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मध्यप्रदेश सूचना प्रोद्योगिकी निवेश नीति 2012

मध्यप्रदेश सूचना प्रोद्योगिकी निवेश नीति 2012

परिकल्पना

इस नीति का लक्ष्य सूचना प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएं और इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर मैन्यूफेक्चरिंग - (आई.टी./आई.टी.ई.एस./ई.एच.एम.) - को प्रदेश के आमजन की उन्नति के साथ रोजगार के अवसर प्रदान करने वाले जीवंत उद्योग के रूप में विकसित करना है।

उद्देश्य

1. राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में निवेश प्रवाह को बढ़ाना।

2. प्रदेश के युवा वर्ग हेतु प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अधिकतम अवसर उत्पन्न करना।

3. छोटे शहरों (कस्बों) में आधारभूत संरचना एवं विकास के अवसर उपलब्ध कराना।

4. सूचना प्रौद्योगिकी पार्क/निवेश क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करना।

रणनीति

1. राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने एवं सूचना प्रौद्योगिकी सेवा प्रदाय करने वाली फर्क्स को अपना आधार स्थापित करने हेतु छूट/सुविधाओं की उपलब्धता।

2. प्रदेश के शिक्षित युवा वर्ग के लिये रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करना एवं राज्य से होने वाले प्रतिभा-पलायन को रोकना।

3. कुशल एवं तकनीकी जनशक्ति तैयार करने हेतु मानव संसाधन का विकास।

4. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य गुणवत्ता प्रमाणीकरण को अंगीकृत करने का प्रोत्साहन।

कार्य योजना

राज्य शासन इन्दौर, ग्वालियर, भोपाल और जबलपुर पर विशेष ध्यान केन्द्रित कर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नियोजन और इसके समग्र विकास हेतु प्रतिबद्ध है। सूचना प्रौद्योगिकी उद्योगों को आकर्षित करने एवं इस क्षेत्र में पार्कों के विकास के लिये कार्य योजना निम्नानुसार होगी :

1. वाणिज्य, उद्योग एवं रोजगार विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ-16-8-ग्यारह-डी 99 दिनांक 28.01.2000 (यथा समय विभाग द्वारा किये जाने वाले संशोधनों सहित) के अंतर्गत वर्णित सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.), सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएं (आई.टी.ई.एस.), इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर मैन्यूफेक्चरिंग (ई.एच.एम.) एवं अन्य सम्बद्ध गतिविधियां सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में सम्मिलित किये जाने योग्य होंगी।

2. शासन द्वारा भूमि के बड़े भाग सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र के रूप में चिन्हित किये गए हैं। इन क्षेत्रों में सूचना प्रौद्योगिकी/सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं के कर्मियों हेतु खान-पान प्रांगण, अस्पताल, शॉपिंग मॉल, आवासीय परिसर, स्कूल, स्टार होटल और अन्य मनोरंजन सुविधाओं के निर्माण की अनुमति होगी।

3. भारत सरकार के सहयोग से राज्य शासन द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र (आई.टी.आई.आर.) के विकास की दिशा में कार्यवाही की जायेगी।

4. सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र में निर्माण हेतु राज्य शासन निजी क्षेत्र की एजेन्सीज से समन्वय कर कार्य करेगा। निजी क्षेत्र की योग्य अधोसंरचना विकास एजेंसियों को चिन्हित किया जाएगा, जो सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र के विकास, विपणन और प्रबंधन कार्य करेंगी।

5. शासन, भूमि-स्वामियों की आपसी सहमति से, ख्यातिप्राप्त एवं बड़ी धनराशि विनियोजित करने में सक्षम निजी क्षेत्र की अनुभवी कम्पनियों द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र के विकास हेतु निजी भूमि उपलब्ध करवाने में सहयोग करेगा।

6. सूचना प्रौद्योगिकी निवेश नीति के अंतर्गत छूट/प्रोत्साहन प्राप्त करने हेतु आवेदक कंपनी को राज्य शासन द्वारा अधिसूचित प्राधिकृत एजेंसी के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी इकाई के रूप में मान्य होने का प्रमाण पत्र प्राप्त करना आवश्यक होगा।

उपलब्ध छूट/प्रोत्साहन

1. एकल खिड़की समाधान व्यवस्था:

