অসমীয়া   বাংলা   बोड़ो   डोगरी   ગુજરાતી   ಕನ್ನಡ   كأشُر   कोंकणी   संथाली   মনিপুরি   नेपाली   ଓରିୟା   ਪੰਜਾਬੀ   संस्कृत   தமிழ்  తెలుగు   ردو

आकांक्षी जिलों का परिवर्तन - शिक्षा संकेतक

2022 का नया भारत

भारतीय अर्थ व्यवस्था उच्च विकास पथ पर अग्रसर है। यूएनडीपी के मानव विकास सूचकांक 2016 के अनुसार 188 देशों की सूची में यह 131वें स्थान पर था। अपने नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने की दृष्टि से इसकी उपलब्धि विकास गाथा के अनुरूप नहीं रही है। हालांकि, विभिन्न राज्य इस दृष्टि से विशिष्ट क्षमतावान हैं, फिर भी, उन्हें अपने नागरिकों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचा आदि में सुधार के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। राज्यों के अंदर भी बड़े पैमाने पर भिन्नताएं है। कुछ जिलों ने अच्छा प्रदर्शन किया है जबकि कुछ ने कठिनाई का सामना किया है। ऐसे ज़िले जो अर्ध विकसित क्षेत्र में आते है उनकी प्रगति में सुधार के लिए संगठित प्रयास करने की जरुरत है। फलस्वरूप एचडीआई की दृष्टि से देश की रैंकिंग में अत्यधिक वृद्धि होगी और सतत संधारणीय ध्येय (एसडीजी) को हासिल करने में भी मदद मिलेगी। यह 2022 तक नए भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

कार्यक्रम के तहत ध्यानाकर्षण के प्रमुख क्षेत्र

यह कार्यक्रम जन आंदोलन के दृष्टिकोण को अपनाते हुए जिले के समग्र सुधार के लिए है। इसमें सभी जिलों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्य निष्पादन के निम्नांकित प्रयास किये जायेंगे-

क)  स्वास्थ्य और पोषण

ख)  शिक्षा

ग) कृषि और जल संसाधन ।

घ) वित्तीय समावेशन और कौशल विकास

ङ) सड़क, पेयजल की उपलब्धता, ग्रामीण विद्युतीकरण और व्यक्तिगत पारिवारिक शौचालयों सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तार ।

मुख्य कार्य योजना

कार्यक्रम की मुख्य कार्य योजना निम्नानुसार है -

राज्य मुख्य प्रेरकों की भूमिका निभाएंगे।

प्रत्येक जिले की क्षमता के अनुसार कार्य करना।

विकास को जन आंदोलन बनाना, समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर युवाओं को शामिल करना।

सबल पक्षों की पहचान कर बेहतर परिणाम देने वाले क्षेत्रों को चिन्हित करना ताकि वे विकास के उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सके।

प्रतिस्पर्धा की भावना जगाने के लिए प्रगति का आंकलन और ज़िलों की रैंकिंग।

ज़िले राज्य स्तर पर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सर्वश्रेष्ठ स्थान पाने का प्रयास करेंगे।

कार्यक्रम के लिए संस्थागत प्रबंध

यह एक सामूहिक प्रयास है जिसमें राज्य मुख्य संचालक हैं।

केन्द्र सरकार के स्तर पर कार्यक्रम के क्रियान्वयन का दायित्व नीति आयोग का रहेगा। इसके अतिरिक्त, अलग-अलग मंत्रालयों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

हर जिले के लिए, अपर सचिव/संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को केन्द्रीय प्रभारी अधिकारी के रूप में मनोनीत किया गया है।

प्रभारी अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत विशिष्ट मुद्दों पर ध्यानाकर्षित करने और स्कीमों पर चर्चा के लिए सीईओ, नीति आयोग की संयोजकता में एक अधिकार प्राप्त समिति अधिसूचित की गई है।

इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन हेतु राज्यों से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित करने का भी अनुरोध किया गया है।

राज्यों में नॉडल अधिकारी/राज्य स्तरीय प्रभारी अधिकारी भी मनोनीत किये गए है।

जिलों का चयन

पारदर्शी मापदंडों के आधार पर 115 जिलों का चयन किया गया है। इन जिलों द्वारा अपने नागरिकों की गरीबी, अपेक्षाकृत कमजोर स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा की स्थिति तथा अपर्याप्त आधारभूत संरचना की दृष्टि से झेली जाने वाली चुनौतियों को शामिल करते हुए एक मिश्रित सूचकांक तैयार किया गया है। इन जिलों में वामपंथ, उग्रवाद से पीड़ित वे 35 जिले भी शामिल हैं जिन्हें गृह मंत्रालय द्वारा चयनित किया गया था।

