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महादलित, अल्पसंख्यक एवं अतिपिछड़ा वर्ग अक्षर आंचल योजना

महादलित, अल्पसंख्यक एवं अतिपिछड़ा वर्ग अक्षर आंचल योजना

पृष्ठभूमि

बिहार में पिछले कुछ वर्षों से राज्य सरकार ने अभिवंचित तबकों (महादलित, अति पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक , शहरी गरीब) के सामाजिक, शैक्षिक एवं आर्थिक उन्नयन के लिए विशेष  अभियान चला रखा है। इन अभियानों में राज्य सरकार द्वारा शिक्षा  का प्रचार-प्रसार प्राथमिकता है। इस दिशा  में गत वर्षों में राज्य सरकार ने अनेकों नवाचारी प्रयोग एवं अभियान के माध्यम से विद्यालय के बाहर के बच्चों को विद्यालय में लाने के लिए प्रयास किया है। साथ ही इन बच्चों की माताओं को बुनियादी साक्षरता प्रदान करने हेतु साक्षरता वर्गों का संचालन करवाया है। इन नवाचारी प्रयोगों एवं अभियान के कारण राज्य में विद्यालयों में छीजन कम हुआ है साथ ही महिला साक्षरता दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि (2011 जनगणना) हुई है।

शिक्षा  के प्रचार-प्रसार के क्रम में राज्य सरकार ने ऐसे विशेष  समुदायों की पहचान (महादलित, अति पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक ) की है जिनके बीच शिक्षा  का स्तर कम है तथा जिनके बीच और प्रभावी तरीके से विशेष  व्यवस्था कर काम करने की आवश्यकता  है।

इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने अपने संसाधन से ''राज्य संपोषित साक्षरता कार्यक्रम'' की एक योजना बनायी है :-महादलित, अल्पसंख्यक  एवं अतिपिछड़ा वर्ग अक्षर आँचल योजना।

लक्ष्य

  • महादलित, अतिपिछड़ा वर्ग - 8 लाख
  • मुस्लिम महिला - 4 लाख

कार्यक्रम की संरचना

राज्य में

इस कार्यक्रम के  संचालन हेतु राज्य स्तर पर प्रधान सचिव, शिक्षा विभाग, बिहार सरकार की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय समिति होगी जिसके सदस्य निम्न होंगे -

1.  प्रधान  सचिव,  शिक्षा  विभाग,बिहार सरकार - अध्यक्ष

2.  राज्य परियोजना निदेशक , बिहार शिक्षा   परियोजना  परिषद्‌  - सदस्य

3.  निदेशक ,  प्राथमिक  शिक्षा   - सदस्य

4.  निदेशक , जन शिक्षा   - सदस्य सचिव

5.  कार्यक्रम  पदाधिकारी,   बिहार शिक्षा परियोजना परिषद्‌- सदस्य

जिला स्तर पर

इस  कार्यक्रम      के संचालन हेतु जिला स्तर पर जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति होगी जिसके सदस्य निम्न होंगे -

1.  अध्यक्ष जिला परिषद्‌- संरक्षक

2.   जिला पदाधिकारी - अध्यक्ष

3.   जिला शिक्षा पदाधिकारी -उपाध्यक्ष

4.  जिला कार्यक्रम पदाधिकारी(साक्षरता) - सदस्य सचिव

5.  जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (सर्व शिक्षा  अभियान) - सदस्य

6.   जिला कल्याण पदाधिकारी- सदस्य

7.  मुख्य  कार्यक्रम समन्वयक, जिला लोक शिक्षा  समिति- सदस्य

8.  सदस्य, राज्य संसाधन समूह -सदस्य

9.  एक महिला के0आर0पी0- सदस्य

10. डी0पी0सी0  महिला समाखया- सदस्य (जिस जिला में महिला समाखया नहीं है वहाँ सर्व शिक्षा  अभियान की जिला जेण्डर कॉडिनेटर।)

प्रखण्ड स्तर पर

इस कार्यक्रम के संचालन हतु प्रखंड  स्तर  पर  एक  प्रबोधन समिति होगी जिसके निम्न सदस्य होंगे :-

