অসমীয়া   বাংলা   बोड़ो   डोगरी   ગુજરાતી   ಕನ್ನಡ   كأشُر   कोंकणी   संथाली   মনিপুরি   नेपाली   ଓରିୟା   ਪੰਜਾਬੀ   संस्कृत   தமிழ்  తెలుగు   ردو

स्कूल एवं आंगनवाड़ी में स्वच्छता

स्कूल एवं आंगनवाड़ी में स्वच्छता

स्कूलों एवं आंगनवाड़ियों में सुरक्षित एवं पर्याप्त पेय जल की उपलब्धता, सेनेटरी की सुविधाओं का प्रावधान तथा साफ़-सफाई की आदत डालना आदि पंचायत के जल एवं स्वच्छता कार्यक्रमों तथा पहलों के महत्वपूर्ण घटक हैं जिसके कारण निम्नलिखित हैं:

  • स्वच्छ वातावरण बच्चों के विकास के लिए बेहतर स्थितियां उपलब्ध कराता है ।
  • स्कूलों में पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों की संख्या घटती है ।
  • विशेष रूप से ऐसे समय में जब स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग से सेनेटरी की सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं ।
  • रोगों एवं कीटाणुओं के संक्रमण के विरुद्ध बेहतर संरक्षण प्रदान किया जाता है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब स्कूलों में पेय जल एवं स्वच्छता की बेहतर सुविधाएँ प्रदान की जाती है ।
  • यदि देखभाल करने वाले एवं जागरूक शिक्षकों के माध्यम से छात्रों में स्वच्छता एवं साफ़-सफाई की समुचित आदतें डाली जाती हैं, तो ये आदतें प्रौढ़ जीवन में भी बनी रहती हैं ।
  • घर एवं पड़ोस से छात्रों का संबंध उनके परिवारों एवं पड़ोस में स्वच्छता एवं साफ़-सफाई के संदेश का प्रसार करने में मदद करता है ।

स्कूल जलापूर्ति, स्वच्छता एवं साफ़-सफाई की शिक्षा (एस.एस.एच.ई)

स्कूलों में पेय जल, स्वच्छता एवं साफ़-सफाई के महत्व को ध्यान में रखते हुए दुनिया भर में स्कूल जलापूर्ति, स्च्चता एवं साफ-सफाई की शिक्षा (एस.एस.एच.ई) कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है ।

एसएसएचई कार्यक्रम के प्रमुख घटक इस प्रकार हैं:

  • हाथ धोने की सुविधा, भंडारण टैंक एवं पर्याप्त जलापूर्ति के साथ सभी प्रकार के ग्रामीण स्कूलों में शौचालयों का निर्माण ।
  • लड़कियों के लिए अलग शौचालयों का निर्माण ।
  • स्कूलों में हैंड पंप लगाना, पाइप के कनेक्शन देना, पेय जल का समुचित भंडारण एवं रखरखाव ।
  • साबुन, बाल्टी, मग आदि के साथ हाथ धोने की सुविधा मुहैया कराना ।
  • नाली, कचरा पेटी, सोक पिट आदि के साथ ठोस एवं तरल अपशिष्ट के समुचित निस्तारण की व्यवस्था ।
  • मध्याह्न भोजन तैयार करने एवं भंडारित करने के लिए समुचित एवं स्वास्थ्यकर व्यवस्थाएं जिसमें व्यक्तिगत साफ़-सफाई का अनुपालन एवं संबंधित रसोईयों एवं अन्य मजदूरों द्वारा दस्तानों का प्रयोग शामिल है ।
  • विकलांग बच्चों के लिए विशेष व्यवस्थाएं ।
  • किचन गार्डन ।
  • वर्षा जल संचयन ।
  • प्रचालन एवं अनुरक्षण की गतिविधियाँ ।

उपर्युक्त के अलावा, इस कार्यक्रम के तहत “सॉफ्टवेयर” की गतिविधियाँ शामिल हैं जैसे कि स्वास्थ्य एवं सेनेटरी क्लब, स्कूलों के प्रधानाचार्यो एवं शिक्षकों आदि के लिए उन्मुखीकरण कार्यक्रम ।

स्कूलों में पेय जल तथा स्वच्छता के प्रावधान के लिए सर्वशिक्षा अभियान (एस.एस.ए), राष्ट्रीय ग्रामीण पेय जल कार्यक्रम (एन.आर.डी.डब्ल्यू.पी), निर्मल भारत अभियान/मिशन स्वच्छ भारत (एन.बी.ए/एम.एस.बी) तथा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एम.जी.एन.आर.ई.जी.एस) से सहायता प्राप्त की जा सकती है ।

भारत सरकार ने सभी राज्य सरकारों को भविष्य में इस तरह से पेय जल की योजनाएं तैयार करने की सलाह दी है कि उनके तहत शत प्रतिशत स्कूल शामिल हों ।

एसएसएचई तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आर.टी.ई अधिनियम) में स्कूलों में पेय जल एवं स्वच्छता की आधारभूत सुविधाओं के लिए संस्तुत आयामों/विनिर्देशों का विशेष रूप से उल्लेख है ।

ग्राम पंचायतों की भूमिका

  • ग्राम पंचायतों को एस एस एच ई कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है । वे ऐसी ग्राम योजना तैयार कर सकती है जिसके तहत उनके क्षेत्र के सभी स्कूलों में पेय जल एवं स्वच्छता की सुविधाएँ शामिल हों ।
  • सरपंच तथा वार्ड सदस्यों को स्कूल प्रबंधन समिति (एस एम सी) की बैठकों में स्कूलों में सुरक्षित पेयजल तथा स्वच्छता की सुविधाओं की आवश्यकता पर जोर देना चाहिए । इसी तरह, वे आर टी ई अधिनियम के तहत प्रदान किये गए अधिकारों का भी प्रयोग कर सकते हैं।

शिक्षा के अधिकार (आर टी ई) अधिनियम के तहत ग्राम पंचायत के अधिकार

धारा 9:

  • संबंधित राज्य सरकारों द्वारा इस प्रकार स्थापित प्रत्येक स्थानीय प्राधिकरण (जिसमें ग्राम पंचायत शामिल है) नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा, अदसंरचना आदि उपलब्ध कराने के लिए आर टी ई अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा ।

धारा 32:

  • स्थानीय प्राधिकरण इस अधिनियम के तहत राज्य सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना के मामले में अधिनियम के तरह किसी शिकायत के संबंध में शिकायत निवारण प्राधिकरण के रूप में काम कर सकता है (कुछ राज्य सरकारों द्वारा ऐसी अधिसूचनाएं जारी की गई है)।

आंगनवाड़ी

पोषण, स्वच्छता एवं साफ़-सफाई की दृष्टि से प्रारंभिक बाल्यावस्था में जीवन की गुणवत्ता का बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर काफी प्रभाव होता है । सुरक्षित एवं देखभाल करने वाले माहौल के साथ यह बच्चों को जीवित रहने एवं शारीरिक और मानसिक स्वस्थ्य के साथ भावनात्मक दृष्टि से सुरक्षित, सामाजिक दृष्टि से सक्षम व्यक्ति के रूप में विकसित होने में समर्थ बनाता है ।

प्रारंभिक बाल्यावस्था में विकास के स्वरूप को देखते हुए साफ़-सफाई एवं स्वच्छता की गतिविधियाँ आंगनवाड़ियों  में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ।छोटे बच्चों के लिए इसके अंतर्गत सुरक्षित पेय जल का प्रावधान, स्वास्थ्य की दृष्टि से तैयार किया गया भोजन, खाने का साफ़ स्थान तथा निजी साफ़-सफाई के उपाय जैसे कि हाथ एवं शरीर के निचले अंगों को धोना आदि शामिल हैं ।

इस प्रकार स्कूल स्वच्छता एवं साफ़-सफाई के तहत अभिचिन्हित सभी कार्य एवं उपाय आंगनवाड़ियों पर भी लागू होते हैं । आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ताओं को निम्नलिखित महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है:

  1. छोटे बच्चों में निजी सफाई की आदत डालना तथा इसका प्रर्यवेक्षण करना ।
  2. शौचालय के प्रयोग के बारे में बच्चों को शिक्षा देना ।
  3. हर रोज शौचालय की जाँच करना तथा उसकी सफाई को सुनिश्चित करना ।
  4. स्वच्छता, साफ़-सफाई में सुधार तथा शौचालय बनाने के लाभों के महत्व के बारे में माताओं को समझाना ।
  5. भोजन एवं पानी को ठीक ढंग से रखने एवं संभालने के महत्व के बारे में माताओं को समझाना ।

स्कूल प्रबंधन समिति (एस एम सी)

  • संबंधित वार्ड सदस्य एस एम सी का सदस्य होता है |
  • सरपंच एस एम सी की किसी भी बैठक में भाग ले सकते हैं तथा भागीदारी कर सकते हैं |

निर्मल भारत अभियान तथा मनरेगा के तहत आंगनवाड़ी शौचालय के निर्माण को भी शामिल किया गया है । यदि किसी निजी भवन में आंगनवाड़ी चल रहा है, तो उस भवन के स्वामी द्वारा शौचालय के निर्माण के लिए सहायता प्राप्त करने का भी प्रावधान है ।

परन्तु चाहे आंगनवाड़ी केंद्र सरकारी भवन में स्थित हो या निजी भवन में, बच्चों के लिए शौचालय ऐसे होने चाहिए जिनका बच्चे प्रयोग कर सकें तथा ये वयस्कों एवं बड़े बच्चों के लिए डिजाइन किए गए नियमित शौचालय के जैसे नहीं होने चाहिए ।

एस.एस.एच.ई के लिए ग्राम पंचायत द्वारा अपेक्षित कदम:

  • ग्राम पंचायत की योजना में स्कूलों एवं आंगनवाड़ियों में जलापूर्ति एवं स्वच्छता सुधार के उपाय शामिल करना |
  • सरपंच तथा संबंधित वार्ड सदस्य (सदस्यों) को नियमित रूप से एस एम सी बैठकों में भाग लेना चाहिए तथा स्वच्छता के मुद्दों पर जोर देना चाहिए |
  • छात्र एवं छात्राओं में साफ़-सफाई की समुचित शिक्षा के लिए शिक्षकों को प्रेरित करने के लिए स्कूल के प्रधानाध्यापक के साथ मिलकर पहल करना |
  • संयोजन-एस.एस.एच.ई एवं आंगनवाड़ी की स्वच्छता में सुधार के लिए अपेक्षित सहायता प्राप्त करने के लिए विभिन्न विभागों जैसे कि शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ, ग्रामीण जलापूर्ति एवं स्वच्छता, महिला एवं बाल विकास, पंचायती राज तथा ग्रामीण विकास विभाग आदि के अधिकारीयों के साथ समुचित संपर्क स्थापित करना |
  • एसएमसी की बैठकों में अभिभावकों तथा अभिभावकों के प्रतिनिधियों की भागीदारी प्राप्त करना|

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. एसएसएचई कार्यक्रम के लाभ क्या हैं?

(क)  यह बच्चों में स्वस्थ आदतें डालने में मदद करता है, जो स्वच्छता एवं साफ़-सफाई के प्रति सही दृष्टिकोण के साथ वयस्क बनते हैं ।

(ख)  बीमारियों में कमी के कारण यह उनकी क्षमता तथा उनके शैक्षिक विकास को सुदृढ़ करता है ।

(ग)   स्कूलों में स्वच्छता की समुचित सुविधाओं की उपलब्धता के माध्यम से यह पढ़ाई बीच में छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या को घटाता है ।

(घ)   यह बच्चों के स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को बढ़ावा देता है ।

2. एसएसएचई कार्यक्रम के तहत स्कूलों में उपलब्ध कराई जाने वाली मुख्य सुविधाएँ क्या हैं?

(क)  पर्याप्त संख्या में शौचालय एवं पेशाबघर ।

(ख)  माहवारी के अपशिष्ट में निस्तारण के लिए प्रावधान के साथ लड़कियों के लिए अलग शौचालय एवं पेशाबघर ।

(ग)   जलापूर्ति की सुविधाएँ ।

(घ)   कचरा पेटी, सोक पिट, किचन गार्डन तथा ड्रेनेज सिस्टम ।

3. क्या प्राइवेट स्कूल एन बी ए/एम एस बी स्कीम के तहत शामिल हैं?

जी नहीं । केवल ग्रामीण सरकारी स्कूल शामिल हैं । प्राइवेट स्कूल छात्रों से फ़ीस लेते हैं और इसलिए उनसे ऐसी सुविधाएँ उपलब्ध कराने की अपेक्षा की जाती है ।

4. हाथ धोने की सुविधाएँ कैसे प्रदान करें?

हाथ धोने की समुचित सुविधाओं के बगैर केवल शौचालयों का प्रावधान अधूरा होगा । इसलिए, प्रत्येक शौचालय ब्लॉक में निम्नलिखित के साथ हाथ धोने की सुविधाएँ अवश्य उपलब्ध होनी चाहिए:

(क)  वाश बेसिन या कोई अन्य उपयुक्त व्यवस्था ।

(ख)  वाटर ड्रम ।

(ग)   पानी का नियमित प्रावधान ।

(घ)   बाल्टी, मग, ट्रे साथ साबुन ।

(ङ)    अपशिष्ट जल के निस्तारण के लिए व्यवस्था ।

5. क्या स्कूल स्वच्छता कार्यक्रम में लड़कियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है?

जी हाँ । निश्चित रूप से । ऐसा निम्नलिखित कारणों से है:

  • लड़कियों के लिए अलग शौचालय का न होना लड़कियों के स्कूल छोड़ने के महत्वपूर्ण कारणों में से एक है । सभी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय, महिला शिक्षकों का प्रावधान तथा पानी एवं हाथ धोने की पर्याप्त सुविधाओं की व्यवस्था करके पढ़ाई बीच में छोड़ने की उनकी दर को कम करना जरूरी है ।
  • स्कूल में लड़कियों के शौचालय के स्थान का भी अपना महत्व होता है । यह किसी सुरक्षित स्थान में होना चाहिए परन्तु अलग-अलग नहीं होना चाहिए क्योंकि इसमें जोखिम शामिल होता है ।
  • मासिक धर्म से संबंधित संवेदनशील मुद्दों को भी ध्यान में रखना चाहिए तथा माहवारी के अपशिष्ट के समुचित निस्तारण के लिए प्रावधान किया जाना चाहिए । छात्राओं के लिए विश्वस्त परामर्शदाता के रूप में किसी महिला शिक्षक को नामित करना चाहिए ।
  1. एसएसएचई कार्यक्रम महत्वपूर्ण कर्त्ता कौन हैं?

(क)  स्कूल प्रबंधन समिति (एस एम सी) ।

(ख)  प्रधान अध्यापक एवं अन्य शिक्षक ।

(ग)   अभिभावक तथा समुदाय के अन्य सदस्य ।

(घ)   ग्राम पंचायत ।

(ङ)    अन्य जैसे कि गैर सरकारी संगठन, ग्राम संगठन, स्वास्थ्य कर्मी आदि ।

  1. स्कूल शौचालयों एवं जलापूर्ति के प्रचालन एवं अनुरक्षण का क्या होगा?

यह एक महत्वपूर्ण पहलू है । जब तक नियमित रूप से रखरखाव नहीं होगा, दोषपूर्ण शौचालय, अपर्याप्त जलापूर्ति, शौचालयों के अवरुद्ध होने, केवल स्टाफ द्वारा शौचालयों का प्रयोग आदि जैसी समस्याएं उत्पन्न होंगी । इसलिए एस एम सी के निर्णय के अनुसार नियमित अनुरक्षण कार्यक्रम संचालित करना होगा । नियमित आधार पर इसका सुनिश्चित करने के लिए किसी प्रेरित शिक्षक को नामित करना होगा ।

 स्वच्छ भारत एक जन आंदोलन

स्रोत: पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार

अंतिम बार संशोधित : 2/21/2020



© C–DAC.All content appearing on the vikaspedia portal is through collaborative effort of vikaspedia and its partners.We encourage you to use and share the content in a respectful and fair manner. Please leave all source links intact and adhere to applicable copyright and intellectual property guidelines and laws.
English to Hindi Transliterate