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, म.प्र. शासन सूचना प्रौद्योगिकी उद्योगों को म.प्र. राज्य में आकर्षित करने का कार्य करेगा और म.प्र. ट्रेड एन्ड इन्वेस्टमेन्ट फेसिलिटेशन कारपोरेशन (एम.पी. ट्रायफेक) किसी भी परियोजना के लिये अनुमति एवं समाधान सम्बन्धी समस्त औपचारिकताएं पूर्ण करने हेतु एकल खिड़की के रूप में कार्य करेगा।

2. उद्योग संवर्धन नीति का लागू होना:

मध्यप्रदेश की उद्योग संवर्धन नीति के अन्तर्गत दी जाने वाली प्रासंगिक सुविधाएं शासन द्वारा आवंटित भूमि/निजी भूमि पर स्थापित सूचना प्रौद्योगिकी उद्योगों को, समस्त शासकीय औपचारिकताओं हेतु, एकल खिड़की समाधान व्यवस्था के प्रावधान के साथ उपलब्ध होंगी।

3. गुणवत्ता प्रमाणीकरण प्रोत्साहन:

शासन राज्य में कार्यरत किसी सूचना प्रौद्योगिकी कम्पनी द्वारा केपेबिलिटी मैच्योरिटी मॉडल (सी.एम.एम./सी.एम.एम.आई.) पीपल्स केपेबिल्टी मैच्योरिटी मॉडल (पी.सी.एम.एम.) का गुणवत्ता प्रमाणीकरण प्राप्त कर लेने पर, उनके द्वारा व्यय की गई राशि का 75 प्रतिशत, अधिकतम रुपये 6 लाख की सीमा तक, पश्चात्वर्ती प्रतिपूर्ति करेगी। यह प्रोत्साहन राशि आवेदक कम्पनी को केवल एक बार दी जायेगी।

4. भूमि उपयोग सम्बन्धी छूट:

(क) सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र के समूचे क्षेत्रफल में वर्तमान “तल क्षेत्र अनुपात में छूट प्रकरण दर प्रकरण आधार पर तथा नगर विकास योजना के प्रावधानों के अंतर्गत प्राप्त होगी। (ख) कुल सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र के कम से कम 60 प्रतिशत क्षेत्र का सूचना प्रौद्योगिकी के कार्यों हेतु एवं शेष 40 प्रतिशत का उपयोग अन्य सहायक कार्यों एवं सहयोगी गतिविधियों हेतु किया जा सकेगा। तथापि, विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र (एस.ई.जेड.) हेतु आवंटित भूमि के लिये ‘एस.ई.जेड. नियम लागू होंगे।

5. स्टाम्प ड्यूटी में छूट:

(क) सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र में बैंकों/वित्तीय संस्थाओं के साथ निष्पादित रहननामों/बन्धक पत्रों के लिये सूचना प्रौद्योगिकी कम्पनियों द्वारा देय स्टाम्प ड्यूटी से छूट इस शर्त पर प्राप्त होगी कि ऐसी नई इकाई को संसूचित एजेंसी द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी इकाई प्रमाणित किया गया हो।

(ख) वित्तीय संस्थाओं, शासकीय एजेंसियों या निजी क्षेत्र द्वारा या की ओर से निष्पादित पट्टे/विक्रय के ऐसे दस्तावेजों जिनके द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र में भूमि/परिसर सूचना प्रौद्योगिकी कम्पनी को नई इकाई के पक्ष में अन्तरित की जाती है, पर स्टाम्प शुल्क से छूट इस शर्त पर प्राप्त होगी कि, ऐसी नई इकाई को संसूचित एजेंसी द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी इकाई प्रमाणित किया गया हो।

6. विद्युत सम्बन्धी प्रोत्साहन:

(क) कैप्टिव पावर प्लान्ट लगाने के लिये किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। इस संबंध में विद्युत अधिनियम-2003 के प्रासंगिक प्रावधान लागू होंगे।

(ख) म.प्र. राज्य में औद्योगिक क्षेत्र की इकाईयों को अबाधित विद्युत आपूर्ति की जा रही है। सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग को विद्युत की आपूर्ति, निर्धारित शुल्क के भुगतान पर तथा निर्धारित शर्तों के अधीन एक डेडीकेटेड फीडर के माध्यम से की जाएंगी।

7. भूमि के मूल्य में छूट :

