत है; (छ) ‘मान्यताप्राप्त एसोसिएशन’ से कोई एसोसिएशन, जो अग्रिम संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1952 की धारा 6 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा फिलहाल मान्यता दी गई है, अभिप्रेत है; (ज) ‘रिजर्व बैंक’ से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के अधीन स्थापित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है; (झ) ‘अनुसूचित बैंक’ से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की दूसरी अनुसूची में फिलहाल शामिल बैंक, (जिसमें राष्ट्रीयकृत बैंक शामिल है) अभिप्रेत है; (ञ) ‘स्टेट बैंक’ से भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 के अधीन स्थापित भारतीय स्टेट बैंक अभिप्रेत है; (ट) ‘राज्य भंडारण निगम’ से किसी राज्य के लिए भंडारण निगम, जो इस अधिनियम के अधीन स्थापित की गई या स्थापित मानी गई है, अभिप्रेत है; (ठ) ‘भंडारण निगम’ से भंडारण निगम, जो इस अधिनियम के अधीन स्थापित की गई या स्थापित मानी गई है, अभिप्रेत है (ड) ‘वर्ष’ से वित्तीय वर्ष अभिप्रेत है। 2 (क) किसी राज्य में कानून, जो प्रवृत्त नहीं है, या कोई कृत्यकारी, जो अस्तित्व में नहीं है, का इस अधिनियम में दिया गया कोई संदर्भ उस राज्य के संबंध में प्रवृत्त तदनुरूपी कानून या तदनुरूपी कृत्यकारी, जो अस्तित्व में है, के संदर्भ में माना जाएगा। केन्द्रीय भंडारण निगम (1) किसी ऐसी तारीख से, जो केन्द्रीय सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट की जाए, केन्द्रीय सरकार केन्द्रीय भंडारण निगम के नाम से एक निगम स्थापित करेगी जो एक निगमित निकाय होगा, जिसमें स्थायी उत्तराधिकार होगा और सम्पत्ति का अधिग्रहण, उसे रखने और बेचने की शक्ति के साथ एक सील होगी और उक्त नाम से मुकदमा चलाया जा सकता है या उस पर मुकदमा हो सकता है। (2) केन्द्रीय भंडारण निगम का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा [या ऐसे अन्य स्थान पर, जो केन्द्रीय सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे] अंश पूंजी और अंशधारी (1) केन्द्रीय भंडारण निगम की अधिकृत अंश पूंजी एक सौ करोड़ रुपये होगी जो प्रत्येक एक हजार रुपये के अंकित मूल्य के दस सौ हजार शेयरों में विभक्त होगी; जब केन्द्रीय भंडारण निगम उपयुक्त समझे तब कोई शेयर, जो जारी करने से रह गए हैं, परंतु केन्द्रीय सरकार, सरकारी राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा, समय-समय पर, केन्द्रीय भंडारण निगम की अधिकृत अंश पूंजी में उस सीमा तक वृद्धि कर सकती है जिस सीमा तक सरकार निर्धारित करे। (2) केन्द्रीय सरकार, इस प्रयोजन के लिए संसद द्वारा कानून द्वारा उचित विनियोजन के पश्चात् किसी भी समय जारी अंश पूंजी का चालीस प्रतिशत पूर्वक्रीत करेगी और अंश पूंजी का शेष साठ प्रतिशत, ऐसी अवधि के भीतर और ऐसे अनुपात में, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जाए, निम्नलिखित संस्थाओं द्वारा पूर्वक्रीत किया जाएगा, अर्थात्:- (क) स्टेट बैंक; (ख) अन्य अनुसूचित बैंक; (ग) सहकारी समितियां; (घ) बीमा कम्पनियां, निवेश न्यास और अन्य वित्तीय संस्थाएं; (ड.) कृषि उपज या किसी अधिसूचित वस्तु से संबंधित कार्य कर रही मान्यताप्राप्त एसोसिएशने और कम्पनियां। (3) यदि उप-धारा (2) में उल्लिखित अंश पूंजी के साठ प्रतिशत कोई भाग बिना आवंटन के रह जाता है तो वह केन्द्रीय सरकार और स्टेट बैंक द्वारा ऐसे अनुपात में, जिनकी उनमें सहमति हो, पूर्वक्रीत किया जा सकता है और यदि ऐसे करार में चूक होती है तो केन्द्रीय सरकार द्वारा यथानिर्धारित अनुपात में पूर्वक्रीत किया जा सकता है । (4) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय भंडारण निगम द्वारा बनाए गए विनियमों के अनुसरण में, केन्द्रीय भंडारण निगम के अंश केन्द्रीय सरकार [स्टेट बैंक या किसी अन्य अनुसूचित बैंक], किसी बीमा कम्पनी, किसी निवेश न्यास या अन्य वित्तीय संस्था या किसी सहकारी समिति या किसी कृषि उपज या किसी अधिसूचित वस्तु से संबंधित कार्य कर रही मान्यताप्राप्त एसोसिएशने और कम्पनियां। एसोसिएशन या कम्पनी को छोड़कर, अंतरणीय नहीं होंगे। केन्द्रीय सरकार और न्यास अथवा अनुमोदित प्रतिभूतियों द्वारा अंशों की गारंटी (1) केन्द्रीय भंडारण निगम के अंशों पर केन्द्रीय सरकार द्वारा मूलधन को वापस करने और ऐसी न्यूनतम दर पर, जो केन्द्रीय सरकार, अंशों के जारी होने के समय सरकारी राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा निर्धारित करे, वार्षिक लाभांश का भुगतान करने की गारंटी दी जाएगी। (2) इस उप-धारा में उल्लिखित अधिनियम में निहित किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय भंडारण निगम के अंश भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) की धारा 20 में निर्दिष्ट प्रतिभूतियों में, और बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) तथा बैंककारी कम्पनी अधिनियम, 1949 (1949 का 10) के प्रयोजन के लिए अनुमोदित प्रतिभूतियों में शामिल मानी जाएंगी। केन्द्रीय भंडारण निगम का प्रबंधन (1) केन्द्रीय भंडारण निगम के कार्यों और व्यवसाय का सामान्य पर्यवेक्षण और प्रबंधन निदेशक मंडल में निहित होगा जो एक कार्यकारी समिति तथा एक प्रबंध निदेशक की सहायता से सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है और सभी कार्यों का निपटान कर सकता है जो इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय भंडारण निगम द्वारा किए जा सकते हैं। (2) निदेशक मंडल जन हित को ध्यान में रखते हुए व्यवसाय के सिद्धांतों पर कार्य करेगा और केन्द्रीय सरकार द्वारा उन्हें दिए गए नीतिगत प्रश्नों पर अनुदेशों द्वारा उनका मार्गदर्शन किया जाएगा। (3) यदि यह संदेह उत्पन्न होता है कि कोई प्रश्न नीतिगत प्रश्न है या नहीं, तो केन्द्रीय सरकार का निर्णय अंतिम होगा। निदेशक मंडल (1) धारा 6 में उल्लिखित निदेशक मंडल में निम्नलिखित