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नशा पीड़ितों को विधिक सेवाऐं एवं नशा उन्मूलन के लिए विधिक सेवाऐं

नशा पीड़ितों को विधिक सेवाऐं एवं नशा उन्मूलन के लिए विधिक सेवाऐं
  1. पृष्ठभूमि
  2. मौजूदा विधिक  प्रावधान
  3. योजना का नाम
  4. परिभाषाएं
  5. योजना का लक्ष्य
  6. विशेष इकाइयों की स्थापना
  7. डाटा बेस तैयार करना
  8. विभिन्न योजनाओं को लागू करना
  9. अवैध उपजाव का नष्टीकरण
  10. भूमि स्तर पर स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं की भागीदारी
  11. विद्यालयों और महाविद्यालयों में जागरुकता
  12. लावारिस बच्चों में जागरूकता
  13. ड्रग दुरूपयोग के पीड़ितों के बीच जागरुकता
  14. यौन कर्मियों हेतु जागरुकता कार्यक्रम
  15. जेलों में जागरूकता कार्यक्रम
  16. आम जनता के बीच जागरूकता
  17. केमिस्ट व औषधि / ड्रग्स विक्रेताओं के बीच जागरूकता
  18. इलेक्ट्रानिक व प्रिंट मीडिया के द्वारा जागरूकता
  19. नशामुक्ति/पुनरुद्धार केन्द्रों के साथ समन्वय
  20. हिस्सेदारों का प्रशिक्षण / रिफ्रेशर कोर्स
  21. ड्रग्स के व्यसन से सुधरे हुए व्यक्तियों का सहयोग
  22. ड्रग्स विरोध की  क्लब
  23. अर्धविधिक स्वयंसेवियों को शामिल करना
  24. अच्छे कार्यों की सराहना

पृष्ठभूमि

नवयुवकों, किशोरों एवं बालको में ड्रग तस्करी एवं दुरूपयोग की असाधरण बढोतरी गंभीर व जटिल निहितार्थ सूचित करती है जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित करती है। इसकी रोकथाम राज्य के साथ साथ समाज की सर्वोत्तम प्राथमिकता है। यह एक खुला राज है की ड्रग/नशा ने निर्दोष बच्चों, नव बालकों, नवयुवकों  एवं महिलाओं के ऊपर अपना  भयानक शिकंजा कस लिया है। इसका खतरनाक फैलाव इससे प्रतीत होता है की नशे की शुरुआत 9-10 वर्ष की किशोर आयु से हो जाती है। आधुनिक  प्रयोगात्मक अध्ययन से ज्ञात हुआ  है की भारत  में लगभग  7 करोड़ लोग पदार्थ दुरुपयोग में लगे है जिनमे से 17% लोग इसके आदि  है। जिन पौधें से यह पदार्थ/ ड्रग बनाये जाते है उनकी अवैध  खेती गंभीर चिंता का विषय है। सामान्यतः लोग ऐसी खेती के दुष्प्रभाव से अवगत नहीं होते। पदार्थ की अवैध  खेती रोकने के लिए पंचायती राज संस्थाओं एवं स्थानीय निकासों  की भागेदारी आवश्यक रूप से अपेक्षित है। राज्य की कई एजेन्सियों के साथ साथ गैर सरकारी संगठन भी नशीले पदार्थो की तस्करी और मादक पदार्थो के उन्मूलन के क्षेत्र  में कार्यरत है परन्तु उनके बीच समन्वय की कमी है। अभिकरणों एवं विभिन्न पदाधिकारियों के व्यक्तिगत प्रयासों भी अपेक्षित परिणाम नहीं प्राप्त कर सके हैं। इस तथ्य को विचार में रखते हुए कि विधिक सेवा संस्थाएं इस खतरे के उन्मूलन में बड़ा योगदान दे सकती हैं, रांची (झारखण्ड) में हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों  के तेरहवें अखिल भारतीय सम्मलेन में एक संकल्प लिया गया था जिसका निष्कर्ष यह था कि नशों की लत एवं नशा का दुरूपयोग समस्त विधिक सेवा संस्थाओं के लिए एक गम्भीर चिंता का विषय है एवं इसकी आवश्यकता महसूस की गयी थी कि इस समस्या का परीक्षण किया जाए।

