शौचालयों का निर्माण एवं प्रयोग ग्राम पंचायतों द्वारा स्वच्छता के लिए शौचालयों का निर्माण एवं प्रयोग सेनेटरी शौचालय का मुख्य प्रयोजन मल से इंसानों एवं जानवरों के संपर्क तथा पर्यावरण में अशोधित मल के फैलने पर रोक लगाना है ।इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एक अच्छे सेनेटरी शौचालय को सुनिश्चित करना चाहिए: शौचालय का मल मिट्टी को प्रदूषित न करे । शौचालय का मल सतह जल या भूजल को प्रदूषित न करे । शौचालय का मल मक्खियों एवं जानवरों की पहुंच से दूर हो । शौचालय यथासंभव साधारण होने चाहिए ताकि वे बीमारों, बुजुर्गो तथा शारीरिक अथवा मानसिक रूप से अक्षम लोगों के लिए उपयुक्त हों । प्रत्येक शौचालय में दो मुख्य भाग होते है सुपर स्ट्रक्चर - जो मुख्य रूप से शौचालय का प्रयोग करने वाले की निजता की रक्षा करने के लिए होता है । सब स्ट्रक्चर - यह तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मानव अपशिष्ट के सुरक्षित निस्तारण या पुन: प्रयोग का प्रावधान करता है । मिट्टी के प्रकार तथा जल स्तर के आधार पर विभिन्न प्रकार के शौचालयों की सिफारिश की गई है कम जल स्तर वाली मिट्टी भारत के अधिकांश भागों में पाई जाती है ।ऐसी परिस्थिति में पिट शौचालय सबसे उपयुक्त किस्म का शौचालय है ।साधारण एकल अपरिष्कृत पिट शौचालय से लेकर वातायित परिष्कृत पिट शौचालय एवं टविन पिट सिस्टम तक पिट शौचालय की विभन्न डिजाइनें उपलब्ध हैं । पिट शौचालय के बुनियादी भाग इस प्रकार हैं सुराख के साथ उकडूं बैठने का प्लेटफार्म पैन पी ट्यूब उकडूं बैठने के सुराख से नीचे पिट (अधिकांश मामलों में एक कनेक्टिंग पाइप के साथ) पिट शौचालय किस तरह काम करते हैं? पिट में मल, बैक्टीरिया एवं फंगस की सक्रियता के माध्यम से सड़ता है ।गैस निकलकर वातावरण में मिल जाती है या आसपास की मिट्टी में समाहित हो जाती है ।मूत्र एवं अन्य द्रव बहकर मिट्टी में चले जाते है ।मल में मौजूद कीटाणु नष्ट हो जाते हैं क्योंकि पिट में जो परिस्थितियाँ होती हैं वे उनके ज़िंदा रहने के लिए अनुकूल नहीं होती हैं ।शेष बची सामग्री के दबते रहने के कारण धीरे-धीरे पिट भर जाता है ।पिट शौचालय भारत में इस्तेमाल होने वाला सबसे आम किस्म का शौचालय है जो अधिकांश मिट्टियों के लिए उपयुक्त है । लीच पिट ऐसा पिट होता है जिसमें रिसाव (मिट्टी में रिसाव) होता है ।लीच पिट शौचालय में लीच होल के माध्यम से मूत्र मिट्टी में रिस जाता है । हाथ से मैला साफ़ करना अस्वच्छ सूखे शौचालयों से मानव मल को हटाने के लिए झाड़ूओं एवं प्लेट्स का प्रयोग इंसानों द्वारा मल को ढ़ोना न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकर है, अपितु बहुत ही अपमानजनक एवं गरिमा रहित भी है । भारत सरकार “हाथ से मैला साफ़ करने वालों के रूप में रोजगार का निषेध तथा उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013” से प्रतिस्थापित करके हाथ से मैला साफ़ करने पर निषेध लगाया है ।इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन एक दंडनीय अपराध है । भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस अधिनियम के तहत विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई की है तथा सरकार को विभिन्न निर्देश जारी किए हैं । साधारण एकल पिट शौचालय में मानव अपशिष्ट पिट में गिरता है जहाँ यह सड़ जाता है और मूत्र व तरल पदार्थ बह कर मिट्टी में चला जाता है ।कुछ समय बाद रोग पैदा करने वाले कीटाणु नष्ट हो जाते हैं तब पिट की सफाई की जा सकती है । ट्विन पिट शौचालय में एक अतिरिक्त पिट होता है जिसका प्रयोग तब किया जाता है जब पहला पिट भर जाता है ।इस बीच, पहले पिट में मल के पूरी तरह से सड़ जाने के पश्चात पहले पिट को साफ़ कर लिया जाता है ।इसलिए, इस प्रकार के शौचालय को वैकल्पिक डबल पिट शौचालय भी कहा जाता है । इसके अलावा अन्य प्रकार के शौचालय निम्नलिखित है: पोर फ्लश पिट शौचालय: इन्हें अधिक स्वच्छ माना जाता है परन्तु इसके लिए अधिक कुशल रखरखाव की जरूरत होती है, ये अधिक महंगे हैं तथा अधिक पानी की जरूरत होती है (प्रत्येक प्रयोग के लिए चार लीटर) । ईको सैन शोचालय: इस प्रकार के पानी रहित शौचालय में मानव अपशिष्ट को वायुजीवी प्रक्रिया के माध्यम से उपयुक्त तापमान पर कुछ सामग्री मिलाकर पोषक “मानव खाद” में परिवर्तित किया जाता है ।यह शौचालय अधिक महंगा है तथा इसके लिए अधिक रखरखाव की जरूरत होती है । सेप्टिक टैंक शौचालय: यहाँ सेप्टिक टैंक किसी फ्लश शौचालय से मानव अपशिष्ट को ग्रहण करता है और कुछ शोधन के पश्चात उसे सीवर से जोड़ता है ।इस शौचालय का रखरखाव काफी कठिन है । बायो डाइजेस्टर शौचालय: इस प्रकार के पानी रहित शौचालय में मानव अपशिष्ट गैर वायुजीवी प्रक्रिया के माध्यम से बायो गैस में परिवर्तित हो जता है जिसमें मुख्य रूप से मिथेन एवं कार्बन डाईआक्सइड शामिल होती है।इसका लाभ यह है कि इसमें अपेक्षाकृत कम स्थान की जरूरत होती है तथा लगभग न के बराबर पानी की जरूरत होती है ।हालांकि इसकी आरंभिक लागत अधिक होती है परन्तु कुछ समय में निवेश की भरपाई हो जाती है ।यह एक प्रगतिशील प्रौद्योगिकी है तथा शीघ्र ही इसके सस्ते एवं सरल हो जाने की संभावना है । लीच पिट शौचालय के निर्माण में बरती जाने वाली सावधानियाँ दोनों पिटों को 4 फीट की गहराई तक खोदना चाहिए (3 फीट व्यापक) तथा इसके अलावा इनमें आसपास में दूरी 3 फीट होना चाहिए । जंक्शन बॉक्स से पिट तक पाइप की ढलान 2.5 प्रतिशत से 5 प्रतिशत होनी चाहिए।