1.  प्रखंड प्रमुख - संरक्षक

2.  प्रखंड लोक शिक्षा  समिति के कार्यक्रम  समन्वयक  - सदस्य।

3.  प्रखंड  शिक्षा   पदाधिकारी- संयोजक

4.   प्रखण्ड विकास पदाधिकारी-सदस्य

5.  महिला प्रखंड साधन सेवी-सदस्य

6. प्रखण्ड चिकित्सा पदाधिकारी- सदस्य

7.   के0आर0पी0 - सदस्य

8.  अल्पसंख्यक  एवं अति पिछड़ा वर्ग की शिक्षा  में विशेष  रूचि रखने  वाली  दो  महिला सदस्य

9.  आशा  कार्यकर्त्ता - सदस्य

10. प्रखण्ड मुख्यालय  के विकास मित्र- सदस्य

11.  एक टोला सेवक- सदस्य

12. तालीमी मरकज   के एक शिक्षा  स्वयंसवेक  -  सदस्य संकुल/पंचायत

इस कार्यक्रम क संचालन हतु संकुल स्तर पर एक प्रबोधन समिति होगी जिसके निम्न सदस्य होंगे।

1. संकुल अवस्थित मुख्यालय  पंचायत के मुखिया - अध्यक्ष

2.  संकुलाधीन अन्य पंचायत के मुखिया - सदस्य

3. संकुल संसाधन केन्द्र समन्वयक - संयोजक

4. पंचायत अवस्थित लोक शिक्षा  केन्द्र के वरीय प्रेरक- सदस्य

5. संकुल के पंचायत में अवस्थित विकास मित्र - सदस्य

6.  ऑगनवाड़ी  सेविका  -सदस्य

7. अल्पसंख्यक  एवं अति पिछड़ा वर्ग समुदाय की एक-एक शिक्षिका -सदस्य

8.  एक टोला सेवक-सदस्य

9. तालीमी मरकज के एक शिक्षा  स्वंयसेवी- सदस्य

10. आशा   कार्यकर्त्ता  - सदस्य

जिला पदाधिकारी की भूमिका

  • संचालन समिति की बैठक की अध्यक्षता करना।
  • जिला स्तर पर मासिक बैठक कर कार्यक्रम की समीक्षा एवं आवश्यक निर्देश ।
  • जिला स्तर पर आयोजित विकास कार्यक्रम की विभिन्न बैठकों में इस योजना को एजेन्डा बनवाना।
  • विभिन्न विभागों से महादलित, अल्पसंख्यक एवं अति पिछड़ा वर्ग अक्षर आंचल योजना से समन्वय हेतु आवश्यक  विभिन्न विभागों को निर्देश  जारी करना।

स्वंयसेवी का उन्मुखीकरण

इस कार्यक्रम का प्रशिक्षण दो स्तरीय होगा-राज्य स्तर एवं प्रखण्ड स्तर।

राज्य स्तर

राज्य स्तर पर साक्षर भारत में कार्यरत सदस्य, राज्य संसाधन समूह ;(SRG) एवं मूल स्रोत व्यक्तियों (KRP)का प्राइमर एवं सहायक प्रशिक्षण  सामग्री आधारित दो दिवसीय प्रप्रशिक्षण  -सह- कार्यशाला राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा आयोजित किया जायेगा। यह प्रप्रशिक्षण  कार्यशाला आवासीय होगा। पुनः कुछ माह पश्चात्‌ उपचारात्मक  प्रशिक्षण एवं  प्रवेशिका  प्रशिक्षण (रिफ्रेशर )  विषय पर आधारित  एक  दिवसीय उन्मुखीकरण करवाया जायेगा। इस कार्यशाला एवं उन्मुखीकरण में मूल स्रोत व्यक्तियों के अलावा सम्बन्धित जिला के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता), जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (सर्व शिक्षा ) एवं मुख्य  कार्यक्रम समन्वयक अनिवार्य रूप से भाग लेंगे।

    प्रखण्ड स्तर

प्रखण्ड स्तर पर तीन दिवसीय प्रप्रशिक्षण  कार्यशाला आयोजित की जाएगी। प्रारम्भ में प्रवेशिका  आधारित दो दिवसीय प्रप्रशिक्षण  तथा पुनः दो माह पश्चात् उपचारात्मक प्रशिक्षण  एवं प्रवेशिका  प्रशिक्षण  (रिफ्रेशर ) विषय पर आधारित एक दिवसीय उन्मुखीकरण करवाया जायेगा। इस कार्यशाला एवं उन्मुखीकरण में प्रखण्ड के सभी टोला सेवक एवं शिक्षा  स्वंयसेवी (तालीमी मरकज), दो स्रोत व्यक्ति (के0आर0पी0) प्रशिक्षक  के रूप में भाग लेंगे। इन प्रद्गिाक्षणों में विकास मित्र, आशा  कार्यकर्त्ता, रोजगार सेवक, मध्याह्नन भोजन, बी0आर0पी0 को भी स्रोत व्यक्ति के रूप में अनिवार्य रूप से बुलाया जायेगा।

