भूमिका आयुष चिकित्सा पद्धति में शैक्षणिक स्तर में न्यूतम मानकों के सशक्त क्रियान्यवन से उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। देश में 508 शैक्षणिक संस्थानों में 107 सरकारी शिक्षण संस्थाएं हैं। न्यूनतम मानक विनियम (एमएसआर) की अनुपालन में क्रियाशील अस्पतालों व शिक्षण संकाय के लिए आवश्यक अवसंरचना तैयार करने तथा प्रावधान बनाने का दायित्व संबंधित कॉलेज/राज्य सरकार अथवा उस संगठन का होगा जिसने कॉलेज की स्थापना की है। हालांकि, कॉलेजों की सहायता करने के उद्देश्य से निश्चित कमियों को पूरा करने हेतु इस विभाग में 9वीं पंचवर्षीय योजना से शिक्षण संस्थानों की वित्तीय सहायता के लिए स्कीमें लागू की हैं। इस स्कीम के तहत उपलब्ध सीमित संसाधनों के साथ अभी तक मात्र 20% लगभग संस्थानों को शामिल किया जा सका है। विभाग दवारा किए गए स्कीम के स्वतंत्र मूल्यांकन से यह संकेत मिला कि देश में आयुष संस्थानों की बुनियादी स्थिति खस्ताहाल है। उन्हें सरकार दवारा दृढ़तापूर्वक लागू किए गए न्यूनतम मानक विनियमों (एमएसआर) के मानदण्डों को पूरा करने के लिए महत्वूपर्ण अंतराल को भरने की आवश्यकता है। 11वीं योजना में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों के स्नातक और स्नात्तकोतर कॉलेजों के लिए वित्तीय सहायता के प्रावधान किए गए। हालांकि, मूल्य वृद्धि पर विचार करते हुए अपेक्षित मानदण्डों में सुधार करना आवश्यक हो गया। इसके अलावा, वे निजी संस्थान जिन्हें अनुदान सहायता घटक से बाहर रखा गया था, प्रसंगवश उनकी संख्या ज्यादा है और इसलिए भारत सरकार दवारा लागू किए गए न्यूनतम मानक विनियमों (एमएसआर) को बड़े पैमाने तथा गुणवत्ता के साथ लागू करने के लिए उत्तरदायी है। अत- अस्पताल और कॉलेज की अवसंरचना और उपस्कर जैसी कार्यात्मकता के महत्वपूर्ण कमियों वाली क्षेत्र की पहचान करते हुए निजी शैक्षणिक संस्थानों को सहायता देने की आवश्कता है। कई राज्यों में कोई भी शिक्षण संस्थान मौजूद नहीं हैं। इससे इन राज्यों में आयुष चिकित्सा पद्धतियों का विकास प्रभावित हुआ है। इसलिए, राज्यों को उनके क्षेत्र में आयुष कॉलेजों की स्थापना करने के प्रयासों के लिए भारत सरकार की तरफ से अनुदान सहायता के रूप में सरकारी क्षेत्र में 75% या 90% निधियां तथा राज्य के हिस्से के रूप में क्रमश- सामान्य श्रेणी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ओर पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों को जैसा भी मामला है, 25% या 10 %निधियों के समर्थन का प्रस्ताव है। इसलिए, भारत सरकार ने बढ़े हुए बजट परिव्यय के साथ साथ लागत मानदंडों सहित स्कीम को जारी रखने का निश्चय किया। उद्देश्य 1. सरकारी/सरकारी सहायता प्राप्त आयुष स्नातक-पूर्व शिक्षण संस्थान का उन्नयन। 2. सरकारी/सरकारी सहायता प्राप्त आयुष स्नातकोत्तर शिक्षण संस्थान का उन्नयन। 