मौजूदा विधिक  प्रावधान

  1. संयुक्त राष्ट्र द्वारा मार्च 1961 में नशीले ड्रग्स पर एकल संधि द्वारा नशीले ड्रग्स एवं तस्करी के खतरे के उन्मूलन का प्रयास आरम्भ हुआ था एवं तत्पश्चात इस संधि के प्रस्ताव को संशोधित करने हेतु मार्च 1972 में एक विज्ञप्ति अपनाई गयी थी। वर्ष 1971 में मनः प्रभावी पदार्थो की संयुक्त राष्ट्र संधि हुई थी एवं उसके पश्चात वर्ष 1988 में नशीले ड्रग्स एवं मनः प्रभावी पदार्थों की अवैध  तस्करी के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र संधि हुई। भारत ऐसी समस्त संधियों  का हस्ताक्षरी है।
  2. भारत के संविधान  का अनुच्छेद 47 यह आदेश देता है कि राज्य स्वास्थ्य को हानि पहुँचाने वाले नशीले मदिरा एवं ड्रग्स के उपयोग को सिवाय उन ड्रग्स के जो दवाओं  के औषधीय  प्रयोजनों हेतु प्रयुक्त होते है, निषेध  करने के बारे में  प्रयास करेगा।
  3. अवैध  ड्रग तस्करी एवं ड्रग दुरूपयोग के राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता हुए रुझान ने व्यापक विधानों  को पारित करने के लिए प्रेरित  किया है – (क) औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 एवं (ख) स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम,1985, नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के निषेध , नियंत्रण, विनियमन, खेती, निर्माण,बिक्री परिवहन, खपत आदि के लिए। कठोर विधियों  के बावजूद अवैध  ड्रग व्यापार संयोजित ढंग से कई गुना बढ़ता ही जा रहा है।
  4. इसी पृष्ठभूमि में नालसा ने अनुभव किया कि मांग एवं पूर्ति कम करने, लत छुड़ाने एवं पुनर्वास में उसकी एक महत्वपूर्ण भूमिका है। समस्या के आयामों को समझने के उद्देश्य के लिए एवं विधिक सेवा संस्थानों की प्रभावी ढंग से समस्या का समाधन करने के लिए भूमिका परिभाषित करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है। यह योजना भारत में ड्रग का खतरा -संक्षिप्त विवरण, चुनौतियाँ एवं समाधन विषय पर मनाली, हिमाचल प्रदेश में हुए स्थानीय सम्मलेन में समिति के विचार विमर्श से प्राप्त आयामों पर बनाई गई है।

योजना का नाम

यह योजना नालसा नशा पीड़ितों को विधिक सेवाऐं एवं नशे का उन्मूलन के लिए विधिक सेवाऐं योजना, 2015 कहलाएगी।

परिभाषाएं

इस योजना में जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,

  1. अधिनियम से अभिप्राय विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987(1987 का 39 वां) है।
  2. एन डी पी एस अधिनियम  से अभिप्राय स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1965 का 61वां) है।
  3. विधिक सेवा से तात्पर्य वैसा ही है जैसा विधिक सेवा प्राधिकरण  की धारा 2(c) के अंतर्गत परिभाषित है।
  4. विधिक सेवा क्लीनिक से तात्पर्य वह क्लीनिक है जो राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (विधिक सेवा क्लीनिक) विनियम, 2011 के अंतर्गत 2(ग) में परिभाषित है।
  5. विधिक सेवा संस्था से अभिप्राय राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या  तालुका विधिक सेवा समिति  अथवा जैसा कि मामला हो,  है।
  6. पैनल लॉयर से अभिप्राय वो पैनल लॉयर हैं जिनका चयन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (निःशुल्क एवं सक्षम विधिक सेवा) विनियम, 2010 के विनियम 8 के अंतर्गत हुआ हो।
  7. अर्धविधिक  स्वयंसेवी से अभिप्राय वो अर्धविधिक  स्वयं सेवी है जो नालसा की पैरा-लीगल वालंटियर्स (संशोधित) योजना - पैरा लीगल वालंटियर्स प्रशिक्षण माड्‌यूल में परिभाषित है।
  8. अन्य समस्त शब्द एवं भाव जो प्रयोग किये गए हैं परन्तु इस योजना में परिभाषित नहीं किये गए हैं और वो विधिक सेवा प्राधिकरण  अधिनियम, 1987 (1987 का 39वां) अथवा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नियम, 1995 अथवा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (निःशुल्क एवं सक्षम विधिक सेवा), विनियम, 2010 के अंतर्गत परिभाषित हैं उनका क्रमशः वही अर्थ होगा जो उक्त अधिनियम  अथवा नियम अथवा विनियम में उन्हें प्रदान किया गया है।