प्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी के निवेश को आकर्षित करने के लिये भूमि के मूल्य में छूट देना एक मुख्य प्रोत्साहन है। सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र के निर्माण के लिये आवंटित भूमि के मूल्य पर निर्धारित शर्ते व प्रक्रिया अनुसार निम्नानुसार छूट प्राप्त हो सकेगी:

(अ) छूट केवल शासकीय भूमि पर प्राप्त होगी।

(ब) भूमि उपलब्ध होने की दशा में, तत्समय लागू कलेक्टर गाइड लाइन रेट के 25 प्रतिशत मूल्य पर उपलब्ध करवाई जाएगी। यह इस शर्त के साथ होगा कि स्थाई पूँजी में निवेश तीन वर्षों की अवधि में करना होगा। इन इकाईयों को भूमि निम्न तालिका में उल्लेखित अनुसार आबंटित होगी :

क्र. सं.

परियोजना लागत (करोड़ रुपये में)

रियायती दरों पर देय भूमि

1

20 करोड़ तक

आवश्यकतानुसार अधिकतम 10 एकड़

2

20 से 50

आवश्यकतानुसार अधिकतम 15 एकड़

3

50 से 100

आवश्यकतानुसार अधिकतम 25 एकड़

4

100 से अधिक

प्रकरण - दर - प्रकरण आधार पर

 

तथापि यहां यह स्पष्ट किया जाता है कि भूमि मूल्य के अतिरिक्त विकास शुल्क पृथक रूप से देय होगा, यदि भूमि का विकास मध्यप्रदेश शासन अथवा इनके किसी प्राधिकरण/एजेंसी द्वारा किया गया है।

(स) लीज रेन्ट कम्पनी द्वारा देय वास्तविक लीज प्रीमियम के 01 (एक) प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से वसूल किया जाएगा।

(द) आवेदक कम्पनी द्वारा प्रति एकड़ 100 इंजीनियर्स/आई.टी./आई.टी.ई.एस. प्रोफेशनल्स को रोजगार दिये जाने पर ही छूट की पात्रता होगी। इन कर्मियों में से 50 प्रतिशत कर्मी मध्यप्रदेश राज्य के मूल निवासी होंगे।

(इ) भूमि 99 वर्ष तक की लीज पर प्रकरण दर प्रकरण आधार पर दी जाएगी तथा इसके नवीनीकरण का प्रावधान होगा।

8. ब्याज अनुदान

ब्याज अनुदान के संबंध में मध्यप्रदेश उद्योग संवर्धन नीति के प्रासंगिक प्रावधान लागू होंगे।

9. पूंजीगत निवेश अनुदान :

पूंजीगत निवेश अनुदान के संबंध में मध्यप्रदेश उद्योग संवर्धन नीति के प्रासंगिक प्रावधान लागू होंगे।

10. कुशलता अन्तराल (स्किल गैप) प्रशिक्षण व्यय प्रतिपूर्ति

मध्यप्रदेश राज्य के मूल निवासी इंजीनियर्स/आई.टी./आई.टी.ई.एस. प्रोफेशनल्स को स्किल गैप प्रशिक्षण देने में हुए व्यय की 50 प्रतिशत राशि की प्रतिपूर्ति की जाएगी जिसकी अधिकतम सीमा 10000/- रुपये (रुपये दस हजार) प्रति कर्मी होगी। यह प्रतिपूर्ति कम्पनी को केवल एक बार तथा कम्पनी द्वारा कार्य संचालन प्रारम्भ किये जाने के प्रथम दो वर्षों के भीतर नियोजित व्यक्तियों के लिए देय होगी।

11. विधिक विनियमों सम्बन्धी छूट

सूचना प्रौद्योगिकी इकाईयों को सुसंगत/सम्बन्धित विधिक प्रावधानों में निम्नानुसार छूट प्राप्त होगी:

(क) सूचना प्रौद्योगिकी इकाईयों को म.प्र. दुकान एवं स्थापना अधिनियम 1958 के, व्यवसाय करने के समय एवं साप्ताहिक अवकाश सम्बन्धी, प्रावधानों से एक अधिसूचना जारी कर छूट दी जा सकेगी। नियोक्ता द्वारा कार्यस्थल पर और आवागमन के दौरान महिला कर्मियों की सुरक्षा एवं संरक्षा की व्यवस्था की जाने पर, इन महिला कर्मियों को 3 शिफ्ट में 24 घण्टे कार्य करने की अनुमति दी जा सकेगी।