संकेतक और कार्य संपादन में सुधार के उपाय

संकेतकों में सुधार के आसान उपाय नीचे दिए गए हैं –

क) मुख्य कार्य संपादन संकेतकों की पहचान - प्रत्येक विशिष्ट क्षेत्र में प्रगति को दर्शाने वाले महत्वपूर्ण संकेतकों को चिन्हित किया गया है।

ख) प्रत्येक जिले में वर्तमान स्थिति का पता लगाना और राज्य में सर्वश्रेष्ठ जिले की बराबरी का प्रयास करना - जिले को पहले अपनी स्थिति का पता लगाना चाहिए और राज्य में सर्वश्रेष्ठ जिले के साथ इसकी तुलना करनी चाहिए। अंत में इसे देश का एक सर्वश्रेष्ठ जिला बनने का प्रयास करना है।

ग) कार्य निष्पादन को सुधारना और अन्य जिलों के साथ प्रतिस्पर्धा के उपाय करना।

संकेतकों में सुधार के चरण

शिक्षा संकेतक

संकेतक – 1

(क)प्राथमिक (कक्षा 5) से उच्च प्राथमिक (कक्षा 6) में जाने की दर

योजना

एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान)

उपाय

  • सभी विद्यालयों में कक्षा 5 के विद्यार्थियों की संख्या का आंकलन ।
  • कक्षा 5 में विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए जिले के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सीटों की उपलब्धता का आंकलन करने हेतु जिला शिक्षा अधिकारी शिक्षकों को निर्देश देंगे।
  • सीटों की उपलब्धता के बारे में माता-पिता को सूचित करें ताकि विद्यार्थी बीच में ही पढ़ाई न छोड़ दें।
  • यदि कोई विद्यार्थी स्कूल छोड़ देता है तो कक्षा 5 के शिक्षक को उनके घर पर जाना चाहिए और उन्हें कक्षा 6 में प्रवेश लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • जिला कलेक्टर द्वारा इस पारगमन (ट्रान्जीशन) की मॉनीटरिंग की जाए और अच्छा कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाए।

 

संकेतक – 1(ख)

उच्च प्राथमिक (कक्षा 8) से माध्यमिक (कक्षा 9) में जाने की दर ।

योजनाएं

1)      एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान),

2)      आरएमएसए (राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान)

उपाय

  • सीटों की पहचान के लिए उठाए गए कदमों की तरह माध्यमिक विद्यालयों में भी कक्षा 8 और 9 के लिए कार्य करना।
  • विद्यालयों की लेखाजांच करना ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विद्यालयों में विद्यार्थियों की अपेक्षाओं को पूरा करने योग्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, जैसे - विद्यालय जाने वाली बालिकाओं की सुरक्षा, रजोनिवृत्ति संबंधी समुचित सुविधाएं, व्यावसायिक कौशल की शुरुआत आदि।

संकेतक – 2

शौचालय सुविधा - सक्रिय कन्या शौचालयों वाले विद्यालयों का प्रतिशत

योजनाएं

  • एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान),
  • आरएमएसए (राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान)

उपाय

  • शौचालयों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए पंचायती राज विभाग के तहत सेवाओं और निधियों (फन्ड्स) का समायोजन जिला कलेक्टर करेंगे। इस संबंध में भारत सरकार पहले ही। सलाह जारी कर चुकी है।
  • अभिसरण हेतु जिला कलेक्टर (डीसी) स्वच्छ भारत कोष (वित्त मंत्रालय) के तहत शौचालयों के निर्माण के लिए निधि प्राप्त करने हेतु मानव संसाधन विकास मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा और साक्षरता विभाग को प्रस्ताव भेज सकते हैं।
  • रजोनिवृत्ति के दौरान उचित देखरेख हेतु अभिनव तौर-तरीकों का प्रयोग करना। स्थानीय स्तर पर सैनिटरी नैपकिन तैयार करने से जुड़े कई सर्वोत्तम कार्य व्यवहार प्रचलन में हैं।

संकेतक – 3

सक्रिय पेयजल सुविधाओं वाले विद्यालयों का प्रतिशत

उपाय

  • पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ने दिनांक 15.03.2018 के अपने पत्र द्वारा सभी आकांक्षी जिलों में पाईपयुक्त जलापूर्ति के प्रावधान को मंजूरी दी है। जिला कलेक्टर को राज्य/ज़िले के संबंधित अधिकारी से सम्पर्क कर सभी विद्यालयों में पाईपयुक्त पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए।

संकेतक – 4

शैक्षिक परिणाम

क)    कक्षा 3 में गणित में परफोर्मेन्स

ख)   कक्षा 3 में भाषा में परफोर्मेन्स

ग)     कक्षा 5 में गणित में परफोर्मेन्स

घ)     कक्षा 5 में भाषा में परफोर्मेन्स

कक्षा 8 में गणित में परफोर्मेन्स कक्षा 8 में भाषा में परफोर्मेन्स योजनाएं - (1) एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान), (2) सीएसएसटीई (अध्यापक शिक्षा संबंधी केंद्र प्रायोजित स्कीम)

