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प्राथमिक चिकित्सा की उपयोगी बातें

प्राथमिक चिकित्सा का उद्देश्य

  1. जीवन बचाने के लिए
  2. आगे की चोट को रोकने के लिए
  3. संक्रमण के लिए जीवन शक्ति और प्रतिरोध की रक्षा करने के लिए

प्राथमिक चिकित्सा की उपयोगी बातें

जब कोई व्यक्ति घायल या अचानक बीमार पड़ जाता है, तो चिकित्सकीय मदद से पहले का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। यही वह समय होता है जब पीड़ित पर पूरा ध्यान दिया जाना चाहिये। प्राथमिक उपचार के लिए कुछ सलाह यहां दिये जा रहे हैं-

  • यह सुनिश्चित करें कि आपके घर में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था है। इसमें कुछ प्रमुख दवाइयां भी हों जिन तक आसानी से पहुंचा जा सकता हो।
  • अपने प्राथमिक चिकित्सा उपकरणों, दवाइयों और अन्य चीजों को बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
  • किसी पीड़ित की मदद से पहले खुद को सुरक्षित बना लें। दृश्य का अनुमान करें और संभावित खतरों का आकलन कर लें। जहां तक संभव हो, दस्तानों का उपयोग करें ताकि खून तथा शरीर से निकलनेवाले अन्य द्रव्य से आप बच सकें।
  • यदि आपात स्थिति हो तो यह सुनिश्चित करें कि पीड़ित की जीभ उसकी श्वास नली को अवरुद्ध नहीं करे। मुंह पूरी तरह खाली हो। आपात-स्थिति में मरीज का सांस लेते रहना जरूरी है। यदि सांस बंद हो तो कृत्रिम सांस देने का उपाय करें।
  • यह सुनिश्चित करें कि पीड़ित की नब्ज चल रही हो और उसका रक्त-संचार जारी रहे। यह आप बहते हुए खून को देख कर पता लगा सकते हैं। यदि मरीज के शरीर से खून तेजी से बह रहा हो या उसने जहर खा ली हो और उसकी सांस या हृदय की धड़कन रुक गयी हो तो तेजी से काम करें। याद रखें कि हर सेकेंड का महत्व है।
  • यह महत्वपूर्ण है कि गर्दन या रीढ़ में चोट लगे मरीज को इधर से उधर खिसकाया न जाये। यदि ऐसा करना जरूरी हो तो धीरे-धीरे करें। यदि मरीज ने उल्टी की हो और उसकी गर्दन टूटी नहीं हो तो उसे दूसरी ओर कर दें। मरीज को कंबल आदि से ढंक कर गर्म रखें।
  • जब आप किसी मरीज की प्राथमिक चिकित्सा कर रहे हों तो किसी दूसरे व्यक्ति को चिकित्सकीय मदद के लिए भेजें। जो व्यक्ति चिकित्सक के पास जाये, उसे आपात स्थिति की पूरी जानकारी हो और वह चिकित्सक से यह सवाल जरूर करे कि एंबुलेंस पहुंचने तक क्या किया जा सकता है।
  • शांत रहें और मरीज को मनोवैज्ञानिक समर्थन दें।
  • किसी बेहोश या अर्द्ध बेहोश मरीज को तरल न पिलायें। तरल पदार्थ उसकी श्वास नली में प्रवेश कर सकता है और उसका दम घुट सकता है। किसी बेहोश व्यक्ति को चपत लगा कर या हिला कर होश में लाने की कोशिश न करें।
  • मरीज के पास कोई आपातकालीन चिकित्सकीय पहचान-पत्र की तलाश करें ताकि यह पता चल सके कि मरीज को किसी दवा से एलर्जी है या नहीं अथवा वह किसी गंभीर बीमारी से तो ग्रस्त नहीं है।

    प्राथमिक उपचार किट

    हर दफ्तर, कारखाने, घर और स्कूल में एक सुलभ प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स होना चाहिए। यह दुकानों में आसानी से उपलब्ध होता है लेकिन आप घर पर उपलब्ध एक टिन या कार्ड बोर्ड बॉक्स का उपयोग अपने प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स के रूप में कर सकते हैं। आपके प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स में निम्नलिखित चीजें मुख्य रूप से होनी चाहिए।

    • विभिन्न आकारों में रोगाणुमुक्त चिपकने वाली पट्टियाँ
    • विभिन्न आकारों की सोखने वाली जाली या सोखने वाले पैड्स के छोटे रोल
    • चिपकनेवाली टेप
    • त्रिकोणीय और रोलर पट्टियां
    • कपास (1 रोल)
    • बैंड-एड्स (प्लास्टर्स)
    • कैंची
    • पेन टॉर्च
    • लेटेक्स दस्ताने (2 जोड़ी)
    • चिमटी
    • सुई
    • गीले तौलिये और साफ सूखे कपड़े के टुकड़े
    • एंटीसेप्टिक (सेवलॉन या डेटॉल)
    • थर्मामीटर
    • पेट्रोलियम जेली या अन्य लुब्रिकेंट का ट्यूब
    • अलग-अलग आकार की सेफ्टी पिन्स
    • सफाई करने का घोल/ साबुन

    कुछ महत्वपूर्ण दवाएं (डॉक्टर की सलाह के बगैर)

    • एस्पिरिन या पैरासिटामॉल दर्द निवारक
    • दस्त के लिए दवा
    • मधुमक्खी के काटने पर लगाई जाने वाली एन्टिहिस्टामाइन क्रीम
    • ऐन्टासिड (पेट की गड़बड़ के लिए)
    • लैग्ज़ेटिव (पेट साफ़ करने की दवाई)

     

    अपना प्राथमिक चिकित्सा किट ऐसी जगह रखें जहाँ इस तक आसानी से पहुँचा जा सके। जब भी दवाईयाँ समाप्ति तिथि पर पहुंचें, उन्हें बदल दें।

    कटना और छिलना

    कटना

    • पूरे भाग को साबुन तथा गुनगुने पानी से साफ करें ताकि धूल हट जाये।
    • घाव पर सीधे तब तक दबाव डालें, जब तक खून का बहना बंद न हो जाये।
    • घाव पर असंक्रामक पट्टी बांधें।
    • यदि घाव गहरा हो तो जल्दी से चिकित्सक से संपर्क करें।

    छिलना या जख्म

    • साबुन और गुनगुने पानी से धोयें।
    • यदि खून बह रहा हो तो इसे संक्रमण से बचाने के लिए पट्टी से ढंक दें।

    संक्रमित घाव के लक्षण

    • सूजना
    • लाली
    • दर्द
    • बुखार आना
    • मवाद की मौजूदगी

    स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन



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