योजना का लक्ष्य

  1. आम जनता के बीच विधिक प्रावधानों, विभिन्न नीतियों, कार्यक्रम एवं योजनाएं, स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थों के विषय के साथ-साथ विद्यालयों तथा महाविद्यालयों के बच्चों, गली के बच्चों, नगर झोपड़पट्टटी के बच्चों, सुई से ड्रग लेने वालों, परिवारों, कैदियों, असंगठित क्षेत्रों  में कार्य करने वालों, दवा बेचने वालों, ड्रग प्रयोग करने वालों, यौन कर्मियों एवं जन साधरण आदि में ड्रग दुरूपयोग के दुष्प्रभाव के विषय में जागरूकता फैलाना ।
  2. विभिन्न पदार्थों स्रोत/पौधें की जायज खेती करने वाले किसानों में ऐसे ड्रग एवं पदार्थों के सेवन के प्रतिकूल स्वास्थ्य एवं जीवन हानिकारक प्रभाव के विषय में संवेदनशीलता लाने हेतु साक्षरता शिविरों  का आयोजन करना।
  3. माता-पिता तथा शिक्षकों तथा विद्यार्थियों में पदार्थ दुरूपयोग के विषय में जागरूकता फैलाना ।
  4. विभिन्न भागीदारों अर्थात न्यायपालिका, अभियोजन, बार के सदस्यों, पुलिस, पफोरेंसिक प्रयोगशालाओं, नशा मुक्ति केन्द्रों, सुधार गृह, पुनर्वास केन्द्रों, विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय प्रशासन, किशोर गृह, वृद्धाश्रमों, नारी निकेतनों, विशेष किशोर विद्यालयों, न्यायालयों में कार्यरत कर्मचारीगण, इत्यादि को ड्रग के खतरों एवं इसके उन्मूलन के प्रभावी उपायों के विषय में संवेदनशील बनाना।
  5. ड्रग दुरुपयोग के पीड़ितों को पहचानने, उनका उपचार करने तथा नशा मुक्ति के पश्चात उनके पुनर्वास में उपलब्ध  बुनियादी सुविधाओं को गतिमान करना।
  6. पंचायती राज संस्थाओं/स्थानीय निकायों की क्षमता जमीनी स्तर पर ड्रग दुरुपयोग की रोकथाम एवं निवारण तथा ड्रग/पदार्थों में उपयोग होने वाले पौधें की अवैध  खेती के दुरुपयोग और विनाश करने हेतु हस्तक्षेप और रोकथाम के प्रयासों के लिए उपयोग करना।
  7. नशा मुक्ति केन्द्रों एवं पुनर्वास केन्द्रों इत्यादि के बीच बेहतर सुविधाओं के लिए प्रभावी सहयोग पैदा करना और पीड़ितों के अधिकार का सम्मान करना और यदि कोई अतिक्रमण/उल्लंघन प्रतीत हो तो बीच बचाव करना।
  8. क्षेत्र  में कार्यरत विभिन्न भागीदारों के कार्य कलापों में सहयोग पैदा करना।
  9. ड्रग तस्करी एवं ड्रग दुरुपयोग के पीड़ितों को आवश्यक विधि सेवा सुनिश्चित करना।

 

