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मुख्यमंत्री झुग्गी-झोपड़ी महिला साक्षरता योजना

मुख्यमंत्री झुग्गी-झोपड़ी महिला साक्षरता योजना

पृष्ठभूमि

बिहार में पिछले दिनों से राज्य सरकार ने महिलाओं के बहुआयामी विकास, योजनाओं में उनकी भागीदारी एवं पूर्व में मुख्यमंत्री अक्षर आंचल योजना, महादलित, अल्पसंखयक एवं अतिपिछड़ा वर्ग कार्यक्रम एवं

अभियान चलाए गए हैं या चलाये जा रहे हैं। ये दोनों योजना ग्रामीण क्षेत्रों में चलाई गई हैं। शहरी क्षेत्रों में साक्षरता के लिए महिलाओं को बुनियादी साक्षरता प्रदान करने हेतु इस योजना का निर्माण किया गया है।

लक्ष्य

 

इस योजना के अर्न्तगत प्रथम चरण में राज्य के सभी जिलों के मुखयालय में चिन्हित झुग्गी-झोपड़ी में वास करने वाली 2,54,495 जनता, 15-35 आयु वर्ग की महिलाओं को बुनियादी साक्षरता प्रदान की जाएगी।

संरचना

 

जिला स्तर -

इस योजना के संचालन हेतु जिला स्तर पर एक संचालन समिति जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में

गठित की जायेगी जो निम्नवत होगी :-

अध्यक्ष, नगर परिषद्‌/नगर निगम   -     संरक्षक

जिला पदाधिकारी                 -     अध्यक्ष

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) -    समन्वयक

सदस्य राज्य संसाधन समूह        -     सदस्य

एक महिला के0आर0पी0           -     सदस्य

डी0पी0सी0 महिला सामाखया       -     सदस्य

(यदि जिला में महिला सामाखया कार्यरत न हो)   - सदस्य

झुग्गी-झोपड़ी में कार्यरत एन0 जी0 ओ0 के एक प्रतिनिधि -  सदस्य

झुग्गी-झोपड़ी में कार्यरत समाजिक संगठन के एक प्रतिनिधि - सदस्य

संकुल स्तर -

प्रथम चरण में यह योजना सभी जिला मुखयालय के चिन्हित झुग्गी-झोपड़ी में संचालित होगी। पदाधिकारी इस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए प्रखण्ड स्तर पर नोडल पदाधिकारी की भी भूमिका निर्वहन करेंगे।

साक्षरता का इन्टरफेस स्थापित भी करना है जिसमें प्रखण्ड रूप में इस कार्य को करेंगे।

विद्यालय शिक्षा समिति की भूमिका

राज्य संपोषित इस साक्षरता कार्यक्रम का केन्द्र स्थल अनिवार्य रूप में स्थानीय प्राथमिक/मध्य विद्यालय होंगे। कार्यक्रम के संबंधित अक्षरदूत विद्यालय के बाद दो घंटे के लिए केन्द्र का संचालन करेंगे। केन्द्र के सफल संचालन के लिए केन्द्रों आकर एक केन्द्र संचालन समिति होगी जिसकी देख-रेख में साक्षरता केन्द्र चलेगा।

पठन-पाठन सामग्री

 

बिहार राज्य पाठ्‌य पुस्तक प्रकाशन निगम, पटना से मुद्रित कराकर लक्ष्यानुसार जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) के माध्यम से संकुल संसाधन केन्द्रों पर उपलब्ध कराया जायेगा जहाँ से अक्षरदूत के माध्यम से केन्द्रों पर भेजा जायेगा। इसके अलावा रौलिंग बोर्ड, दरी, अभ्यास पुस्तिका , काष्ठ पेन्सिल, पेन्सिल कटर, पेन्सिल इरेजर एवं चौक बाजार दर पर क्रय हेतु संबंधित अक्षरदूत को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) द्वारा नगद उपलब्ध कराया जायेगा।

सामुदायिक शिक्षण केंद्र

 

