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अनुसूचित जनजातियों हेतु राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति योजना

अनुसूचित जनजातियों हेतु राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति योजना

भूमिका

यह एक केन्द्रीय योजना है जो इंजीनियरिंग, तकनीकी एंव विज्ञान क्षेत्र में विदेशों में मास्टर स्तर के पाठ्यक्रम, पीएच.डी. और पोस्ट डॉक्टरेट अनुसंधान कार्यक्रम स्तर के प्रतिभाशाली अनुसूचित जनजाति छात्रों को वित्तिय सहायता प्रदान करती है। इस योजना की शुरूआत 1954-55 के दौरान हुई और इसे समय-समय पर संशोधित किया गया। यह एक गैर-योजनागत स्किम है, जो 2007-08 से योजनागत स्कीम बनी।

प्रमुख विशेषताएं

यह योजना इंजीनियरिंग, तकनीकी, विज्ञान के 35 निर्दिष्ट विषयों में विदेशों में मास्टर स्तर के पाठ्यक्रम पीएच.डी. एंव पोस्ट डॉक्टरेट अनुसंधान कार्यक्रम स्तर के 15 प्रतिभाशाली अनुसूचित जनजाति छात्रों (13 एसटी एंव 2 पीजीटी) को वित्तिय सहायता प्रदान करती है।

यह योजना अनुसूचित जनजाति के परीक्षार्थियों हेतु रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के प्रयास करती है।

100% केन्द्रीय सहायता सीधे परीक्षार्थी को उपलब्ध कराई जाती है।

वित्तीय सहायता निम्न दी गई अवधि सहित पाठ्यक्रमों/शोधों के पूरा होने तक उपलब्ध कराई जाती है, जो भी पहले हो -

  • पोस्ट डॉक्टरेट अनुसंधान - 1एंव1/2 वर्ष (डेढ़ वर्ष)
  • पीएच.डी. - 4 वर्ष (चार वर्ष)
  • मास्टर डिग्री –3 वर्ष ( तीन वर्ष)

भारतीय मिशन विदेश के अतिरिक्त शैक्षिक संस्था/विश्वविद्यालय में सक्षम अधिकारी की सिफारिशों पर ही ऊपर दिए गए पाठ्यक्रमों की निर्धारित अवधि के बाद रहने का अतिरिक्त समय, किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता के बिना माना जा सकता है, सिर्फ भारत लौटने के लिए हवाई यात्रा को छोड़कर।

योग्यता मानदंड

 

  1. परीक्षार्थी अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित होना चाहिए।
  2. परीक्षार्थी के मास्टर डिग्री, पीएच.डी. एंव पोस्ट डॉक्टरल शोध के लिए प्रथम श्रेणी के साथ 60% अंक या प्रासंगिक डिग्री में बराबर ग्रेड होने चाहिए।
  3. परीक्षार्थी की उम्र 35 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।
  4. परिक्षार्थी के माता-पिता/अभिभावक की सभी स्रोतों से प्रतिमाह आय 25000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए (कुल आय के आयकर के प्रयोजन राशि को छोड़कर)।
  5. एक ही माता-पिता/अभिभावक के एक से अधिक बच्चे पात्र नहीं होते है।
  6. जो परिक्षार्थी रोजगार में हो या काम कर रहे हो उनको अपना आवेदन अनापत्ति प्रमाण पत्र के साथ नियोजक के माध्यम से भेजना होता है।
  7. अंततः चयनित परिक्षार्थियों का चुने हुए क्षेत्र में तीन साल के भीतर विदेश में मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/संस्थान में प्रवेश एंव शामिल होना आवश्यक है।

लाभ

 

  1. चयनित छात्रों को विदेशी विश्वविद्यालय द्वारा प्रभारित ट्यूशन एवं अन्य शिक्षण शुल्क आदि प्रदान किया जाता है। इसके अलावा यात्रा व्यय के साथ रखरखाव एवं अन्य अनुदान भी उपलब्ध कराया जाता है।
  2. विदेशी सरकार/संस्थाओं या किसी भी योजना के तहत स्नातकोत्तर अध्ययन, शोध या विदेश में प्रशिक्षण (सेमिनार, कार्यशालाएं, सम्मेलन को छोड़कर) जिसमें स्वीकृत लागत प्रदान नहीं की जाती हो, हेतु मेरिट छात्रवृत्ति में शामिल ऐसे चार अनुसूचित जनजाति छात्रों को केवल स्वीकृत अनुदान प्रत्येक वर्ष उपलब्ध कराया जाता है।
  3. निर्धारित उच्चतम सीमा तक के शोध/शिक्षण असिस्टेंटशिप के द्वारा पुरस्कार विजेताओं को उनकी विहित वृति पूर्ति करने की अनुमति दी गई। जहां आय उच्चतम सीमा से परे हो, ऐसे में भारतीय मिशन विदेश द्वारा इस योजना के तहत रखरखाव भत्ता तदनुसार घटा दिया जायेगा।

 

योजना की प्रगति

इस योजना के तहत, 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान (2007-08 से 2011-12) 1.54 करोड़ रु. जारी किए गए। 2012-13 वित्त वर्ष के दौरान 1 करोड़ रु. का बीई, इसके अलावा 0.87 करोड़ रुपये अभी तक जारी किए जा चुके है।

स्रोत: भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय


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