कार्य योजना

विशेष इकाइयों की स्थापना

  1. इस योजना की सूचना मिलने के एक मास के अंतर्गत राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण  (एतद्‌ पश्चात एस.एल.एस.ए. निर्देशित) राज्य के समस्त तालुकाओं/मण्डलों उप मण्डलों में विशेष इकाइयाँ स्थापित करेगा जिनमें डी.एल.एस.ए. अध्यक्ष द्वारा मनोनीत न्यायिक अधिकारी गण, नव युवक अधिवक्तागण, संबंधित मुख्य  चिकित्सीय अधिकारी  द्वारा मनोनीत चिकित्सीय अधिकारी गण, मुख्य  सचिव द्वारा मनोनीत राजस्व/पुलिस/वन अधिकारी गण, सामाजिक कार्यकर्ता, अर्द्धविधिक  स्वयंसेवी और ड्रग के खतरे के उन्मूलन अथवा पुनर्वास एवं नशा मुक्ति हेतु ठोस कार्य करने वाले किसी स्वयंसेवी संस्था जो नालसा से जुड़ी हो, के प्रतिनिधि होंगे। विशेष इकाईयों की अध्यक्षता तालुका/मंडल/उपमंडल विधिक सेवा समिति (एतद्‌ पश्चात टी.एल.एस.सी. निर्देशित) के अध्यक्ष डी.एल.एस.ए. अध्यक्ष के व्यापक पर्यवेक्षण के अंतर्गत करेंगे।
  2. ऐसी विशेष इकाईयों में दस से अधिक  सदस्य नहीं होंगे। डी.एस.एल.ए. के सचिव जिले के नोडल अधिकारी  होंगे। तालुका विधिक सेवा समिति के सचिव विशेष इकाइयों के सचिव होंगे।
  3. विशेष इकाइयों का संगठन होने के पश्चात नालसा के मॉडयूल के अनुसार विशेष इकाइयों के सदस्यों के लिए डी.एल.एस.ए. प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
  4. विशेष इकाइयाँ किये गए कार्य की नियमित रिपोर्ट एस.एल.एस.ए. को डी.एस.एल.ए. अध्यक्ष द्वारा देती रहेंगी जो उन्हें अपनी टिप्पणियों सहित आगे भेजने होंगे।ये विशेष इकाइयॉं अपने गठन के 15 दिवसों के भीतर ड्रग एब्यूज से निपटने, हस्तक्षेप और नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम हेतु अपने अपने संबंधित क्षेत्रो में होने वाले कार्यक्रमों का एक सूक्ष्म स्तरीय कार्यक्रम तैयार करेंगी।
  5. ऐसे कार्यक्रम डी.एल.एस.ए. के अध्यक्ष द्वारा एस.एल.एस.ए. के सदस्य सचिव को भेजे जायेंगे जो अपने तौर पर उसे अनुमोदन हेतु कार्यपालक अध्यक्ष के समक्ष रखेंगे । एस.एल.एस.ए. के कार्यपालक अध्यक्ष संशोधन  सहित अथवा बिना संशोधन , 15 दिन के अन्दर अपनी अनुमति दे देंगे।
  6. इस योजना के प्रावधानों  के अंतर्गत उन्हें सौंपे गए कार्यों के अतिरिक्त विशेष इकाइयाँ उन अन्य कार्य को भी करेंगी जो उन्हें एस.एल.एस.ए. समय-समय पर सौंपती रहेगी।

डाटा बेस तैयार करना

एस.एल.एस.ए.स समस्त विद्यमान नीतियों योजनाओं, विनियमों, निदेश, निवारण, नियम, उदघोषणाओं तथा अभिलेखों का डाटाबेस तैयार करेंगे जो स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थों के प्रभावी निवारण, रोकथाम उन्मूलन पर उपलब्ध  होंगे और इसे अपने वेबसाइट पर अपलोड करेंगे और नालसा को इस विषय में बताएँगे।

विभिन्न योजनाओं को लागू करना

  1. एस.एल.एस.ए.स जन साधरण को और विशेष रूप से ड्रग दुरुपयोग के पीड़ितों, उनके परिवारों तथा नशामुक्ति पुनर्वास केन्द्रों के कार्यकारियों को नीतियों, योजनाओं, कार्यक्रमों के विषय में सूचना फैलाने  हेतु समस्त कदम उठाएंगे।
  2. विशेष इकाइयाँ ऐसी सूचना को प्रमुखता से अपने कार्यालय में दर्शायेंगी तथा उचित पुस्तिकाएं/ पर्चे / तख्तियाँ, आदि को छपवाएगी, जैसा कि एस.एल.एस.ए.स द्वारा अनुमोदित हो।

अवैध उपजाव का नष्टीकरण

स्वापक एवं मनः प्रभावी पदार्थ बनाने में प्रयोग किये जाने वाले भाँग तथा अफीम  के साथ अन्य किसी पौधे की अवैध  खेती  के नष्टीकरण में एस.एल.एस.ए.स राज्य सरकार का सहयोग करेंगी। एस.एल.एस.ए.स राज्य सरकार से यह भी आग्रह करेंगी कि ऐसे नष्टीकरण कार्य को मनरेगा योजना के अंतर्गत स्वीकार्य कार्य के रूप में सम्मिलित किया जाए। यह बड़े स्तर पर अवैध  पौधें के नष्टीकरण का रास्ता प्रशस्त करेगी और इसके साथ ही इस पूरे अभियान में समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित करेगा।

