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वसा और कोलेस्ट्रॉल

वसा और कोलेस्ट्रॉल

जीवनशैली के विकार:भारतीय परिदृश्य

आधुनिक विज्ञान ने उन्नत स्वच्छता, टीकाकरण और एंटीबायोटिक्स तथा चिकित्सकीय सुविधाओं के माध्यम से अनेक संक्रामक बीमारियों से होनेवाली मृत्यु के खतरे को खत्म कर दिया है। इसका अर्थ यह है कि अब मृत्यु का प्रारंभिक कारण हृदय रोग और कैंसर जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां हो गई हैं। प्राकृतिक रूप से हर व्यक्ति की मृत्यु किसी-न-किसी कारण से हो सकती  है, लेकिन जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां लोगों की असमय मृत्यु का कारण बन जाती हैं। आधुनिक युग में बहुत से लोग आनुपातिक रूप से कम उम्र में ही हृदय रोगों और कैंसर तथा जीवनशैली से जुड़ी अन्य बीमारियों की वजह से मर रहे हैं।

भारत में स्थिति काफी चिंताजनक है। बीमारियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)ने भारत की पहचान ऐसे देश के रूप में की है, जहां निकट भविष्य में जीवनशैली से जुड़े विकार सर्वाधिक होंगे। आजकल न केवल जीवनशैली के विकार आम हो रहे हैं, बल्कि ये युवा आबादी को भी प्रभावित कर रहे हैं। इसलिए 40+ की आबादी पर से खतरा शायद 30+ या और कम पर आ रहा है। मधुमेह की वैश्विक राजधानी के रूप में पहले से ही पहचान बना चुका भारत एक और नकारात्मक उपलब्धि हासिल करने की ओर बढ़ रहा है और वह है जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की वैश्विक राजधानी बनना। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और मैक्स अस्पताल द्वारा किए गए एक संयुक्त अध्ययन के अनुसार उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय रोग के मामले, विशेष तौर पर युवा और शहरी युवा आबादी में खतरनाक गति से बढ़ रहे हैं। चिकित्सकों के कथनानुसार, वसायुक्त भोजन की अत्यधिक मात्रा और अल्कोहल के साथनिष्क्रिय जीवन पध्दति हीमोटापे, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के लिए जिम्मेदार हैं।

इस भाग में निम्न बिंदुओं पर जानकारी दी गई है-

सबसे पहले इसके अंतर्गत वसा और कोलेस्ट्रॉल की जानकारी को यहां प्रस्तुत किया गया है।

संतृप्त और असंतृप्त वसा

संतृप्त वसा पशु उत्पादों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे, मांस, डेयरी उत्पाद, चिप्स और पेस्ट्रियों में पाई जाती हैं। संतृप्त वसा की रासायनिक संरचना पूरी तरह से हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ संतृप्त होती है, और उसके कार्बन परमाणुओं के बीच दोहरा बंधन नहीं पाया जाता है। संतृप्त वसा हृदय के लिए स्वास्थ्यकारक नहीं होती हैं, क्योंकि वे आपके रक्त में कम घनत्व वाले लाइपोप्रोटीन (एलडीएल) कोलेस्ट्रॉल ("बुरा" कोलेस्ट्रॉल) का स्तर बढ़ाने के लिए सबसे अधिक जानी जाते हैं।

दूसरी ओर, असंतृप्त वसा, मेवा, एवोकेडो, और जैतून जैसे खाद्य पदार्थों में पाई जाती हैं। वे कमरे के तापमान पर तरल दशा में रहती हैं और  संतृप्त वसा से उनकी रासायनिक संरचना भिन्न होती है क्योंकि उसमें दोहरे बंधन होते हैं। इसके अतिरिक्त, अध्ययनों से पता चला है कि असंतृप्त वसा हृदय के लिए स्वास्थ्यकर वसा हैं - उनमें एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करने की क्षमता होती है और वे उच्च घनत्व लाइपोप्रोटीन (एचडीएल) कोलेस्ट्रॉल (“अच्छा” कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को बढ़ाती हैं।

असंतृप्त और संतृप्त वसाओं के बीच अंतर

संतृप्त वसाओं और असंतृप्त वसाओं, जो भोजन में पाए जाने वाले वसा के दो मुख्य प्रकार हैं, के बीच के अंतर की जानकारी, आपको अपने कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकती है। जबकि असंतृप्त वसा और संतृप्त वसा दोनों ही विविध प्रकार के खाद्य पदार्थों में पाई जाती हैं, अध्ययनों से पता चला है कि ये वसा समान रूप से नहीं बनाई जाती हैं। असंतृप्त वसा आपके दिल के लिए फायदेमंद हो सकती हैं, जबकि संतृप्त वसा आपके कोलेस्ट्रॉल और दिल के लिए हानिकारक हो सकती हैं।

इसलिए, यदि आप कोलेस्ट्रॉल कम करने वाले आहार-नियम का पालन करने की कोशिश कर रहे हैं, तो असंतृप्त वसा खाने पर आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर और नहीं बढ़ने चाहिये। लेकिन, आपको अधिक संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थों से बचने का प्रयास करना चाहिये।

मोनोअनसैचुरेटेड और बहुअसंतृप्त वसाओं के बीच क्या अंतर है?