स्वंयसेवी एवं टोला सेवकों का भार

महादलित, अतिपिछड़ा एवं अल्पसंख्यक  टोले में चलने वाले इस अक्षर आंचल योजना के अंतर्गत पूर्व से चयनित एवं कार्यरत उत्थान केन्द्र के टोला सेवक एवं तालीमी मरकज के शिक्षा  स्वंयसेवी पूर्व के कार्य के अतिरिक्त साक्षरता केन्द्र का भी संचालन करेंगे। साक्षरता केन्द्र के संचालन के अतिरिक्त ये सभी टोला सेवक एवं शिक्षा  स्वंयसेवी महादलित, अल्पसंख्यक  एवं अतिपिछड़ा वर्ग समुदाय के 06 से 14 आयु वर्ग के प्रत्येक बालक-बालिका को शिक्षा  से जोड़ेंगे तथा ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक बच्चा प्रारंभिक शिक्षा  पूरी कर सके। प्रत्येक स्वयं सेवक इन समुदाय के 06-14 आयु वर्ग के प्रत्येक बालक-बालिका का निकटवर्ती प्राथमिक विद्यालय में नामांकन करायेंगे एवं नामांकन के पश्चात् प्रत्येक दिन उन्हें विद्यालय लाना सुनिश्चित करेंगे। साथ ही, वे उन बच्चों को शिक्षा  प्रदान करने में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक की सहायता करेंगे। ये स्वंयसेवी बच्चों की अकादमिक दक्षताओं का आकलन कर उनके उपचारात्मक प्रशिक्षण  का भी संचालन करेंगे।

साथ ही, टोला सेवक एवं शिक्षा स्वंयसेवी विद्यालय के पोषक क्षेत्र की असाक्षर महादलित, अल्पसंख्यक  एवं अतिपिछड़ा वर्ग महिलाओं को विकास मित्र, आशा  कार्यकर्त्ता, आंगनबाड़ी सेविका, संकुल संसाधन केन्द्र समन्वयक, स्थानीय विद्यालय के प्रधानाध्यापक, वार्ड सदस्य, प्रेरक एवं अन्य की सहायता से चिन्हित करेंगे। तत्पश्चात प्रत्येक साक्षरता केन्द्र में जो अनिवार्य रूप में प्राथमिक विद्यालय में ही होगा, एक साल की अवधि में छः-छः महीने के दो सत्रों में विद्यालय परिसर में विद्यालय अवधि के पश्चात् इनमें से चालीस महादलित एवं अतिपिछड़ा वर्ग महिलाओं को बुनियादी साक्षरता प्रदान करेंगे। वे इन महिलाओं को विकासात्मक योजनाओं की जानकारी भी देंगे और उन्हें विकासात्मक योजनाओं से जोड़ेंगे भी। इस कार्य में वे विकास मित्र, आशा कार्यकर्त्ता, आंगनबाड़ी सेविका, न्याय मित्र एवं विकासात्मक योजना से जुड़े अन्य सरकारी कर्मियों का सहयोग तथा समन्वय प्राप्त करेंगे। वे सभी टोला पर नवसाक्षर महिलाओं के कम से कम दो बचत समूह भी स्थापित करेंगे। बारह माह की अवधि में 40 असाक्षर महादलित, अल्पसंख्यक  एवं अतिपिछड़ा वर्ग के महिलाओं को साक्षर करने के उपरांत टोला सेवकों एवं शिक्षा  स्वयंसेवियों को राज्य सरकार द्वारा प्रशस्ति -पत्र प्रदान किया जायेगा।

