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नवजात का व्यवहारपरक मूल्यांकन

नवजात का व्यवहारपरक मूल्यांकन

परिचय

नवजात शिशु की व्यवहारगत विशेषताओं के मापन हेतु विभिन्न मापकों का निर्माण हुआ है | इनमें से बेरी ब्रेजेल्टन (1984) द्वारा निर्मित निओनेटेल विहैवरल एसेसमेंट स्केल का उपयोग सर्वाधिक प्रचलित है | मापन की उपयुक्तता विभिन्न कारणों से महत्व रखती है

भूमिका

इस मापनी पर प्राप्तांकों एवं शारीरिक जाँच को एक साथ संबंध करके केन्द्रीय स्नायु संस्थान संबंधी दोषों की पहचान किया जाता है| ताकि समय से कमजोर बच्चों का उपचार किया जा सके (ब्रेजल्टन एवं अन्य, 1987)|

इस मापनी का विस्तृत उपयोग विभिन्न देशों में बच्चों की व्यवहारगत विशेषताओं के मापन हेतु किया गया| इन अनुसंधानों से ज्ञात हुआ है कि बच्चों के व्यवहार पर वैयक्तिक एवं सांस्कृतिक भिन्नताओं का प्रभाव पड़ता है| उसके व्यवहारों के विकास पर पड़ता है वे बच्चे जिन्हें माता-पिता से प्रोत्साहन मिलता है, वे कम चिडचिड़े या शांत स्वभाव वाले पाए गए| फिर भी इन प्राप्तांकों के आधार पर बच्चों के भावी व्यवहार के बारे में विश्वास पूर्वक पूर्वकथन नहीं किया जा सकता| क्योंकी पालन- पोषण के ढंग एवं नवजात शिशु का व्यवहार, दोनों का संयुक्त रूप से प्रभाव विकास पर पड़ता है| अतएव प्रारंभ के दो सप्ताहों में लिए गए आंकड़ों द्वरा बुद्धि एवं सफलता के बारे में पूर्वकथन किया जा सकता है|

स्रोत: जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची



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