असंतृप्त वसाओं को, जो हृदय के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए सिद्ध हो चुकी हैं, दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित की जा सकती है: मोनोअनसैचुरेटेड और बहुअसंतृप्त। मोनोअनसैचुरेटेड और बहुअसंतृप्त वसाओं के बीच अंतर उनकी रचनाओं में होता है। मोनोअनसैचुरेटेड वसाओं की रचनाओं में एक दोहरा बंधन होता है। दूसरी ओर, बहुअसंतृप्त वसाओं की संरचना में दो या अधिक दोहरे बंधन होते हैं। भोजन में संतृप्त वसा और ट्रांस वसा के स्थान पर मुख्य रूप से मोनो्नसैचुरेटेड और बहुअसंतृप्त वसायुक्त भोजन करने से आपको हृदय रोग से अपनी की रक्षा करने में मदद मिल सकती है। इस विषय में मोनोअनसैचुरेटेड वसा की अपेक्षा बहुअसंतृप्त वसा के बारे में अधिक सबूत उपलब्ध हैं।

राष्ट्रीय कोलेस्ट्रॉल शिक्षा कार्यक्रम के अनुसार, आपके दैनिक कैलोरी सेवन का 10 % तक बहुअसंत़प्त वसा हो सकती हैं। बहुअसंतृप्त वसा निम्न खाद्य पदार्थों से प्राप्त की जा सकती हैं। मेवे, वनस्पति तेल (मकई का तेल, सैफ्लॉवर तेल) ।

कोलेस्ट्रॉल क्या है?

कोलेस्ट्रॉल वसा की तरहकी एक पदार्थ है जो मुख्य रूप से हमारे यकृत में उत्पन्न होता है, लेकिन जो भोजन हम खाते हैं उसमें भी पाया जाता है। हमारा शरीर जितने कोलेस्ट्रॉल की हमें जरूरत होती है, उतना बना लेता है, लेकिन वास्तव में हमें कोलेस्ट्रॉल की जरूरत क्यों होती है? वास्तव में, कोलेस्ट्रॉल के कई महत्वपूर्ण कार्य हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • कोशिका झिल्लियों का गठन और रखरखाव
  • सेक्स हार्मोनों का निर्माण
  • पित्त लवणों का उत्पादन जो खाद्य पदार्थों को पचाने में मदद करते हैं
  • विटामिन डी का उत्पादन

आपको प्रतिदिन कितनी मात्रा में कोलेस्ट्रॉल के सेवन की जरूरत होती है?

हालांकि आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल का बड़ी मात्रा में होना आपके स्वास्थ्य के लिए बुरा हो सकता है, फिर भी आपके शरीर के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण यौगिक है। कोलेस्ट्रॉल विविध प्रकार की शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए जिम्मेदार है।

उदाहरण के लिए, कोलेस्ट्रॉल सेक्स और स्टीरॉयड हार्मोनों के लिए एक महत्वपूर्ण घटक है। यह हमारे शरीर में हर कोशिका के लिए संरचनात्मक सहायता भी प्रदान करता है, क्योंकि कोलेस्ट्रॉल कोशिका झिल्लियों का एक प्रमुख घटक होता है। इसके अतिरिक्त, कोलेस्ट्रॉल माइलिन आवरण, जो हमारे तंत्रिका कोशिकाओं को ढंकता है, को बनाने के लिए भी आवश्यक है। हालांकि उच्च कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग के बीच एक गहरा संबंध स्थापित किया गया है, फिर भी हमें हमारे शरीर में कुछ कोलेस्ट्रॉल की आवश्यकता होती है।

वास्तव में, शरीर में आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए जरूरी कोलेस्ट्रॉल का लगभग 80 प्रतिशत यकृत द्वारा बनाया जाता है, और शेष भाग भोजन से आता है।

आपकी कोलेस्ट्रॉल की दैनिक खपत एक दिन में 200 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन,यकृत हमारी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जरूरी सारे कोलेस्ट्रॉल को बनाने में सक्षम है,इसलिए वास्तव में इसे आहार के जरिये प्राप्त करने की कोई जरूरत नहीं है।