केन्द्र संचालन एवं समय प्रबंधन में प्रधानाध्यापक एवं समिति की भूमिका

राज्य संपोषित इस साक्षरता कार्यक्रम का केन्द्र स्थल अनिवार्य रूप में स्थानीय प्राथमिक/मध्य विद्यालय होंगे। दोनों कार्यक्रम के संबंधित स्वंयसेवी विद्यालय के बाद दो घंटे के लिए केन्द्र का संचालन करेंगे। केन्द्र के सफल संचालन के लिए केन्द्रों पर नामांकित शिशिक्षु  ओं एवं स्थानीय विद्यालय के विद्यालय प्रधानाध्यापक, शिक्षा  समिति के अध्यक्ष, सचिव को मिलाकर एक केन्द्र संचालन समिति होगी। जिसकी देख-रेख में साक्षरता केन्द्र चलेंगे। विद्यालय के प्रधानाध्यापक ही दोनों स्वंयसेवकों की उपस्थिति को सत्यापित करेंगे जिस आधार पर उनके मानदेय का भुगतान होगा।

एक उत्थान केन्द्र पर एक ही टोला सेवक एवं तालीमी मरकज पर एक शिक्षा  स्वयंसेवी ही रहेंगे। जहाँ नये केन्द्रों की स्थापना की आवश्यकता  होगी वहाँ सर्व शिक्षा  अभियान के पूर्व के नियमों के अनुसार टोला सेवक एवं शिक्षा  स्वयंसेवी का चयन किया जायेगा।

पाठ्‌य सामग्री

प्रत्येक साक्षरता केन्द्र पर निम्नलिखित पठन पाठन सामग्री की आपूर्ति की जायेगी :-

1.

अभ्यास पुस्तिका

10 रु0 x 20 प्रशिक्षु

200.00

2.

काष्ट पेंसिल

2.50 रु0 x 3 पेंसिल x 20 प्रशिक्षु

150.00

3.

पेन्सिल कटर

3 रु0 x 20 प्रशिक्षु

60.00

4.

पेन्सिल रबर

2 रु0 x 20 प्रशिक्षु

40.00

5.

चौक

10 रु0 x 03 बार केन्द्र पर

30.00

 

योग

 

480.00

6.

दरी (एक बार)

/ 500/-

500.00

7.

रॉलिंग बोर्ड (एक बार)

/ 25/-

25.00

 

 

कुल -

1005.00

उपरोक्त सामग्री प्रथम सत्र के लिए है। दूसरे सत्र के लिये क्रम स0 -5 तक की कुल राशि पुनः देय होगी। उपरोक्त सामग्रियों को निम्नलिखित रूप से उपलब्ध कराया जाएगा :

    प्रवेशिका एवं सहायक प्रशिक्षण सामग्री

जन शिक्षा  निदेशालय  द्वारा राज्य संदर्भ में एक प्रवेशिका एवं सहायक प्रशिक्षण सामग्री विकसित की जायेगी, जिन्हें बिहार राज्य पाठ्‌य पुस्तक प्रकाशन निगम, पटना से मुद्रित कराकर आवश्यकतानुसार जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) के माध्यम से प्रखण्ड संसाधन केन्द्रों पर उपलब्ध कराया जायेगा जहाँ से टोला सेवक एवं शिक्षा  स्वंयसेवी के माध्यम से केन्द्रों पर भेजा जायेगा।

  • रौलिंग बोर्ड, दरी, अभ्यास पुस्तिका, काष्ठ पेन्सिल, पेन्सिल कटर, पेन्सिल इरेजर एवं चौक बाजार दर पर क्रय हेतु सम्बन्धित टोला सेवक एवं तालीमी मरकज स्वंयसेवी के लिए एक मुश्त राशि विभिन्न जिलों में कार्यरत टोला सेवकों एवं तालीमी मरकज स्वंयसेवी की संख्या  के अनुसार जिलों को बैंक ड्राफ्ट द्वारा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) को उपलब्ध करायी जाएगी। राशि  प्राप्ति के बाद जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) संबंधित टोला सेवकों एवं शिक्षा  स्वंयसेवियों को आवंटन के अनुसार नगद भुगतान करेंगे।