इसी तरह, शौचालय एवं जंक्शन के बीच पाइप की ढलान होनी चाहिए । पिट में कम से कम 30 प्रतिशत साइड सर्फेस तथा पिट की संपूर्ण पेदी में लीच पिट होने चाहिए जिसके माध्यम से गैस एवं द्रव बहकर मिट्टी में मिल जाएं । साइड सर्फेस के ऊपर ईटों के बीच उपयुक्त स्थान ऐसा होना चाहिए कि यह मधुमक्खी के छत्ते जैसा दिखे । जब ईटों के स्थान पर सीमेंट की विंग का प्रयोग किया जाए, तो लीच पिट के लिए कुल सर्फेस एरिया के 30 प्रतिशत का प्रावधान होना चाहिए । यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि 6 मिमी की मोटाई वाले आयरन रॉड के साथ सीमेंट रिंग का प्रयोग किया जाए । पिट का स्लैब पिट के होल से थोड़ा बड़ा होना चाहिए तथा यह अपेक्षित मानक का होना चाहिए । पिट शौचालय पानी के किसी भी स्रोत से कम से कम 15 मीटर (40-45 फीट) दूर होना चाहिए । बेसिन को पी ट्रैप से जोड़ने था पी ट्रैप को पिट पाइप से जोड़ने में समुचित सावधानी बरतनी चाहिए ।पी ट्रैप शौचालय को पिट से जोड़ता है । शौचालय के निर्माण में सीमेंट, बालू एवं बजरी के मिश्रण में 1:2:4 के अनुपात का अनुकरण किया जाना चाहिए । उपलब्ध बजट के आधार पर प्रयागकर्त्ता की निजता की रक्षा के लिए किसी प्रकार के सुपर स्ट्रक्चर का चयन कर सकते है । लीच पिट शौचालय के बेसिन को साबुन अथवा डिजरजेंट से हर रोज साफ़ करना (परन्तु एसिड अथवा फिनायल से नहीं) । वेंटिलेटेड परिष्कृत पिट (वी आई पी) शौचालय समान ढंग से काम करता है परन्तु इसके लिए एक अतिरिक्त व्यवस्था की जरूरत होती है ।इसमें एक सीधी वेंटिलेशन पाइप होता है, जो पिट से आरंभ होता है और सुपर स्ट्रक्चर लेवल के ऊपर समाप्त होता है तथा शीर्ष पर एक फ्लाई मेष होता है ।पिट में प्रवेश करने वाली कोई भी मक्खी प्रकाश की ओर जाती है तथा फ्लाई मेष में फंस जाती है और वापस सुपर स्ट्रक्चर में नहीं पहुंचती है ।वीआईपी शौचालय के सुपर स्ट्रक्चर को इसके लिए हमेशा अँधेरे में रखना होता है ।इस प्रकार के शौचालय में सुपर स्ट्रक्चर अधिक गंध रहित होता है क्योंकि सुपर स्ट्रक्चर से ताज़ी हवा पिट में प्रवेश करती है और वेंटिलेशन पाइप के माध्यम से आती रहती है।परन्तु सुपर स्ट्रक्चर में अंधेरा इसका एक नुकसान है । वीआईपी शौचालय के लाभ इस प्रकार हैं: कम लागत, स्वयं परिवार द्वारा निर्माण के लिए उपयुक्त, पानी की कम आवश्यकता, मक्खियों पर नियंत्रण एवं गंध रहित आदि। सामुदायिक सेनेटरी परिसर निर्मल भारत अभियान का एक महत्वपूर्ण घटक है तथा गाँव में किसी भी स्थान पर ऐसे परिसरों का निर्माण किया जा सकता है जो हितधारकों को स्वीकार्य होते है तथा उनके लिए सुगम होते हैं।ग्राम पंचायत एवं प्रयोक्ता समूहों से अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसे परिसरों की पहचान करेंगे या कोई वैकल्पिक व्यवस्था करेंगे । सामुदायिक शौचालय अनके ग्राम पंचायतों में निम्नलिखित कारणों से सामुदायिक शौचालय की आवश्यकता उत्पन्न होती है: आसपास के क्षेत्रों से व्यवसाय के लिए या त्यौहार एवं मेलों में शामिल होने के लिए आने वाले लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करना । बस स्टैंड/सामुदायिक केन्द्रों में यात्रियों एवं आगंतुकों के लिए । ऐसे परिवारों की आवश्यकताएं पूरा करना जिनके यहाँ शौचालयों के निर्माण के लिए अपने घरों में स्थान बिल्कुल भी नहीं है । सामुदायिक शौचालयों का निर्माण