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ऊर्जा संरक्षण

ऊर्जा संरक्षण का महत्व

गांधी जी ने कहा था कि पृथ्वी हर आदमी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त प्रदान करती है, लेकिन हर आदमी के लालच को पूरा करने के लिए नहीं। ऊर्जा संरक्षण की आवश्यकता को नीचे दिये गये तथ्यों द्वारा उल्लिखित किया गया है:

  • हम ऊर्जा का उपयोग उसके उत्पादन करने से ज्यादा तेजी से करते हैं - कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस – सबसे अधिक उपयोग में आने वाले हैं जिनका वर्तमाम स्वरुप हजारों सालों के बाद विकसित हुआ है।
  • ऊर्जा संसाधन सीमित हैं- भारत में दुनिया की आबादी 16% है और दुनिया के ऊर्जा संसाधनों का लगभग 1% भाग पाया जाता है।
  • अधिकतर ऊर्जा स्रोतों को न तो पुन: उपयोग में लाया जा सकता है और न नवीनीकृत किया जा सकता है । गैर अक्षय ऊर्जा स्रोतों का ईंधन उपयोग में हिस्सा 80% है। इसीलिए ऐसा कहा गया है कि अगले 40 सालों में हमारे ऊर्जा के सभी स्त्रोत समाप्त हो सकते हैं।
  • हम ऊर्जा की बचत करके अपने देश की बहुमूल्य मुद्रा की बचत करते हैं। लगभग 75 प्रतिशत अपनी जरूरतों का कच्चे तेल आयात से पूरा करते हैं। इस आयात का कुल मूल्य प्रति वर्ष भारतीय रुपयों में लगभग. 50,000 करोड़ रुपये तक होता है।

एक पुरानी भारतीय कहावत है जो इसका इस तरह वर्णन करती है - पृथ्वी, जल और वायु हमारे माता पिता से प्राप्त हमारे लिए एक उपहार नहीं है बल्कि हमारे बच्चों के लिए कर्ज़ है। इसलिए हमें ऊर्जा संरक्षण को एक आदत बनाने की जरूरत है।

घर पर ऊर्जा संरक्षण

घर में ऊर्जा का उपयोग प्रकाश, खाना पकाने, हीटिंग के लिए और अन्य घरेलू उपकरणों के संचालन के लिए किया जाता है। कुछ नीचे दिये गये तरीकों का उपयोग कर इन क्षेत्रों में ऊर्जा के प्रयोग में बचत की जा सकती है।

घरेलु प्रकाश

  • जब उपयोग में नहीं हो तो लाइट बंद करें।
  • ट्यूब लाइट और बल्ब आदि उपकरणों पर जमी धूल को नियमित रूप से साफ करें।
  • आईएसआई मार्का वाले बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल करें।
  • ऊर्जा बचाने के लिए सीएफएल का प्रयोग करें।
  • दिन के उजाले के समय अंदर अधिकतम प्रकाश प्राप्त करने के लिए खिड़कियों पर हल्के रंग, ढीले बुनाई पर्दे का प्रयोग करें।
  • पारंपरिक ट्यूब रोशनी के स्थान पर T5 रोशनी ऊर्जा बचाने के लिए प्रयोग की जा सकती है।

अल्प ऊर्जा, अधिक प्रकाश - सीएफएल

  • सामान्यतौर पर भारत में उपयोग में लाये जा रहे लैंप, बल्ब एवं अन्य उपकरणों द्वारा अधिक ऊर्जा खपत करने के कारण, आज लगभग 80 प्रतिशत बिजली बेकार चली जाती है।
  • कॉम्पैक्ट फ्लूरेसेन्ट लाइट (सीएफएल) बल्ब का उपयोग कर हम बिजली की लागत में बचत कर सकते हैं। सीएफएल बल्ब परंपरागत बल्ब की तुलना में पाँच गुणा अधिक प्रकाश देता है।
  • साथ ही, सीएफएल बल्ब के टिकाऊ होने की अवधि सामान्य बल्ब से आठ गुणा अधिक है।
  • फ्लूरेसेन्ट ट्यूब लाइट व कॉम्पैक्ट फ्लूरेसेन्ट लाइट जलने में कम ऊर्जा ग्रहण करती है और ज्यादा गर्मी भी नहीं देती। यदि हम 60 वाट के साधारण बल्ब के स्थान पर, 15 वाट का कॉम्पैक्ट फ्लूरेसेन्ट लाइट बल्ब का उपयोग करते हैं तो हम प्रति घंटा 45 वाट ऊर्जा की बचत कर सकते हैं। इस प्रकार, हम प्रति माह 11 यूनिट बिजली की बचत कर सकते हैं और बिजली पर आने वाले अपने खर्च को कम कर सकते हैं।