आहार की वसा

जैसा कि हमने पहले कहा है, हमारे भोजन के जरिये सेवन की जाने वाली वसा हमारे कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड स्तरों में एक बड़ा योगदान देती है। गलत प्रकार के वसा के अत्यधिक सेवन आपके कोलेस्ट्रॉल स्तरों को बढ़ा देता है। यहाँ आपके आहार में वसा के सेवन के नियंत्रण के लिए कुछ नुस्खे दिये गए हैं।

  • सही प्रकार की वसा का सेवन करें : किसी भी व्यक्ति से बिलकुल ही वसा न खाने की अपेक्षा करना अवास्तविक है, इसलिए उचित मात्रा में सही वसा लेना कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तरों को नियंत्रित करने का सर्वोत्तम तरीका है। यह सुनिश्चित कर लें कि आप असंतृप्त वसा जरूर खाएंगे; ये वसा वनस्पति पर आधारित खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं। ये वसा आपके एचडीएल को बढ़ाते और एलडीएल को घटाते हैं, जिससे हृदय रोग का खतरा कम हो जाता है। पशु-आधारित खाद्य पदार्थों से प्राप्त संतृप्त वसा आपका एचडीएल कम करते हैं और एलडीएल में वृद्धि करते हैं, जिससे आपका हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।
  • वसा का सही मात्रा में सेवन करें : स्वस्थ वयस्कों के लिए, वसा से मिलने वाली कैलोरियां आपकी कुल कैलोरियों के 30 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस 30 प्रतिशत में कुल कैलोरियों का 7 से 10 प्रतिशत संतृप्त वसाओं से, 10 से 15 प्रतिशत मोनोअनसैचुरेटेड वसाओं से और 10 प्रतिशत बहुअसंतृप्त वसाओं से आना चाहिये।
  • अच्छी तरह से संतुलित आहार खाएं : एक स्वस्थ आहार में निम्न पदार्थ शामिल है, प्रतिदिन फल और सब्जियों की 5 या अधिक बार, और अधिक मात्रा में साबुत अनाज, सेम और फलियां । मिठाई और उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थ सीमित मात्रा में खाने चाहिये।

ट्राइग्लिसराइड क्या हैं?

ट्राइग्लिसराइड शरीर और हमारे भोजन में पाए जाने वाले अधिकांश वसाओं का रसायनिक रूप हैं। जब हम भोजन खाते हैं, तो हमारे शरीर द्वारा वसा को ट्राइग्लिसराइडों,जो वसा का वह रूप है जिसमें शरीर ऊर्जा को आवश्यकता के समय प्रयोग के लिए संग्रह करके रखता है, में परिवर्तित कर दिया जाता है। जब शरीर की ऊर्जा की जरूरत होती है, तब ट्राइग्लिसराइड मुक्त हो जाते हैं और हमारी ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के लिए उन्हें ईंधन के रूप में जला दिया जाता है।

आपकी नियमित स्वास्थ्य जाँच के एक हिस्से के रूप में, डॉक्टर अक्सर एक रक्त परीक्षण करवाते हैं जिसमें आपके रक्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइडों की मात्रा मापी जाती है। कुछ लोगों के लिए, ये स्तर सही होते हैं। लेकिन कई लोगों के लिए, उनका आहार, उनके द्वारा ली जा रही दवाएं, या उनका आनुवंशिक स्वरूप, उनके कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइडों के स्तर को शरीर के लिए आवश्यक स्तरों से अधिक कर देता है। दुर्भाग्य से, अधिक है तो बेहतर नहीं है। वास्तव में, आपके रक्त में बहुत ज्यादा कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइडों की मौजूदगी आपके स्वास्थ्य के लिए खतरा हो सकती है। ट्राइग्लिसराइडों और कोलेस्ट्रॉल के सामान्य से अधिक स्तरों का संबंध निम्न से जोड़ा गया है:

  • हृदय का रोग, जिसमें सीने में दर्द होता है और हृदय का दौरा आता है।
  • परिधीय संवहनी रोग (पैरों की धमनियों का अवरूद्ध हो जाना)
  • सिर और गर्दन की अवरूद्ध धमनियों के परिणामस्वरूप होने वाला मस्तिष्काघात।
  • अग्न्याशयशोथ और लाइपोडिस्ट्रॉफी

कोलेस्ट्रॉल के स्तरों को प्रभावित करने वाले कारक क्या हैं?

ऐसे कई कारक हैं जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं। इन कारकों में से कुछ हमारे नियंत्रण से बाहर होते हैं, उदाहरण के लिए, उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर होने की एक आनुवंशिक प्रवृत्ति (एक पारिवारिक इतिहास)। लेकिन कई कारक हमारे नियंत्रण में भी होते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • अधिक वसा और/या कार्बोहाइड्रेट(शर्करा) वाला आहार
  • व्यायाम की कमी
  • एचआईवी के इलाज के लिए प्रयुक्त दवाओं सहित कतिपय दवाएं


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