অসমীয়া   বাংলা   बोड़ो   डोगरी   ગુજરાતી   ಕನ್ನಡ   كأشُر   कोंकणी   संथाली   মনিপুরি   नेपाली   ଓରିୟା   ਪੰਜਾਬੀ   संस्कृत   தமிழ்  తెలుగు   ردو

लकवाग्रस्त बच्चों का पुनर्स्थापन

लकवाग्रस्त बच्चों का पुनर्स्थापन

भूमिका

पोलियो के कारण लकवाग्रस्त बच्चों की कुछ खास मुलभूत पुनर्स्थापन के मुद्दों पर मदद की जा सकती है| जिससे कि वह अपने परिधीय गतिशीलता के अभ्यासों को प्रभावित अंग के लिए कर सकें| हर बच्चे में बिभिन्न प्रकार के मेल वाली गंभीर लकवाग्रस्त मांसपेशियाँ होती हैं| अतः उन सबकी अपनी विशेष जरूरत भी होती है|

कुछ बच्चों के लिए सामान्य व्यायाम एवं खेलों की जरुरत हो सकती है परन्तु कुछ दूसरों को खास किस्म के व्यायाम एवं खेल के सामान की जरुरत हो सकती है| इसके साथ ही दूसरों को बेहतर गतिशील बनाने की मदद हेतु वैशाखी या बंधनी की जरुरत होती है| जिससे वे काम सरलता से कर सकें, अपने शरीर को स्वस्थ रख सकें तथा ज्यादा उपयोगी स्थिति अपना सके| जो बहुत ज्यादा लकवाग्रस्त हैं उन्हें पहियेवाली गाड़ी या पहियाकुर्सी से मदद पहुँचाई जा सकती है|

जुड़ीं हुई दो कहानियां

1.विमला जब एक वर्ष की थी, तब उसका पाँव लकवाग्रस्त हो गया था| चूँकि वह लकवा काफी गंभीर  था| अतः वह खड़ी नहीं हो सकती| वह हर समय अपने घर के आस-पास बैठी रहती है| जब वह एक जगह से दूसरी जगह जाती है तो अपने घुटनों (पैरों) व हाथों के बल घिसटती है| उसके माता-पिता शरीरिक क्रिया (भौतक) उपचार के बारे में नहीं जानते और न ही आस-पास कोई पुनर्वास केंद्र है अतः उसके पैरों व कूल्हों में गंभीर संकुचन आ गए हैं|

विमला का लकवाग्रस्त होना, चल फिर न सकना तथा घिसटना उसका भाग्य है| जिसे कि उसने स्वीकार कर लिया है| जैसे-जैसे विमल बड़ी होती गयी उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचना कठिन हो गया और सामाजिक रूप से उसे शमे भी महसूस होने लगी| 20 साल से विमला खड़े होना या चलना फिरना नहीं कर सकती थी| उसके दोनों कूल्हों एवं घुटनों का ऑपरेशन किया गया तथा लगभग तीन माह तक प्लास्टर चढाने व अंगों को सीधा करने के बाद बंधनी या खपच्ची के उपयोग लायक बनाया जा सका| उसके भाई ने घर पर उसे व्यायाम कराने में सहयता दी| अंत में विमला खड़े होने योग्य हो सकी| वह बीस साल पहली बार अपने पैरों पर खड़ी हो सकी|

२. मुरुगन का परिवार मुत्तुर पालापाड़ी गाँव में, 20 घरों के बीच रहता है| उसके माता-पिता एक जमींदार के यहाँ साधारण मजदूर के रूप में काम करते हैं तथा दैनिक मजदूरी से काम चलाते हैं| मुरुगन जब चार माह का था तब उसे तीन दिनों तक बुखार आया| उसकी माँ पास के डॉक्टर को दिखाने ले गई, जहाँ उसने बाएं पाँव में सुई लगाईं| उसका वही पाँव लकवाग्रस्त हो गया|

मुरुगन के माता-पिता बड़े परेशान हुए और दूसरे डॉक्टर के पास ले गए, जिसने बताया कि उसके बच्चे को पोलियो हो चूका है| वे लम्बे समय तक डॉक्टर, उपचारक तथा अस्पतालों में खोज-बीन करते रहे ताकि वह ठीक हो सके|

सबसे पहले वे अपने घर से 80 किमी दूर कटपाड़ी जाकर एक वैद्य से मिले| इसके बाद में वे मद्रास शहर के अन्य डॉक्टर से मिले| डॉक्टर ने उनके बच्चे का ठीक होने का दिलासा देकर दवाईयां दे दी| लेकिन दुच भी नहीं हुआ| निराश होने के बावजूद, उसके माता-पिता मुरुगन को लेकर कांजीपुरम एक वैद्य के पास गए| उन्हें दो बार एक विशेष प्रकार का तेल दिया गया, जो उन्हें बच्चे के पाँव में मलना था, लेकिन उससे भी सुधार नहीं हुआ|

उम्मीदों पर उम्मीद टिकाये, उसके माता-पिता या अनेक तेलों, दवाओं को अपनाया और धार्मिक कर्मकांड किये| इस तरह उन्होंने अपना सारा धन खर्च कर दिए और 10,0 000 रूपये से ज्यादा बर्बाद हो गए|

उस दौरान मुरुगन के कुल्हें, घुटने और टखने में संकोचन हो गए| उसने हंसना, बोलना या चलना बंद कर दिया, अब वह 5 साल का है|

यह उस समय की बात है जब मुरुगन के माता-पिता ने अलामपोंडी के गाँधी ग्रामीण पुर्नस्थापन के बारे में सुना, जो की उनके गाँव के पास ही शुरू हुआ था| यहाँ पर ये लोग उस कार्यकर्ता से मिले हो पोलियो ग्रस्त बच्चों की देखभाल हेतु प्रशिक्षित था|

मुरुगन की शुरुआत एक व्यायाम से हुई| उसकी माँ हर शनिवार को सेंटर पर आने लगी, उसे ज्यादा व्यायाम सिखाकर घर पर  कराए जाते थे| धीरे-धीरे उसमें कुछ सुधार हुआ चूँकि मुरुगन के संकोचन बहुत ख़राब हो चुके थे अतः उन्हें ऑपरेशन करने की जरुरत थी| पुर्नस्थापन केंद्र की सहयता से मुरुगन का जिला अस्पताल में ऑपरेशन हुआ| उसकी माँ को यह भी सिखाया गया कि ऑपरेशन के बाद किस तरह देखभाल करनी है| आज मुरुगन उस योग्य है कि वह मुस्कराहट के साथ स्कूल जाता है|

स्रोत:- जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची|



© 2006–2019 C–DAC.All content appearing on the vikaspedia portal is through collaborative effort of vikaspedia and its partners.We encourage you to use and share the content in a respectful and fair manner. Please leave all source links intact and adhere to applicable copyright and intellectual property guidelines and laws.
English to Hindi Transliterate