भी निर्मल भारत अभियान के तहत शामिल है, जो ग्रामीण स्वच्छता की अवसंरचना के लिए सहायता एवं प्रोत्साहन प्रदान करने वाली स्कीम है । शौचालयों के संबंध में – क्या करें एवं क्या न करें क्या करें: प्रयोग से पूर्व पैन को गीला करने के लिए थोड़ी मात्रा में पानी डालें ताकि मल अबाध रूप से फिसल कर पिट में चला जाए । पेशाब करने के बाद उकडूं बैठने वाले पैन में थोड़ी मात्रा में (लगभग आधा लीटर) पानी डालें । उकडूं बैठने वाले पैन को थोड़ी मात्रा में पानी तथा डिटर्जेंट पाउडर/साबुन छिड़कने के बाद हर रोज लंबे हैंडल वाले मुलायम झाड़ू/ब्रश से साफ़ करना चाहिए । जब पिट भर जाए, तो प्रवाह को दूसरे पिट में निर्दिष्ट करें । क्या न करें: दोनों पिटों का प्रयोग एक साथ न करें । पैन की सफाई के लिए कास्टिक सोडा अथवा एसिड का प्रयोग न करें । पैन या पिट में कूड़ा, सब्जी या फल के छिलके, चिथड़े, कॉटन अपशिष्ट, सिगरेट के टुकड़े तथा सफाई की सामग्रियां जैसे कि मक्की का डंठल, कीचड़, पत्थर के टुकड़े, पत्तियाँ आदि न डालें । ग्रामीण सेनेटरी मार्ट के लिए ग्राम पंचायतों द्वारा की जाने वाली पहल किसी गाँव या गाँवों के समूह के लिए ग्रामीण सेनेटरी मार्ट स्थापित करने के लिए संभावित उद्यमियों (जिसमें गैर सरकारी संगठन, ग्राम संगठन शामिल हैं) को प्रोत्साहित करना । इस प्रयोजन के लिए ग्राम पंचायत के इलाके में उपयुक्त भूमि की पहचान करना । जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की सहायता एवं मार्गदर्शन प्राप्त करना तथा ग्रामीण सेनेटरी मार्ट की स्थापना में सहायता प्रदान करना और प्रस्ताव भेजना । ग्रामीण सेनेटरी मार्ट के सफलतापूर्वक स्थापित एवं चालू हो जाने के बाद वहाँ बेचे जाने वाले सेनेटरी के सामान की गुणवत्ता एवं मूल्य की निगरानी करना । ग्रामीण सेनेटरी मार्ट स्थापित करने के लिए निर्मल भारत अभियान के तहत उपलब्ध प्रावधान का उपयोग करना । सामुदायिक शौचालयों का रखरखाव सुविधा शुल्क के संग्रहण सहित सामुदायिक शौचालय के अनुरक्षण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को लेनी चाहिए ।जीपीडब्ल्यू एससी/वी डब्ल्यू एस सी के सदस्यों को यह जिम्मेदारी सौपी जा सकती है ।ग्राम पंचायत गैर सरकारी संगठनों/ग्राम संगठन को भी यह जिम्मेदारी सौंपने पर विचार कर सकती है । ग्रामीण सेनेटरी मार्ट (आर एस एम)/उत्पादन केंद्र (पी सी) व्याक्तिगत परिवार शौचालय (आई एच एच एल) के निर्माण के लिए अपेक्षित सामग्रियों तक तत्काल पहुंच प्रदान करने के लिए (ताकि इच्छुक परिवारों को इन सामग्रियों की खरीद के लिए दूर न जाना पड़े) या बहुत जरूरी है कि ग्राम पंचायत आर एस एम/पी सी की स्थापना को प्रोत्साहित करे । ग्रामीण सेनेटरी मार्ट (आर एस एम) सामाजिक उद्देश्य के साथ एक वाणिज्यिक उद्यम है।आर एस एम ऐसा आउटलेट है जो सेनेटरी शौचालयों के निर्माण के लिए अपेक्षित सामान बेचता है ।