शामिल होंगे, अर्थात्:- (क) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामित किए जाने वाले छ: निदेशक; (ख) लोप किया गया। (ग) स्टेट बैंक द्वारा नामित किया जाने वाला एक निदेशक; (घ) अन्य अनुसूचित बैंकों द्वारा चुना जाने वाला एक निदेशक; (ड.) सहकारी समितियों द्वारा चुना जाने वाला एक निदेशक; (च) बीमा कम्पनियों, निवेश न्यासों और अन्य वित्तीय संस्थाओं, मान्यताप्राप्त एसोसिएशनों और कम्पनियों, जो कृषि उपज या अधिसूचित वस्तुओं के संबंध में कार्य करते हैं, द्वारा चुना जाने वाला एक निदेशक; (च- क ) केन्द्रीय सरकार द्वारा तीन निदेशक नियुक्त किए जाएंगे। (छ) केन्द्रीय सरकार द्वारा खंड (क) से (च) में उल्लिखित निदेशकों के साथ परामर्श करके नियुक्त किया गया प्रबंध निदेशक: परंतु यह कि निदेशक मंडल के प्रथम गठन के लिए खंड (घ), (ड.) और (च) के अधीन चुने जाने वाले तीन निदेशक केन्द्रीय सरकार द्वारा इस तरीके से नामित किए जाएंगे कि इन खंडों में उल्लिखित संस्थानों (चाहे वे निगम के अंशधारी बन गए हों या नहीं) की प्रत्येक श्रेणी को प्रतिनिधित्व मिले, लेकिन इस प्रकार नामित किया गया निदेशक तब तक अपने पद पर रहेगा जब तक चुना गया निदेशक उसके स्थान पर नहीं आ जाता है, जैसाकि इस खंड में व्यवस्था की गई है, और इस प्रकार चुना गया निदेशक तब तक अपने पद पर रहेगा जब तक पुराना निदेशक, यदि उसके स्थान पर चुना गया निदेशक नहीं नियुक्त होता, अपने पद पर बना रहता। (2) उप-धारा के खंड (घ), (ड.) और (च) में निर्दिष्ट निदेशक निर्धारित विधि से चुने जाएंगे। (3) यदि इस संबंध में निर्धारित अवधि के भीतर, या ऐसी और अवधि के भीतर, जिसकी केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमति दी जाए, उप-धारा (1) के खंड (घ) या खंड (ड.) या खंड (च) में संस्थान निदेशक का चुनाव करने में विफल रहते हैं तो केन्द्रीय सरकार रिक्ति को भरने के लिए निदेशक नामित कर सकती है । (4) निदेशक मंडल का एक अध्यक्ष होगा केन्द्रीय सरकार द्वारा निदेशकों में से नियुक्त किया जाएगा। उप-धारा (1) के खंड (चच) के अधीन नियुक्त किए गए निदेशक ऐसे वेतन और भत्ते प्राप्त करने के पात्र होंगे जो केन्द्रीय भंडारण निगम द्वारा केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से निर्धारित किए जाएंगे। (5) प्रबंध निदेशक - (5)(क) ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे कर्तव्यों का निर्वाह करेगा जो निदेशक मंडल या केन्द्रीय भंडारण निगम उसे सौंपेगा या प्रत्यायोजित करेगा; और (ख) ऐसे वेतन और भत्ते प्राप्त करेगा जो केन्द्रीय भंडारण निगम द्वारा केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से निर्धारित किए जाएंगे। (6) प्रबंध निदेशक को छोड़कर केन्द्रीय भंडारण निगम के निदेशक पारिश्रमिक के रूप में ऐसी धनराशि प्राप्त करने के पात्र होंगे जो केन्द्रीय भंडारण निगम द्वारा केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से निर्धारित किए जाएंगे। परंतु कोई भी सरकारी निदेशक उसकी सेवा शर्तों को विनियमित करने वाले नियमों के अधीन उसे अनुमेय भत्तों, यदि कोई हों, को छोड़कर कोई पारिश्रमिक प्राप्त करने का पात्र नहीं होगा। (7) निदेशकों का कार्यकाल और उनमें से आकस्मिक रिक्तियों को भरने की विधि वह होगी, जो निर्धारित की जाएगी। केन्द्रीय भंडारण निगम के निदेशक के पद के लिए अयोग्यता (1) यदि वह पागल पाया जाता है या विक्षिप्त हो जाता है; या (2) वह किसी भी समय दिवालिया करार किया गया है या उसने अपने ऋणों का भुगतान रोक दिया है या अपने ऋणदाताओं के साथ समझौता कर लिया है; या (3) यदि वह/उसने कोई अपराध करता है/किया है जिसमें भ्रष्टाचार लिप्त है और उसे इस अपराध के लिए छ: महीने की कैद की सजा मिली है, तो वह तब तक अयोग्य होगा जब तक सजा के समाप्त होने की तारीख से पांच वर्ष की अवधि व्यपगत न हो गई हो; या (4) यदि उसे सरकार या सरकार के अपने या सरकार द्वारा नियंत्रित निगम की सेवा से हटा दिया गया है या बरखास्त कर दिया गया है; या (5) धारा 7 की उप-धारा (1) के खंड (चच) के अधीन नियुक्त निदेशक और प्रबंध निदेशक के मामले को छोड़कर, यदि वह केन्द्रीय भंडारण निगम या किसी राज्य भंडारण निगम का वेतनभोगी अधिकारी है; या (6) उस स्थिति को छोड़कर जब कम्पनी अधिनियम, 1956 में यथापरिभाषित किसी सरकारी कम्पनी में एक अंशधारी (निदेशक को छोड़कर) है उसकी व्यक्तिगत रूप से केन्द्रीय भंडारण निगम के साथ की गई किसी अस्तित्व युक्त संविदा या केन्द्रीय भंडारण निगम के लिए किए जा रहे किसी कार्य में रुचि है: (6)परंतु यह कि जहां ऐसा कोई व्यक्ति अंशधारी है, तब वह ऐसी कम्पनी में उसके द्वारा रखे गए शेयरों की किस्म और मात्रा के संबंध में केन्द्रीय भंडारण निगम को सूचित करेगा। निदेशकों को पद से हटाना (1) केन्द्रीय सरकार केन्द्रीय भंडारण निगम के परामर्श से, किसी भी समय, प्रबंध निदेशक को प्रस्तावित बरखास्तगी के प्रति सफाई देने का उचित अवसर देने के बाद उसे बरखास्त कर सकती है। (2) निदेशक मंडल किसी निदेशक को पद से हटा सकता है- (क) जो धारा 8 में उल्लिखित किसी अयोग्यताओं के अनुसार अयोग्य है या अयोग्य बन गया है; या (ख) यदि निदेशक मंडल की राय में उसकी अनुपस्थिति का कारण पर्याप्त नहीं है और वह मंडल की अनुमति के बिना अनुपस्थित रहता है या मंडल की लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहता है। अधिकारियों आदि की नियुक्ति और उनकी सेवा की शर्तें (1) केन्द्रीय भंडारण निगम अपने कार्यों को कुशलतापूर्वक करने के लिए ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों, जो वह आवश्यक समझे, की नियुक्ति कर सकता है। (2) केन्द्रीय भंडारण निगम द्वारा इस अधिनियम के अधीन नियुक्त किया गया प्रत्येक व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन सेवा शर्तों के अध्यधीन होगा और वह ऐसे पारिश्रमिक के लिए पात्र हो जो केन्द्रीय भंडारण निगम द्वारा इस अधिनियम