भूमि स्तर पर स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं की भागीदारी

इन संस्थाओं की भागीदारी निम्न प्रकार से होगी -

  1. विशेष इकाइयां पंचायती राज संस्थाओं के साथ मिलकर उन क्षेत्रों को जहाँ चरस/गांजा, इत्यादि जैसे पदार्थों को अवैध  रूप से उपजाया जाता है  की शिनाखत करेगी / विशेष इकाइयों द्वारा इस प्रकार तैयार की गई रिपोर्ट डी.एस.एल.ए. चेयरमैन के द्वारा एस.एल.एस.ए. को अग्रेषित की जायेगी एवं कार्यपालक अध्यक्ष, एस.एल.एस.ए. के अनुमोदन से मामले को उचित कार्रवाई हेतु संबंधित प्राधिकारियों के साथ उठाया जाएगा।
  2. विशेष इकाइयाँ ड्रग की लत वाले व्यक्तियों एवं सुई से ड्रग लेने वाले व्यक्तियों की पहचान हेतु, उनके उपचार एवं पुनर्वास हेतु प्रबंध  करने हेतु पंचायती राज संस्थाओं की सहयता लेंगी।
  3. विशेष इकाइयाँ ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रग के दुष्प्रभावों के बारें में जागरूकता फैलाने  हेतु पंचायती राज संस्थाओं की सहायता भी लेंगी।
  4. विशेष इकाइयों को, जहाँ तक संभव हो, ऐसे प्रचार में महिला मण्डलों एवं युवक मंडलों अथवा क्षेत्र  के अन्य समान स्वयं सहायता समूहों के साथ जुड़ना चाहिए।

जागरूकता

विद्यालयों और महाविद्यालयों में जागरुकता

विद्यालयों और महाविद्यालयों में, छात्रों  को ड्रग्स के दुष्प्रभावों के बारे में जागरुक बनाने हेतु, विशेष इकाईयाँ विद्यालयों और महाविद्यालयों में जागरुकता एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम चलाने हेतु, विद्यालयों में विधिक  साक्षरता क्लबों और महाविद्यालयों में विधिक सेवा क्लिनिकों के साथ समन्वय स्थापित करेंगी।

जागरुकता और संवेदनशीलता कार्यक्रमों को विभिन्न तरीकों से आयोजित किया जा सकता हैं, जैसे-

  • विद्यालयों/विद्यालयों के समूह में ड्रग दुरूपयोग के विरुद्ध  यात्रा के बैनर के अंतर्गत क्षेत्र  के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सम्मिलित करते हुए जागरुकता कार्यक्रम आरंभ करना।
  • जागरुकता शिविर द्वारा अभिभावकों-अध्यापकों की नियमित बैठकों के आयोजन द्वारा।
  • सामूहिक साक्षरता अभियानों द्वारा।
  • परिसंवाद, संगोष्ठी, वाद-विवादों आदि के कार्यक्रमों द्वारा।
  • ड्रग दुरूपयोग के दुष्प्रभावों के बारे में प्रश्नोत्तरी तथा निबन्ध्-लेखन प्रतियोगिताओं के आयोजन द्वारा।

नुक्कड़  नाटकों -इसी प्रकार के किसी अन्य तथा नए तरीकों द्वारा। कोई अन्य इसके समान तथा नए तरीकों द्वारा।

  • विद्यालयों/महाविद्यालयों के अध्यापकों को भी जागरुकता/संवेदनशील कार्यकर्मों में भागीदार बनाना चाहिये।
  • जागरुकता/संवेदनशीलता कार्यक्रमों में नालसा/एस.एल.एल.ए. द्वारा निर्मित प्रचार-पुस्तिकाओं/पुस्तिकाओं व पर्चो को छात्रों  में वितरित करना चाहिये।
  • ऐसे प्रचार-पुस्तिकाओं/पर्चो को सभी जागरुकता अभियानों में और मुख्य  कार्यालयों एवं विधिक सेवा क्लिीनिकों में  वितरित किया जाएगा।
  • विद्यालय/महाविद्यालय पाठ्‌क्रम में ड्रग दुरूपयोग पर अध्याय को शामिल करना- विद्यालय एवं महाविद्यालय के पाठ्‌क्रम में आवश्यक रूप से ड्रग दुरूपयोग पर अध्याय शामिल करने हेतु संबंधित शिक्षा परिषदों एवं विश्वविद्यालयों से निवेदन करना।

ड्रग दुरूपयोग के पीड़ितों के परिवारों को जागरूक करना।

जिन परिवारों में बच्चों और अभिभावकों के बीच स्नेहमय संबंध शिथिल या खत्म हो जाते हैं अथवा जिनके अभिभावक या परिवार-जन ड्रग/मादक पदार्थों का प्रयोग करते हैं, सामान्यता वे बच्चे ड्रग दुरूपयोग के पीड़ित बन जाते हैं।

