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सर्वोच्च न्यायालय में ई-फाइलिंग प्रक्रिया

ई-शासन की ओर सर्वोच्च न्यायालय की पहल

भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने 2 अक्तूबर, 2006 से सर्वोच्च न्यायालय में ई -फाइलिंग सेवा की शुरुआत की। ई-फाइलिंग का मतलब है कि देश का कोई भी नागरिक अपने घर से ही इंटरनेट के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा दायर कर सकते/सकती हैं। इस कार्य के लिए उन्हें वकील की मदद नहीं लेनी पड़ेगी। ई-फाइलिंग के इच्छुक व्यक्ति को इंटरनेट पर जाकर सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइटको लॉगइन कर अपना पंजीकरण कराना होता है और उसके बाद वे आसानी से अपना मुकदमा दर्ज़ करा सकते हैं। इस सेवा का उपभोग करने के लिए ऊपर दिये गये वेब साइट पर क्लिक करें।

सर्वोच्च न्यायालय में ऑनलाइन मुकदमा दायर करने हेतु पंजीकरण कराने के लिए आपको निम्न प्रक्रिया पालन करनी चाहिए

  1. सर्वोच्च न्यायालय के ई-फाइलिंग सेवा का पहली बार उपयोग करने वाले को उसमें दिए गए साईन-अप विकल्प के माध्यम से अपने नाम का पंजीकरण कराना होता है।
  2. इंटरनेट पर यह पंजीकरण मुफ्त है और कोई भी अपने नाम का पंजीकरण करा सकता/सकती है।
  3. पंजीकरण कराने के लिए इंटरनेट पर दो विकल्प आपको दिखेंगे- (1) यूजर नेम अर्थात् उपयोगकर्त्ता का नाम व (2) पासवर्ड।
  4. ई - फाइलिंग के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में केवल पीड़ित व्यक्ति अर्थात् मुकदमा दायर करने के इच्छुक व्यक्ति स्वयं या निबंधित वकील ही मुकदमा दायर कर सकता है।
  5. पंजीकरण के लिए वहाँ पर आपको दो विकल्प उपलब्ध होंगे – (1) एडवोकेट ऑन पर्सन अर्थात् आप वकील के रूप में अपना नाम पंजीकृत कराना चाहते हैं या (2) पेटिशनर इन पर्सन अर्थात् आप साधारण व्यक्ति के रूप में अपने को पंजीकृत कराना चाहते हैं। यदि आप कोई साधारण जनता हैं और मुकदमा दायर कराना चाहते हैं तो आपको पेटिशनर इन पर्सन के रूप में पंजीकृत करानी चाहिए। वकील एडवोकेट ऑन रिकार्ड के रूप में अपना नाम पंजीकृत करायें। दोनों के पहले खाली स्थान बना होता है और अपने उपयोग के अनुसार उसमें माऊस की सहायता से क्लिक कर दें।
  6. एडवोकेट ऑन रिकार्ड के लिए “लॉगइन कोड” उनका एडवोकेट ऑन रिकार्ड कोड होगा जबकि साधारण व्यक्ति को साइन-अप विकल्प के द्वारा अपना लॉग-इन आईडी बनानी होगी। उसके बाद पासवर्ड डालनी जरूरी होगी। एक बार लॉग-इन आईडी बन जाने के बाद भविष्य में ई-फाइलिंग के लिए उसका उपयोग अनिवार्य होगा।
  7. सफलतापूर्वक लॉग-इन करने के बाद आप अपना मुकदना इंटरनेट के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से दायर कर सकते हैं।
  8. यहाँ पर आपके सामने फिर दो विकल्प होंगे- (1) नया मुकदमा या (2) संशोधित (यह मुख्य रूप से ई - फाइलिंग के तहत पहले से ही दायर की गई मुकदमा से संबंधित है)। नया मुकदमा वाले विकल्प पर क्लिक करके आप कोई नया मुकदमा दायर कर सकते हैं। संशोधित वाले विकल्प चुनने पर आपके द्वारा पहले से दायर किसी मुकदमे में सुधार करने का मौका दिया जाएगा।
  9. सर्वोच्च न्यायालय में ई - फाइलिंग के लिए शुल्क केवल क्रेडिट या डेबिट कार्ड के माध्यम से ही जमा किया जा सकता है।

स्रोत : ई-फिलिंग यूज़र मैन्युअल

मामले/वाद की स्थिति

वेब पोर्टल-केस स्टेटस पक्षकारों और उनके अधिवक्ताओं को उच्चतम न्यायालय में लंबित तथा निष्पादित मामलों की स्थिति की अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराता है। मामलों की स्थिति, किसी भी मामले की स्थिति की जानकारी - निष्पादित या स्थगित, निचली अदालतों का विवरण, पक्षकार और अधिवक्ता का नाम के रू प में देती है। अदालत में मामला दायर होते ही इसकी स्थिति वेबसाइट पर उपलब्ध हो जाती है। इसमें अदालत द्वारा संबंधित मामले में अब तक दिये गये आदेश भी समाहित होते हैं। इस वेबसाइट पर आम लोगों की बेहद अनुकूल प्रतिक्रिया मिली है, क्योंकि लंबित मामलों की जानकारी अब पक्षकार के घर पर उपलब्धहै। इससे पक्षकार को दिल्ली नहीं आना पड़ता है।

इंटरनेट पर दैनिक आदेश

भारतीय सर्वोच्च न्यायालय एवं दिल्ली उच्च न्यायालय का दैनिक आदेश न्यायाधीशों के हस्ताक्षर के बाद वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया जाता है। ये आदेश सिर्फ याचिकाकर्ता के सूचना के लिए होता जबकि आदेश का हस्ताक्षरित आधिकारिक प्रति उचित माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। इस सेवा का वादी एवं वकीलों द्वारा शीघ्र ही उपयोग किया जाता है। इस संबंध में संबंधित न्यायालय आँकड़े की देखभाल करते हैं। टेक्स्ट या पाठ्य आधारित स्वतंत्रखोज प्रणाली की सुविधा ने प्रयोक्ताओं को समान मुकदमा में से नये मुकदमा को खोजने में सक्षम बनाता है। यह प्रयोक्ताओं को बिना केस नंबर एवं पक्ष का नाम जाने न्यायालय के आदेश को जानने में मदद करता है।

स्त्रोत : पोर्टल विषय सामग्री टीम।



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