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किशोर न्यायिक बोर्ड

किशोर न्यायिक बोर्ड

4(1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार, प्रत्येक जिले में एक या अधिक किशोर न्याय बोडों को, इस अधिनियम के अधीन विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों के संबंध में शक्तियों का प्रयोग करने और उसके कृत्यों का निर्वहन करने के लिए, स्थापित करेगी।

(2) बोर्ड एक ऐसे महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट, जो मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (जिसे इसमें इसके पश्चात् प्रधान मजिस्ट्रेट कहा गया है) न हो, जिसको पास कम से कम तीन वर्ष का अनुभव हो और दो ऐसे सामाजिक कार्यकर्ताओं से मिलकर बनेगा जिनका चयन ऐसी रीति से किया जाएगा, जो विहित की जाए और उनमें से कम से कम एक महिला होगी। यह एक न्यायपीठ का रूप लेगा और ऐसी न्यायपीठ को वही शक्तियां प्राप्त होंगी, जो दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 द्वारा, यथास्थिति, किसी महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट को प्रदत्त की गई हैं।

(3) किसी भी सामाजिक कार्यकर्ता को बोर्ड के सदस्य के रूप में नियुक्त तभी किया जाएगा जब ऐसा व्यक्ति कम से कम सात वर्ष तक बालकों से तात्पर्यित स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याण संबंधी क्रियाकलापों में सक्रिय रूप से अंतर्वलित हो या बाल मनोविज्ञान, मनोरोग विज्ञान, सामाजिक विज्ञान या विधि में डिग्री सहित व्यवसायरत वृत्तिक हो।

(4) कोई भी व्यक्ति बोर्ड के सदस्य के रूप में चयन के लिए पात्र नहीं होगा, यदि,-

(i) उसका मानव अधिकारों या बाल अधिकारों का अतिक्रमण किए जाने का कोई पिछला रिकार्ड है;

(ii) उसे ऐसे किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है जिसमें नैतिक अधमता अंतर्वलित है और ऐसी दोषसिद्धि को उलटा नहीं गया है या उसे उस अपराध के संबंध में पूर्ण क्षमा प्रदान नहीं की गई है;

(iii) उसे केद्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या केंद्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन किसी उपक्रम या निगम की सेवा से हटा दिया गया है या पदच्युत कर दिया गया है;

(iv) वह कभी बालक दुव्यवहार या बाल श्रम के नियोजन या किसी अन्य मानव अधिकारों के अतिक्रमण या अनैतिक कार्य में लिप्त रहा है।

बोर्ड में का प्रधान मजिस्ट्रेट

(5) राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सभी सदस्यों, जिनके अंतर्गत बोर्ड में का प्रधान मजिस्ट्रेट भी है, का देखरेख, संरक्षण, पुनर्वासन, बालकों के लिए विधिक उपबंधों और न्याय के संबंध में ऐसा समावेशन, प्रशिक्षण और संवेदीकरण, जो विहित किया जाए, उसकी नियुक्ति की तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर अधिष्ठापन किया जाए।

बोर्ड के सदस्यों की पदावधि

(6) बोर्ड के सदस्यों की पदावधि और वह रीति जिसमें ऐसा सदस्य त्यागपत्र दे सकेगा, ऐसी होगी, जो विहित की जाए।

बोर्ड की सदस्यता

(7) बोर्ड के किसी सदस्य की, प्रधान मजिस्ट्रेट के सिवाय, नियुक्ति को राज्य सरकार द्वारा जांच करने के पश्चात् समाप्त किया जा सकता है, यदि वह सदस्य

(i) इस अधिनियम के अधीन निहित की गई शक्ति के दुरुपयोग का दोषी पाया गया है;

(ii) बोर्ड की कार्यवाहियों में बिना किसी विधिमान्य कारण के लगातार तीन मास तक भाग लेने में असफल रहता है; या

(iii) किसी वर्ष में तीन-चौथाई से कम बैठकों में भाग लेने में असफल रहता है; या

(iv) सदस्य के रूप में अपनी अवधि के दौरान उपधारा (4) के अधीन अपात्र हो जाता है।

जहां किसी बालक के संबंध में इस अधिनियम के अधीन जांच आरंभ कर दी गई है और ऐसी जो जांच के दौरान वह बालक अठारह वर्ष की आयु पूरी कर लेता है वहां, इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड द्वारा जांच जारी रखी जा सकेगी और उस व्यक्ति के विरुद्ध आदेश इस रूप में पारित किए जा सकेंगे मानो ऐसा व्यक्ति अभी भी बालक है।