सर्वेक्षण एवं बैचिंग-मैचिंग

यह राज्य संपोषित साक्षरता कार्यक्रम दो विशेष  प्रकार के समूहों (समुदाय) के बीच संचालित होगा। सर्वप्रथम 15-35 आयु के लक्ष्य समूह के लिए दोनों समुदाय का सर्वेक्षण कराया जाएगा। सर्वेक्षण में आये सर्वप्रथम असाक्षरों को बैचिंग-मैचिंग के बाद संबंधित स्वयंसेवकों (टोला सेवक, शिक्षा  स्वंयसेवी) के साथ टैंगिंग करने के बाद केन्द्र प्रारंभ होगा। यह सर्वेक्षण निदेशालय  स्तर पर विकसित सर्वेक्षण प्रपत्र में होगा जिसे जिलों को उपलब्ध कराया जाएगा। सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार की गयी प्रथम सूचना रिर्पोट का डाटा इंट्री जिला स्तर पर करवाकर राज्य स्तर पर इसकी सी0डी0 उपलब्ध करायी जायेगी। इसके लिए एक सॉफ्टवेयर तैयार कर जिलों को उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही सर्वेक्षण में आए आंकड़ों (असाक्षर ब्यौरा) का एक समेकित रिपोर्ट जिला स्तर पर तैयार कर राज्य स्तर को उपलब्ध कराया जाएगा।

प्रबोधन एवं समीक्षा

महादलित, अल्पसंख्यक  एवं अति पिछड़ा वर्ग अक्षर आँचल योजना-

इस कार्यक्रम का तीन स्तरों से प्रबोधन कराया जाएगा।

1.राज्य स्तर से सदस्य, राज्य संसाधन समूह आवंटित जिले में माह में 12 दिन विभिन्न केन्द्रों का प्रबोधन करेंगे एवं अपना प्रतिवेदन निदेशालय  एवं संबंधित जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) को देंगे।

2. जिला स्तर से के0आर0पी0 समूह अपने आवंटित प्रखण्ड में विभिन्न केन्द्रों का दौरा करेंगे, टोला सेवक एवं शिक्षा  स्वंयसेवी को आवश्यक  सहयोग देंगे, आवश्यकता नुसार स्थानीय स्तर पर ही समस्याओं के समाधान का प्रयास करेंगे एवं लिखित प्रतिवेदन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी(साक्षरता) को समर्पित करेंगे। प्रत्येक के0आर0पी0 को प्रबोधन हेतु 15 दिन का समय देना होगा।

3.प्रखण्ड स्तर पर प्रखण्ड शिक्षा  पदाधिकारी एवं प्रखण्ड समन्वयक (साक्षर भारत) माह  में दस दिन केन्द्रों का अनुश्रवण करेंगे।

4. संकुल स्तर पर समन्वयक, संकुल संसाधन केन्द्र भी अपने संकुलाधीन विभिन्न टोलों का सप्ताह में दो दिन अनुश्रवण करेंगे। प्रत्येक संकुल पर संकुल समन्वयक टोला सेवकों     एवं शिक्षा

स्वयंसेवियों का मासिक बैठक आयोजित करेंगे। इस बैठक में उक्त प्रखण्ड के के0आर0पी0 अनिवार्य रूप में भाग लेंगे।

5. जिला स्तर से ही जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता), मुख्य  कार्यक्रम समन्वयक-सह-सचिव, जिला लोक शिक्षा  समिति, जिला शिक्षा  पदाधिकारी भी अपने स्तर से महीनें में दस दिन अनुश्रवण कार्य करेंगे एवं अपना अनुश्रवण प्रतिवेदन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) को समर्पित करेंगे। इस अनुश्रवण कार्य हेतु बजट में यात्रा प्रावधान किया गया है।

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) प्रत्येक माह के अंत में एक समेकित प्रतिवेदन निदेशक, जन शिक्षा -सह-  सचिव, राज्य साक्षरता मिशन  प्राधिकरण को उपलब्ध करायेंगे। निदेशालय  में कार्यरत पदाधिकारियों, कार्यक्रम प्रबंधन इकाई के परामर्शदाताओं  के बीच जिले आवंटित कर दिये जायेंगे जिनका प्रबोधन कर वे अपना प्रतिवेदन निदेशक , जन शिक्षा  को सौपेंगे।

निदेशक, जन शिक्षा  जिलों से प्राप्त प्रतिवेदन एवं निदेशालय स्तर से जिलों में गये पदाधिकारियों के प्रतिवेदन के आधार पर जिलावार एक समेकित प्रतिवेदन प्रत्येक माह प्रधान सचिव को अवलोकन हेतु उपलब्ध करायेंगे।

