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कार्बोहाइड्रेट्स

परिचय

कार्बोहाइड्रेट्स साधारण चीनी होती है अथवा वे पदार्थ होते हैं, जिन्हें जल अपघटन द्वारा चीनी में परिवर्तित किया जा सकता है। ये कार्बन, हाइड्रोजन और आक्सीजन से मिलकर बनते हैं, जिनमें अंतिम दो आनुपातिक मिश्रण से जल बनाया जा सकता है और इसलिए इन्हें कार्बोहाइड्रेट कहा जाता है। इसका सामान्य सूत्रा Cn H2n On होता है।

कारबोज के प्रमुख कार्य

1. ऊर्जा प्रदायक - कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा के बहुत ही सस्ते स्रोत हैं। एक ग्राम कार्बोहाइड्रेट से चार कैलोरी मिलती हैं। ग्लूकोज़ ऊर्जा का मुख्य स्रोत हैं, इसलिए शरीर में सभी प्रकार के कार्बोहाइड्रेटों को ग्लूकोज़ में परिवर्तित किया जाता है और तात्कालिक आवश्यकताओं के लिए उपयोग किया जाता है। इसका थोड़ा भाग ग्लाइकोज़न के रूप में यकृत तथा मांसपेशियों में संग्रहीत किया जाता है और कुछ भाग उत्तकों में वसा के रूप में संगृहीत किया जाता है।

2. प्रोटीन बचाने वाले कार्य - शरीर में ऊर्जा के स्रोत के रूप में कार्बोहाइड्रेट का उपभोग अधिमानिक रूप में किया जाता है जबकि आहार में इनकी संपूर्ति समुचित रूप में की जाती है। इससे ऊत्तक निर्माण के लिए प्रोटीन की बचत होती है।

3. भोजन में स्वाद - अधिकांश कारबोज प्रकृति से मीठे होते हैं, इससे भोजन का स्वाद बढ़ जाता है।

4. वसा का पूर्ण उपचयन - प्रत्येक आहार में कार्बोहाइड्रेट की कुल मात्रा अनिवार्य है, ताकि वसा का उपचयन सामान्य रूप में हो सके। यदि कार्बोहाइड्रेट को तीव्रता से प्रतिबंधित कर दिया जाए, तो वसा का चयापचय तेजी से होने लगेगा और शरीर में इसके मध्यवर्ती उत्पादन में बढ़ोत्तरी हो जाएगी जिसके परिणामस्वरूप केटोसिस की स्थिति हो जाएगी।

5. लेक्टोस - अन्य चीनी पदार्थों की अपेक्षा यह कम घुलनशील होती है और इसलिए आंतों में यह पर्याप्त देर तक रहती है। इससे उन वांछित जीवाणुओं में वृद्धि होती है, जो विटामिन-बी काम्पलैक्स के संश्लेषण में सहायक होते हैं। ये कैलिशयम के उपयोग और अवशेषण में भी सहायता करते हैं।

6. आहार को परिमाण प्रदान करना – यद्यपि सैलूलोज, हेमिसेलूलोज और पैकिटन शरीर को कोर्इ पोषक तत्व प्रदान नहीं करते, परन्तु इनके तन्तु आहार को परिमाण और आयतन प्रदान करने में सहायक होते हैं। ये अपचनीय पदार्थ अमाशय तथा आंतों के मार्गों की पुरस्सरण क्रियाओं को उत्तेजित करके आंतों में अवशिष्ट, उचिछष्ट पदार्थों के निष्कासन को सुसाध्य बनाते हैं और उनमें पानी को सोखने की गुणधर्मिता भी होती है, जिससे आंतों की अन्तर्वस्तु का आयतन बढ़ जाता है। आहार में फोक ;पिइतमद्ध की मात्रा बढ़ाने से शर्करा व कोलेस्ट्रोल कम होने के परिणाम मिले हैं। साबुत अनाज, दालों, हरी पत्तेदार सबिजयों व फल में प्रचुर मात्रा में फोक ;पिइतमद्ध मिलता है।

कार्बोहाइड्रेट के स्रोत

1.  वेतसार - चावल, गेहूँ, मक्का, साबूदाना आदि अनाजों, सभी बेकरी उत्पादनों, दाल, टमाटर, साबूदाना, रतालू और सूखे मेवों में मिलता है।

2.  चीनी - गन्ने, गुड़, शहद, जै़ली, सूखे मेवे, मिठार्इ और अंगूर आदि ताजे फलों में मिलती है।

3. सेलूलोज़ - अनाजों, फलों और सब्जियों के अस्तर में रेशेवाला गूदा होता है।

प्रस्तावित दैनिक आहारीय आवश्यकता

कार्बोहाइड्रेट के लिए किसी निशिचत मात्रा की प्रस्तावना नहीं की गर्इ है। फिर भी इससे कुल ऊर्जा का 60-70 प्रति शत मिलना चाहिए। एक वयस्क व्यक्ति के दैनिक आहार में 40 ग्राम फाइबर अवश्य होना चाहिए। आहार में फाइबर की कमी से कब्ज़ व आंत का कैंसर हो सकता है।

कमी

यदि आहार में कार्बोहाइड्रट की कमी होती है तो ऊर्जा आवश्यकताओं की संपूर्ति नहीं होती। इससे व्यक्ति कमजोरी महसूस करता है। मनुष्य की कार्यक्षमता घट जाती है। मनुष्य का शरीर भार भी मानक भार से कम हो जाता है। बच्चों में वृद्धि धीमे होती है। इससे केटोसिस रोग के लक्षण भी विकसित होने लगते हैं।

अधिकता

यदि ज्यादा कारबोज खायें तो वे शरीर में वसा के रूप में संचित हो जाते हैं, जिससे मोटापा, मधुमेह तथा हृदय रोग हो जाते हैं।     

स्त्रोत: इंटरनेट, दैनिक समाचारपत्र



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