आरएसएम स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य विभिन्न प्रकार के शौचालयों तथा सेनेटरी अन्य सुविधाओं के निर्माण के लिए अपेक्षित सामग्री, सेवा एवं मार्गदर्शन प्रदान करना है, जो तकनीकी एवं वित्तीय दृष्टि से क्षेत्र के लिए उपयुक्त हो ।गैर सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, महिला संगठनों, पंचायतों आदि द्वारा आर एस एम खोले एवं संचालित किए जा सकते हैं । ग्रामीण सेनेटरी मार्ट शुरू करना सामाजिक उद्देश्य के साथ एक व्यावसायिक अवसर भी है ।घर के पास सामग्री की उपलब्धता से शौचालयों का निर्माण काफी आसान हो जाएगा ।ग्रामीण सेनेटरी मार्ट न केवल पैन, बेसिन, पी पाइप, वाल्व, पी ट्रैप, सीमेंट रिंग/ब्रिक, पिट लिड, जैसी सेनेटरी की वस्तुओं का भंडारण करते हैं, जो सुपर स्ट्रक्चर आदि के लिए अपेक्षित साधारण सामग्री हैं, अपितु स्वच्छता के बारे में गाँव के लोगों को सलाह भी देते हैं । मांग के आधार पर ग्राम पंचायत उत्पादन केन्द्रों (पीसी) को भी प्रोत्साहित कर सकती है, जहाँ गाँव के स्तर पर स्थानीय पसंद के अनुसार उपर्युक्त वस्तुओं का विनिर्माण किया जाता है ।उत्पादन केंद्र या तो स्वतंत्र रूप से काम कर सकते हैं या फिर ग्रामीण सेनेटरी मार्ट के अंग हो सकते हैं ।ग्राम पंचायत, ग्राम संगठनों, गैर सरकारी संगठनों, अन्य द्वारा भी इन आर एस एम/ पी सी का संचालन किया जा सकता है । व्यक्तिगत परिवार शौचालयों के निर्माण एवं प्रयोग में ग्राम पंचायत एवं जी पी डब्ल्यू एस सी/ वी डब्ल्यू एस सी की भूमिका व्यक्तिगत परिवार शौचालयों का निर्माण एवं प्रयोग सुनिश्चित करने में ग्राम पंचायत एवं जी पी डब्ल्यू एस सी/ वी डब्ल्यू एस सी को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं: गाँव के लोगों के घरों के अंदर आई एच एच एल के स्थान, अपेक्षित सामग्रियों तथा उनकी खरीद के बारे में उनका मार्गदर्शन करना । शौचालयों के निर्माण के दौरान अपेक्षित साधारण सावधानियों के बारे में बताना । निर्मल भारत अभियान एवं मनरेगा के तहत उपलब्ध वित्तीय सहायता की प्रक्रिया के बारे में बताना । शौचालय के निर्माण पूरा हो जाने के बाद विलंब के आई एच एच एल के उपयोग को सुनिश्चित करना ।ऐसा इसलिए है कि शौचालयों के निर्माण के बाद भी परिवारों के कुछ सदस्य (या उनमें से सभी) शौचालयों का प्रयोग करने के बजाय खुले में शौच करना पसंद करते हैं और इस तरह ग्राम पंचायतों का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता है ।इसलिए, ग्राम पंचायत को शौचालयों के नियमित प्रयोग तथा खुले में शौच करने की प्रथा के उन्मूलन को सुनिश्चित करना चाहिए । जहाँ आज भी हाथ से मैला साफ़ करना प्रचलित है, ग्राम पंचायत इस प्रथा को बंद करने के लिए पूरे जोश के साथ प्रचार कर सकती है ।हाथ से मैला साफ़ करना न केवल दंडनीय अपराध है अपितु अमानवीय एवं अस्वास्थ्यकर भी है । इस सिलसिले में ग्राम पंचायत जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (डी.डब्ल्यू.एस.