  1. विशेष इकाईयों को ड्रग दुरूपयोग के पीड़ितों के परिवारों और उन अभिभावकों को जो किसी एक अथवा अन्य प्रकार के नशो की लत के आदि  हैं, पहचानना चाहिए एवं उनको अपने बच्चों के साथ पैतृक संबंध बनाने हेतु संवेदनशील बनाना चाहिए। अभिभावकों को बच्चों के साथ बातचीत करने के लिए राजी करने, उनके क्रिया-कलापों के पर्यवेक्षण और अध्यापकों से उनके छात्रों  और उनके व्यवहार के बारे में बात करने एवं नशों की लत पहचानने की और इसके इलाज की जागरूकता पर ध्यान केन्द्रित किया जाना चाहिए।
  2. जागरुकता लाई जानी चाहिए ताकि लत के कलंक को मिटाया जा सके व इससे उत्पन्न मानसिक पीड़ाओं का उपचार किया जा सके क्योंकि नशों की लत को भी किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के रूप में मान्यता मिलें और इसका जल्द से जल्द उपचार किया जा सकें।

लावारिस बच्चों में जागरूकता

  • ड्रग दुरूपयोग के पीड़ितों में सर्वाधिक  संख्या  लावारिस बच्चों की है। ये सबसे अधिक  उपेक्षित एवं कमजोर वर्ग है, सामान्यताः परित्यक्त एवं उनके परिवारों द्वारा छोड़े गये हैं। इसलिए, लावारिस बच्चों के साथ कार्य करने वाली एनजीओ के साथ इनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने की अति आवश्यकता है।
  • विशेष इकाईयाँ व्यसनी लावारिस और शहरी स्लम बस्ती के बच्चों को पहचान करेंगी और उनको नशा-मुक्ति केंद्र (केन्द्रों) या  पुनर्वास केंद्र (केन्द्रों), जैसी भी स्थिति हो, में दाखिला करने हेतु प्रबंध  करेंगी।

ड्रग दुरूपयोग के पीड़ितों के बीच जागरुकता

ड्रग की लत वाले व्यक्तियों की पहचान के साथ, विशेष इकाईयाँ मनोचिकित्सकों एवं डाक्टरों के साथ मिलकर उनके लिए नियमित संवेदनशील कार्यक्रम कार्यक्रमोंद्ध का संचालन करेंगी। ऐसे कार्यक्रमों में प्रेरणास्रोत व्यक्तियों और खेल, सिनेमा, साहित्य आदि के क्षेत्र  में सफल ता प्राप्त व्यक्तियों को सम्मिलित किया जायेगा।

यौन कर्मियों हेतु जागरुकता कार्यक्रम

विशेष इकाईयाँ रेड-लाइट क्षेत्रों  में यौन कर्मियों और उनके बच्चों को ड्रग दुरूपयोग के दुष्परिणामों के बारे में बताने के लिए युक्तिपूर्वक जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन करेंगी।

जेलों में जागरूकता कार्यक्रम

विधिक सेवा संस्थान जेल के कैदियों तथा जेल स्टाफ  के लिए स्वापक औषधियों के दुष्प्रभाव के विषय में समय-समय पर जागरूकता एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित करेगा।