उपाय -

  • एनसीईआरटी की वेबसाइट के होमपेज पर नेशनल अचीवमेंट सर्वे-2017, पर क्लिक करके जिले की प्रगति का अध्ययन करना। यहां जिले का रिपोर्ट कार्ड प्रदर्शित किया जाता है।
  • शैक्षिक परिणामों की पहचान करना जिसके लिए विशेष हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।
  • शिक्षक प्रशिक्षण हेतु ज़िला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (डीआईईटी) अथवा ज़िले में किसी अन्य प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठन (एन जी ओ) से संपर्क करना।
  • कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराना। यह शिक्षण कार्य विद्यालय समय के पश्चात किया जा सकता है।
  • यह सुनिश्चित करना कि विद्यालय समय पर खुलें, कक्षा अध्यापक मौजूद रहें और पढाएं भी। शिक्षण परिणामों में सुधार हेतु विद्यालय प्रबंधन समिति, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा ग्राम पंचायतों का सहयोग प्राप्त करना।
  • विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को आनंददायी और आकर्षक बनाने हेतु शिक्षकों को प्रोत्साहित करना।

संकेतक – 5

महिला साक्षरता (15 वर्ष से अधिक)

योजना

  • प्रौढ़ शिक्षा योजना

उपाय

  • शिक्षित लोगों की पहचान करना, जैसे- राष्ट्रीय सेवा योजना और नेहरु युवा केन्द्र के स्वयंसेवी, सेवानिवृत्त सरकारी तथा अन्य व्यक्ति, होम मेकर्स आदि जो पढ़ाने के लिए इच्छुक और स्वप्रेरित हों।
  • प्रत्येक टीम में ऐसे 10 व्यक्तियों को शामिल करना जिनका नेतृत्व ऐसा शिक्षक करे जिसने प्रौढ़ शिक्षण का प्रशिक्षण प्राप्त किया हो। जिला शिक्षा अधिकारी ऐसे शिक्षकों को पहचानने में मदद करेगा।
  • महिला स्वयं सहायता समूहों, ग्राम पंचायत, आईसीडीएस कर्मचारियों, आशा सहयोगिनी या अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग लेना।
  • अध्यापन के लिए अभिनव तौर-तरीकों का विकास करना, जैसे संगीत और नाटक का उपयोग।

संकेतक - 6

विद्युत सुविधायुक्त माध्यमिक विद्यालयों का प्रतिशत

उपाय

  • दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 99.8 प्रतिशत गांवों का विद्युतीकरण कर दिया गया है। जिले के विद्युतीकृत गांवों में स्थित समस्त माध्यमिक विद्यालयों में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

संकेतक - 7

आरटीई द्वारा दर्शाए गये छात्र-शिक्षक अनुपात वाले प्रारंभिक विद्यालयों का प्रतिशत

योजना

  • एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान)

उपाय

  • जिला कलेक्टर द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया जायेगा के वे ऐसे प्रारंभिक विद्यालयों की सूची तैयार करें जिनमें आरटीई मानदंडों के अनुसार शिक्षकों की संख्या ज्यादा अथवा कम है।
  • ज़िले के भीतर शिक्षकों की पुनतैनाती करें ताकि अधिकतर विद्यालयों में आरटीई मानदंडों के अनुरुप अपेक्षित संख्या में शिक्षक लगाये जा सकें।
  • जिलाधिकारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शिक्षक विद्यालयों में नियमित रूप से आएं और कोई फर्जी शिक्षक न दिखाया जाए।

संकेतक – 8

शिक्षा सत्र शुरु होने के 1 माह के भीतर बच्चों को पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने वाले विद्यालयों का प्रतिशत

योजना

  • एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान)

उपाय

  • विद्यालय सत्र के अंत में, प्रत्येक सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय में बुक बैंक तैयार करने के लिए यथासंभव पाठ्यपुस्तकें वापस एकत्रित की जाएं।
  • यह सुनिश्चित करने का उत्तरदायित्व प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों को सौंपा जाना चाहिए। ये पाठ्यपुस्तकें बच्चों को अगले सत्र में वितरित की जा सकती हैं।
  • जिला कलेक्टर को राज्य सचिव, शिक्षा विभाग से यह सुनिश्चित करने के लिए बात करनी चाहिए कि उनके जिले में सभी प्रारंभिक विद्यालयों में नई पाठ्यपुस्तकें समय पर पहुंच जाएं।

 

स्रोत लिंक: भारत सरकार का नीति आयोग



© 2006–2019 C–DAC.All content appearing on the vikaspedia portal is through collaborative effort of vikaspedia and its partners.We encourage you to use and share the content in a respectful and fair manner. Please leave all source links intact and adhere to applicable copyright and intellectual property guidelines and laws.
English to Hindi Transliterate