3. उन राज्यों को नए आयुष शिक्षण संस्थानों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना जहां सरकारी क्षेत्र में ये विद्यमान नहीं हैं। घटक राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत निम्नलिखित घटकों को सहायता प्रदान की जाएगी मुख्य क्रियाकलाप क. आयुष स्नातकपूर्व संस्थानों का अवसंरचनागत विकास। ख आयुष स्नातकोत्तर संस्थानों/जोड़े गए स्नातकोत्तर फार्मेसी/पैरा मेडिकल पाठ्यक्रमों का अवसंरचनाकात विकास। ग. उन राज्यों में नए आयुष शिक्षण संस्थानों की स्थापना जहां सरकारी क्षेत्र में ये विद्यमान नहीं हैं। नम्य क्रियाकलाप निजी आयुष शिक्षण संस्थानों के लिए ब्याज सब्सिडी घटक। मुख्य क्रियाकलाप आयुष स्नातकपूर्व संस्थानों का अवसंरचनात्मक विकास भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद अधिनियम (आईएमसीसी), 1970 और होम्योपैथी परिषद अधिनियम, 1970 के तहत केंद्र सरकार दवारा पिछले पांच वर्षों से विधिवत अनुमति प्राप्त राज्य सरकार/सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान पात्र हैं। स्नातकपूर्व संस्थानों के उन्नयन के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर सहायता प्रदान की जाएगी। सहायता का प्रतिरूप i) ओपीडी/आईपीडी/शैक्षिक विभागों/पुस्तकालय/प्रयोगशालाओं/कन्या 210.00 लाख रुपए छात्रावासों/लड़कों के लिए छात्रावास इत्यादि ii) उपकरण, फर्नीचर और पुस्तकालय की पुस्तकें 90.00 लाख रुपए आयुष स्नातकोत्तर संस्थानों/ जोड़े गए स्नातकोत्तर फार्मेसी/पैरा मैडिकल पाठ्यक्रमों का अवसंरचनागत विकास भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद अधिनियम (आईएमसीसी), 1970 और होम्योपैथी केन्द्रीय परिषद अधिनियम, 1970 के तहत केन्द्र सरकार दवारा पिछलें पांच वर्षों से विधिवत अनुमति प्राप्त राज्य सरकार/सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान पात्र हैं। स्नातकोत्तर संस्थानों के उन्नयन के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर सहायता की जाएगी। सहायता का प्रतिरूप i) ओपीडी/आईपीडी/शैक्षिक विभागों/पुस्तकालय/प्रयोगशालाओं/कन्या छात्रावासों/लड़कों के लिए छात्रावास इत्यादि 280.00 लाख रुपए ii) उपकरण, फर्नीचर और पुस्तकालय की पुस्तकें एवं नए स्नातकोत्तर छात्रों को वजीफे का भुगतान 120.00 लाख रुपए उन राज्यों में नए आयुष शिक्षण संस्थानों की स्थापना जहां सरकारी क्षेत्र में ये विद्यमान नहीं हैं i) ओपीडी/आईपीडी/शैक्षिक विभागों/पुस्तकालय/प्रयोगशालाओं/कन्या छात्रावासों/लड़कों के लिए छात्रावास इत्यादि 900.00 लाख रुपए ii) उपकरण, फर्नीचर और पुस्तकालय की पुस्तकें 150.00 लाख रुपए 1. यह घटक उन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों पर लागू होगा जहां सरकारी क्षेत्र में आयुर्वेद, सिद्ध और होम्योपैथी कॉलेज उपलब्ध नहीं हैं। 