आनेवाले समय में प्रत्येक झोपड़पट्टी में साक्षरता कार्यक्रम को समेकित करते हुए एक-एक सामुदायिक केन्द्र के रूप में विकसित किया जायेगा। आगे चलकर इस केन्द्र पर एक समन्वयक भी होगा जो स्थानीय युवती या युवक होगा। प्रारंभ में झोपड़पट्टी में अवस्थित प्रा0/म0 वि0/सी0आर0सी0 इस सामुदायिक केन्द्र का स्थल होगा। कल्याण विभाग (राज्य सरकार) एवं नुरूम योजना (भारत सरकार) के सहयोग से एक सामुदायिक भवन के निर्माण का प्रयास किया जायेगा।

सर्वेक्षण, बैचिंग-मैचिंग एवं डाटा इंट्री

 

यह राज्य संपोषित साक्षरता कार्यक्रम जिला मुखयालय के चिन्हित झुग्गी-झोपड़ियों में संचालित होगा सर्वप्रथम 15-35 आयु के लक्ष्य समूह के लिए इन झुग्गी-झोपड़ी में निवास करनेवाली महिलाओं का सर्वेक्षण कराया जाएगा। सर्वेक्षण में आये असाक्षरों का बैचिंग-मैचिंग के बाद संबंधित अक्षरदूत के साथ टैंगिंग की जाएगी |

प्रशिक्षण

 

प्रशिक्षण का आयोजन दो स्तरों पर होगा:

राज्य स्तर

राज्य स्तर पर कार्यरत सदस्य, राज्य संसाधन समूह एवं सभी जिलों से चिन्हित पांच के0आर0पी0 (जिसे जिला में आयोजित किया जाएगा।

क्लस्टर स्तर

क्लस्टर स्तर पर कार्यरत सदस्य, राज्य संसाधन समूह एवं सभी जिलों से चिन्हित पांच के0आर0पी0 (जिसे क्लस्टर में आयोजित किया जाएगा।

अक्षरदूत (वी0टी0)

समाप्ति के बाद विद्यालय परिसर में ही प्रतिदिन एक घण्टा साक्षरता केन्द्र का संचालन करेंगे। प्रत्येक अक्षरदूत दस असाक्षर महिलाओं को साक्षर करेंगे। एक विद्यालय में एक से अधिक केन्द्र हो सकते हैं मगर सभी केन्द्रों पर पढ़नेवाली महिलायें दस ही होंगी। प्रत्येक अक्षरदूत अपने विद्यालय के बाल संसद/मीना मंच के एक प्रतिनिधि को सहयोगी के रूप में जोड़ेंगे। सफल अक्षरदूतों को प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

प्रारंभिक शिक्षा

 

प्रायः आज भी शहरी झुग्गी-झोपड़ी में वास करने वाली आबादी में से बच्चे एक बड़ी संख्या में विद्यालय नहीं जाते|

साक्षरता केन्द्र स्थल एवं समय

 

प्रत्येक क्लस्टर में 60-70 साक्षरता केन्द्र हो सकते हैं जो विभिन्न स्कूलों में विद्यालय के बाद चलेंगे अर्थात जो जिस विद्यालय में पदस्थापित होंगे उसी विद्यालय में उनका केन्द्र चलेगा। एक विद्यालय में अधिकतम 6-7 साक्षरता केन्द्र संचालित किए जा सकते हैं। सामान्य तौर पर केन्द्रों का समय 2.30 - 3.30 होगा। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद सभी अक्षरदूतों एवं उनके सहयोगी (विद्यार्थी) को विभाग द्वारा प्रमाण-पत्र दिया जाएगा।

पाठ्‌य सामग्री

 

प्रत्येक साक्षरता केन्द्र पर निम्नलिखित पठन पाठन सामग्री की आपूर्ति की जायेगी :-

  1. अभ्यास पुस्तिका
  2. काष्ट पेंसिल
  3. पेन्सिल कटर
  4. पेन्सिल रबर
  5. चौक
  6. दरी
  7. रॉलिंग बोर्ड

संख्या के अनुसार जिलों को बैंक ड्राफ्ट द्वारा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।

प्रबोधन

 

इस कार्यक्रम का त्रिस्तरीय प्रबोधन होगा :

राज्य स्तर से सदस्य, राज्य संसाधन समूह विभिन्न क्लस्टरों का माह में 2 बार भ्रमण कर क्लस्टर संचालन समिति, अक्षरदूत को विभिन्न समस्याओं के समाधान एवं केन्द्र संचालन में सहयोग देंगे। सभी सदस्य अपना भ्रमण जिला स्तर से चिन्हित के.आर.पी. अपने आवंटित क्लस्टरों का भ्रमण करेंगे तथा अक्षर दूत एवं क्लस्टर संचालन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) को एक लिखित प्रतिवेदन समर्पित करेंगे।