के अधीन निर्धारित किया जाएगा। केन्द्रीय भंडारण निगम के कार्य इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन, केन्द्रीय भंडारण निगम – (1) भारत में या विदेश में ऐसे स्थानों पर, जैसा यह उपयुक्त समझे, गोदामों और भांडागारों का अधिग्रहण और निर्माण कर सकता है; (2) व्यक्ति विशेष, सहकारी समितियों और अन्य संस्थानों द्वारा पेशकश की गई कृषि उपज, बीजों, खाद, उर्वरकों, कृषि औजारों और अधिसूचित वस्तुओं का भंडारण करने के लिए भांडागारों का प्रचालन कर सकता है; (3) भांडागारों से और भांडागारों तक कृषि उपज, बीजों, खाद, उर्वरकों, कृषि औजारों और अधिसूचित वस्तुओं की ढुलाई के लिए सुविधाओं की व्यवस्था कर सकता है; (4) राज्य भंडारण निगमों की अंश पूंजी में पूर्वक्रीत कर सकता है; (5) कृषि उपज, बीजों, खाद, उर्वरकों, कृषि औजारों और अधिसूचित वस्तुओं की खरीद, बिक्री, भंडारण और वितरण के प्रयोजन के लिए सरकार के एजेंट के रूप में कार्य करना; (क.) केन्द्रीय सरकार के पूर्व के अनुमोदन से किसी केन्द्रीय अधिनियम या किसी राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन या कम्पनी अधिनियम, 1956 के अधीन बनाई गई या स्थापित किसी निगम या पंजीकृत किसी कम्पनी, जिसमें विदेशी कम्पनी या इसकी समनुषंगी कम्पनियों की जरिये, शामिल हैं, के साथ संयुक्त उद्यम के साथ इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए करार कर सकता है। स्पष्टीकरण – इस खंड के प्रयोजन के लिए, अभिव्यक्त शब्द ‘विदेशी कम्पनी’ का अभिप्राय आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2 के खंड (23क) के अधीन दिया गया अर्थ होगा। (ख) स्थापित सहायक कम्पनियां; और यथानिर्धारित ऐसे अन्य कार्य कर सकता है। कार्यकारी समिति (1) केन्द्रीय भंडारण निगम की एक कार्यकारी समिति होगी, जिसमेंनि शामिल होंगे:- (क) निदेशक मंडल का अध्यक्ष; (ख) प्रबंध निदेशक; और (ग) निगम द्वारा निर्धारित विधि से दो अन्य निदेशकों का चयन। (2) निदेशक मंडल का अध्यक्ष कार्यकारी समिति का अध्यक्ष होगा। (3) निदेशक मंडल के सामान्य नियंत्रण, निर्देश और पर्यवेक्षण के अध्यधीन, कार्यकारी समिति केन्द्रीय भंडारण निगम की सक्षमता के अंदर किसी भी मामले में कार्रवाई करने के लिए सक्षम होगी। निगम की बैठक (1) केन्द्रीय भंडारण निगम की वार्षिक आम सभा (जिसे इसके बाद वार्षिक आम सभा कहा गया है) प्रत्येक वर्ष या तो निगम के मुख्यालय में या इसके किसी अन्य कार्यालय में वित्तीय वर्ष के समाप्त होने के छ: महीने के भीतर होगी, और कोई अन्य साधारण बैठक निदेशक मंडल द्वारा किसी अन्य समय बुलाई जा सकती है। (2) वार्षिक आम सभा में उपस्थित अंशधारी वार्षिक लेखों, आलोच्य वर्ष के दौरान निगम के कार्यकरण पर निदेशक मंडल की रिपोर्ट और वार्षिक तुलन-पत्र तथा लेखों पर लेखापरीक्षक की रिपोर्ट पर चर्चा करने के पात्र होंगे। (3) केन्द्रीय भंडारण निगम के एक-तिहाई अंशधारियों की मांग पर केन्द्रीय भंडारण निगम का निदेशक मंडल निगम की एक विशेष बैठक बुलाएगा। (4) उप-धारा (3) के अधीन विशेष बैठक के लिए मांग में बैठक बुलाने के उद्देश्य का उल्लेख होगा और उस पर मांगकर्ताओं के हस्ताक्षर होंगे और वह मांग-पत्र निगम के मुख्यालय के जमा कराया जाएगा और इसमें प्रत्येक फार्म पर एक या अधिक मांगकर्ताओं के हस्ताक्षर होंगे। (5) यदि केन्द्रीय भंडारण निगम का निदेशक मंडल जमा कराई गई ऐसी मांग की तारीख से इक्कीस दिन के भीतर बुलाई जाने वाली बैठक के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं करता है तो मांगकर्ता या उनका बहुमत स्वयं बैठक बुला सकते हैं, लेकिन बुलाई गई बैठक मांग के जमा होने की तारीख से तीन महीने के भीतर आयोजित की जाएगी। (6) केन्द्रीय भंडारण निगम अपने कार्य और बैठकों (बैठकों में गणपूर्ति सहित) के संबंध में कार्यविधि के ऐसे नियमों का अनुपालन करेगा जैसाकि इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय भंडारण निगम द्वारा बनाए गए विनियमों के व्यवस्था की गई है। केन्द्रीय भंडारण निगम द्वारा रखी जाने वाली धनराशि के प्रयोजन (1) केन्द्रीय सरकार, इस संबंध में कानून द्वारा संसद द्वारा उचित विनियोजन करने के पश्चात्, केन्द्रीय भंडारण निगम द्वारा रखी जाने वाली धनराशि के प्रयोजन के लिए निगम को धनराशि का भुगतान करेगी। क. अनुदानों के माध्यम से, ऐसी धनराशि जो केन्द्रीय सरकार आवश्यक समझे; और ख. ऋणों के माध्यम से, ऐसी शर्तों और निबंधनों पर ऐसी धनराशि, जो केन्द्रीय सरकार निर्धारित कर सकती है। (2) उप-धारा (1) के अधीन भुगतान करते समय, केन्द्रीय सरकार उस प्रयोजन के लिए निधि निर्दिष्ट करेगी जिसके लिए भुगतान किया जाता है। निगम दो प्रकार की निधियां रखेगा केन्द्रीय भंडारण निगम दो पृथक निधियां रखेगा, अर्थात्:- (क) केन्द्रीय भण्डागारण निधि (जिसे इसके बाद भण्डागारण निधि कहा गया है); और (ख) सामान्य निधि। भण्डागारण निधि भण्डागारण निधि का उपयोग निम्नलिखित के लिए किया जाएगा – (क) राज्य सरकारों को ऐसी शर्तों पर ऋण देना जो केन्द्रीय भंडारण निगम उपयुक्त समझे ताकि राज्य सरकारें राज्य भंडारण निगमों की अंश पूंजी में अंशदान कर सकें; (ख) राज्य भंडारण निगमों या राज्य सरकारों को ऐसी शर्तों और निबंधनों पर ऋण और राजसहायता देना जो केन्द्रीय भंडारण निगम, अन्यथा सहकारी समितियों के माध्यम से, कृषि उपज और अधिसूचित वस्तुओं के भण्डागारण और भंडारण को बढ़ावा देने के प्रयोजन के लिए उपयुक्त समझे; (ग) कृषि उपज और अधिसूचित वस्तुओं के भण्डागारण और भंडारण को बढ़ावा देने के प्रयोजन के लिए कार्मिकों को प्रशिक्षण, या प्रचार और प्रसार के संबंध में किए जाने वाले व्यय को पूरा करने के लिए; (घ) भण्डागारण निधि के प्रशासन के संबंध में होने वाले व्यय, जिसमें अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों का वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रमिक शामिल हैं, को पूरा करने के लिए। सामान्य