2. परियोजना को पूरा करने के लिए भारत सरकार दवारा प्रदान की गई अनुदान सहायता राज्यों के योगदान की पूरक होगी। राज्य सरकार को इस आशय का वचन देना होगा कि परियोजना के लिए शेष लागत का वहन वह राज्य सरकार करेगी। 3. जहां राज्य के योगदान में भूमि और मौजूदा भवन शामिल हों, वहां आवेदन पत्र के साथ भूमि और भवन सक्षम प्राधिकारी दवारा मूल्य निर्धारण का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाए। 4. यह पूर्णरूपेण एक परियोजना आधारित प्रस्ताव होगा जिसका मूल्यांकन भाचिप एवं हो. के राज्य सचिव/राज्य निदेशक की एक समिति और आयुष विभाग के संबंधित सलाहकार करेंगे। नम्य क्रियाकलाप क निजी आयुष शैक्षणिक संस्थानों के विकास के लिए ब्याज सब्सिडी भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद अधिनियम (आईएमसीसी), 1970 और होम्योपैथी परिषद अधिनियम, 1970 के तहत केंद्र सरकार दवारा पिछले पांच वर्षों से विधिवत अनुमति प्राप्त अलाभकारी शैक्षणिक संस्थान पात्र हैं। स्नातकपूर्व संस्थानों के उन्नयन के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर सहायता प्रदान को जाएगी। राष्ट्रीयकृत बैंक से कॉलेज द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले ऋण का प्रतिरूप i) ओपीडी/आईपीडी/शैक्षिक विभागों/पुस्ताकलय/ परियोजना लागत का 70% तक प्रयोगशालाओं/कन्या छात्रावासों/लड़कों के लिए 210.00 लाख रु. (स्नातक पूर्व के लिए) छात्रावास इत्यादि- 280.00 लाख रु. (स्नातकोत्तर के लिए) ii) उपकरण, फर्नीचर और पुस्तकालय की पुस्तकें - परियोजना लागत का 30% तक 90.00 लाख रु. (स्नातक पूर्व के लिए) 120.00 लाख रु. (स्नातकोत्तर के लिए) भारत सरकार 6% की दर से ब्याज सब्सिडी के रूप में सहायता देगी। अवसंरचना उन्नयन हेतु राष्ट्रीयकृत बैंक से कुल सब्सिडी की अधिकतम स्वीकार्य सीमा प्रति करोड़ 25 लाख रूपए होगी जिसका पुनर्भुगतान 7 वर्षों की अवधि में किया जाएगा। ब्याज में छूट की वित्तीय सहायता प्राप्त करने हेतु संस्थान को कॉलेज अवसंरचना के उन्नयनीकरण के उद्देश्य के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक से आवधिक ऋण प्राप्त करना होगा। राष्ट्रीयकृत बैंक से एक बार ऋण स्वीकृत हो जाने पर, संस्थान ब्याज सब्सिडी स्कीम के लिए राज्य सरकार को आवेदन करेगा। राज्य सरकार ब्याज सब्सिडी योजना की अनुशंसा करेगी और केन्द्र सरकार से एसएएपी के अनुमोदन के लिए राज्य वार्षिक कार्य योजना (एसएएपी) में शामिल करेगी। राज्य सरकार ब्याज सब्सिडी स्कीम के घटक के संचालन हेतु एक नोडल राष्ट्रीय बँक को चिन्हित करेगा। सभी पात्र निजी संस्थानों के लिए ब्याज सब्सिडी राशि को भारत सरकार के अनुमोदन के अनुसार हस्तांतरित कर दिया जाएगा। नोडल बैंक इसके पश्चात ब्याज सब्सिडी को उस निश्चित बैंक में हस्तांतरित कर देगा जहां से शिक्षण संस्थान ने ऋण प्राप्त किया है। निजी कॉलेज का आवेदन पत्र राज्य वार्षिक कार्य योजना का भाग होना चाहिए । इस आवेदन पत्र में आवेदनकर्ता कॉलेज को राष्ट्रीयकृत बैंक से वित्तीय मंजूरी