क्लस्टर स्तर पर समन्वयक, संकुल संसाधन केन्द्र भी अपने क्लस्टर के विभिन्न स्कूलों में चल रहे साक्षरता केन्द्रों का दौरा करेंगे। अक्षरदूतों की मासिक बैठक करेंगे। इस बैठक में के.आर.पी. (क्लस्टर प्रभारी) अनिवार्य रूप में भाग लेंगे। इस प्रबोधन कार्य हेतु संकुल संसाधन केन्द्र के समन्वयकों के लिए मासिक यात्रा व्यय का प्रावधान किया जायेगा।

अधिकारी भी अपने स्तर से माह में पाँच दिन अनुश्रवण कार्य करेंगे एवं अपना अनुश्रवण प्रतिवेदन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) को समर्पित करेंगे। आधार पर जिलावार समेकित प्रतिवेदन प्रधान सचिव को उपलब्ध करायेंगे।

एस.आर.जी./के.आर.पी. की भूमिका

 

साक्षरता केन्द्रों का अनुश्रवण

संकुल, प्रखण्ड एवं जिला स्तर की बैठकों में भागीदारी

सूचनाओं का आदान-प्रदान

मासिक प्रगति प्रतिवेदन को ससमय भेजवाना।

अक्षर मेला/सामाजिक उत्सव के आयोजन में सहयोग प्रदान करना ।

साक्षरता केन्द्र एवं जिला स्तर की संचालन समिति के बीच संपर्क व्यक्ति के रूप में कार्य।

कार्यक्रम का विकासात्मक अन्तर्सम्बन्ध

 

कार्यक्रम के बीच (तीसरे-चौथे माह से) में ही विभिन्न लाइन डिपार्टमेन्टस के समन्वय से नवसाक्षर महिलाओं के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इस प्लान का तीन फोकस एरिया होगा :-

(क) समयबद्ध अभिसरण योजना से भी साझेदारी की जाएगी।

(ख) प्रत्येक संकुलो से चिन्हित 50-50 नवसाक्षर युवतियों को ऑटोरिक्शा ऋण के लिए बैंक एवं कल्याण विभाग के साथ साझेदारी|

(ग) साईबर कैफे शुरू करने के लिए बैंक, कल्याण विभाग एवं नूरुम योजना से साझेदारी।

प्रमाणीकरण

 

कार्यक्रम के संचालन हेतु जिला एंव संकुल स्तर पर गठित समिति द्वारा जिले की असाक्षर महिलाओं को साक्षरता केन्द्र पर लाने हेतु एवं उन्हें प्रेरित करने के लिए रणनीति तय की जाएगी। यह कार्य संकुल संसाधन केन्द्र की समिति के सभी नवसाक्षरों द्वारा पढ़ाई पूरी करने के बाद इनकी बुनियादी साक्षरता परीक्षा लेकर प्रमाणीकरण करवाया जायेगा। इसके लिए बिहार बोर्ड ऑफ ओपेन स्कूलिंग का सहयोग प्राप्त किया जाएगा। संख्या के अनुसार जिलों को बैंक ड्राफ्ट द्वारा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।

कार्यक्रम की रुपरेखा

 

इस कार्यक्रम की त्रिस्तरीय रुपरेखा होगी :

राज्य स्तर से सदस्य, राज्य संसाधन समूह विभिन्न क्लस्टरों का माह में 2 बार भ्रमण कर क्लस्टर संचालन समिति, अक्षरदूत को विभिन्न समस्याओं के समाधान एवं केन्द्र संचालन में सहयोग देंगे। सभी सदस्य अपना भ्रमण जिला स्तर से चिन्हित के0आर0पी0 अपने आवंटित क्लस्टरों का भ्रमण करेंगे तथा अक्षर दूत एवं क्लस्टर संचालन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) को एक लिखित प्रतिवेदन समर्पित करेंगे।

