परिचय राष्ट्रीय पोषण निगरानी बोर्ड की रिपोर्ट 2012 के अनुसार, अनाज और बाजरा ग्रामीण भारतीय आबादी के भोजन के प्रमुख भाग हैं। सामान्य रूप से, ग्रामीण आबादी अपर्याप्त आहार पर आधारित होती है क्योंकि जड़ों और कंदों को छोड़कर सभी खाद्य समूहों के कम ग्रहण के रूप में भारतीयों के लिए अनुशंसित आहार के सेवन (आरडीआई) से कम है। संतुलित आहार से वंचित देश की आबादी की प्रतिशतता संबंधी कोई विशेष डेटा नहीं है। कमजोर आयु वर्ग जैसे 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों, किशोरों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को संतुलित आहार प्रदान करने के लिए, सरकार ने अंब्रेला आईसीडीएस योजना की आंगनवाड़ी सेवाओं के तहत पूरक पोषण कार्यक्रम (एसएनपी) के माध्यम से पूरक पोषण के प्रावधान किए हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत विवरणी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की अनुसूची-II के तहत इस योजना के अंतर्गत बच्चों और गर्भवती तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए दैनिक पोषण पात्रता का विवरण इस प्रकार है: क्र.सं. श्रेणी भोजन का प्रकार कैलोरी (केसीएएल) प्रोटीन (ग्राम) 1. बच्चें (6 माह से 3 साल की आयु तक) घर ले जाने हेतु राशन 500 12-15 2. बच्चें (3 साल से 6 साल की आयु तक) सुबह की नमकीन और पकाया हुआ गर्म भोजन 500 12-15 3. बच्चें (6 माह से 6 साल की आयु तक) जो कुपोषित हैं घर ले जाने हेतु राशन 800 20-25 4. गर्भवती तथा स्तनपान कराने वाली माताएं घर ले जाने हेतु राशन 600 18-20 भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा निर्धारित भारतीयों के लिए अनुशंसित आहार भत्ते और राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के आधार पर आबादी द्वारा औसत आहार सेवन के बीच अंतर को पाटने के लिए आंगनवाड़ी सेवा योजना के अंतर्गत अनुपूरक पोषण प्रदान किया जाता है। तदनुसार, इस अंतर को पाटने के लिए इस कार्यक्रम के तहत पोषण मानदंड तैयार किए जाते हैं। जनसंख्या स्तर पर संतुलित आहार की अपर्याप्त उपभोग का कारण उपलब्धता की कमी के साथ ही संतुलित आहार के महत्व के बारे में जानकारी की कमी है। सरकार पौष्टिक और संतुलित आहार के उपभोग के महत्व के बारे में समुदाय की जागरूकता बढ़ाने के लिए मासिक ग्राम स्वास्थ्य और पोषण दिवस आयोजित कर रही है। स्त्रोत: पत्र सूचना कार्यालय