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स्वास्थ्य सेवा तंत्र

परिचय

अधिकांश लोग अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार के लिए आधुनिक व परंपरिक दवाओं को मिला-जुलाकर प्रयोग करते हैं ।

भारत में उपचार की विभिन्न पद्धतियों में स्वास्थ्य सेवाओं के अलग-अलग स्तर हैं : सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मचारी, पारम्परिक उपचारक, स्वास्थ्य केन्द्र तथा अस्पताल। इन सभी को एक साथ “ स्वास्थ्य सेवा तंत्र “ कहा जाता है। स्वास्थ्य सेवा तंत्र में स्वास्थ्य कर्मचारी, डॉक्टर, नर्सें तथा अन्य सम्मिलित होते हैं। वे निजी प्रैक्टिस में हो सकते हैं ( अर्थात अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए फिस लेते हैं ) या वे समुदाय, सरकार, किसी धार्मिक/सेवा संस्था, कल्याण संस्था या किसी अन्य संगठन द्वारा समर्थित होते हैं। कभी-कभी वे भली भांति प्रशिक्षित होते हैं और कभी-कभी नहीं।

इस अध्याय में स्वास्थ्य सेवा तंत्र का वर्णन किया गया है और यह भी बताया गया है कि एक महिला किस प्रकार इसका उपयोग अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए कर सकती है । यह आवयशक नहीं है हर समुदाय में ये सभी स्तर उपस्थित हों। इनके विभिन्न सम्मिश्रण हो, महिलाओं – और सभी रोगी व्यक्तियों को –तभी बेहतर देखभाल मिल सकेगी जब सेवाओं तक उनकी पहुँच होगी और स्वास्थ्य सेवाओं के सभी स्तर-विशेषकर ग्राम, खंड व जिला स्तरों पर स्वास्थ्य सेवाओं का एक दुसरे के साथ अच्छा समन्वय व संबंध हो।

भारत अमूल्य व सम्रध धरोहर वाली असीम विभिन्नता की भूमि है जिसका इतिहास हजारों साल पुराना है । चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी यहां अनके पद्धतियां व रिवाज हैं । महिलाओं तथा बच्चों के स्वास्थ्य तथा पारम्परिक आहार व भोजन के बारे में इन पद्धतियों के बारे में दी गई सलाहों का सही रूप से पालन करने से महिलाओं व उसके परिवारों का स्वास्थ्य सुधर सकता है ।

तदापि विशेषत: महिलाओं के स्वास्थ्य के मामले में, भारतीय पद्धतियों का महत्त्व व स्वीकार्यता अधिक लोगों में होती हैं क्योंकि वे स्थानीय जीवन शैली तथा संस्कृति के अनुरूप ढाली जा सकती है । हालांकि कुछ ऐसे क्षेत्रों की सुधार की गूंजाईश है , विशेषकर सामाजिक प्रथाओं में, जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए घातक होते हैं, फिर भी अधिकांशत: ऐसे क्षेत्र हैं जो सन्तुलित आहार व स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सरल, सस्ता व आसानी से उपलब्ध कराकर महिलाओं को बेहद लाभ पहुंचा सकते हैं। आयुर्वेद जैसी परंपरिक पद्धति अपने दृष्टिकोण तथा महिलाओं और बच्चों को कुशल मंगल रखने में अधिक परिपूर्ण होती है।

भारत में स्वास्थ्य सेवा तंत्र में सरकारी व निजी सेवाएं सम्मिलित हैं । जबकि सरकारी स्वास्थ्य सेवा तंत्र का ढांचा व नेटवर्क अधिक वृहद है , यह ग्रामीण क्षेत्रों व उन लोगों तक पहुँचने में उतना सफल नहीं हुआ है । जहाँ इनकी आवश्यकता सर्वाधिक है । परिणामस्वरूप 80 प्रतिशत चिकित्सा सेवाएं निजी स्रोतों में आधुनिक चिकित्सा पद्धति, आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध , योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा (नैचुरोपैथी) के प्रक्टिसनर्स को अधिक पसंद करती है क्योंकि उन तक पहुंच अधिक आसान होती है।

सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मचारी

कुछ समुदायों में अच्छी तरह से प्रशिक्षित, दक्ष कर्मचारी होते हैं । वे स्वास्थ्य कर्मचारी अकसर स्वास्थ्य पोस्ट या केंद्र पर कार्य करते हैं, लेकिन सभी नहीं । समुदाय स्तर पर स्वस्थ्य सेवाओं को आवश्यकता पड़ने पर महिलाएं पारम्परिक प्रसव सहायक या दाई  या सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मचारी से ही सर्प्रथम सम्पर्क करती हैं । सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मचारीयों को ट्रेनिग दी जानी चाहिए। समुदाय के लोगों में साथ नजदीकी रूप से कार्य करके वे उन स्थानीय परम्पराओं तथा रिवाजों के बारे में सीख सकते हैं जो अनके सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम तथा उसके गंभीर रूप धारण करने से पहले ही उनका उपचार कर सकते हैं।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र (प्रा०स्वा० कें०)(मिनी प्रा०स्वा० कें०, अतरिक्त प्रा०स्वा० कें०, सेक्टर प्रा०स्वा०कें० ) 20,000 -30,000 आबादी के लिए एक बनाया जाता है । एक प्रा०स्वा० कें० ये सब सेवाएं प्रदान करने के लिए सक्षम होना चाहिए ।

  • स्वास्थ्य जानकारी ताकि हरके व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के बारे में बेहतर फैसले ले सके ।
  • टीकाकरण जो अनके रोगों की रोकथाम कर सकते हैं जिनमें टिटनेस, खसरा, डिप्थीरिया, काली खांसी, पोलियो, टी. बी. तथा टीकाकरण से रोकी जा सकने वाली अन्य बिमारियां सम्मिलित हैं ।
  • गर्भावस्था के दौरान देखभाल (प्रसव के पूर्व देखभाल) जो किसी महिला को गर्भावस्था में उसे व उसके अजन्मे बच्चे को प्रभावित करने वाली समस्याओं का गंभीर होने से पहले ही समाधान करने में सहायक होती है ।
  • परिवार नियोजन सम्बंधित सेवाएं व पूर्ति जो महिलाओं को यह चुनने से सहायक होकर अनके जानें बचाती हैं कि महिलाओं को कितने बच्चे व कब-कब हों ।
  • टी.बी. व मलेरिया का शीघ्र निदान तथा उपचार
  • प्रजनन तंत्र के रोगों व यौन संचारित रोगों, का प्रबंधन व रोकथाम
  • मामूली रोगों का उपचार
  • समय पर रेफरल सेवाएं
  • पर्यावरण की स्वच्छता जिसमें पीने के पानी के स्त्रोत्रों का शुद्धिकरण भी सम्मिलित हैं।
  • स्वास्थ्य गाईड्स, स्वस्थ्य कर्मचारियों, स्वस्थ्य सहायकों व दाईयों का प्रशिक्षण

उपस्वास्थ्य केंद्र

ये गांव के स्तर पर स्थित स्वास्थ्य चौकियां है । एक उपकेन्द्र लगभग 5000 लोगों को सेवाएं देता है । पहाड़ी, आदिवासी तथा रेगिस्तानी इलाकों में यह आबादी 3000 होती है । आम तौर पर 5-6 उपकेन्द्र एक प्रा०स्वा० कें० से जुड़े होते हैं ।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आम तौर पर बड़े कस्बों में होते हैं । प्रा०स्वा० केन्द्रों द्वारा दी जाने वाली सेवाएं देने के साथ-साथ यहां लोगों के उपचार के लिए 30 बिस्तर भी होते हैं । प्रा०स्वा०केन्द्रों की तुलना में यहां डॉक्टर व प्रशिक्षित नर्सों की संख्या अधिक होती है और ये महिलाओं व बच्चों के लिए विशेष सेवाएं भी प्रदान करते हैं । तदापि यहां भीड़-भाड होने और डॉक्टरों व नर्सों की अपने रोगियों को ठीक से न जानने की सम्भावना रहती है । सा०स्वा० कें० में विशेष उपकरणों से सज्जित प्रयोगशालाएं भी होती है जो रोक का कारण जानने के लिए परिक्षण कर सकती है ।