इस प्रकार, ऊर्जा संरक्षण कर एवं बिजली खपत में बचत कर, हम उन गाँवों तक बिजली पहुँचाने में मदद कर सकते हैं जहाँ आज तक बिजली नहीं पहुँची है।

विवरण

60 वाट का बल्ब

15 वाट का सीएफएल बल्ब

बचत

बल्ब की कीमत

10 रुपये

116 रुपये

-

वाट

60 रुपये

15 रुपये

45 रुपये

टिकाऊ रहने की अवधि

6 माह, 1 हजार घंटा

4 वर्ष, 8 हजार घंटा

 

प्रति वर्ष बिजली खपत

115 यूनिट

36 यूनिट

79 यूनिट

प्रति वर्ष कीमत 2.75 रुपये प्रति यूनिट की दर से

316.25 रुपये

99 रुपये

217.25

चार वर्ष का कुल लागत

1265 रुपये

396 रुपये

869 रुपये

स्रोत- आँध्र प्रदेश गैर परंपरागत ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड

भोजन पकाने में

  • खाना बनाने में ऊर्जा क्षमतावाले चूल्हों का प्रयोग करें।
  • खाना बनाते समय बर्तन को ढक कर रखें। इससे खाना बनाते समय ऊर्जा की बचत होती है।
  • खाना बनाने से पहले अनाज को भिगोये रखें।

तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और इसका प्रयोग

एलपीजी क्‍या है?

तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) ऐसे हाइड्रोकार्बनों का एक मिश्रण है जो एक सामान्य तापमान और दाब पर गैसीय अवस्‍था में होते हैं, लेकिन इनके आसान संग्रहण के लिए इन्‍हें दाब द्वारा तरल किया जाता है। इस प्रकार इन्‍हें दाबानुकुलित सिलेंडर में लाने ले जाने में आसनी होती है। इसे कच्‍चे तेल को शुद्ध कर या प्राकृतिक गैस के फ्रैक्‍शनेशन द्वारा प्राप्‍त किया जाता है। एलपीजी में ब्‍यूटेन और प्रोपेन हाइड्रोकार्बन के मुख्‍य तत्‍व होते हैं। अन्‍य छोटे खंडों में मौजूद रहने वाले तत्‍व आइसो-ब्‍यूटेन, ब्‍यूटीलीन, एन-ब्‍यूटेन, प्रोपीलीन आदि हैं।

एलपीजी का क्‍या उपयोग है?

एलपीजी को एक सबसे सुरक्षित, सस्‍ते, पर्यावरण के अनुकूल और स्‍वास्‍थ्‍य के लिए सुरक्षित खाना पकाने वाले ईंधन के रूप में देखा जाता है। घरों में प्रयोग करने के अलावा एलपीजी को विभिन्‍न औद्योगिक और व्‍यापारिक संस्‍थानों में प्रयोग किया जाता है।

बाजार में उपलब्‍ध एलपीजी सिलिंडरों का मानक आकार क्‍या है?

सामान्‍य रूप से, ग्रामीण, पहाड़ी और निर्जन इलाकों में एलपीजी सिलिंडरों का वजन 5 किलोग्राम और घरेलू प्रयोग के लिए ये सिलेंडर 14.2 किलोग्राम के वजन में उपलब्‍ध हैं। औद्योगिक और व्‍यापारिक प्रयोग के लिए 19 किलोग्राम और 47.5 किलोग्राम के सिलेंडर उपलब्‍ध हैं। कुछ निजी कंपनियां घरेलू प्रयोग के लिए 12 किलोग्राम के सिलिंडर बेचती हैं।

क्‍या घरेलू सिलिंडरों को मोटर वाहनों, एलपीजी से चलने वाले अन्‍य उपकरणों या गैर घरेलू कामों में प्रयोग किया जा सकता है?

नहीं। मोटर वाहनों या अन्‍य गैर घरेलू कामों के लिए घरेलू एलपीजी सिलिंडरों के प्रयोग पर एलपीजी नियंत्रण कानून के अंतर्गत प्रतिबंध है।

कौन-कौन सी कंपनियां भारत में घरेलू प्रयोग के लिए सिलिंडर उपलब्‍ध करवाती हैं?

नीचे दी गई सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां यह कार्य कर रही हैं

निजी क्षेत्रों की कंपनियों के कुछ उदाहरण

नया घरेलू एलपीजी कनेक्शन लेने के लिए क्‍या करना चाहिए?

