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ब्लॉक स्तर पर 6000 मॉडल स्कूल की स्थापना

प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त, 2007 में अपने स्‍वतंत्रता दिवस अभिभाषण में कहा था-

''मैं राज्‍यों से शिक्षा को प्राथमिकता देने की प्रार्थना करता हूं, क्‍योंकि सिर्फ शिक्षा ही एक प्रगतिशील और संपन्न समाज की नींव रख सकती है। राजस्‍व से होने वाली आय में वृद्धि से राज्‍यों की राजको‍षीय क्षमता में सुधार आया है। अब उन्‍हें शिक्षा को प्राथमिकता देनी ही चाहिए।'

इस दिशा में हमारी सरकार ने देशभर में अच्‍छे गुणवत्‍ता वाले स्‍कूलों की स्‍थापना करने का निर्णय लिया है। हम देश के हरेक प्रखंड में एक यानी कुल 6000 नये उच्‍च गुणवत्‍तापूर्ण स्‍कूलों को सहयोग प्रदान करेंगे। ये स्‍कूल क्षेत्र में अन्‍य स्‍कूलों के लिए उत्‍कृष्‍टता के मानक तय करेंगे।

पृष्‍ठभूमि

10वीं योजना अवधि के दौरान माध्यमिक शिक्षा पर उतना बल नहीं दिया गया था। उस तक पहुंच को बढ़ाने और उसकी गुणवत्ता सुधारने के लिए कुछ लघु योजनाएं तो थीं, लेकिन उन योजनाओं का दायरा बहुत सीमित था। इन योजनाओं का पूरा जोर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्‍वायत्त संगठनों द्वारा स्‍कूल प्रणाली को जारी रखने और स्‍कूलों में सूचना व संचार प्रौद्योगिकी के इस्‍तेमाल व छात्रावास सुविधाओं के प्रावधान के जरिए उच्‍चतर माध्‍यमिक शिक्षा को रोजगारपरक बनाने पर था। इसके अलावा मुक्‍त और दूरस्‍थ शिक्षा के जरिए विकलांग लड़कियों की शिक्षा के प्रयास भी शामिल थे।

चूंकि प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण संवैधानिक बाध्यता बन गया है, इसलिए यह जरूरी है कि यही दृष्टि उच्‍चतर माध्‍यमिक शिक्षा के लिए भी अपनाई जाए, जिसे विकसित देशों और कुछ विकासशील देशों में बड़े पैमाने पर हासिल भी कर लिया गया है।

'माध्‍यमिक शिक्षा तक पहुंच लड़कियों, अनुसूचित जाति/जन‍जाति के प्रवेश, खासकर विज्ञान, वाणिज्‍य और रोजगारपरक अध्‍ययन को प्रोत्‍साहित करने के साथ बढ़ेगी।'

“...राज्‍यों को निजी स्‍कूल प्रणाली में केन्‍द्रीय विद्यालय के मानकों, कसौटियों, इमारतों आदि के आधार पर ही निवेश करना चाहिए।'

मॉडल स्‍कूल का विचार

मूल रूप से एक मॉडल स्‍कूल के पास वही सुविधाएं होंगी जो केन्‍द्रीय विद्यालय के पास होती हैं, चाहे वे शिक्षक-छात्र के बीच का अनुपात हो, सूचना व संचार प्रौद्योगिकी का प्रयोग, समग्र शैक्षिक शै‍क्षणिक वातावरण, उपयुक्‍त पाठ्यक्रम और परिणाम की बात हो। मॉडल स्‍कूल के महत्‍वपूर्ण लक्षणों में से कुछ निम्‍न हैं:

  • एक मॉडल स्‍कूल में उपलब्‍ध शिक्षा समग्र होनी चाहिए जो पाठ्यक्रम के साथ-साथ शारीरिक, भावनात्‍मक और सौंदर्यशास्‍त्रीय दृष्टि का विकास कर सके।
  • या तो नए स्‍कूल स्‍थापित किए जा सकते हैं अथवा मौजूद स्‍कूलों को ही मॉडल स्‍कूलों में परिवर्तित किया जा सकता है।
  • इन स्‍कूलों को न केवल पढ़ाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए, बल्कि उनकी खेल और अन्‍य गतिविधियों के लिए भी आवश्‍यक बुनियादी ढांचा उपलब्‍ध करवाया जाएगा। खेल और बाहरी गतिविधियों के लिए भी पर्याप्‍त संभावना रहेगी। मॉडल स्‍कूलों में खेल का मैदान, पार्क और रंगशाला जैसी सुविधाएं भी रहेंगी।
  • पाठ्यक्रम में स्‍थानीय संस्‍कृति और परिस्थितियों की झलक मिलनी चाहिए और पढ़ाई गतिविधियों पर आधारित होनी चाहिए।
  • इन स्‍कूलों के पास पर्याप्‍त आईसीटी ढांचा, इंटरनेट तक पहुंच और पूर्णकालिक कम्‍प्‍यूटर शिक्षक होंगे।
  • शिक्षक-छात्र अनुपात 1:25 से अधिक नहीं होनी चाहिए और कक्षाओं में कम से कम 30 छात्रों के बैठने के लिए पर्याप्‍त स्‍थान होना चाहिए। हालांकि, एक कक्षा में छात्रों की संख्‍या अधिकतम 40 हो सकती है।
  • सामान्‍य मानदंडों के अनुसार हरेक विषय का अलग शिक्षक होने के अलावा कला और संगीत शिक्षक भी इन स्‍कूलों को उपलब्‍ध करवाया जाएगा। ये स्‍कूल भारतीय विरासत और कला एवं शिल्‍प जैसी गतिविधियों के लिए भी सुविधाओं का निर्माण करेंगे।
  • इन विद्यालयों में विज्ञान, गणित और अंग्रेजी के विषयों को पढ़ाने पर अधिक जोर दिया जाएगा। यदि आवश्‍यकता हुई तो कमजोर छात्रों के लिए एक पूरक पाठ्यक्रम चलाया जा सकता है।
  • स्‍कूल के पाठ्यक्रम में ऐसी सामग्री होनी चाहिए जो नेतृत्‍व क्षमता, समूह भावना, भागीदारी क्षमताएं, कौशल विकास और व्यावहारिक जीवन की परिस्थितियों का सामना करने की सामर्थ्‍य पैदा कर सकें।
  • इन स्‍कूलों में स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा दी जाएगी और स्‍वास्‍थ्‍य जांच भी होगी।
  • विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए एक अच्‍छा पुस्‍तकालय उपलब्‍ध करवाया जाएगा, जिसमें अच्‍छी पुस्‍तकें और पत्रिकाएं हों।
  • क्षेत्र भ्रमण और शै‍क्षणिक यात्रा पाठ्यक्रम का अभिन्‍न हिस्‍सा होंगे।
  • पढ़ाने का माध्‍यम तय करना राज्‍य सरकार का काम होगा। हालांकि, विशेष जोर अंग्रेजी सीखने और बोलने पर दिया जाएगा।
  • इन स्‍कूलों की विशेष परीक्षा बोर्ड के मान्‍यता का काम राज्‍य सरकारों का होगा।
  • छात्रों का चयन स्‍वतंत्र चुनाव परीक्षा के जरिए होगा।
  • प्रधानाध्‍यापक और शिक्षकों का चयन राज्‍य सरकारों के साथ सलाह-मशविरे के बाद एक स्‍वतंत्र प्रक्रिया के जरिए होगा।
  • मॉडल स्‍कूलों के पास कार्यक्रम आयोजित करने के लिए पर्याप्‍त स्‍थान होगा, ताकि पड़ोस के स्‍कूल भी उसका लाभ ले सकें।

क्रियान्‍वयन

6,000 मॉडल स्‍कूलों में से 2,500 स्‍कूल केन्‍द्रीय विद्यालय की तर्ज पर शै‍क्षणिक रूप से पिछड़े ब्‍लॉकों में स्‍थापित किए जाएंगे। अन्‍य 2,500 स्‍कूल सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत स्‍थापित किए जाएंगे। शेष 1,000 स्‍कूलों की स्‍थापना की स्थापना पर बाद में निर्णय लिया जाएगा।

  • राज्‍यों में केन्‍द्रीय विद्यालय की तर्ज पर 2,500 मॉडल स्‍कूल|
  • स्‍थान: 2,500 मॉडल स्‍कूल शैक्षिक रूप से पिछड़े प्रखंड में स्‍थापित किए जाएंगे।
  • भूमि: राज्‍य सरकारें इन स्‍कूलों के लिए भूमि की पहचान कर उसे निःशुल्‍क उपलब्‍ध करवाने का काम करेगी।
  • स्‍कूलों का चयन: मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा राज्‍यवार स्‍कूलों की संख्‍याओं का आवंटन किया जाएगा। इसके बाद राज्‍य सरकारें नए स्‍कूलों की स्‍थापना करने के लिए या मौजूद स्‍कूलों को ही मॉडल स्‍कूलों में परिवर्तित करने के लिए स्‍वतंत्र होंगी।
  • पढ़ाने का माध्‍यम: पढ़ाने के माध्‍यम को राज्‍य सरकार पर छोड़ा गया है, हालांकि विशेष ज़ोर अंग्रेजी सीखने और बोलने पर दिया जाएगा।
  • कक्षाएं: यदि स्‍कूल अंग्रेजी माध्‍यम का है, तो 6ठी से 12वीं तक की कक्षाएं स्‍कूल में होंगी। हरेक कक्षा के दो सेक्‍शन होंगे और यदि स्‍कूल का माध्‍यम क्षेत्रीय हो, तो कक्षाएं 9वीं से 12वीं तक होंगी।
  • प्रबंधन: इन स्‍कूलों का प्रबंधन राज्‍य सरकारें केन्‍द्रीय विद्यालय सोसाइटी की तर्ज पर करेंगी।

निर्माण:

  • स्‍कूल भवन का निर्माण राज्‍य सोसाइटी द्वारा करवाया जाएगा।
  • मानदंड केन्‍द्रीय विद्यालय सोसाइटी/राज्‍य के लोक निर्माण विभाग द्वारा उपलब्‍ध करवाए जाएंगे।
  • राज्‍य सरकार के पास स्‍कूल भवन का निर्माण मानदंडों के मुताबिक किसी निजी साझेदार द्वारा करवाने का एक विकल्‍प होगा।