निधि (1) निम्नलिखित में सामान्य निधि जमा की जाएगी – (क)धारा 16 की उप-धारा (1) में उल्लिखित धनराशियों को छोड़कर केन्द्रीय भंडारण निगम को प्राप्त समस्त धनराशि; और (ख)ऐसे अनुदान और ऋण जो केन्द्रीय सरकार द्वारा सामान्य निधि के प्रयोजन के लिए दिए जाएंगे। (2) सामान्य निधि का उपयोग निम्नलिखित के लिए किया जाएगा:- (क) केन्द्रीय भंडारण निगम के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य पारिश्रमिक पर होने वाले व्यय को पूरा करने के लिए; (ख) निगम के अन्य प्रशासनिक खर्चों को पूरा करने के लिए; और (ग) इस अधिनियम के प्रयोजन को पूरा करने के लिए; परंतु यह कि सामान्य निधि का उपयोग धारा 16 की उप-धारा (2) के खंड (ग) या खंड (घ) में उल्लिखित खर्चों को पूरा करने के लिए नहीं किया जाएगा। राज्य भंडारण निगम (1) राज्य सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और केन्द्रीय भंडारण निगम के अनुमोदन से ऐसे नाम से, जैसाकि अधिसूचना में निर्दिष्ट हो, राज्य के लिए भंडारण निगम स्थापित कर सकती है। (2) उप-धारा (1) के अधीन स्थापित राज्य भंडारण निगम उस उप-धारा के अधीन अधिसूचित नाम से एक निगमित निकाय होगा, जिसमें स्थायी उत्तराधिकार होगा और सम्पत्ति का अधिग्रहण, उसे रखने और बेचने की शक्ति के साथ एक सील होगी और उक्त नाम से मुकदमा चलाया जा सकता है या उस पर मुकदमा हो सकता है। (3) राज्य भंडारण निगम का मुख्यालय राज्य के अंदर ऐसे स्थान पर होगा, जैसाकि सरकारी राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा। (4) उप-धारा (1), (2) और (3) में निहित किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार के लिए उप-धारा (1) के अधीन निगम स्थापित करना आवश्यक नहीं होगा जहां धारा 43 की उप-धारा (2) के खंड (छ) के अधीन, इस अधिनियम के अंतर्गत एक निगम स्थापित हुआ माना जाता है। अंश पूंजी और अंशधारी (1) राज्य भंडारण निगम की अधिकृत अंश पूंजी दो करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगी, जैसाकि निर्धारित की जाए, और यह प्रत्येक एक सौ रुपये के अंकित मूल्य के शेयरों में विभक्त होगी, जिसकी ऐसी संख्या, जो निगम द्वारा राज्य सरकार के परामर्श से निर्धारित की जाए, पहले जारी की जाएगी और शेष शेयर जब निगम, उपयुक्त समझे, केन्द्रीय भंडारण निगम के परामर्श से और राज्य सरकार की स्वीकृति से समय-समय पर जारी किए जा सकते हैं। परंतु किसी राज्य भंडारण निगम के संबंध में केन्द्रीय सरकार संबंधित राज्य सरकार के साथ परामर्श करने के पश्चात्, समय-समय पर और सरकारी राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा उक्त अधिकृत पूंजी की अधिकतम सीमा में उस सीमा तक और ऐसी विधि से वृद्धि कर सकती है जो केन्द्रीय सरकार निर्धारित करे। (2) प्रथमत: जारी किए गए शेयरों में से और ऐसी पूंजी के बाद के किसी निर्गम में से, केन्द्रीय सरकार, किसी भी स्थिति में जहां राज्य सरकार ने ऐसी पूंजी का पचास प्रतिशत पूर्वक्रीत किया है, पूंजी का शेष पचास प्रतिशत पूर्वक्रीत करेगी। राज्य भंडारण निगम का प्रबंधन (1) राज्य भंडारण निगम के कार्यों का सामान्य पर्यवेक्षण और प्रबंधन एक निदेशक मंडल में निहित होगा जिसमें निम्नलिखित शामिल होंगे, अर्थात् (क) केन्द्रीय भंडारण निगम द्वारा पांच निदेशक नामित किए जाएंगे जिनमें से एक निदेशक स्टेट बैंक के परामर्श से नामित किया जाएगा और कम से कम एक निदेशक गैर-सरकारी होगा; (ख) पांच निदेशक राज्य सरकार द्वारा नामित किए जाएंगे; और (ग) प्रबंध निदेशक, जिसकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा खंड (क) और (ख) में उल्लिखित निदेशकों के परामर्श से की जाएगी और उसकी सूचना केन्द्रीय भंडारण निगम को दी जाएगी। (2) निदेशक मंडल का अध्यक्ष राज्य सरकार द्वारा राज्य भंडारण निगम के निदेशकों में से नियुक्त किया जाएगा और उसकी सूचना केन्द्रीय भंडारण निगम को दी जाएगी। (3) प्रबंध निदेशक (क) ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे कर्तव्यों का निर्वाह करेगा जो निदेशक मंडल या केन्द्रीय भंडारण निगम उसे सौंपेगा या प्रत्यायोजित करेगा; और (ख) ऐसा वेतन और भत्ते प्राप्त करेगा जो राज्य भंडारण निगम केन्द्रीय भंडारण निगम के परामर्श से और राज्य सरकार के पूर्व के अनुमोदन से निर्धारित किए जाएंगे। (4) निदेशक मंडल जन हित को ध्यान में रखते हुए व्यवसाय के सिद्धांतों पर कार्य करेगा और केन्द्रीय सरकार द्वारा उन्हें दिए गए नीतिगत प्रश्नों पर अनुदेशों द्वारा उनका मार्गदर्शन किया जाएगा। (5) यदि यह संदेह उत्पन्न होता है कि कोई प्रश्न नीतिगत है या नहीं, या, यदि राज्य सरकार और केन्द्रीय भंडारण निगम परस्पर विरोधी अनुदेश देते हैं तो यह मामला केन्द्रीय सरकार के पास भेजा जाएगा जिसका उस पर दिया गया निर्णय अंतिम होगा। (6)प्रबंध निदेशक के सिवाय राज्य भंडारण निगम के निदेशक पारिश्रमिक के रूप में ऐसी धनराशि प्राप्त करने के पात्र होंगे, जो निर्धारित किए जाएंगे: परंतु कोई भी सरकारी निदेशक उसकी सेवा शर्तों को विनियमित करने वाले नियमों के अधीन उसे अनुमेय भत्तों, यदि कोई हों, को छोड़कर कोई पारिश्रमिक प्राप्त करने का पात्र नहीं होगा। (7)निदेशकों का कार्यकाल और उनमें से आकस्मिक रिक्तियों को भरने की विधि वह होगी, जो निर्धारित की जाएगी। राज्य भंडारण निगम के निदेशक के पद के लिए अयोग्यता राज्य भंडारण निगम का निदेशक चुनने और बनने के लिए कोई व्यक्ति अयोग्य होगा। (i) यदि वह पागल पाया जाता है या विक्षिप्त हो जाता है; या (ii) वह किसी भी समय दिवालिया करार किया गया है या उसने अपने ऋणों का भुगतान रोक दिया है या अपने ऋणदाताओं के साथ समझौता कर लिया है; या (iii) यदि वह/उसने कोई अपराध करता है/किया है जिसमें भ्रष्टाचार लिप्त है और उसे इस अपराध के लिए छ: महीने की कैद की सजा मिली है, तो वह तब तक अयोग्य होगा जब तक सजा के समाप्त होने की तारीख से पांच वर्ष की अवधि व्यपगत न हो गई हो; या (iv) यदि उसे सरकार या सरकार के अपने या सरकार द्वारा नियंत्रित निगम की सेवा से हटा दिया गया है या बरखास्त कर दिया गया है; या (v) प्रबंध निदेशक के मामले को छोड़कर, यदि वह राज्य भंडारण निगम का एक वेतनभोगी कर्मचारी है; या (vi) उस स्थिति को छोड़कर जब कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में यथापरिभाषित किसी सरकारी कम्पनी में एक अंशधारी (निदेशक को छोड़कर) है उसकी व्यक्तिगत रूप से राज्य भंडारण निगम के साथ की गई किसी अस्तित्वयुक्त संविदा या केन्द्रीय भंडारण निगम के लिए किए जा रहे किसी कार्य में रुचि है: (vi)परंतु यह कि जहां ऐसा कोई व्यक्ति अंशधारी है, तब वह ऐसी कम्पनी में उसके द्वारा रखे गए शेयरों की किस्म और मात्रा के संबंध में भंडारण निगम को सूचित करेगा। निदेशकों को पद से हटाना (1) राज्य सरकार केन्द्रीय भंडारण निगम को सूचित करते हुए, किसी भी समय, प्रबंध निदेशक को प्रस्तावित बरखास्तगी के प्रति सफाई देने का उचित अवसर देने के बाद उसे बरखास्त कर सकती है। (2) निदेशक मंडल किसी निदेशक को पद से हटा सकता है- (क) जो धारा 21 में उल्लिखित किन्हीं अयोग्यताओं के अनुसार अयोग्य है या (ख )अयोग्य बन गया है; या (ग) यदि निदेशक मंडल की राय में उसकी अनुपस्थिति का कारण पर्याप्त नहीं है और वह मंडल की अनुमति के बिना अनुपस्थित रहता है या मंडल की लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहता है। अधिकारियों आदि की नियुक्ति और उनकी सेवा की शर्तें (1) राज्य भंडारण निगम अपने कार्यों को कुशलतापूर्वक करने के लिए ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों, जो वह आवश्यक समझे, की नियुक्ति कर सकता है। (2) राज्य भंडारण निगम द्वारा इस अधिनियम के अधीन नियुक्त किया गया प्रत्येक व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन सेवा शर्तों के अध्यधीन होगा और वह ऐसे पारिश्रमिक के लिए पात्र हो जो निगम द्वारा इस अधिनियम के अधीन निर्धारित किया जाएगा। राज्य भंडारण निगम के कार्य इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन, राज्य भंडारण निगम – (क) राज्य के अंदर गोदामों और भांडागारों का अधिग्रहण और निर्माण करना जैसाकि केन्द्रीय भंडारण निगम के साथ परामर्श करने के पश्चात् निश्चय किया जाए; (ख) कृषि उपज, बीजों, खाद, उर्वरकों, कृषि औजारों और अधिसूचित वस्तुओं का भंडारण करने के लिए भांडागारों का प्रचालन कर सकता है; (ग) भांडागारों से और भांडागारों तक कृषि उपज, बीजों, खाद, उर्वरकों, कृषि औजारों और अधिसूचित वस्तुओं की ढुलाई के लिए सुविधाओं की व्यवस्था कर सकता है। (घ) कृषि उपज, बीजों, खाद, उर्वरकों, कृषि औजारों और अधिसूचित वस्तुओं की खरीद, बिक्री, भंडारण और वितरण के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय भंडारण निगम के या सरकार के एजेंट के रूप में कार्य करना; राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से केन्द्रीय भंडारण निगम के साथ संयुक्त उद्यम का करार कर सकता है; और (ड.) यथानिर्धारित ऐसे अन्य कार्य कर सकता है। कार्यकारी समिति (1) राज्य भंडारण निगम की एक कार्यकारी समिति होगी, जिसमें निम्नलिखित शामिल होंगे। (क) निदेशक मंडल का अध्यक्ष; (ख) प्रबंध निदेशक; और (ग) निर्धारित विधि से चुने गए तीन अन्य निदेशक, जिनमें से एक धारा 20 की उप-धारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट एक निदेशक होगा। (2) निदेशक मंडल का अध्यक्ष कार्यकारी समिति का अध्यक्ष होगा। (3) निदेशक मंडल, किन्हीं सामान्य या विशेष निर्देशों के अध्यधीन, समय-समय पर, कार्यकारी समिति को राज्य भंडारण निगम को राज्य की सक्षमता के अंदर किसी भी मामले में कार्रवाई करने के लिए सक्षम बना सकता है। वित्त, लेखे और लेखापरीक्षा (1) प्रत्येक भंडारण निगम प्रत्येक वर्ष के आरम्भ होने से पहले आगामी वर्ष के अपने कार्यकलापों के कार्यक्रम का विवरण और इसके संबंध में वित्तीय अनुमान तैयार करेगा। (2) उप-धारा (1) के अधीन तैयार किया जाने वाला विवरण प्रत्येक वर्ष के आरम्भ होने से पहले तीन महीने की अनधिक अवधि में निम्नलिखित को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा – (क) केन्द्रीय भंडारण निगम के मामले में केन्द्रीय सरकार को; (ख) राज्य भंडारण निगम के मामले में केन्द्रीय भंडारण निगम और राज्य सरकार को। (3) उप-धारा (1) में उल्लिखित भंडारण निगम के विवरण और वित्तीय अनुमानों में केन्द्रीय भंडारण निगम के मामले में केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से और राज्य भंडारण निगम के मामले में केन्द्रीय भंडारण निगम और राज्य सरकार के अनुमोदन से भंडारण निगम द्वारा संशोधन किया जा सकता है। भंडारण निगम की उधार लेने की शक्ति (1) भंडारण निगम रिजर्व बैंक के परामर्श से और समुचित सरकार के पूर्व के अनुमोदन से, धन जुटाने के प्रयोजन के लिए बांड और ऋण-पत्र जारी कर सकता है और बेच सकता है जिन पर ब्याज देया होगा। परंतु जारी किए गए और बकाया बांड्स और ऋण-पत्रों तथा निगम के अन्य ऋणों की कुल धनराशि किसी भी समय निगम की प्रदत्त अंश पूंजी और आरक्षित निधि के दस गुणा से अधिक नहीं होगी। (2) इस अधिनियम के अधीन, भांडागार निगम अपने कार्यों को करने के प्रयोजन के लिए निम्नलिखित से धनराशि उधार ले सकता है। (i) रिजर्व बैंक से, या (ii) स्टेट बैंक से, जिसके लिए/पर किन्हीं प्रतिभूतियों, जिसके प्रति वह [भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955] के अधीन अग्रिम और धनराशियां उधार लेने के लिए अधिकृत किया गया है। (iii) किसी अनुसूचित बैंक से, या (iv) ऐसी बीमा कम्पनी, निवेश न्यास या अन्य वित्तीय संस्था से, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस संबंध में अनुमोदित की जाए। (3) उप-धारा (1) के परंतु के अध्यधीन, केन्द्रीय भंडारण निगम केन्द्रीय सरकार से और राज्य भंडारण निगम राज्य सरकार से और केन्द्रीय भंडारण निगम से ऐसी