(ख) सूचना प्रौद्योगिकी विनिर्माणी इकाईयों में कार्यरत महिला कर्मियों के कार्य करने के समय में फैक्ट्रीज एक्ट के अन्तर्गत छूट दी जा सकेगी। नियोक्ता द्वारा कार्यस्थल पर और आवागमन के दौरान महिला कर्मियों की सुरक्षा एवं संरक्षा की व्यवस्था की जाने पर, इन महिला कर्मियों को 3 शिफ्ट में 24 घण्टे कार्य करने की अनुमति दी जा सकेगी।

(ग) न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 की अनुसूची में सूचना प्रौद्योगिकी इकाईयों को स्वतंत्र नियोजन के रूप में जोड़ा जाएगा ताकि ऐसे कर्मी पृथक वर्गीकृत किये जायें तथा उनकी कुशलता और कार्य क्षमता अनुसार उनकी मजदूरी नियत हो सके।

(ध) सूचना प्रौद्योगिकी इकाईयों को विभिन्न अधिनियमों/नियमों द्वारा नियत रजिस्टरों एवं फार्स का स्त-प्रमाणीकरण करने की अनुमति होगी यथा - पेमेन्ट ऑफ वेजेस एक्ट, मिनिमम वेजेस एक्ट, इम्प्लाईज स्टेट इंश्योरेंस एक्ट, पेमेन्ट ऑफ ग्रेच्यूटी एक्ट, मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, ईक्वल रिमैन्यूरेशन एक्ट, वॉटर एन्ड पोल्यूशन एक्ट, इम्प्लायमेंट एक्सचेन्ज एक्ट, फैक्ट्रीज एक्ट, इम्प्लाईज प्रॉविडेन्ट फन्ड एण्ड मिसलेनियस प्रॉविजन्स एक्ट, कान्ट्रेक्ट लेबर (रेग्यूलेशन एण्ड एबालिशन) एक्ट। उन्हें यह भी अनुमति होगी कि वे अनेक पंजियों तथा अभिलेख के स्थान पर विभिन्न श्रमिक अधिनियमों के अन्तर्गत एकल पंजी और अभिलेखों को संधारित करें।

(ङ) सूचना प्रौद्योगिकी इकाईयों को सुसंगत श्रमिक अधिनियम/नियम (लेबर लॉज) के संबंधित प्रावधानों से मुक्त रखा जायेगा, जिससे कि वे चौबीस घंटे, 07 दिन एवं तीन शिफ्ट कार्य संचालित कर सकें।

12. प्रवेश कर पर छूट

(अ) वे सूचना प्रौद्योगिकी इकाईयाँ जो सॉफ्टवेयर विकास संबंधी व्यवसायिक गतिविधियों में संलग्न हैं, के प्रयोग में आने वाले सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों को पांच वर्ष की अवधि के लिए प्रवेश कर से मुक्त रखा जायेगा।

(ब) इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर विनिर्माणी इकाईयों (ई.एच.एम.) को पांच वर्ष की अवधि के लिए प्रवेश कर से मुक्त रखा जायेगा।

13. इकाई के विस्तार/आधुनिकीकरण हेतु सुविधाएं ऐसी सभी विद्यमान सूचना प्रौद्योगिकी इकाईयां जो अपनी क्षमता का विस्तार/आधुनिकीकरण करेंगी, अपने वृद्धिगत (इंक्रीमेन्टल) उत्पादन पर उपरोक्त समस्त छूट एवं सुविधाएं उसी प्रकार प्राप्त करेंगी जिस प्रकार वे “नई सूचना प्रौद्योगिकी इकाई' को प्राप्त होंगी बशर्ते उन्हें संसूचित एजेंसी द्वारा प्रमाणीकृत किया जाए। केवल वे इकाईयां इस प्रावधान के अन्तर्गत पात्र मानी जायेंगी, जो विस्तार हेतु, अपने विद्यमान पूंजीगत निवेश की 50 प्रतिशत राशि, रुपये 25 लाख की न्यूनतम राशि के उपबन्ध के साथ अतिरिक्त निवेश करेंगी।

स्त्रोत: मध्यप्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी विभाग



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