एस0आर0जी0/के0आर0पी0 की भूमिका

  • टोला सेवक एवं शिक्षा  स्वंयसेवी (तालीमी मरकज) का प्रप्रशिक्षण  एवं प्रबोधन।
  • साक्षरता केन्द्रों का अनुश्रवण
  • संकूल, प्रखण्ड एवं जिला स्तर की बैठकों में भागीदारी
  • सूचनाओं का आदान-प्रदान
  • मासिक प्रगति प्रतिवेदन को ससमय भेजवाना।
  • स्वयं सहायता समूह निर्माण की प्रक्रिया में सहयोग प्रदान करना।
  • अक्षर मेला/सामाजिक उत्सव के आयोजन में सहयोग प्रदान करना।
  • साक्षरता केन्द्र से जिला स्तर की संचालन समिति के बीच संपर्क व्यक्ति के रूप में कार्य।
  • पठन-पाठन सामग्री, सहायक प्रशिक्षण  सामग्री वितरण में सहयोग।
  • कार्यक्रम के दौरान दिये गए अन्य कार्य।

सपोर्ट एजेंसी एवं स्रोत संस्थान

  • राज्य संसाधन केन्द्र।
  • खादी ग्रामोद्योग निगम।
  • जीविका।
  • जन प्रशिक्षण  संस्थान|
  • नारी गुंजन।
  • मंथन।
  • नाबार्ड।
  • प्रथम|
  • लीड बैंक ।
  • बिहार बोर्ड ऑफ ओपेन स्कूलींग
  • महादलित विकास मिशन।
  • महिला सामाखया।
  • बसुधा केन्द्र।
  • बी0जी0भी0एस0।
  • महिला विकास निगम।
  • उद्यमिता विकास संस्थान।
  • राष्ट्रीय महिला कोष।

इन एजेंसिया/स्रोत संस्थाओं से स्थानीय (जिला, प्रखण्ड) सन्दर्भों में समन्वय स्थापित कर सहयोगलिया जा सकता है। उनके साथ कार्यक्रम का समन्वय स्थापित किया जा सकता है।

शिशिक्षुओं की लामबंदी व सामाजिक उत्सव(अक्षर मेला)

कार्यक्रम के संचालन हेतु जिला, प्रखण्ड एंव संकुल स्तर पर गठित समिति द्वारा जिले की असाक्षर महिलाओं को साक्षरता केन्द्र पर लाने हेतु एवं उन्हें प्रेरित करने के लिए रणनीति तय की जाएगी। यह कार्य संकुल संसाधन केन्द्र की समिति के द्वारा किया जायेगा जिसमें पंचायत लोक शिक्षा  समिति के सदस्यों का सहयोग भी लिया जाएगा। इन महिला शिशिक्षुओं  को गोलबंद करने के लिए संकुल एवं प्रखण्ड स्तर पर सामाजिक उत्सव/अक्षर मेला का आयोजन किया जायेगा। संकुल स्तर पर यह दो माह में एक बार एवं प्रखण्ड स्तर पर प्रत्येक तीन माह पर एक बार होगा। यह आयोजन एक दिवसीय होगा जिनमें नवसाक्षरों के अनुभव का आदान-प्रदान, सहायक सामग्री प्रदर्शनी, अक्षर दौड़, अनुभव आदान-प्रदान, विज्ञान का चमत्कार, सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे कार्यक्रम के आयोजन होंगे। इस अक्षर मेला में स्थानीय मध्य विद्यालय के बाल संसद/मीना मंच के सदस्यों को भी अपनी प्रस्तुति के लिए बुलाया जाएगा। प्रत्येक सामाजिक उत्सव/अक्षर मेला विषय आधारित (थीमेटिक) होगा।

प्रमाणीकरण

सभी नवसाक्षरों द्वारा पढ़ाई पूरी करने के बाद इनकी बुनियादी साक्षरता परीक्षा लेकर प्रमाणीकरण करवाया जायेगा। इसके लिए बिहार बोर्ड ऑफ ओपेन स्कूलिंग एवं एन0आई0ओ0एस0 का सहयोग प्राप्त किया जाएगा।

विकासात्मक अंतर्सम्बन्ध

राज्य संपोषित इन दोनों कार्यक्रमों में कार्यक्रम प्रारंभ के तीसरे-चौथे माह से विकास योजनाओं से अन्तर्संबंध बनाने के लिए कुछ फोकस कार्यक्रमों को शुरू किया जाएगाः-