एम) की सहायता एवं मार्गदर्शन ले सकती है, जो ग्राम पंचायतों में आर.एस.एम/पी.सी. की स्थापना के लिए किसी उपयुक्त एजेंसी के साथ एम.ओ.यू (समझौता ज्ञापन) भी कर सकते हैं ।परिवारों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने तथा स्थानीय राजगीरों को प्रशिक्षित करने के लिए भी इन आर.एस.एम. को यथासमय प्रोत्साहित किया जा सकता है ।इस सबके लिए ग्राम पंचायत को ग्रामीण परिवारों को प्रेरित करने के लिए न केवल सामाजिक विपणन की जरूरत होगी अपितु स्थानीय स्तर पर शौचालय निर्माण के लिए उपलब्ध सामग्री की खरीद के लिए उनमें मांग पैदा करने के लिए भी सामाजिक विपणन की जरूरत होगी । अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न जिस इलाके में जल स्तर ऊपर है वहाँ किस प्रकार का शौचालय उपयुक्त है? यदि जल स्तर ऊपर है, तो निम्नलिखित तरीकों से भूजल को दूषित होने से बचाया जा सकता है: (क)पिट के बॉटम के लेवल को जल स्तर से कम से कम 1.5 मीटर (4-5 फीट) ऊपर रखना।शौचालय का प्रयोग करने वाले लोगों की संख्या के आधार पर पिट के आकार के बारे में निर्णय लिया जा सकता है ।अधिक क्षमता वाले कम शौचालयों की तुलना में कम क्षमता वाले शौचालयों का अधिक संख्या में निर्माण करना बेहतर होता है । (ख)भूजल के प्रदूषित होने के खतरे को न्यूनतम करने के लिए पिट के चारों ओर रेत के एक आवरण का भी निर्माण किया जा सकता है । ग्रामीण क्षेत्रों में पहली पसंद के रूप में लीच पिट शौचालय की सिफारिश क्यों की जाती है? इसके कारण निम्नलिखित हैं: (क) लीच पिट शौचालय की आरंभिक लागत कम होती है । (ख) इसका एक दिन में निर्माण हो सकता है । (ग) इसके लिए आवधिक अनुरक्षण की जरूरत नहीं होती है । (घ) सड़ा हुआ मानव अपशिष्ट नुकसान रहित जैव उर्वरक बन जाता है तथा 3 से 5 वर्ष में केवल एक बार इसे हटाने की जरूरत होती है । (ङ) लीच पिट शौचालय की डिजाइन आसान होती है तथा सेप्टिक टैंक तथा अन्य प्रकार के शौचालयों की तुलना में यह कम स्थान घेरता है । क्या लीच पिट से तैयार होने वाली कंपोस्ट खाद सुरक्षित है? जी हाँ।पिट में 12 से 18 माह तक पड़े रहने पर मल जैव उर्वरक में परिवर्तित हो जाता है तथा इसे सुरक्षित ढंग से बाहर निकाला जा सकता है (जब तक कि दूसरे पिट से अपशिष्ट का इसमें रिसाव न हो, जो एस साथ ही इस्तेमाल में है या पास की किसी अन्य संरचना से मल प्राप्त कर रहा है) । शौचालय के निर्माण के लिए मेरे घर में बिल्कुल भी जगह नहीं है, मैं क्या कर सकता हूँ? किसी कोने में 2 x 2 मीटर के छोटे से स्थान में भी पिट शौचालय का निर्माण करना संभव है ।यदि यह भी संभव न हो, तो ऐसे परिवारों का एक समूह आपस में मिलकर ग्राम पंचायत से स्थिति के आधार पर किसी सामुदायिक शौचालय या व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण के लिए कोई उपयुक्त स्थान आबंटित करने के लिए अनुरोध कर सकता है ।