प्रतिभूतियों और ऐसी शर्तों और निबंधनों पर धनराशि उधार ले सकता है जिनके संबंध में प्रत्येक मामले में उधार लेने वाले निगम और ऋणदाता में सहमति हो। (4) भंडारण निगम के बांड्स और ऋण-पत्रों की समुचित सरकार द्वारा गारंटी दी जाए ताकि बांड्स या ऋण-पत्रों को जारी करते समय निगम के निदेशक मंडल की सिफारिश पर ब्याज की ऐसी दर पर, जो समुचित सरकार द्वारा निर्धारित की जाए, मूलधन और ब्याज चुकाया जा सके। जमा खाता भंडारण निगम की समस्त धनराशि रिजर्व बैंक में या स्टेट बैंक [या किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में] या इस अधिनियम के अधीन बनाए नियमों के अध्यधीन, [किसी अन्य अनुसूचित बैंक] या सहकारी बैंक में जमा की जाएगी। निधियों का निवेश भंडारण निगम केन्द्रीय या किसी राज्य सरकार की प्रतिभूतियों में या ऐसी किसी अन्य विधि से, जो समुचित सरकार द्वारा निर्धारित की जाए, अपनी धनराशि का निवेश कर सकता है। लाभों का निपटान (1) प्रत्येक भंडारण निगम अपने वार्षिक निवल लाभों में से एक आरक्षित निधि सृजित करेगा। (2) अशोध्य और संदिग्ध ऋणों, परिसम्पत्तियों पर मूल्यह्रास और अन्य सभी मामलों, जिनके लिए कम्पनी अधिनियम, 1956 के अधीन पंजीकृत और सम्मिलित कम्पनियों द्वारा सामान्यतया प्रावधान किया जाता है, के लिए प्रावधान करने के पश्चात् भंडारण निगम अपने वार्षिक निम्न लाभों में से लाभांश घोषित कर सकता है (3) परंतु जब तक आरक्षित निधि से केन्द्रीय भंडारण निगम की प्रदत्त अंश पूंजी कम है और जब तक ऐसी धनराशि, यदि कोई हो, जो उस सरकार ने धारा 27 की उप-धारा (4) या धारा 5 की उप-धारा (1) के अनुसरण में केन्द्रीय सरकार को चुका दी गई हो, तब तक केन्द्रीय भंडारण निगम के मामले में ऐसे लाभांश की दर केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 5 की उप-धारा (1) द्वारा गारंटित दर से अधिक नहीं होगी। भंडारण निगम के लेखे और लेखापरीक्षा (1) प्रत्येक भंडारण निगम समुचित लेखे, अन्य संगत रिकार्ड रखेगा तथा लाभ और हानि लेखे सहित वार्षिक लेखों का विवरण और तुलन-पत्र ऐसे रूप में रखेगा जो निर्धारित किए जाएं।परंतु केन्द्रीय भंडारण निगम के मामले में, भण्डागारण निधि और सामान्य निधि से संबंधित लेखे अलग से रखे जाएंगे। (2) भंडारण निगम के लेखों की कम्पनी अधिनियम, 1956 की धारा 226 के अधीन लेखापरीक्षक के रूप में कार्य के रूप में विधिवत् रूप से योग्य लेखापरीक्षक द्वारा लेखापरीक्षा की जाएगी। (3) उक्त लेखापरीक्षक की नियुक्ति समुचित सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षा के परामर्श से की जाएगी। (4) लेखापरीक्षक को भंडारण निगम के वार्षिक तुलन-पत्र तथा लाभ और हानि लेखे की प्रति दी जाएगी और उसका यह कर्तव्य होगा कि वह उनसे संबंधित लेखों, वाउचरों के साथ उनकी जांच करे, और उसके पास निगम द्वारा रखी सभी बहियों की एक सूची होगी और सभी उपयुक्त समयों पर उसकी निगम की बहियों, लेखों और अन्य दस्तावेजों तक पहुंच होगी और वह निगम के किसी अधिकारी से ऐसी सूचना और स्पष्टीकरण, जो वह लेखापरीक्षक के रूप में अपने कर्तव्य के कार्यनिष्पादन के लिए आवश्यक समझे, मांग सकता है। (5) लेखापरीक्षक लेखों, वार्षिक तुलन-पत्र तथा लाभ और हानि लेखे, जिनकी उसने जांच की है, के संबंध में अंशधारियों को रिपोर्ट देगा और ऐसी प्रत्येक रिपोर्ट में वह यह उल्लेख करेगा कि क्या उसके विचार में लेखे सही और उचित हैं – (क) वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर निगम के तुलन-पत्र के संबंध में क्या स्थिति है। (ख) लाभ और हानि लेखे के मामले में इसके वित्तीय वर्ष के लिए लाभ और हानि और यदि वह अधिकारियों से कोई स्पष्टीकरण या सूचना मांगता है, क्या यह दी गई है और क्या यह संतोषजनक है। (6) समुचित सरकार भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षा के साथ परामर्श करके किसी भी समय लेखापरीक्षक को निर्देश जारी कर सकती है जिसमें उससे अपेक्षा की गई हो कि वह भंडारण निगम द्वारा अपने अंशधारियों और ऋणदाताओं की रक्षा के लिए किए गए उपायों की पर्याप्तता के संबंध में या निगम के लेखों की लेखापरीक्षा में अपनी कार्यविधि की पर्याप्तता के संबंध में समुचित सरकार को रिपोर्ट करे और वह लेखापरीक्षा के अपने दायरे का विस्तार करे या यह निदेश दे सकती है कि यदि समुचित सरकार के विचार में जन हित में ऐसा करना अपेक्षित हो तो लेखापरीक्षक द्वारा कोई अन्य जांच की जाए। (7) भंडारण निगम लेखापरीक्षक की प्रत्येक रिपोर्ट की प्रति भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक और केन्द्रीय सरकार को अंशधारियों को प्रस्तुत करने से कम से कम एक महीना पहले भेजेगा। (8) इस धारा में इससे पहले निहित किसी बात के होते हुए भी, भारत का नियंत्रक और महालेखापरीक्षक या तो अपनी ओर से या समुचित सरकार से इस संबंध में अनुरोध प्राप्त होने पर भंडारण निगम की किसी भी समय, जो वह उचित समझे, ऐसी लेखापरीक्षा कर सकता है। परंतु जहां धारा 5 की उप-धारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा दी गई गारंटी के प्रति उसे कोई भुगतान करना अपेक्षित है, वहां ऐसी लेखापरीक्षा भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक या उसके द्वारा इस संबंध में अधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा की जाएगी। (9) भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक और भंडारण निगम के लेखों की लेखापरीक्षा करने के संबंध में उसके द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति को इस लेखापरीक्षा के संबंध में वही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार प्राप्त होंगे जो नियंत्रक और महालेखापरीक्षक को सरकारी लेखों की लेखापरीक्षा में होते हैं और विशेष रूप से उसका बहियों, लेखों, सम्बद्ध वाउचरों और कोई अन्य दस्तावेज या कागजात की मांग करने और निगम के कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा। (10 