जांच की प्रक्रिया के दौरान बालक

(1) ऐसा कोई व्यक्ति, जिसने अठारह वर्ष की आयु पूरी कर ली है और उसे उस समय जब वह अठारह वर्ष की आयु से नीचे का था, किसी अपराध को करने के लिए गिरफ्तार किया जाता है तो उस व्यक्ति को इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए जांच की प्रक्रिया के दौरान बालक समझा जाएगा।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति, यदि उसे बोर्ड द्वारा जमानत पर छोड़ा नहीं जाता है, जांच की प्रक्रिया के दौरान सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा।

(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति को इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन विनिर्दिष्ट प्रक्रिया के अनुसार माना जाएगा।

बोर्ड की बैठक

7. (1) बोर्ड ऐसे समयों पर अपनी बैठकें करेगा और अपनी बैठकों में कारबार के संव्यवहार के बारे में ऐसे नियमों का अनुपालन करेगा, जो विहित किए जाएं, और यह सुनिश्चित करेगा कि सभी प्रक्रियाएं बाल हितैषी हों और यह कि वह स्थान बालक को अभित्रास करने वाला अथवा नियमित न्यायालय को समान न हो ।

(2) विधि का उल्लंघन करने वाले बालक को बोर्ड के, जब बोर्ड की कोई बैठक न हो, किसी व्यष्टिक सदस्य क समक्ष पेश किया जा सकगा ।

(3) बोर्ड, बोर्ड के किसी सदस्य के अनुपस्थित होते हुए भी कार्य कर सकेगा और बोर्ड द्वारा पारित कोई भी आदेश कार्यवाहियों के किसी प्रक्रम के दौरान केवल किसी सदस्य की अनुपस्थिति के कारण ही अविधिमान्य नहीं होगा: परंतु मामले के अंतिम निपटारे के समय या धारा 18 की उपधारा (3) के अधीन कोई आदेश करने में कम से कम दो सदस्य, जिसके अंतर्गत प्रधान मजिस्ट्रेट भी है, उपस्थित रहेंगे।

(4) बोर्ड के सदस्यों के बीच अंतरिम या अंतिम निपटारे में कोई मतभेद होने की दशा में, बहुमत की राय अभिभावी होगी, किंतु जहां ऐसा कोई बहुमत नहीं है, वहां प्रधान मजिस्ट्रेट की राय अभिभावी होगी।

गठित बोर्ड को विधि का और उतरदायित्व

8. (1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, और इस बोर्ड की शक्तियां कुल्य अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय किसी जिले के लिए गठित बोर्ड को विधि का और उतरदायित्व। उल्लंघन करने वाले बालकों के संबंध में इस अधिनियम के अधीन उस बोर्ड के अधिकारिता क्षेत्र में सभी कार्यवाहियों को अनन्य रूप से निपटाने की शक्ति होगी।

(2) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन बोर्ड को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग उच्च न्यायालय और बालक न्यायालय द्वारा भी तब जब कार्यवाहियां अपील, पुनरीक्षण में या अन्यथा धारा 19 के अधीन उसके समक्ष आती हैं, किया जा सकेगा।

(3) बोर्ड के कृत्यों और उत्तरदायित्वों के अंतर्गत निम्नलिखित भी आएंगे

(क) प्रक्रिया के प्रत्येक क्रम पर बालक और माता-पिता या संरक्षक की सूचनाबद्ध

सहभागिता को सुनिश्चित करना;

(ख) यह सुनिश्चित करना कि बालक के अधिकारों की, बालक की गिरफ्तारी, जांच, पश्चात्वर्ती देखरेख और पुनर्वासन की संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान, संरक्षा हो;

(ग) विधिक सेवा संस्थाओं के माध्यम से बालक के लिए विधिक सहायता की उपलब्धता सुनिश्चित करना;

(घ) बालक को बोर्ड, जब कभी आवश्यक हो, यदि वह कार्यवाहियों में प्रयुक्त भाषा को समझने में असमर्थ है, दुभाषिया या अनुवादक, जिसके पास ऐसी अहंताएं और अनुभव हो, ऐसी फीस का, जो विहित की जाए, संदाय करने पर उपलब्ध कराएगा;

(ड) परिवीक्षा अधिकारी या यदि परिवीक्षा अधिकारी उपलब्ध नहीं है तो बाल कल्याण अधिकारी या किसी सामाजिक कार्यकर्ता को मामले का सामाजिक अन्वेषण करने और सामाजिक अन्वेषण रिपोर्ट उन परिस्थितियों को अभिनिश्चित करने के लिए, जिनमें अभिकथित अपराध किया गया था, उसके बोर्ड के समक्ष प्रथम बार पेश किए जाने की तारीख से पन्द्रह दिन की अवधि के भीतर प्रस्तुत करने का निदेश देना;

(च) विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों के मामलों का धारा 14 में विनिर्दिष्ट जांच की प्रक्रिया के अनुसार न्यायनिर्णयन और निपटारा करना;