क्लस्टर स्तर पर समन्वयक, संकुल संसाधन केन्द्र भी अपने क्लस्टर के विभिन्न स्कूलों में चल रहे साक्षरता केन्द्रों का दौरा करेंगे। अक्षरदूतों की मासिक बैठक करेंगे। इस बैठक में के0आर0पी0 (क्लस्टर प्रभारी) अनिवार्य रूप में भाग लेंगे। इस प्रबोधन कार्य हेतु संकुल संसाधन केन्द्र के समन्वयकों के लिए मासिक यात्रा व्यय का प्रावधान किया जायेगा।

अधिकारी भी अपने स्तर से माह में पाँच दिन अनुश्रवण कार्य करेंगे एवं अपना अनुश्रवण प्रतिवेदन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) को समर्पित करेंगे।

आधार पर जिलावार समेकित प्रतिवेदन प्रधान सचिव को उपलब्ध करायेंगे।

एस.आर.जी./के.आर.पी.की भूमिका

 

साक्षरता केन्द्रों का अनुश्रवण

संकुल, प्रखण्ड एवं जिला स्तर की बैठकों में भागीदारी

सूचनाओं का आदान-प्रदान

मासिक प्रगति प्रतिवेदन को ससमय भेजवाना।

अक्षर मेला/सामाजिक उत्सव के आयोजन में सहयोग प्रदान करना ।

साक्षरता केन्द्र एवं जिला स्तर की संचालन समिति के बीच संपर्क व्यक्ति के रूप में कार्य।

कार्यक्रम का विकासात्मक अन्त

 

कार्यक्रम के बीच (तीसरे-चौथे माह से) में ही विभिन्न लाइन डिपार्टमेन्टस के समन्वय से नवसाक्षर महिलाओं के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इस प्लान का तीन फोकस एरिया होगा :-

(क) समयबद्ध अभिसरण योजना से भी साझेदारी की जाएगी।

(ख) प्रत्येक संकुलो से चिन्हित 50-50 नवसाक्षर युवतियों को ऑटोरिक्शा ऋण के लिए बैंक एवं कल्याण विभाग के साथ साझेदारी|

(ग) साईबर कैफे शुरू करने के लिए बैंक, कल्याण विभाग एवं नूरुम योजना से साझेदारी।

सपोर्ट एजेन्सी थोड़ा बेहतर होता है। इस संदर्भ में उपर्युक्त वर्णित विकासात्मक अंतर्संबंध को सफल बनाने के लिए निम्नलिखित एजेन्सियों से मदद हो सकती हैं:-

  • बसुधा केन्द्र
  • नारी गुंजन
  • प्रथम
  • जीविका
  • खादी ग्रामोद्योग निगम
  • कृषि विज्ञान केन्द्र
  • लीड बैंक (जिलावार)
  • एस0 आर0 सी0
  • महिला विकास निगम
  • उद्यमिता विकास संस्थान।
  • निदान

दस्तावेजीकरण

 

पूरे कार्यक्रम का एक दस्तावेज निर्माण कराया जायेगा। इस दस्तावेज में कुछ सफलता कहानी, केस स्टडी, अनुभव, नवाचारी पहलकदमियाँ, कुछ कठिनाईयों आदि पर आधारित लिखित आलेख होंगे। यह दस्तावेज हार्ड एवं सॉफ्ट कॉपी में तैयार कराये जायेंगे। साथ ही, कार्यक्रम की वीडियोग्राफी भी होगी।

साक्षरता केन्द्र पर क्या होगा?

 

सहायक गतिविधियां होंगी जैसे:

  • एक घण्टा साक्षरता केन्द्र का संचालन।
  • प्रत्येक केन्द्र पर कम से कम दस असाक्षर महिला को स्वंयसेवी (अक्षरदूत) को पढ़ाना अनिवार्य होगा।
  • कॉर्ड रखना।
  • सफल नवसाक्षरों का प्रमाणीकरण करवाना।
  • सहायक गतिविधियां
  • साक्षरता रंगोली।
  • अक्षर दौड़।
  • शब्द/वाक्य/लेखन प्रतियोगिता।
  • अन्तरकेन्द्र मिलन समारोह।
  • अक्षर मेला/सामाजिक उत्सव।
  • विकास चर्चा (इस चर्चा में वार्ड में कार्यरत विभिन्न विकास विभाग के कर्मियों को सम्पर्क कर बुलाया जा सकता है)।
  • साक्षरता भोज।
  • क्षेत्र भ्रमण।

स्त्रोत: शिक्षा विभाग, बिहार सरकार



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