भूमिका 'भद्र' का मतलब होता है 'अनुकूल' या 'सुन्दर'। यह आसन लम्बे समय तक ध्यान / मेडीटेसन में बैठे रहने के लिए अनुकूल है और इससे शरीर निरोग और सुंदर रहने के कारण इसे भद्रासन कहा जाता हैं। भद्रासन योग को अंग्रेजी में 'ग्रेसिऑस पोज' भी कहा जाता हैं। भद्रासन कई प्रकार से किया जाता हैं पर हम यहाँ पर भद्रासन का सबसे सरल और उपयोगी प्रकार की जानकारी दे रहे हैं। भद्रासन योग की विधि सबसे पहले एक समान और समतल जगह पर दरी /चटाई या योग मैट बिछा दे। अब वज्रासन में बैठ जाये। अब घुटनों को जितना संभव हो उतना दूर रखे। पैर के पंजो को इस तरह रखे की पैरों की उंगलियों का संपर्क जमीन से रहे और नितम्ब (हिप्स) को पंजो के बीच जमीन पर रखे। दोनों हाथों की हथेलियों को नीचे की ओर घुटनों पर रखे। शरीर को स्थिर और सीधा रखे। कमर-गर्दन सीधी रहनी चाहिए। अब नाक के अग्र (फ्रंट ) पर दृष्टि केंद्रित करे। नियमित श्वसन करे। भद्रासन का अभ्यास करने के बाद 5 मिनट शवासन करे। भद्रासन के लाभ ध्यान में बैठने के लिए एक उपयोगी आसन हैं। एकाग्रता शक्ति बढ़ती हैं और दिमाग तेज होता हैं। मन की चंचलता कम होती हैं। प्रजनन शक्ति बढ़ाता हैं। पाचन शक्ति ठीक रहती हैं। पैर के स्नायु मजबूत होते हैं। सिरदर्द, कमरदर्द, आँखों की कमजोरी, अनिद्रा और हिचकी जैसे समस्या में राहत मिलती हैं। भद्रासन, यह एक बेहद सरल और उपयोगी आसन हैं। अगर आपको कोई पेट की बीमारी है या घुटनों की तकलीफ है तो डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की राय लेकर ही यह योग करे। योग करने पर कोई परेशानी होने पर डॉक्टर / योग विशेषज्ञ की सलाह लेना चाहिए। योग अभ्यास का समय धीरे-धीरे बढ़ाये। लेखक: डॉ. परितोष त्रिवेदी स्रोत: निरोगिकाया