(छ) विधि का उल्लंघन करने के अभिकथित बालकों से, जिनके बारे में यह कथन किया गया है कि किसी प्रक्रम पर देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता है, संबंधित मामलों को, इसके द्वारा इस बात को मानते हुए कि विधि का उल्लंघन करने वाला बालक तत्समय देखरेख की आवश्यकता वाला बालक हो सकता है समिति और बोर्ड, दोनों के उसमें अन्तर्वलित होने की आवश्यकता है, समिति को अंतरित करना;

(ज) मामले का निपटारा करना और अंतिम आदेश पारित करना जिसके अन्तर्गत बालक के पुनर्वास के लिए व्यष्टिक देखरेख योजना भी है, जिसके अन्तर्गत परिवीक्षा अधिकारी या जिला बालक संरक्षण एकक या किसी गैर सरकारी संगठन के सदस्य द्वारा ऐसी अनुवर्ती कार्रवाई भी है जो अपेक्षित हो;

(झ) विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों की देखरेख के बारे में 'योग्य व्यक्ति' घोषित करने के लिए जांच करना;

(ज) विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों के लिए आवासीय सुविधाओं का प्रत्येक मास कम से कम एक निरीक्षण दौरा करना और सेवाओं की क्वालिटी में सुधार के लिए जिला बालक संरक्षण एकक और राज्य सरकार को कार्रवाई की सिफारिश करना;

परंतु मामले के अंतिम निपटारे के समय या धारा 18 की उपधारा (3) के अधीन कोई आदेश करने में कम से कम दो सदस्य, जिसके अंतर्गत प्रधान मजिस्ट्रेट भी है, उपस्थित रहेंगे।(4) बोर्ड के सदस्यों के बीच अंतरिम या अंतिम निपटारे में कोई मतभेद होने की दशा में, बहुमत की राय अभिभावी होगी, किंतु जहां ऐसा कोई बहुमत नहीं है, वहां प्रधान मजिस्ट्रेट की राय अभिभावी होगी।

बोर्ड की शक्तियां

8. (1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, और इस बोर्ड की शक्तियां कुल्य अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय किसी जिले के लिए गठित बोर्ड को विधि का और उतरदायित्व। उल्लंघन करने वाले बालकों के संबंध में इस अधिनियम के अधीन उस बोर्ड के अधिकारिता क्षेत्र में सभी कार्यवाहियों को अनन्य रूप से निपटाने की शक्ति होगी।

(2) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन बोर्ड को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग उच्च न्यायालय और बालक न्यायालय द्वारा भी तब जब कार्यवाहियां अपील, पुनरीक्षण में या अन्यथा धारा 19 के अधीन उसके समक्ष आती हैं, किया जा सकेगा।

(3) बोर्ड के कृत्यों और उत्तरदायित्वों के अंतर्गत निम्नलिखित भी आएंगे

(क) प्रक्रिया के प्रत्येक क्रम पर बालक और माता-पिता या संरक्षक की सूचनाबद्ध सहभागिता को सुनिश्चित करना;

(ख) यह सुनिश्चित करना कि बालक के अधिकारों की, बालक की गिरफ्तारी, जांच, पश्चात्वर्ती देखरेख और पुनर्वासन की संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान, संरक्षा हो;

(ग) विधिक सेवा संस्थाओं के माध्यम से बालक के लिए विधिक सहायता की उपलब्धता सुनिश्चित करना;

(घ) बालक को बोर्ड, जब कभी आवश्यक हो, यदि वह कार्यवाहियों में प्रयुक्त भाषा को समझने में असमर्थ है, दुभाषिया या अनुवादक, जिसके पास ऐसी अहंताएं और अनुभव हो, ऐसी फीस का, जो विहित की जाए, संदाय करने पर उपलब्ध कराएगा;

(ड) परिवीक्षा अधिकारी या यदि परिवीक्षा अधिकारी उपलब्ध नहीं है तो बाल कल्याण अधिकारी या किसी सामाजिक कार्यकर्ता को मामले का सामाजिक अन्वेषण करने और सामाजिक अन्वेषण रिपोर्ट उन परिस्थितियों को अभिनिश्चित करने के लिए, जिनमें अभिकथित अपराध किया गया था, उसके बोर्ड के समक्ष प्रथम बार पेश किए जाने की तारीख से पन्द्रह दिन की अवधि के भीतर प्रस्तुत करने का निदेश देना;

(च) विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों के मामलों का धारा 14 में विनिर्दिष्ट जांच की प्रक्रिया के अनुसार न्यायनिर्णयन और निपटारा करना;

