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मूर्छा, कंपकंपी और लू लगना

मूर्छा, कंपकंपी और लू लगना

मूर्छा

  • होश खोने से पहले मरीज शिकायत कर सकता है।

१.सिर का सुन्न होना
२.कमजोरी
३.मतली
४.त्वचा का रंग फीका पड़ना

  • यदि कोई व्यक्ति मूर्छित हो रहा हो, तो उसे

१.आगे की ओर झुकना चाहिए
२.सिर को घुटनों में लेने की कोशिश करनी चाहिए

चूंकि सिर हृदय से नीचे हो जायेगा, इसलिए खून मस्तिष्क में जाएगा।

  • जब मरीज बेहोश हो जाये

१.मरीज के सिर को नीचे और पैर को ऊपर की ओर रखें
२.तंग कपड़ों को ढीला कर दें
३.चेहरे और गर्दन पर ठंडा व भींगा कपड़ा रखें
अधिकांश मामलों में इस स्थिति में रखा गया मरीज कुछ देर बाद होश में आ जाता है। यह सुनिश्चित करें कि मरीज को पूरी तरह होश आ गया है। इसके लिए उससे सवाल करें और उसकी पहचान पूछें।
किसी चिकित्सक से सलाह लेना हमेशा लाभकारी होता है।

कंपकंपी

कंपकंपी या थरथराहट (तेज, अनियमित या मांसपेशियों में सिकुड़न) मिरगी या अचानक बीमार पड़ने के कारण हो सकती है। यदि मरीज सांस लेना बंद कर दे, तो खतरनाक हो सकता है। ऐसे मामलों में चिकित्सक की सलाह लेने की अनुशंसा की जाती है।

लक्षण

  • मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं और फिर उसमें झटके आते हैं।
  • मरीज अपनी जीभ काट सकता है या सांस लेना बंद कर सकता है।
  • चेहरा और जीभ का रंग नीला पड़ सकता है।
  • मुंह से बहुत अधिक झाग निकलने लगता है।

चिकित्सा

  • मरीज के पास से ठोस चीजें हटा दें और उसके सिर के नीचे कोई नरम चीज रखें।
  • दांतों के बीच या मरीज के मुंह में कुछ न रखें।
  • मरीज को कोई तरल पदार्थ न पिलायें।
  • यदि मरीज की सांस बंद हो, तो देखें की उसकी श्वास नली खुली है और उसे कृत्रिम सांस दें।
  • शांत रहें और मदद आने तक मरीज को सुविधाजनक स्थिति में रखें।
  • कंपकंपी के अधिकांश मामलों के बाद मरीज बेहोश हो जाता है या थोड़ी देर बाद फिर से कंपकपी शुरू  हो जाती है।

जितनी जल्दी संभव हो, मरीज को चिकित्सक के पास ले जाएं।

लू लगना

  • मरीज के शरीर को तत्काल ठंडा करें।
  • यदि संभव हो, तो उसे ठंडे पानी में लिटा दें या उसके शरीर पर ठंडा भींगा हुआ कपड़ा लपेटें या उसके शरीर को ठंडे पानी से पोछें, शरीर पर बर्फ रगड़ें या ठंडा पैक से सेकें।
  • जब मरीज के शरीर का तापमान 101 डिग्री फारेनहाइट के आसपास पहुंच जाये, तो उसे एक ठंडे कमरे में आराम से सुला दें।
  • यदि तापमान फिर से बढ़ने लगे, तो उसे ठंडा करने की प्रक्रिया दोहरायें।
  • यदि वह पानी पीने लायक हो, तो पानी पिलायें।
  • मरीज को कोई दवा न दें।
  • चिकित्सक की सलाह लें।

स्त्रोत: पोर्टल विषय सामग्री टीम



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