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मध्यस्थता के लिए उपक्रमात्मक प्रारंभिक कार्यकलाप

मध्यस्थता के लिए उपक्रमात्मक प्रारंभिक कार्यकलाप

भूमिका

ऐसी कुछ बातें हैं जिन कार्यकलापों के आरंभ करने से पूर्व ध्यान में रखना चाहिए। इनमें से कुछ प्रारंभिक या उपक्रमात्मक कार्यकलापों की सूची नीचे दे जाती है –

  • कार्यकलाप आरंभ करने से पूर्व बच्चे और रखपाल दोनों को तैयार और निश्चित रहना चाहिए।
  • कमरे में प्रवेश करते समय या उधर से गुजरते समय बच्चे को नाम संबोधित करें या उससे जब किसी विशिष्ट प्रतिक्रिया की जरूरत हो तो भी नाम से ही बुलाएं।
  • बच्चे के साथ इस कार्यकलाप को करने वाला ऐसा व्यक्ति हो जिसे बच्चा अच्छी तरह जनता हो और उसके साथ उसकी घनिष्ठता हो जो आमतौर से माता – पिता ही हो सकते हैं।
  • जब बच्चे के साथ कार्यकलाप करते हों तो विकर्षण को यानी दूसरी ओर ध्यान लगाना न्यूनतम करें।
  • बच्चे के साथ उपयोग में आने वाली तमाम सामग्रियों की संरक्षा और साफ़ – सफाई सुनिश्चित करें।
  • सभी कार्यकलाप दैनिक दिनचर्याओं के साथ करें। इससे समय बचता है और बच्चा अधिक अर्थवान संदर्भ के द्वारा सीखता है।
  • बच्चे पर प्रति भागी बनने के लिए जोर- जबरदस्ती न करें। बच्चे का सहयोग जरूरी है ताकि बच्चा कार्यकलाप से लाभान्वित हो।
  • पहले कुछ प्रयासों में यदि बच्चा किसी प्रकार का कार्यकलाप में यदि दिलचस्पी जाहिर करता हो निराश मत होइए या दिल छोटा न करें।
  • यदि बच्चा आपको समझने का प्रयास न करे तो भी उसे जाइये कि कार्यकलाप क्या है और आरंभ करने से पूर्व उसे यह सूचित करें।
  • बच्चे के कौशलों को विकसित करने के लिए कुछ कार्यकलाप को बार - बार दोहराने की आवश्यकता होती है। बच्चे की आयु और उसकी क्षति का स्तर निश्चय करेगा कि किस हिसाब से वह हिसाब करता है।
  • ये कार्यकलाप ऐसे समय करने का प्रयास करें जब बच्चा और आप (बच्चा और रखपाल) दोनों भी एकदम सतर्क हो।
  • बच्चे की प्रतिक्रियाओ के प्रति संवेदनशील रहें। प्रत्येक बच्चे में अपनी पसंद और नापंसद को व्यक्त करने के अलग – अलग तरीके हो सकते हैं।
  • बच्चे की पसंद और नापसंद को पूरा ध्यान रखें।
  • जब भी बच्चा कार्यकलाप के प्रति अच्छी प्रतिक्रिया व्यक्त करते करे आप से बात करें या आप से बात करें उसे हर बार प्रोत्साहित करें।
  • जब भी कोई कार्यकलाप बच्चे के बोर हो जाने की हद तक न करें।
  • कार्यकलाप उसी समय तक जारी रखें जब तक बच्चा उसमें दिलचस्पी ले रहा हो या उसका आनंद उठा रहा हो। यह ध्यान रखें कि कार्यकलापों में वैराइटी लायें ताकि कार्यकलाप में बच्चा मगन हो जाये।
  • शारीरिक समस्या वाले बच्चे को शारीरिक सहायता दें। व्यवासायिक की मदद लें कि विशेष समस्या से पीड़ित बच्चे को किस अवस्थिति में रखें।
  • बच्चे को उठाने या छूने से पहले उससे मधुर या नम्र भाषा में बात करें।
  • बच्चे द्वारा सकारात्मक प्रतिक्रिया पाने के लिए उसके पूरे शरीर का परिक्षण करें, केवल आँखों का नहीं।
  • बच्चे के साथ विशेषकर नजाकत से व्यवहार करें, क्योंकि उसके पास दृष्टि की कमी नही, अन्यथा होने वाले सम्पर्क में वह उसकी मदद कर सकती थी।
  • कार्यकलाप आरंभ करने से पहले उपयोग में लायी जाने वाली हर सामग्री को उसे छूने और जानने दें।
  • वातावरण में मौजूद हर वस्तु के बारे में बच्चे को बार – बार बताते जाएँ।
  • बच्चे को एक कमरे से दुसरे कमरे में ले जाते समय या एक स्थान से दुसरे स्थान को ले जाते समय रास्ते के बारे में बताते जाएँ ताकि वह उसे याद रख सके।
  • यदि बच्चा दृष्टि प्रेरणा के प्रति संवेदनशील हो या उसे ऐंठन आदि की बीमारी हो तो कार्यकलाप आरंभ करने से पहले व्यावसायिकों की राय दें।

दृष्टि क्षति का प्रकार

दृष्टि क्षति के प्रकार के आधार पर कार्यकलापों में अंतर हो सकता है।

दृष्टि क्षति के 3 प्रकार –

  • पेरिफेरल दृष्टि
  • केंद्रीय दृष्टि
  • धुंधली दृष्टि

पेरिफेरल दृष्टि क्षति – केंद्रीय दृष्टि हानि  - धुँधली दृष्टि हानि के प्रकार के अनुसार उसके कार्यकलाप भी भिन्न होंगे, अत: नेत्र चिकित्सक/दृष्टि पुर्नवास व्यासायिक/डॉक्टर/चिकित्सा केंद्र/प्राइमरी स्वास्थय केन्द्रों से, कार्यकलाप आरंभ करने से पहले संपर्क करें।

स्त्रोत: सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार



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