(क.) महिला बचत बैंक

सभी केन्द्रों पर नामांकित महिलाओं का बचत समूह बनाया जाएगा। इन समूहों का स्थानीय बैंक में खाता होगा। प्रखण्ड के सभी टोला स्तरीय बचत समूह को मिलाकर प्रखण्ड स्तर पर एक महिला बचत फेडरेशन(बैंक) होगा। इस काम में स्थानीय स्तर (प्रखण्ड एवं पंचायत) पर जीविका का सहयोग लिया जाएगा। बने समूहों का जीविका के साथ टैगिंग भी की जायेगी।

(ख.)  जननी सुरक्षा योजना के अतंर्गत सभी गर्भवती नवसाक्षरों को लाभ दिलवाने की एक कार्य योजना संकुल स्तर पर बनायी जाएगी। साथ ही साथ, पेंशन योजनाओं का लाभ भी पात्रता वाले लोगों को दिलवाने के लिए एक योजना बनायी जाएगी ।

(ग.)   कार्यक्रम से आच्छादित सभी टोलों के बच्चों के लिए स्कूल चलो अभियान प्रारंभ किया जायेगा ताकि इन टोलों के 06-14 आयु वर्ग के बच्चे एवं बच्चियों के लिए प्रारंभिक शिक्षा  सुनिश्चित हो।

(घ.)   नवसाक्षर महिलाओं का मनरेगा के अन्तर्गत जॉब कार्ड बनवाने की पंचायतवार योजना बनाई जाएगी।

इसी प्रकार स्थानीय परिवेश में विकासात्मक अन्तर्सम्बन्ध के लिए कुछ और प्रभावी उठाये जा सकते हैं। क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न विभाग (लाइन डिपार्टमेंट) के कर्मी/पदाधिकारियों का नवसाक्षरों से रूबरू कराना।

दस्तावेजीकरण

पूरे कार्यक्रम का एक दस्तावेज निर्माण कराया जायेगा। इस दस्तावेज में कुछ सफलता कहानी, केस स्टडी, अनुभव, नवाचारी पहलकदमियाँ, कुछ कठिनाईयों आदि पर आधारित लिखित आलेख होंगे। यह दस्तावेज हार्ड एवं सॉफ्ट कॉपी में तैयार कराये जायेंगे। साथ ही, कार्यक्रम की आवश्यकतानुसार फोटोग्राफी एवं विडियोग्राफी भी होगी।

इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन में प्रखण्ड शिक्षा  पदाधिकारी की एक महत्वपूर्ण एवं दोहरी भूमिका होगी।पहली भूमिका में प्रखण्ड शिक्षा  पदाधिकारी प्रखण्ड संचालन समिति के संयोजक के रूप में कार्य करेंगे। राज्य एवं जिला से प्राप्त निर्देशों  का अनुपालन करवायेंगे तथा अनुपालन प्रतिवेदन जिला केन्द्र को भेजेंगे। इसी के साथ-साथ प्रखण्ड शिक्षा  पदाधिकारी इस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए प्रखण्ड स्तर पर नोडल पदाधिकारी की भी भूमिका का निर्वहन करेंगे। चूँकि इस कार्यक्रम का एक व्यापक उद्देश्यों स्कूली शिक्षा  एवं साक्षरता का इन्टरफेस स्थापित भी करना है जिसमें प्रखण्ड शिक्षा   पदाधिकारी, विद्यालयी तन्त्र, शिक्षक , सी0आर0सी0सी0 के साथ प्रखण्ड स्तरीय समन्वय के लिए नोडल पदाधिकारी के रूप में इस कार्य को करेंगे।

अभियान का प्रवेश बिन्दु

साक्षरता जैसे सामाजिक-शैक्षिक (सोशल एजुकेशन) लामबंदी के कार्यक्रम में यह बहुत महत्वपूर्ण होता है कि कार्यक्रम (अभियान) की शुरूआत कैसे होती है? अभियान का प्रवेश बिन्दु (एंट्री पॉइंट) क्या है? इसके लिए पूर्व की छोटी-छोटी तैयारी कितने सावधानी से की गई है? क्योंकि ऐसी ही पूर्व की तैयारियां अभियान को एक ऊंचाई तक ले जाती हैं जो कार्यक्रम के सफलता का आधार बनता है। प्रारंभ में इस अभियान का हम दो प्रवेश  बिन्दु बनाकर अपने-अपने जिला, प्रखण्ड, संकुल स्तर पर शुरूआत करेंगे।