(छ) विधि का उल्लंघन करने के अभिकथित बालकों से, जिनके बारे में यह कथन किया गया है कि किसी प्रक्रम पर देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता है, संबंधित मामलों को, इसके द्वारा इस बात को मानते हुए कि विधि का उल्लंघन करने वाला बालक तत्समय देखरेख की आवश्यकता वाला बालक हो सकता है समिति और बोर्ड, दोनों के उसमें अन्तर्वलित होने की आवश्यकता है, समिति को अंतरित करना;

(ज) मामले का निपटारा करना और अंतिम आदेश पारित करना जिसके अन्तर्गत बालक के पुनर्वास के लिए व्यष्टिक देखरेख योजना भी है, जिसके अन्तर्गत परिवीक्षा अधिकारी या जिला बालक संरक्षण एकक या किसी गैर सरकारी संगठन के सदस्य द्वारा ऐसी अनुवर्ती कार्रवाई भी है जो अपेक्षित हो;

(झ) विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों की देखरेख के बारे में 'योग्य व्यक्ति' घोषित करने के लिए जांच करना;

(ज) विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों के लिए आवासीय सुविधाओं का प्रत्येक मास कम से कम एक निरीक्षण दौरा करना और सेवाओं की क्वालिटी में सुधार के लिए जिला बालक संरक्षण एकक और राज्य सरकार को कार्रवाई की सिफारिश करना;

(ट) विधि का उल्लंघन करने वाले किसी बालक के विरुद्ध, इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन कारित अपराधों के संबंध में, इस बारे में की गई किसी शिकायत पर, प्रथम इत्तिला रिपोर्ट रजिस्टर करने का पुलिस को आदेश देना,

(ठ) देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले किसी बालक के विरुद्ध इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन कारित अपराधों के संबंध में इस बारे में समिति द्वारा प्रथम इत्तिला रिपोर्ट रजिस्टर करने का पुलिस को आदेश देना;

(ड) इस बात की जांच करने के लिए कि क्या वयस्कों के लिए बनी जेलों में कोई बालक डाला गया है, उन जेलों का नियमित निरीक्षण करना और ऐसे बालक को संप्रेक्षण गृह में स्थानांतरित किए जाने के तत्काल उपाय करना; और

(ढ) कोई अन्य कुत्य, जो विहित किया जाए।

तत्काल कार्यवाही

9. (1) जब किसी मजिस्ट्रेट की जो इस अधिनियम के अधीन बोर्ड की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सशक्त नहीं है, यह राय है कि वह व्यक्ति, जिसके बारे में यह अभिकथन किया गया है कि उसने अपराध किया है, और उसके समक्ष लाया गया है, कोई बालक है तो वह ऐसी राय को अविलंब अभिलेखबद्ध करेगा और उस बालक को तत्काल ऐसी कार्यवाही के अभिलेख के साथ कार्यवाहियों पर अधिकारिता रखने वाले बोर्ड को भेजेगा।

(2) यदि वह व्यक्ति, जिसके बारे में यह अभिकथन किया गया है कि उसने अपराध किया है, बोर्ड से भिन्न किसी न्यायालय के समक्ष यह दावा करता है कि वह व्यक्ति बालक है या अपराध के किए जाने की तारीख को बालक था, या यदि न्यायालय की स्वयं यह राय है कि वह व्यक्ति अपराध के किए जाने की तारीख को बालक था, तो उक्त न्यायालय उस व्यक्ति की आयु की अवधारणा करने के लिए ऐसी जांच करेगा, ऐसा साक्ष्य लेगा जो आवश्यक हो (किन्तु शपथपत्र नहीं) और उस व्यक्ति की यथासंभव निकटतम आयु का कथन करते हुए मामले के निष्कर्ष अभिलिखित करेगा: परन्तु ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय के समक्ष किया जा सकेगा और उसको किसी भी प्रक्रम पर, मामले का अंतिम निपटारा हो जाने के पश्चात् भी, स्वीकार किया जाएगा और उस दावे का अवधारण इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अनुसार किया जाएगा, भले ही वह व्यक्ति इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख को या उससे पूर्व बालक न रह गया हो।

(3) यदि न्यायालय का यह निष्कर्ष है कि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है और वह ऐसे अपराध के किए जाने की तारीख को बालक था, तो वह उस बालक को बोर्ड के पास, समुचित आदेश पारित करने के लिए भेजेगा और न्यायालय द्वारा पारित दंडादेश के, यदि कोई हो, बारे में यह समझा जाएगा कि उसका कोई प्रभाव नहीं है।

(4) यदि इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति को, जब उस व्यक्ति के बालक होने के दावे की जांच की जा रही है, संरक्षात्मक अभिरक्षा में रखा जाना अपेक्षित है, तो उस व्यक्ति को उस अंत:कालीन अवधि में सुरक्षित स्थान में रखा जा सकेगा।

स्रोत: विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार


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