भंडारण निगम के वार्षिक लेखे और उनकी लेखापरीक्षा रिपोर्ट वित्तीय वर्ष की समाप्ति के छ: महीने के अंदर निगम की वार्षिक आम सभा में रखी जाएगी। (11) इस धारा के अधीन प्रत्येक लेखापरीक्षा रिपोर्ट वार्षिक आम सभा में इसे प्रस्तुत करने के एक महीने के भीतर समुचित सरकार को भेजी जाएगी और सरकार उसके तत्काल बाद यह रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों या राज्य के विधान-मंडल, जैसा भी मामला हो, में प्रस्तुत करेगी। विवरणियां और रिपोर्टें भंडारण निगम अपनी सम्पत्तियों या कार्यकलापों से संबंधित ऐसी विवरणियां, सांख्यिकी, लेखे और अन्य सूचना समुचित सरकार को भेजेगा जिसकी उसे समय-समय पर आवश्यकता हो। विविध रिक्ति के कारण भंडारण निगम के कार्य और कार्यवाही अवैध नहीं होंगे। भंडारण निगम का कोई भी कार्य या कार्यवाही केवल इस कारण से अवैध नहीं होगी यदि इसके निदेशक का कोई पद रिक्त हो या उसके गठन में कोई त्रुटि हो। प्रत्यायोजन भंडारण निगम, लिखित में सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, ऐसी शर्तों और सीमाओं, यदि कोई हों, जैसी कि उक्त आदेश में निर्दिष्ट हों, सचिव या किसी अन्य अधिकारी को इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियों और कार्यों का प्रत्यायोजन कर सकता है जो वह अपने कार्यों के कुशलतापूर्वक निष्पादन के लिए आवश्यक समझे। अंशधारियों का मतदान का अधिकार भंडारण निगम के अंशधारियों की किसी बैठक में, प्रत्येक सदस्य को निगम में उसके द्वारा धारित प्रत्येक शेयर के लिए एक मत होगा। केन्द्रीय भंडारण निगम और राज्य भंडारण निगम के बीच मतभेद यदि केन्द्रीय भंडारण निगम और राज्य भंडारण निगम के बीच इस अधिनियम के तहत अपने कार्यों और शक्तियों के संबंध में कोई मतभेद है तो ऐसा मतभेद केन्द्रीय सरकार को भेजा जाएगा जिसका उस पर निर्णय अंतिम होगा। सत्यनिष्ठा और गोपनीयता की घोषणा भंडारण निगम का प्रत्येक निदेशक, लेखापरीक्षक, अधिकारी या कर्मचारी अपना कार्यभार ग्रहण करने से पहले अनुसूची में निर्धारित प्रपत्र में सत्यनिष्ठा और गोपनीयता की घोषणा करेगा। निदेशकों को क्षतिपूर्ति (1) भंडारण निगम के प्रत्येक निदेशक को उसके कर्तव्यों का निर्वाह करने में हुए समस्त हानियों या खर्चों, उनको छोड़कर जो उसके द्वारा जानबूझकर या चूक के कारण हुई हों, की संबंधित भंडारण निगम द्वारा क्षतिपूर्ति की जाएगी। (2) भंडारण निगम का कोई निदेशक निगम के किसी अन्य निदेशक या किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के लिए या निगम की ओर से नेकनीयती से अधिग्रहीत किसी सम्पत्ति या प्रतिभूति के मूल्य या स्वामित्व की अपर्याप्तता या कमी के परिणामस्वरूप हुई किसी हानि या व्यय के लिए या निगम की देयता के अधीन किसी व्यक्ति के गलत कार्य द्वारा या अपने कार्यालय के कर्तव्यों या उनसे संबंधित कर्तव्यों के निष्पादन में नेकनीयती से किए गए किसी कार्य के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। अपराध (1) भंडारण निगम की लिखित में स्वीकृति के बिना जो भी किसी विवरण या विज्ञापन में उस निगम के नाम का उपयोग करता है, उसे छ: महीने तक की कैद या एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। (2) भंडारण निगम की लिखित में स्वीकृति के बिना जो भी किसी विवरण या विज्ञापन में उस निगम के नाम का उपयोग करता है, उसे छ: महीने तक की कैद या एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। आय कर और अधिकर से संबंधित उपबंध आय कर अधिनियम, 1961 के प्रयोजन के लिए, भंडारण निगम उस अधिनियम के अर्थ के दायरे में एक कम्पनी मानी जाएगी और अपनी आय, लाभ और फायदों पर तदनुसार आय कर और अधिकर अदा करने के लिए उत्तरदायी होगा। परंतु केन्द्रीय भंडारण निगम के मामले में, धारा 5 की उप-धारा (1) के अनुसरण में दी गई गारंटी के तहत केन्द्रीय सरकार द्वारा अदा की गई धनराशि या भंडारण निगम के मामले में धारा 27 की उप-धारा (4) के अनुसरण में दी गई किसी गारंटी के तहत केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा अदा की कोई धनराशि भंडारण निगम की आय, लाभ या फायदा नहीं समझा जाएगा, और ऐसी धनराशि में से उस निगम द्वारा जारी किए गए ऋण-पत्रों और बांड्स पर कोई ब्याज उसके द्वारा खर्च के रूप में नहीं समझा जाएगा। परंतु यह भी कि किसी अंशधारी या ऋण-पत्रधारी के मामले में, लाभांश या ब्याज का ऐसा भाग, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा दी गई किसी ऐसी धनराशि में से अदा किया गया है, प्रतिभूति पर ब्याज से उसकी आय, जो उस अधिनियम की धारा 86 के अर्थ के दायरे में आय कर से मुक्त घोषित की गई है, समझी जाएगी। भंडारण निगमों का परिसमापन कम्पनियां या निगमों के परिसमापन से संबंधित कानून का कोई उपबंध किसी भंडारण निगम पर लागू नहीं होगा और समुचित सरकार के आदेश द्वारा और ऐसी विधि, जिसका यह निदेश दे, द्वारा सुरक्षित कोई भी निगम परिसमापनाधीन नहीं होगा। नियम बनाने की शक्तियां (1) समुचित सरकार, सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए नियम बना सकती है। (2) पूर्वोलिखित शक्ति की व्यापकता पर प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए प्रावधान कर सकते हैं: (क) अतिरिक्त कार्य जो भंडारण निगम कर सकती है; (ख) केन्द्रीय भंडारण निगम के निदेशकों के नामांकन और चुनाव की विधि और वह अवधि जिसके भीतर ऐसे निदेशक नामित किए जाएंगे या चुने जाएंगे (ग) भंडारण निगम के निदेशकों का कार्यकाल और उनके बीच से आकस्मिक रिक्तियां भरने की विधि और उन्हें देय पारिश्रमिक; (घ) भंडारण निगम की कार्यकारी समिति के लिए निदेशकों को चुनने की बिधि (ङ) राज्य भंडारण निगम की अधिकृत पूंजी धारा 19 की उप-धारा (1) द्वारा या उसके अधीन निर्दिष्ट अधिकतम सीमा के भीतर (च) भंडारण निगम द्वारा तैयार किए जाने वाले लेखों के वार्षिक विवरण और तुलन-पत्र के प्रपत्र (छ) भंडारण निगम की धनराशियां किसी अनुसूचित बैंक या किसी सहकारी बैंक में जमा करना (ज) भंडारण निगम के शेयरों को जारी करने की विधि, उसके संबंध में की जाने वाली मांगों, और शेयरों को जारी करने के बाद सम्बद्ध सभी अन्य मामले (झ) प्रपत्र और विधि जिसमें भंडारण निगम द्वारा धारा 31क के अधीन विवरणियां, सांख्यिकी, लेखे और अन्य सूचना भेजी जानी (ञ) अन्य कोई मामले जो निर्धारित किए जाएंगे या किए जा सकते है। 