अस्पताल

ये आम तौर पर बड़े कस्बों या शहरों में होते हैं और काफी महंगे हो सकते हैं । इनमे काफी संख्या में डॉक्टर्स व नर्स होती हैं और गंभीर रोगों के उपचार के लये विशेष उपकरण होते हैं । गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्ति को किसी ऐसे विशेष अस्पताल या डॉक्टर के पास जाना पड़ता है जी उसे प्रकार के रोगों का उपचार करता है ।

  • एक महिला को इन सब के इए अस्पताल जान पड़ा सकता है ।
  • कोई ऐसे समस्या जिसका कहीं और उपचार संभव नहीं है ।
  • प्रसव या गर्भपात की जटिलताएं ।
  • फैलोपियन नलिकाओं में गर्भधारण जैसी आपात स्थितियां ।
  • ओपरेशन की आवश्यकता वाली स्वास्थ्य समस्याएं ।

उपचार पाने का अधिकार

आप चाहे कहीं भी स्वास्थ्य देखभाल के लिए जाएं आपको सम्मान के साथ उपचार पाने का अधिकार है

ये लोग जो आपके स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं, उन्हें चाहिए कि वे आपको यह सब प्रदान करने के लिए यथासंभव प्रयास करें –

पहुंच :

चिकित्सा सेवा की आवश्यकता वाले सभी लोगों को इन सेवाओं तक की पहुँच होनी चाहिये । ये सेवाएं आपके निवास, धर्म, जाति, रंग सामाजिक स्तर, राजनैतिक संबंध या बीमारी के बारे में बिना किसी भेदभाव के मुहैया होनी चाहिए । यह बात सरकारी व निजी स्वास्थ्य सेवाओं –दोनों पर लागू होती है ।

जानकारी :

आपको अपनी समस्या और उसके उपचार के विकल्पों के बारे में पूर्ण जानकारी दी जानी चाहिए । आपको सेवाएं प्रदान करने वाले व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपको ठीक होने व  इस रोग को फिर से न होने देने के लिए क्या-क्या करना है ।

चुनना :

आप यह चुन सके कि आप इलाज करवाना चाहती हैं या नहीं और कराना चाहती है तो कैसे ? इसके अतिरिक्त आपको यह भी चुनने का अधिकार है कि आप कहाँ इलाज करवाना चाहती हैं ।

सुरक्षा :

हानिकारक दुष्प्रभावों से बचने व उपचार के परिणामों के बारे में आपको जानकारी दी जानी चाहिए ।

सम्मान :

आपके साथ हमेशा नम्रता व सम्मान के साथ व्यवहार होना चाहिए ।

एकांतता :

जो बातें आप किसी डॉक्टर, नर्स या स्वास्थ्य कर्मचारी को बताती हैं वे किसी अन्य द्वारा सुनी या किसी अन्य के सामने दोहराई नहीं जानी चाहिए । चिकित्सीय परिक्षण इस प्रकार होना चाहिये कि अन्य लोग आपके शरीर को न देख सकें । अगर कमरे में, परिक्षण के दौरान, अन्य लोगों का होना आवश्यक है तो आपको यह बताया जाना चाहिए कि वे कौन हैं और वहाँ पर क्यों मौजूद हैं। अगर आप इन लोगों की उपस्थिति नहीं चाहती हैं तो आपको उन्हें कमरे से बाहर भेजने का हक है ।

आराम :

परीक्षण के दौरान आपको यथासम्भव सहज बनाया जाना चाहिये । आपको प्रतीक्षा करने के लिए एक अच्छा मिलाना चाहिए और आपको अधिक प्रतिक्षा नहीं करवानी चाहिए ।

फोलो-अप देखभाल :

अगर आपको और देखभाल की आवश्यकता है तो आपका उसी व्यक्ति के पास फिर से जाना संभव होना चाहिए या आपको दी गई सेवा व देखभाल का लिखित रिकार्ड आपको दिया जाना चाहिए ताकि आप उसे नए डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मचारी के पास ले जा सकें ।



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