प्रवेश:

  • सीटों को केन्द्रीय विद्यालय संगठन जैसी प्रवेश परीक्षा के आधार पर भरा जाएगा। आरक्षण के लिए मौजूदा नियम लागू होंगे।
  • भवन का डिजाईन भूकम्‍प निरोधी होगा और उसमें आग से बचने की भी व्‍यवस्‍था होगी।
  • सौर और अन्‍य नवीकरणीय ऊर्जा के इस्‍तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा और यथासंभव भवनों का निर्माण इसी हिसाब से किया जाएगा।

2500 स्‍कूलों की स्‍थापना में राज्‍यों की भूमिका

  • इन स्‍कूलों की स्‍थापना और चलाने का भार राज्‍य सरकारों पर होगा जो कि मौजूदा सरकारी स्‍कूलों से मॉडल स्‍कूलों में परिवर्तित या फिर नए स्‍कूल ही हो सकते हैं।
  • राज्‍य/केन्‍द्र शासित सरकारों को केन्द्रीय विद्यालय संगठन की तर्ज पर स्‍कूलों के प्रबंधन के लिए सोसाइटी की स्‍थापना करनी होगी।
  • राज्‍य/केन्‍द्र शासित सरकारें जहां भी जरूरत होगी, वहां स्‍कूलों की स्‍थापना के लिए भूमि उपलब्‍ध कराएगी।
  • हरेक राज्‍य परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए एक कार्य योजना उपलब्‍ध कराएगा।
  • न्‍यूनतम भूमि आवश्‍यकता केन्द्रीय विद्यालय संगठन/नवोदय विद्यालय संगठन के मानदंडों के मुताबिक लागू होंगी, लेकिन आवश्‍यक मानदंडों की पूर्ति/संतुष्टि के बाद भूमि की कमी के मामले में थोड़ी ढील दी जा सकती है।
  • इन स्‍कूलों की स्‍थापना शैक्षिक रूप से पिछड़े ब्‍लॉकों में की जाएगी और पांचवीं अनुसूची में आने वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। मौजूदा स्‍कूलों के उन्‍नयन/ परिवर्तन के मामले में आश्रम स्‍कूलों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
  • सारा निर्माण कार्य राज्‍य सोसाइटी के जरिए होगा जो इन स्‍कूलों का प्रबंधन करेगी। इसलिए कुल खर्च में राज्‍य का योगदान इन्‍हीं सोसाइटियों के खाते में जाएगा।
  • भवन निर्माण और रख-रखाव के लिए राज्‍य पीपीपी मॉडल को अपना सकते हैं जिसके लिए बराबर अनुपात में केंद्र और राज्‍य सरकारें सालाना भुगतान करेंगी।
  • उपयुक्‍त निगरानी समितियों का गठन राज्‍य सरकार द्वारा ब्‍लॉक, जिला और राज्‍य स्‍तर पर किया जाएगा। राज्‍य स्‍तर की निगरानी समिति में केन्‍द्र सरकार के प्रतिनिधि भी होंगे।
  • राज्‍य केन्द्रीय विद्यालय संगठन/सोसाइटी को अस्‍थायी तौर पर स्‍थान का चयन कर उसे उपलब्‍ध करवाएगा ताकि स्‍कूल का कामकाज अस्‍थायी तौर पर ही शुरू किया जा सके।

अनुदान

पूंजी लागत का 75 प्रतिशत केन्‍द्र सरकार द्वारा और बाकी 25 प्रतिशत राज्‍य सरकार द्वारा उपलब्‍ध करवाया जाएगा। 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान केन्‍द्र सरकार 75:25 अनुपात के आधार पर राशि उपलब्‍ध कराएगी। यह बंटवारे का तरीका 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में केन्‍द्र और राज्‍य सरकार के बीच 50:50 के अनुपात में हो जाएगा। विशेष श्रेणी में आने वाले राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 का होगा।

लागत मानदंड

  • केंद्रीय विद्यालय संगठन ने अनुमान लगाया है कि केन्द्रीय विद्यालय की तर्ज पर दो सेक्‍शन की 6ठी से 12वीं तक की कक्षाओं वाले एक स्‍कूल की स्‍थापना के लिए कुल एकमुश्‍त लागत 3.02 करोड़ रुपए है। अनुमान के मुताबिक सालाना 0.75 करोड़ रुपए की और लागत आएगी।
  • यह अनुमान वर्तमान निर्माण और परिचालन लागत की दरों पर आधारित है।
  • केन्‍द्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय और सरकारी विद्यालय स्‍थापित करने के लिए वास्‍तवित लागत केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग के मानदंडों से तय होंगे, जो अलग-अलग स्‍थानों के लिए भिन्‍न है। ऊपर दिए गए लागत के मानदंड केवल अनुमान पर आधारित हैं।

स्त्रोत भारत सरकार का मानव संसाधन विकास मंत्रालय



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