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वीएलई सोम्या लायीं उत्तर प्रदेश रनकुटा में डिजिटल क्रांति

वीएलई सोम्या लायीं उत्तर प्रदेश रनकुटा में डिजिटल क्रांति

भूमिका

सोम्या गुप्ता 19 वर्षीय कॉलेज छात्रा है। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में दूरस्थ और पिछड़े गांव रनकुटा निवासी सोम्या ने नवंबर 2016 में अपनी सीएससी की स्थापना की। जब वह कंप्यूटर कोर्स कर रहीं थी तब उन्हें सीएससी योजना के बारे में पता चला। सोम्या की सीएससी स्थापना से पहले ग्रामीणों को कनेक्टिविटी की कमी के कारण सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी पाने और सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए आगरा शहर के लिए एक लंबी दूरी की यात्रा तय करनी होती थी।

नवंबर के बाद से गांवों से लोग आधार नामांकन, बॉयोमीट्रिक और जनसांख्यिकीय अद्यतन, पैन कार्ड और पासपोर्ट, मोबाइल रिचार्ज और बिल भुगतान डी 2 एच, ई-लर्निंग, बीमा, आदि जैसी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए उसके सीएससी पर आने लगे। उसने आधार कार्ड के तहत 600 लोगों के मोबाइल नंबर अपडेट किया गया और कई ग्रामीणों का जनसांख्यिकीय अपडेट भी किया।

डिजी धन अभियान ने बदली जिंदगी

डिजी धन अभियान को दिसंबर में सरकार द्वारा घोषित किया गया था और सोम्या ने अपने गांव के लोगों जो प्रौद्योगिकी का उपयोग करने और डिजिटल साक्षरता व डिजिटल भुगतान विकल्प के बारे में आशंकित थे उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए इसे एक अवसर के रूप में लिया। अब तक उन्होंने 700 के आसपास नागरिकों को स्मार्ट फोन की तरह डिजिटल उपकरणों पर प्रशिक्षित किया और ई-वॉलेट , डिजी पे या यूएसएसडी के माध्यम से लेन-देन करना सिखाया है। उन्होंने विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय की महिलाएं और प्रवासी मजदूर परिवार की लड़कियों को प्रशिक्षित किया है । उसका मिशन अपने गांव रनकुटा को डिजिटल सशक्त गांव बनाना है। मेरे गांव में लोग अभी भी डिजिटल सेवाओं के बारे में आशंकित हैं। सोम्या कहती हैं कि मेरी प्राथमिक उनकी मानसिकता और इस तरह की आशंकाओं को बदलने की है।

सोम्या गुप्ता 19 वर्षीय कॉलेज छात्रा है। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में दूरस्थ और पिछड़े गांव रनकुटा निवासी सोम्या ने नवंबर 2016 में अपनी सीएससी की स्थापना की। जब वह कंप्यूटर कोर्स कर रहीं थी तब उन्हें सीएससी योजना के बारे में पता चला। सोम्या की सीएससी स्थापना से पहले ग्रामीणों को कनेक्टिविटी की कमी के कारण सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी पाने और सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए आगरा शहर के लिए एक लंबी दूरी की यात्रा तय करनी होती थी। नवंबर के बाद से गांवों से लोग आधार नामांकन, बॉयोमीट्रिक और जनसांख्यिकीय अद्यतन, पैन कार्ड और पासपोर्ट, मोबाइल रिचार्ज और बिल भुगतान डी 2 एच, ई-लर्निंग, बीमा, आदि जैसी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए उसके सीएससी पर आने लगे। उसने आधार कार्ड के तहत 600 लोगों के मोबाइल नंबर अपडेट किया गया और कई ग्रामीणों का जनसांख्यिकीय अपडेट भी किया।
डिजी धन अभियान को दिसंबर में सरकार द्वारा घोषित किया गया था और सोम्या ने अपने गांव के लोगों जो प्रौद्योगिकी का उपयोग करने और डिजिटल साक्षरता व डिजिटल भुगतान विकल्प के बारे में आशंकित थे उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए इसे एक अवसर के रूप में लिया। अब तक उन्होंने 700 के आसपास नागरिकों को स्मार्ट फोन की तरह डिजिटल उपकरणों पर प्रशिक्षित किया और ई-वॉलेट , डिजी पे या यूएसएसडी के माध्यम से लेन-देन करना सिखाया है। उन्होंने विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय की महिलाएं और प्रवासी मजदूर परिवार की लड़कियों को प्रशिक्षित किया है । उसका मिशन अपने गांव रनकुटा को डिजिटल सशक्त गांव बनाना है। मेरे गांव में लोग अभी भी डिजिटल सेवाओं के बारे में आशंकित हैं। सोम्या कहती हैं कि मेरी प्राथमिक उनकी मानसिकता और इस तरह की आशंकाओं को बदलने की है।


स्रोत: सीएससी इंडिया



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