आम जनता के बीच जागरूकता

  1. विशेष इकाइयां स्वापक पदार्थों की गैरकानूनी बिक्री अथवा उपभोग के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने  पर विशेष ध्यान देते हुए ऐसे क्षेत्रों  में जहां किसानों को अफीम  अथवा ऐसे अन्य पौधें की खेती की मंजूरी प्राप्त है, समय-समय पर स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 पर विधिक  साक्षरता शिविर आयोजित करेंगी।
  2. आम जनता को इस बात के प्रति जागरूक बनाया जाएगा कि प्रतिबंधित  व वर्जित औषधियों /ड्रग्स के गैरकानूनी कब्जे, ढुलाई, बिक्री व खेती आदि के बारे में पुलिस को गुप्त सूचना देना। कानून के अंतर्गत संरक्षित है तथा उनकी पहचान गुप्त रखी जाती है।
  3. विशेष इकाइयां परिवाहकों (ट्रांसपोर्टरों) व टैक्सी चालकों को ड्रग्स के परिणामों व दुष्प्रभावों के बारे में साक्षर बनाने के लिए भी नियमित रूप से विधिक  साक्षरता शिविर आयोजित करेंगी।
  4. विधिक सेवा संस्थान विशेष इकाइयाँ स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम  के कड़े प्रावधानों  तथा ड्रग्स के दुरूपयोग के बारे में सार्वजनिक स्थलों जैसे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्‌डे, सरकारी व निजी विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, पंचायत भवन, न्यायालयों, जिला कलक्टरी, उपमंडल दंडाधिकारी कार्यालयों आदि पर सूचनापट्‌ट विज्ञापन पट्‌ट आदि प्रदर्शित करेंगी।
  5. विशेष इकाइयाँ ड्रग्स के दुरूपयोग के दुष्प्रभावों के बारे में गाँवों, मेलों व त्योहारों में जागरूकता शिविर आयोजित करेंगी।
  6. विशेष इकाइयां पुनर्वास कालोनियों, आवासीय क्षेत्रों, बाजारों में विभिन्न संगठनों/समितियों के साथ मिलकर जागरूकता शिविर आयोजित करेंगी।
  7. एस.एल.एस.ए. डाक विभाग, कोरियर एजेंसियों तथा वित्तीय संस्थानों को उनके कर्मचारियों को इन एजेंसियों के माध्यम से गुप्त रूप से ड्रग्स की आवाजाही ढुलाई के प्रति संवेदनशील रहने के लिए शामिल करने हेतु प्रयास करेगी।

केमिस्ट व औषधि / ड्रग्स विक्रेताओं के बीच जागरूकता

  • विशेष इकाइयाँ केमिस्ट व औषधि विक्रेताओं को ड्रग्स के दुष्प्रभाव के प्रति संवेदनशील बनाएगी।
  • केमिस्टों को इस बात का प्रशिक्षण दिया जाए कि वे नियमित रूप से चिकित्सीय ड्रग्स खरीदने वाले बच्चों व युवाओं के प्रति सतर्क रहें व उन्हें यह ड्रग्स बेचने से इंकार करें।
  • ड्रग्स बेचने वालों की पहचान की जायेगी तथा उनके लिए भी समान रूप से संवेदनशील बनाने वाले कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
  • पुलिस को भी संवेदनशील बनाया जा सकता है कि वह गली विक्रेताओं, पान की दुकानों आदि में संदिग्ध् गतिविधियों  पर नजर रखे व इस व्यसन की रोकथाम में शामिल हो।

इलेक्ट्रानिक व प्रिंट मीडिया के द्वारा जागरूकता

एस.एल.एस.ए. को ड्रग्स के दुष्प्रभावों व इससे छुटकारा पाने के साधनों पर नियमित रेडियो वार्ताएं व टीवी कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए। इन कार्यक्रमों में न्यायिक अधिकारियों, वकीलों, मनोवैज्ञानिकों, मनोचिकित्सकों, पुलिस अधिकारियों, आदर्श व्यक्तियों आदि को शामिल किया जाएगा।

