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किशोर बालिका स्वास्थ्य

बड़ा परिवर्तन, बड़ी चुनौती

आम तौर पर 10 से 16 वर्ष में एक मानव शरीर में यौवन शुरू होता है। यह एक बच्चे की परिपक्व होने की क्रमिक प्रक्रिया है। प्रत्येक व्यक्ति में समय-समय पर परिवर्तन होते रहते हैं। शरीर, व्यवहार, और जीवन शैली में परिवर्तन उनमें से कुछ हैं। इस प्रक्रिया के दौरान होने वाले परिवर्तन शरीर, हाथों, पैरों और कमर के आसपास दिखाई देते हैं।

  1. शरीर के यौन अंग बड़े होते हैं और हार्मोन का उत्पादन शुरू होता है।
  2. त्वचा का और अधिक विकास हो सकता है।

शरीर की देखभाल

यहां शरीर की अच्छी तरह से देखभाल करने के लिए कुछ आवश्यक, सरल और बुनियादी बातें दी गई हैं:

  1. एक वयस्क जब युवा होता है, तो उसे अधिक पसीना आना शुरू हो सकता है। इसलिए नियमित रूप से स्नान द्वारा त्वचा साफ और शरीर की गंध को दूर रखना आवश्यक है।
  2. दंत क्षय (गुहाओं) से बचने के लिए व और तरो-ताजा साँस के लिए कम से कम दिन में दो बार दांत साफ करें।
  3. तेल ग्रंथियों से अधिक सीबम (एक तैलय पदार्थ) का उत्पादन होता है जो मुहांसों के रूप में विकसित हो सकता है। मुहासे किशोरावस्था उम्र में बहुत ही सामान्य होते हैं, और उनसे पूरी तरह से बचने का कोई उपाय नहीं है। त्वचा को साफ रखना ही सबसे अच्छा समाधान है।

माता-पिता की सलाह लें

किशोरावस्था मनुष्य के जीवन काल का एक ऐसा समय है जहां युवा और उनके माता-पिता के सामने कई समस्याएं आती हैं। कुछ बातों पर युवाओं को हमेशा ध्यान देना चाहिए, ये बातें हैं:

  • अपने परिवार की प्रशंसा करनी चाहिए।
  • माता-पिता के विचारों और विश्वास की कद्र होनी चाहिए।
  • माता-पिता की इच्छाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य

कई मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देर से बचपन और किशोरावस्था में उभर सकती हैं, किंतु प्रयास यह होना चाहिए कि सामाजिक कौशल, समस्याएं सुलझाने के कौशल और आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी से इसका समाधान निकालना चाहिए। इस तरह के आचरण,विकार, चिंता, अवसाद के साथ ही यौन व्यवहार में भी परिवर्तन का कारक हो सकते हैं। इसलिए सामाजिक कौशल एवं आत्मविश्वास जैसे व्यवहार के रूप मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में मदद कर सकते हैं।

गलत पदार्थों का उपयोग

अवैध पदार्थ, तम्बाकू और शराब, स्वस्थ विकास की स्थिति के लिए बड़ी बाधा साबित हो सकते है। कानून के अलावा अन्य साथियों का दबाव और एक स्वस्थ तरीके से तनाव का प्रबंधन करने की क्षमता मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ीं समस्याओं को कम करने में प्रभावी होते हैं।

अनैच्छिक घाव

सड़क यातायात दुर्घटनाओं को कम करने, गंभीर चोट, दुर्घटनाग्रस्त किशोर और उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा में महत्वपूर्ण हैं-लागू गति सीमा। यातायता के नियमों के पालन में गति सीमा दुर्घटना को कम करने में काफी प्रभावी है।

हिंसा

जीवन कौशल बच्चों एवं किशोरों में सामाजिक विकास कार्यक्रमों के एक महत्वपूर्ण भाग के रुप में हिंसक व्यवहार को कम करने में महत्वपूर्ण है। इस कौशल के निर्माण में शिक्षक और माता पिता को सहायक बनाने की कोशिश की जा सकती है। जिससे समस्या को सुलझाने और अहिंसक होते हुए भी अनुशासित रखने में प्रभावी हुआ जा सकता है और इससे हिंसा में कमी आती है।

  • सीट बेल्ट को बढ़ावा देने के लिए कानून (और हेलमेट) का उपयोग और साथ में शिक्षा से अल्कोहल या अन्य पदार्थों का उपयोग ड्राइविंग में नहीं करने की जागरुकता लाना।
  • सुरक्षित और सस्ती सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता को बढ़ा कर ड्राइविंग करने के लिए विकल्प प्रदान करना
  • पर्यावरण सुरक्षित बनाना
  • पानी डूबने से बचने के लिए बच्चों और किशोरों को शिक्षित करना।

पोषाहार

पूर्व के वर्षों में कुपोषण जीवन काल भर में व्यापक, प्रतिकूल स्वास्थ्य और सामाजिक परिणामों के लिए जिम्मेदार रहा है। इससे अच्छे बचपन में रुकावट आती है। भोजन के उपयोग में सुधार से  बचपन से किशोरावस्था आने की स्थिति में शारीरिक विकास संतुलित होता है। रक्ताल्पता किशोरियों में महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के कम होने की समस्याओं में से एक है।

यौन और प्रजनन स्वास्थ्य

यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में किशोरों को शिक्षित करने के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सकता है, जिससे कि वे अपने जीवन में 'क्या सीखा है' को लागू करने के लिप्रेरित हो सकें। साथ ही ऐसा करने के उद्देश्य को कार्यक्रम के साथ जोड़ा जा सकता है। इससे  आसानी से किशोरों और स्वास्थ्य कर्मियों को इन मामलों में जागरुक किया जा सकता है।  किशोरावस्था में यौन बलात्कार के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर लड़ा जाना चाहिए।

एचआईवी

एचआईवी संक्रमण से युवा लोगों के सामने खड़े जोखिम को यौन कैरियर की शुरुआती उम्र के साथ जोड़ा जाता है। यौन साथी के चयन और यौन व्यवहार करने के लिए सही समय, कंडोम उपयोग की जानकारी एवं एचआईवी संक्रमण रोकथाम की शिक्षा युवा लोगों के लिए अनिवार्य की जानी चाहिए।

स्रोत: RCH II



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