सहित पुनर्भुगतान अनुसूची, दण्डात्मक ब्याज प्रावधान तथा अन्य नियमों और शतों का उल्लेख होना चाहिए। आयुष विभाग, भारत सरकार से संबंधित कॉलेज की स्थिति जानने के पश्चात राज्य नोडल बैंक दवारा ब्याज सब्सिडी का हस्तांतरण किया जाना चाहिए। इस संबंध में राज्य नोडल बैंक और राज्य आयुष सोसायटी/राज्य सरकार के साथ समझौता ज्ञापन किया जाएगा। पहले ऋण वितरण की तारीख से एक वर्ष के भीतर आवेदन करने वाले संस्थान पात्र होंगे। राष्ट्रीयकृत बैंकों दवारा लिए जाने वाले ब्याज पर ही सब्सिडी देय होगी और संस्थान दवारा किस्त का भुगतान करने के बाद इसे राष्ट्रीयकृत बैंक में संस्थान के ऋण खाते में सीधे जमा कर दिया जाएगा। दण्डनीय ब्याज और अन्य शुल्कों की प्रतिपूर्ति नहीं की जाएगी। ब्याज सब्सिडी की अदायगी सात वर्षों की पुनर्भुगतान अवधि तथा पुनर्भुगतान की वास्तविक अवधि इसमें से जो पहले हो के लिए की जाएगी I उस संस्थान की ब्याज सब्सिडी अनुमेय होगी जो बैंक को नियमित किस्तें और ब्याज अदा करता है I यदि संस्थान ब्याज चुकाने में असमर्थ हो जाता है तो उसे चूक अवधि के लिए ब्याज सब्सिडी नहीं मिलेगी तथा इस चूक अवधि को सात वर्षों की अवधि में से घटा दिया जायेगा I आवधिक ऋण की पहली क़िस्त के भुगतान की तारीख से ब्याज सब्सिडी पर विचार किया जायेगा I अपग्रेड पाठ्यक्रम शुरू होने के पश्चात् ही भुगतान किया जायेगा I आईएमसीसी और एचसीसी अधिनियमों की प्रासंगिक धाराओं के तहत केंद्र सरकार द्वारा पिछले 5 वर्षों से विधिवत अनुमति प्राप्त निजी संसथान इस स्कीम के तहत पात्र होंगें I यदि संसथान पाठ्यक्रम चलाने के लिए भारत सरकार से पश्चातवर्ती अनुमति प्राप्त नहीं करता है तो वह उस अवधि के लिए इस स्कीम के तहत सहायता प्राप्त नहीं करेगा तथा अनुमति मिलने वाली अवधि को सात वर्षों के अवधि में से घटा दिया जायेगा I आवेदन प्रस्तुत करने तथा मिशन के क्रियान्वयन के लिए दिशा-निर्देश 1. मिशन के तहत सहायता प्राप्त करने के इच्छुक संस्थानों को भाचिप एवं हो.राज्य निदेशालय जिसे राज्य वार्षिक कार्य योजना(एसएएपी)में शामिल होना चाहिये, के माद्यम से अनुलग्नक के रूप में आवेदन पत्र के साथ दस्तावेजों/शपथ पत्र सहित घटक के तहत प्रदत विधिवत रूप से आकलन की अपनी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट अग्रेषित करनी आवश्यक है I 2. आवेदक संस्थान को छात्रों को प्रवेश की अनुमति निरंतर जारी रखने के सम्बन्ध में नवीनतम अनुज्ञा की प्रतिलिपि के साथ सभी आवेदनों को प्रस्तुत करना होगा I 3. 12वीं योजना के दौरान उपरोक्त संघटकों में से किसी एक के लिए ही संस्थान की सहायता हेतु विचार किया जायेगाI यदि किसी संस्था ने 11वीं योजना के दौरान सहायता प्राप्त की है तो वह सहायता के लिए संशोधित दिशानिर्देशों के शेष के लिए ही पात्र होगी I स्रोत: आयुष मंत्रालय, भारत सरकार राष्ट्रीय आयुष मिशन के विस्तृत दिशानिर्देश के लिए इस लिंक पर जाएँ