नशामुक्ति/पुनरुद्धार केन्द्रों के साथ समन्वय

  1. विशेष इकाइयां माह में कम से कम एक बार अपनी अधिकार  क्षेत्र  में आने वाले नशामुक्ति व पुनर्वास केन्द्रों का दौरा करेंगी। विशेष इकाइयाँ तालुका के भीतर पुनर्वास व नशामुक्ति केन्द्रों की एक सूची तैयार करेंगी तथा सूचना को लगातार अद्यतन करेंगी । यह इस सूची को इन्हें चलाने वाले व इनकी पृष्ठभूमि के ब्योरे सहित एस.एल.एस.ए. को भी भेजेंगी।
  2. विशेष इकाइयाँ पुनर्वास/ नशामुक्ति केन्द्रों में सुविधाओं की पर्याप्तता का आकलन करने हेतु इनमें प्रदान की गयी सुविधाओं का निरीक्षण करेंगी।
  3. विशेष इकाइयाँ सलाहकार, मनोवैज्ञानिकों व डाक्टरों के दौरों के बारे में अभिलेख का निरीक्षण करेंगी।
  4. विशेष इकाइयाँ यह देखने हेतु कि ड्रग्स पुनर्वास केन्द्रों में स्टाफ  की कमी न हो तथा स्टाफ पीड़ितों की संख्या  के अनुरूप हो, कर्मचारियों के अनुपात की जाँच करेंगी।
  5. विशेष इकाइयों को जब भी कर्मचारियों की संख्या  या आधारभूत सुविधाओं में कमी नजर आए, वे इस संबंध में डी.एल.एस.ए. को उपयुक्त सिफारिशें करेंगी जो मामले को सम्बन्ध प्राधिकारियों तक ले जायेगी तथा यह सुनिश्चित करेगी कि कमियाँ पूरी कर दी गयी हैं।
  6. यदि विशेष इकाई पीड़ितों के मानव अधिकार  का उल्लंघन देखती है, तो वह तुरंत टी.एल.एस.सी. के अध्यक्ष को एक रिपोर्ट दाखिल करेगी जो इस रिपोर्ट पर गौर करेंगे और कानूनी कार्यवाही करने से पहले मामले पर स्वयं विचार करेंगे । टी.एल.एस.सी. उन मामलों में कानूनी सहायता भी प्रदान करेगी जहां पीड़ित की ओर से कानूनी कार्यवाही की जानी हो।
  7. विशेष इकाई पुनर्वास केन्द्रों से सूचना भी प्राप्त करेंगी एवं संबंधित डी.एल.एस.ए. को मासिक रिपोर्ट भेजेगी जिसमें पीड़ितों का ब्यौरा, की गयी गतिविधियाँ , मनोचिकित्सकों व डाक्टरों के दौरे का विवरण एवं विशेष इकाई की रिपोर्ट पर किये गए सुधार के उपायों, यदि कोई हों, को भी दिया जाएगा।
  8. विशेष इकाई पीड़ितों के लिए समय-समय पर जागरूकता शिविर का प्रबंध  एवं आयोजन करेगी। सांस्कृतिक एवं अन्य सामाजिक रूप से सक्रिय समूहों को भी ऐसे जागरूकता शिविरों में पीड़ितों को समाज की मुख्य  धारा में शामिल करने के उद्देश्य के साथ शामिल किया जाएगा।

हिस्सेदारों का प्रशिक्षण / रिफ्रेशर कोर्स

एस.एल.एस.ए. स्वयं अथवा राज्य न्यायिक अकादमी के साथ मिलकर न्यायिक अधिकारियों, अभियोजकों, विधिक  परिषद के सदस्यों, पुलिस अधिकारियों एवं न्यायालय के मंत्रालयी कर्मचारियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम, रिफ्रेशर कोर्स, विशेष प्रशिक्षण एवं सम्मलेन का प्रबंध  एवं आयोजन करेगी।

26 जून, को ड्रग्स के दुरूपयोग के विरुद्ध  अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाना

समस्त विधिक सेवा संस्थाएं विशेष इकाई की सहायता से प्रतिवर्ष 26 जून को ड्रग्स के दुरूपयोग एवं इसके अनैतिक व्यापार के विरुद्ध  अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने के लिए व ड्रग्स के दुरूपयोग व इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाने  के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन करेंगे।

ड्रग्स के व्यसन से सुधरे हुए व्यक्तियों का सहयोग

विशेष इकाई अपने क्षेत्र  में ऐसे लोगों की पहचान करेगी जो पूर्व में ड्रग्स के व्यसन में लिप्त रहे हों, एवं जागरूकता शिविरों में उनके अनुभव को बताने हेतु उनको शामिल करेगी।

ड्रग्स विरोध की  क्लब

  1. विशेष इकाइयां विद्यालयों व महाविद्यालयों को निवेदन करेंगी व उन्हें विद्यालयों/महाविद्यालया में ड्रग्स विरोध की क्लब खोलने के लिए शामिल करेंगी ताकि विद्यार्थी आदर्श बनें व अपने साथियों को ड्रग्स के दुष्प्रभावों की जानकारी दें।
  2. विशेष इकाइयाँ विद्यालयों/महाविद्यालयों में ड्रग्स विरोध की क्लबों द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगी। जैसा कि पहले वर्णित है, इसके लिए विधिक  साक्षरता क्लब व विधिक सेवा क्लीनिक का प्रयोग किया जाना चाहिए।

अर्धविधिक स्वयंसेवियों को शामिल करना

अर्धविधिक स्वयंसेवियों को विभिन्न योजनाओं के बारे में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा जो बदले में भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में जायेंगे व लोगों को स्वापक औषधियों  और मनः प्रभावी पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक बनायेंगे।

अच्छे कार्यों की सराहना

प्रत्येक वित्त वर्ष के अंत में, एस.एल.एस.ए. द्वारा राज्य में सर्वश्रेष्ठ विशेष इकाइयों के सदस्यों के द्वारा किये गए विशिष्ठ कार्यों को सराहा जाना चाहिए।

स्रोत: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नालसा, भारत सरकार

 



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