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जैव ईंधन

जट्रोफा उत्पादन तकनीक

जेट्रोफा करकास एक बहुद्देश्यीय अखाद्यतेल उत्पादक झाड़ी है, जिसकी उत्पत्ति अमेरिका और पश्चिम एशिया के उष्णकटिबंधीय इलाके में हुई। यह रबड़नुमा पदार्थ उत्पादित करता है, जिस कारण जानवर इसे चरना पसंद नहीं करते। यह एक कठोरजीवी  और सुखाड़ में भी हरी-भरी रहनेवाली उपज है, जिसका उत्पादन बंजर भूमि में भी किया जा सकता है। इसकी उपज को  आर्थिक रूप से 30 साल तक बनाये रखा जा सकता है। जेट्रोफा करकास के तेल का इस्तेमाल बायो डीजल के 20 प्रतिशत सम्मिश्रण के रूप में किया जा सकता है। हालांकि परिष्कृत तेल एक उपयुक्त साफ-सुथरा बायो डीजल है।

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उष्णकटिबंधीय चुकंदर उत्पादन तकनीक

प्रस्तावना

चुकंदर या शकरकंद (बेटा वल्गैरिस, सैक्कारिफेरा एल) चीनी उत्पादन करने वाली एक द्विवार्षिक फसल है। इसे सम शीतोष्ण जलवायु वाले देशों  में उगाया जाता है। अब उष्णकटिबंधीय चुकंदर के कई प्रकार, उष्णकटिबंधीय और कटिबंधीय देशों में इथेनॉल के उत्पादन के वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इथेनॉल को पेट्रोल या डीजल के साथ 10 प्रतिशत तक मिला कर इसका उपयोग बायो डीजल के रूप में किया जा सकता है। चुकंदर की लत्ती का उपयोग हरे चारे के रूप में किया जा सकता है, जबकि फल का अवशेष और फिल्टर केक का उपयोग भी पशु चारे के रूप में किया जा सकता है।

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मीठे जवार की उत्पादन तकनीक

चावल के बाद जवार सबसे महत्वपूर्ण अनाज है, जिसका उत्पादन सर्वाधिक बड़े भू-भाग में किया जाता है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से अनाज और चारे के लिए किया जाता है। जवार का वैकल्पिक उपयोग खाद्य उद्योग में वाणिज्यिक अनाज के रूप में भी किया जाता है। इसके डंठलों का उपयोग इथेनॉल, सिरका और खल्ली तथा पशु चारे के उत्पादन में भी किया जाता है।

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करंज

जैव ईंधन का उत्पादन करने के लिए अखाद्य तेल देनेवाले कई पौधे उगाये जा सकते हैं। करंज इसमें सबसे उपयुक्त पेड़ है। यह देश के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। इसकी सबसे लोकप्रिय प्रजाति पोनगामिया पिन्नाटा है।

करंज

करंज की मुख्य विशेषताएं

  • यह नाइट्रोजन जमा करनेवाला पेड़ है। इसलिए इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
  • आमतौर पर जानवर इसे नहीं चरते हैं।
  • जल-जमाव, अम्लीय और क्षारीय परिस्थिति का इस पर असर नहीं पड़ता है।
  • यह कठिन मौसम को सह सकता है (मध्यम से अधिक वर्षापात)
  • इसे ढलवां, कचरा और उपजाऊ जमीन कहीं पर भी लगाया जा सकता है।
  • करंज के बीज में 30 से 40 प्रतिशत तक तेल होता है।
  • यह जमीन के कटाव को रोकने और बलुआही जमीन को बांधने में मदद करता है, क्योंकि इसकी समानांतर जड़ों का जाल काफी घना होता है।

इसकी जड़, तना, पत्ते, फल और फूल में औषधीय गुण होते हैं। इसके सूखे पत्ते का उपयोग अनाज के भंडारण में कीटनाशक के रूप में किया जाता है।

करंज तेल के गुण

  • यह अखाद्य तेल है, जो मुख्य रूप से बीज से निकाला जाता है।
  • संग्रहित बीजों में 95 प्रतिशत तक करनेल होता है।
  • तेल की मात्रा 27 से 40 प्रतिशत तक के बीच होती है।
  • करनेल से तेल निकालने के लिए जब यांत्रिक शोधक का इस्तेमाल किया जाता है, तब तेल की मात्रा 24 से 26.5 प्रतिशत के बीच होने की सूचना है।
  • कच्चा तेल पीला नारंगी से भूरे रंग तक का होता है। जमा रखने पर इसका रंग गहरा हो जाता है। इसका स्वाद कड़वा होता है और गंध तेज होती है। यह खाने योग्य नहीं है।
  • जैव ईंधन के अलावा इस तेल का उपयोग लैंप जलाने, ल्यूब्रिकेंट, जलरोधी पेंट के कवच, कीटनाशक, साबुन बनाने और चमड़ा उद्योग में किया जा सकता है।
  • इस तेल का उपयोग गठिया के उपचार के अलावा मनुष्य और जानवरों के चर्म रोग के उपचार में भी किया जाता है।
  • तेल निकालने के बाद बची खल्ली में नाइट्रोजन की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसलिए इसका उपयोग जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में किया जा सकता है। खल्ली को जमीन में मिलाने से इसके कीटनाशक गुण भी खासकर नेमाटोड के लिए बहुत उपयोगी होता है।

करंज तेल बनाम सामान्य पेट्रोलियम डीजल

  • जैव ईंधन के रूप में करंज तेल के भौतिक गुण पारंपरिक डीजल से बहुत अधिक मिलते हैं।
  • पर्यावरण के दृष्टिकोण से करंज का तेल पारंपरिक डीजल के मुकाबले अधिक सुरक्षित है।


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