संभव होने पर दो पड़ोसी किसी एक पिट का संयुक्त रूप से उपयोग कर सकते हैं तथा अपने-अपने अलग सुपर स्ट्रक्चर का निर्माण कर सकते हैं । मुझे शौचालय का प्रयोग करने से डर लगता है क्योंकि पिट बहुत जल्दी से भर सकता है? ऐसा कोई खतरा नहीं है ।यदि रोज 5 से 6 लोगों द्वारा प्रयोग किया जाए, तो 3 x 3 x 4 फीट के एक सामान्य लीच पिट शौचालय को भरने में 4 से 5 साल लग जाते हैं ।ऐसा इसलिए है कि मल में 80 से 90 प्रतिशत पानी होता है जो लीच पिट में समा जाता है ।दो पिट वाले शौचालय में पहले पिट के लगभग भर जाने के बाद दूसरे पिट का प्रयोग किया जा सकता है । यदि पिट की गहराई और बढ़ाई जाए, तो क्या यह उपयोगी होगा? बिल्कुल भी नहीं, यदि हम ऐसा करते हैं, तो भूजल के दूषित होने की संभावना रहती है ।चूँकि सामान्य आकार के परिवार की आवश्यकता को पूरा करने के लिए पिट पर्याप्त है इसलिए पिट को और गहरा करने की कोई आवश्यकता नहीं है ।अगर पिट को और गहरा करेंगे, तो लागत और बढ़ेगी और सड़ी हुई सामग्री को पिट से निकालना मुश्किल होगा तथा भूजल के दूषित होने की संभावना रहती है।इस प्रकार, पिट को चार फीट से अधिक गहरा खोदना उपयोगी नहीं है। सतह के करीब कठोर चट्टान है।ऐसे मामलों में क्या करना चाहिए? ऐसे मामलों में, पिट शौचालय के लेवल को ऊपर उठाना बेहतर होता है ताकि पिट आंशिक रूप से भूतल से ऊपर हो।तथापि, जहाँ प्राकृतिक ढलान होती है, पिट शौचालय का लेवल उठाने की अतिरिक्त लागत से बचने के लिए इसका प्रयोग किया जाना चाहिए। क्या यह संभव है कि बरसात के मौसम में बारिश का पानी मिट्टी में मौजूद सुराखों के माध्यम से पिट में प्रवेश कर सकता है? यदि बरसात के मौसम में पानी का स्तर बहुत ऊपर उठ जाता है, तो सुराखों के माध्यम से पानी पिट के अंदर घुस सकता है।तथापि, बरसात के मौसम के बाद यह बाहर निकल आएगा।बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में उकडूं बैठने वाले पिटों का निर्माण ऊँचे प्लेटफार्म पर करना चाहिए। थोड़े समय तक प्रयोग के लिए हम अस्थायी शौचालय का निर्माण कैसे करते है? ऐसे स्थल का चयन करें जो पानी के किसी स्रोत से दूर हो। तकरीबन 2 से 4 फीट गहरी पिट की खुदाई करें। ऐसे गड्ढ़े की लंबाई प्रयोग करने वाले व्यक्तियों की संख्या पर निर्भर होगी ।निजता की रक्षा करने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से स्क्रीन/पर्दे का निर्माण किया जा सकता है। पिट की खुदाई से निकलने वाली मिट्टी को ढेर लगाकर गड्ढ़े वाले शौचालय के पास रखना चाहिए तथा उसे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से ढक देना चाहिए ।शौच करने के पश्चात ट्रेंच लैट्रिन को इस मिट्टी से अपने मल को ढक देना चाहिए । जब ट्रेंच भरने के कगार पर हो अर्थात भूतल स्तर के करीब पहुंच जाए, तो ट्रेंच को बंद कर दें। इसे मिट्टी से ढक देना चाहिए तथा कम से कम दो साल तक इसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। स्रोत:पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार