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घरेलू क्षेत्र में ऊर्जा संरक्षण

घरेलू क्षेत्र में ऊर्जा संरक्षण

पीसीआरआर का उदय

1973

विश्व भर में तेल संकट

अध्ययन दल

सार्वजनिक क्षेत्र के तेल कंपनियो , एनपीसी, डीजीटीडी के इंजीनियर्स ने उद्योग और एसटीयू में भारी तेल संरक्षण क्षमता का अनुमान लगाया।

 

अध्ययन के परिणाम

संरक्षण की क्षमता 20-30%

 

6 जनवरी 1976

पेट्रोलियम संरक्षण कार्य समूह (पीसीएजी) का गठन

10 अगस्त 1978

पीसीएजी यानि पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ (पीसीआरए) के

रूप में पुनर्निर्मित किया गया इसे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया गया।

 

पीसीआरए के बारे में

पीसीएजी यानि पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ (पीसीआरए) पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत एक सोसाइटी

प्राथमिक उद्देश्य:

  • सभी क्षेत्रों में ऊर्जा संरक्षण के बारे जागरूकता पैदा करना
  • घरेलू क्षेत्र पर विशेष ध्यान

 

क्षेत्रवार दृष्टिकोण

 

 

 

ऊर्जा

ऊर्जा स्त्रोत

1.  सीमित

  • कोयला
  • तेल
  • गैस

2.  अक्षय ऊर्जा

  • सोलर
  • पवन
  • पनबिजली
  • बायोमास आदि

हमें ऊर्जा संरक्षण की क्यों आवश्यकता है ?

  • हम रोज़ घर में, स्कूल में, काम पर और यहां तक कि जब भी खेलते हैं तब भी ऊर्जा का उपयोग करते है।
  • ऊर्जा बचाने के दवारा आप न केवल उपयोगिता बिलों पर बचत कर रहे हैं बल्कि दुनिया की ऊर्जा संसाधनों जैसे गैस, तेल और पानी को बचाने में भी मदद कर रहे हैं।
  • सब से अच्छी बात यह है की, ऊर्जा को समझदारी से उपयोग करके हम हवा और पानी में प्रदूषण को कम कर सकते हैं। जिससे सभी के लिए एक बेहतर वातावरण बना सकता हैं।
  • ग्रीनहाउस गैसों, जैसे कार्बनडाई ऑक्साइड से वैश्विक तापमान और जलवायु परिवर्तन को रोका जा सकता है।
  • सोचिए कि अगर पर्याप्त ऊर्जा नहीं होगी तो, क्या होगा?

i. अंधेरा होने पर कोई रोशनी नहीं होगी

ii. सर्दियों में आपके घर के लिए नहाने के लिए कोई गर्म पानी नहीं होगा

iii. गाड़ी चलाने के लिए कोई गैस या तेल नहीं होगा

iv. इसलिए बहुत सारे कारणों से हमें ऊर्जा बचानी चाहिए

लाईटिंग में ऊर्जा संरक्षण

  • उपयोग में नहीं होने पर रोशनी बंद करें
  • दिन के समय कमरे में उजाले के लिए, अपने खिड़कियों पर हल्के रंग के ढीले पर्दो का इस्तेमाल करके दिन की रोशनी का लाभ उठाएं।
  • दीवार पर हल्के रंगों का उपयोग करें जो दिन के उजाले को परिवर्तित करके कमरे में रोशनी करती है।
  • धूल प्रकाश देने वाले उपकरणो जैसे बल्ब, ट्यूबलाइट आदि से हमेशा धूल साफ करे।
  • एलईडी बल्ब, ताप साधारण बल्ब की तुलना में आठ गुना अधिक ऊर्जा बचाते हैं और एक समान प्रकाश प्रदान करते हैं। परंपरागत बल्ब के स्थान पर 7 वाट एलईडी का उपयोग करें (60 वाट परंपरागत बल्ब के बदले में )
  • ट्यूबलाइट में तांबे के पारंपरिक एफटीएल चोक के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक एफटीएल चोक का उपयोग करें
  • लाईटिंग में ऊर्जा संरक्षण का छोटा उदाहरण -

हम 60 वाट परंपरागत बल्ब को 7 वाट एलईडी बल्ब से बदल सकते

वार्षिक ऊर्जा की बचत की गणना: बिजली की बचत = 60-7 = 53w

ऊर्जा की बचत = 53w*8 घंटा *365 दिन /1000 =155 किलोवाट घंटा।

बिजली की कीमत @Rs.6.38 (200 यूनिट /माह स्लैब) =155*6.38 =Rs.989

7वॉट एलईडी बल्ब की लागत = Rs.240

लागत वसूली समय अवधि <3 माह

पंखा

  • छत से लगे पंखे के उपयोगकर्ता, पारंपरिक रेग्युलेटर को इलेक्ट्रॉनिक रेग्युलेटर से बदल कर, 15-20% ऊर्जा बचा सकते हैं।
  • छत से लगे पंखे की तुलना में निकास पंखे को अधिक ऊंचाई पर स्थापित करें।

रसोई उपकरण

  • माइक्रोवेव ओवन
  • परंपरागत बिजली / गैस स्टोव से 50% कम ऊर्जा का उपभोग करता है।
  • ओवन के दरवाजे को अक्सर खाने की स्थिति की जांच करने के लिए मत खोलें क्योंकि दरवाजा खुलने पर तापमान में 25 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आती है।

रेफ्रिजरेटर

  • गर्म भोजन सीधे फ्रिज में डालने से बचें।
  • अपने रेफ्रिजरेटर और दीवारों के बीच पर्याप्त जगह छोड़ दें ताकि हवा आसानी से रेफ्रिजरेटर के आसपास फैल सकें।

एयर कंडीशनर

  • रेग्युलेटर को हमेशा 26°C तापमान की स्थिति में रखें।
  • 23 °C तापमान की स्थिति, 26 °C तापमान की स्थिति से 10% ज्यादा ऊर्जा का उपयोग करता है।
  • अपने एयर कंडीशनर के साथ साथ छत से लगे पंखे का, उपयोग करें ताकि ठंडी हवा पूरे कमरे में फैल सके। इससे आपको 26 °C से कम तापमान पर एयर कंडीशनर को चलाने की अवशयकता नहीं होगी।
  • खिड़कियों पर सनफिल्म या पर्दै का उपयोग करें तथा दरवाजे हमेशा बंद रखें।

एलपीजी

  • प्रैशर कुकर न केवल समय बल्कि ऊर्जा को भी बचाता है।
  • जब आप अपने खाना पकाने कि सभी सामाग्री एकत्रित कर लें और खाना पकाने के लिय तैयार हों, तभी चुल्हे को जलाएँ।
  • पानी कि उचित मात्रा का उपयोग करें। ज्यादा पानी अधिक ऊजों का उपयोग करता है जो कि अन्यथा बचाया जा सकता है।
  • पानी उबलने के तुरंत बाद लौ कम कर दें।
  • खाना पकाने के पहले, अनाजों जैसे चावल, दाल आदि को कुछ समय तक भिगोने से ईंधन कि बचत होती है।
  • उन बर्तनों का उपयोग न करें जो कि संकीर्ण होते हैं, क्योंकि उससे चुल्हे की लौ बाहर आती है तथा ईंधन कि बर्बादी होती है।
  • एक छोटा बर्नर, बड़े बर्नर की तुलना में 6% से 10% तक अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा की खपत करता है।
  • याद रखे, नीली लौ का मतलब है आपका चूल्हा कुशलता पूर्वक कार्य कर रहा है।
  • पीली लौ का मतलब है कि आपके चूल्हे के बर्नर को सफाई की अवशयकता है।
  • खाना पकाने के दौरान ईंधन बचाने के लिय बर्तन पर ढक्कन का इस्तमाल करें।
  • रेफ्रिजरेटर से निकली गई वस्तुओं (जैसे सब्जी, दूध आदि) को चुल्हे पर चढ़ाने से पहले कमरे के तापमान पर आने दें।

क्षेत्रवार संरक्षण क्षमता

क्षेत्र

संरक्षण की क्षमता

परिवहन

20%

घरेलू

20%

उद्योग

25%

कृषि

25%

व्यावसायिक

25%

 

बचत, पुनःउपयोग तथा री-साइकल

  • जहाँ तक संभव हो, कागज़ या कागज़ से बने वस्तु, टीन के इब्बों आदि का बचत, पुनःउपयोग तथा री-साइकल के लिय अपना सहयोग दें।
  • वनस्पति कचरा - वनस्पति कचरे अच्छे खाद में बदला जा सकता है।
  • ऐसा करने से हम कचरे के संग्रहण/ परिवहन में कि बचत कर सकते हैं।

खाद्य पदार्थों को बर्बाद होने से बचायें

  • बहुत ही बड़ी मात्रा में ऊर्जा का उपयोग फसल कि बुवाई, सिंचाई, कटाई, परिवहन, भंडारण, विपणन और खुदरा बिक्री, ग्राहक द्वारा खरीदी,खाना पकाने कि तैयारी तथा खाना पकाने में किया जाता है।
  • खाना बर्बाद न करके आप यादा ऊर्जा कि बचत कर सकते हैं।

जल की बचत

कभी कभी अपको मालूम भी नहीं होता है की आप कितने जल की बर्बादी करते है। हालांकि, आप जल बर्बाद करना नहीं चाहते हैं। परंतु अनजाने में जल की बर्बादी हो जाती है। इसे रोके।

स्त्रोत: पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ, भारत सरकार



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