क. टोला सेवक एवं शिक्षा  स्वंयसेवी (तालीमी मरकज) उन्मुखीकरण।

ख.    लक्ष्य समूह (टोला/वार्ड स्तर पर) सर्वेक्षण।

ग.    सर्वेक्षण आंकड़ा का समेकन एवं कम्प्यूटराइजेसन ।

इस प्रारंभिक प्रवेश  बिन्दु एवं आंकड़ों आदि का डेटाबेस बनाने के बाद एक कालबद्ध कैलेन्डर  के आधार पर विभिन्न प्रकार के प्रप्रशिक्षण  सामग्रियों (प्राइमर आदि) की आपूर्ति, प्रबोधन, बचत समूह निर्माण, अक्षर मेला/सामाजिक उत्सव का आयोजन किया जायेगा। सर्वेक्षणोपरान्त डाटाबेस से लक्ष्य समूह एवं स्वयंसेवकों की संख्या  स्पष्ट तरीके से प्राप्त हो जाएगी जिससे कार्यक्रम के क्रियान्वयन में काफी सहायता मिलेगी।

साक्षरता केन्द्र पर क्या होगा?

इन सारे प्रयासों (सर्वेक्षण, प्रप्रशिक्षण , प्रबोधन, अक्षर मेला आदि) का एक मात्र उद्देश्यों है सर्वेक्षण में चिन्हित असाक्षर महिलाओं को साक्षरता केन्द्रों पर प्राइमर प्रशिक्षण  के द्वारा साक्षर बनाना। इस प्रकार सभी साक्षरता केन्द्रों पर मोटे तौर पर दो प्रकार की गतिविधियां होगी :-

क. प्राइमर प्रशिक्षण

ख. सहायक गतिविधियां

प्राइमर प्रशिक्षण

  • प्रतिदिन (अवकाद्गा के दिन छोड़कर) एक नियत समय पर दो घण्टा साक्षरता केन्द्र का संचालन।
  • प्रत्येक केन्द्र पर कम से कम बीस असाक्षर महिला को स्वंयसेवी को पढ़ाना अनिवार्य होगा।
  • सभी नामांकित महिलाओं का एक शिशिक्षु  प्रपत्र में रेकॉर्ड रखना।
  • सफल नवसाक्षरों का प्रमाणीकरण करवाना होगा।
  • प्रवेशिका  में छपे बारह मासा के अनुसार माह में कम से कम एक बार केन्द्र पर कुछ अन्य मनोरंजक गतिविधियां का आयोजन।
  • केन्द्र पर नामांकित सभी महिलाओं का (दो माह बाद) स्वयं सहायता समूह बनाना।
  • सभी नामांकित गर्भवती महिलाओं (यदि हैं तो) को जननी सुरक्षा योजना का लाभ दिलवाना तथा विभिन्न योजनाओं की पात्रता रखनेवाली महिलाओं को योजनाओं का लाभ दिलवाना।
  • सभी केन्द्र अनिवार्य रूप में स्थानीय विद्यालय में चलेंगे।

सहायक गतिविधियां

  • साक्षरता रंगोली।
  • अक्षर दौड़।
  • नवसाक्षरों द्वारा बनाये गये वस्तुओं की प्रदर्शनी ।
  • शब्द/वाक्य/लेखन प्रतियोगिता।
  • अन्तरकेन्द्र मिलन समारोह।
  • अक्षर मेला/सामाजिक उत्सव।
  • विकास चर्चा (इस चर्चा में पंचायत में कार्यरत आशा , रोजगार सेवक, पंचायत सेवक, माननीय मुखिया, वार्ड सदस्य, पंच, सरपंच, चिकित्सा पदाधिकारी, कृषि मित्र, विकास मित्र, संकुल समन्वयक, प्रखण्ड शिक्षा  पदाधिकारी, थाना प्रभारी, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, प्रखण्ड कल्याण पदाधिकारी, बाल विकास पदाधिकारी, माननीय प्रखण्ड प्रमुख आदि को सम्पर्क कर बुलाया जा सकता है)।
  • साक्षरता भोज।
  • क्षेत्र भ्रमण।

सहायक गतिविधि के तौर पर स्थानीय स्तर पर और कुछ सोचा जा सकता है।

 

स्रोत: बिहार सरकार का राज्य साक्षरता मिशन व स्थानीय ख़बर

 



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