3. इस धारा के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनने के शीघ्र बाद, संसद, जब इसका सत्र कुल तीस के लिए चल रहा हो, जो एक सत्र में या दो या अधिक लगातार सत्रों में हो और सत्र की समाप्ति से पहले हो तो तत्काल अगले सत्र में) या उक्त क्रमिक सत्रों में हो, के प्रत्येक सदन में रखा जाएगा। दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने के लिए सहमत होते हैं या दोनों सदन इस बात पर सहमत होते हैं कि ये नियम नहीं बनाए जाने चाहिएं तो उसके बाद ये नियम ऐसे संशोधित रूप में लागू होंगे या वे प्रभावी नहीं होंगे, जैसा भी मामला हो; तथापि, ऐसी किसी संशोधन या बातिलीकरण से इस नियम के अधीन पहले की गई किसी भी कार्रवाई की वैधता पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। विनियम बनाने के लिए भंडारण निगमों की शक्तियां भंडारण निगम, समुचित सरकार की पूर्व की स्वीकृति के साथ, सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उन सभी मामलों की व्यवस्था करने के लिए विनियम बना सकता है जिनके लिए इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावकारी बनाने के प्रयोजन के लिए उपबंध करना आवश्यक और उचित है, और इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के अननुरूप न हों। विशेष रूप से, पूर्वोलिखित शक्ति की व्यापकता पर प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित के लिए प्रावधान कर सकते हैं क. भंडारण निगम के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की सेवा शर्तों और उन्हें देय पारिश्रमिक ख. विधि और शर्तें जिनके अध्यधीन केन्द्रीय भंडारण निगम के शेयर अंतरित किए जाएं ग. विधि जिसमें भंडारण निगम और कार्यकारी समिति की बैठकें आयोजित की जाएंगी, ऐसी बैठकों में भाग लेने के लिए शुल्क और उसके अपनाई जाने वाली कार्यविधि घ. भंडारण निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के कर्तव्य और आचरण ङ. शक्तियां और कर्तव्य, जो भंडारण निगम के प्रबंध निदेशक का सौंपे जाएं या प्रत्यायोजित किए जाएं च. सामान्यतया, भंडारण निगम के कार्यों का कुशल संचालन 2. समुचित सरकार, सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, कोई विनियम निरस्त कर सकती है जो उसने स्वीकृत किया है और उसके बाद विनियम प्रभावहीन हो जाएंगे। निरसन और व्यावृत्तियां जिस तारीख से धारा 3 के अधीन केन्द्रीय भंडारण निगम की स्थापना की जाती है, जहां तक राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 (1962 का 26) द्वारा कृषि उपज (विकास और भण्डागारण ) निगम अधिनियम, 1956 (1956 का 28) द्वारा निरस्त नहीं हुआ है, निरस्त हो जाएगा। ऐसे निरसन के होते हुए भी- क. निरसित अधिनियम के अधीन स्थापित केन्द्रीय भंडारण निगम (जिसे इसके बाद उक्त निगम कहा जाएगा) द्वारा आवंटित किए गए शेयर और जारी किए गए शेयर प्रमाण-पत्र इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन उसी प्रकार आवंटित और जारी किए हुए माने जाएंगे जैसाकि यह अधिनियम उस दिन लागू हुआ हो जिस दिन शेयर आवंटित किए गए थे और शेयर प्रमाण-पत्र जारी किए गए थे। ख. उपर्युक्त निगम का प्रत्येक अंशधारी इस अधिनियम की धारा 3 के तहत स्थापित निगम में उतने शेयरों का धारक बन जाएगा जो उक्त निगम में उसके द्वारा धारित शेयरों की संख्या और मूल्य के बराबर है । ग. राष्ट्रीय भण्डागारण विकास निधि की समस्त धनराशि और प्रतिभूतियां, जो उक्त तारीख से तत्काल पहले उपर्युक्त निगम के पास थीं, अधिनियम की धारा 3 के तहत स्थापित निगम को अंतरित हो जाएंगी और वही उसे रखेगा। घ. निरसित अधिनियम के अधीन किया गया कोई कार्य या की गई कोई कार्रवाई (जिसमें कोई नियुक्ति, नामांकन, प्रत्यायोजन, बनाया गया नियम या विनियम शामिल हैं), जहां तक यह इस अधिनियम के उपबंधों के अननुरूप नहीं है, इस अधिनियम के तहत किया हुआ या की हुई मानी जाएगी। ङ. निरसित अधिनियम के अधीन किसी राज्य भंडारण निगम में उक्त निगम द्वारा धारित प्रत्येक शेयर इस अधिनियम के अधीन स्थापित मानी गई तदनुरूपी राज्य भंडारण निगम में इस अधिनियम की धारा 3 के तहत स्थापित निगम द्वारा धारित शेयर माने जाएंगे। च. उक्त नियम के सभी अधिकार, देयताएं और दायित्व, चाहे वे किसी संविदा से या अन्यथा हुए हों, इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन स्थापित निगम के अधिकार, देयताएं और दायित्व होंगे। छ. निरसित अधिनियम के अधीन किसी राज्य के लिए स्थापित राज्य भंडारण निगम इस अधिनियम के अधीन उस राज्य के लिए स्थापित राज्य भंडारण निगम माना जाएगा। अनुसूची (धारा 36 देखें) मैं, ................................................. । घोषणा करता हूं कि मैं ईमानदारी, सच्चाई और अपने विवेक के अनुसार, दक्षता और योग्यता से उन कर्तव्यों को निष्पादित करुंगा जो मेरे लिए भंडारण निगम के निदेशक, अधिकारी, कर्मचारी या लेखापरीक्षक (जैसा भी मामला हो) के रूप में करने अपेक्षित हैं और जो उक्त निगम के कार्यालय या उसमें मेरे द्वारा धारित पद से समुचित रूप से संबंधित हैं। मैं यह भी घोषणा करता हूं कि मैं ऐसे किसी व्यक्ति को, जो इसके लिए विधिक रूप से पात्र नहीं होगा, उक्त निगम के कार्यों के संबंध में कोई सूचना नहीं दूंगा या देने की अनुमति नहीं दूंगा और न ही मैं ऐसे किसी व्यक्ति को निगम से संबंधित या निगम के व्यवसाय से संबंधित या उसके कब्जे में रखी किन्हीं बहियों और दस्तावेजों का निरीक्षण करने या उपलब्ध करने की अनुमति दूंगा स्रोत: खाद्य व सार्वजनिक वितरण विभाग।