घरेलू कनेक्शन लेने के लिए घरेलू एलपीजी सिलेंडर उपलब्‍ध करवाने वाली किसी भी कंपनी के विक्रेता से संपर्क किया जाना चाहिए। समीप के विक्रेता के विषय में जानने के लिए उस कंपनी की वेबसाइट पर देखें।

नए कनेक्‍शन के लिए आवेदन करते समय नीचे दिए गए किसी भी आवास प्रमाण के दस्‍तावेज का होना आवश्‍यक है:- राशन कार्ड, बिजली बिल, टेलिफोन बिल, पासपोर्ट, रोजगार प्रमाणपत्र, फ्लैट आबंटन/स्वामित्व पत्र, गृह पंजीकरण के दस्‍तावेज, एलआईसी पॉलिसी, मतदाता पहचान पत्र, किराए की रसीद, आयकर विभाग द्वारा जारी पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस। हालांकि, कुछ राज्‍यों में नए कनेक्‍शन के लिए राशन कार्ड आवश्‍यक है।

सिलिंडर और रेग्‍यूलेटर के लिए एक सिक्‍योरिटी राशि डिपोजिट जमा करनी पड़ती है। सिक्‍योरिटी डिपोजिट जमा करने पर एक सब्‍स्‍क्रिपशन वाउचर मिलता है। इस वाउचर को संभाल कर रखना चाहिए क्‍योंकि भविष्‍य में कनेक्‍शन के हस्‍तांतरण के लिए इसकी आवश्‍यकता पड़ती है।

घरेलू एलपीजी कनेक्‍शन के हस्‍तांतरण की क्‍या प्रक्रिया है?

i. शहर के अंदर या पड़ोस के शहर में स्‍थानांतण

  • वर्तमान विक्रेता सब्‍स्‍क्रिपशन वाउचर (एसवी) की जांच के बाद एक स्‍थानांतरण दस्‍तावेज जारी करेगा।
  • सब्‍स्‍क्रिपशन वाउचर को स्‍थानांरण दस्‍तावेज के साथ नए विक्रेता को दिखाना चाहिए। नया विक्रेता मूल एसवी को जांच कर स्‍थानांतरण की स्‍वीकृति दे देता है। स्‍थानांतरण और एसवी दस्‍तावेज को संभाल कर रखना चाहिए।
  • यहां, सिलिंडर और रेग्‍यूलेटर जैसे उपकरणों को देने की कोई आवश्‍यकता नहीं है, उपभोक्‍ता स्‍वयं उन्‍हें अपने नए पते पर ले जा सकता/सकती है।

ii. बहुत दूर के इलाके में कनेक्‍शन का स्‍थानांतरण

  • एक मांग पत्र के साथ एसवी को जमा करवाने के बाद वर्तमान स्‍थानीय विक्रेता टर्मिनेशन वाउचर (टीवी) जारी करेगा। सिलेंडर और रेग्‍यूलेटर जैसे उपकरणों को लौटाने पर एसवी में उल्लिखित डिपोजिट राशि को वापस कर दिया जाएगा।
  • नए स्‍थान पर टीवी में दी गई राशि को जमा करवाने पर नया कनेक्‍शन लिया जा सकता है। कृपया नया एसवी प्राप्‍त कर लें और उसे संभाल कर रखें।

एलपीजी लगाते हुए किन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए?

जहां पर गैस लगानी हो वह स्‍थान काफी महत्‍वपूर्ण होता है। यदि निम्‍न सावधानियां बरती जाएं तो रसोई में होने वाली दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। जहां पर गैस सिलिंडर लगाया जाना हो वह जगह हवादार होनी चाहिए और वहां पर हवा की आवाजाही आसनी से होनी चाहिए। एलपीजी को ऐसे कमरे में प्रयोग न‍हीं करना चाहिए जहां पर खिड़की या दरवाजे बंद हों।

  • गैस को ऐसी जगह लगाना चाहिए जहां से सिलिंडर, प्रेशर रेग्‍यूलेटर का नॉब और रबर की ट्यूब आसानी से हिलडुल सके।.
  • सिलिंडर को जमीन की सतह पर ही लगाया जाना चाहिए न कि जमीन से नीचे या भूमिगत जगहों पर।
  • यदि सिलिंडर को कबर्ड में रखा गया है तो ध्‍यान रखें कि वे कबर्ड हवादार हों। तली और ऊपरी स्‍थानों से हवा की आवाजाही होनी चाहिए।
  • खाना पकाने वाले उपकरण को जमीन पर न रखें। उपकरण को हमेशा स्‍लैब या मेज पर इतनी ऊंचाई पर रखा जाना चाहिए जहां पर आसनी से खड़े होकर खाना पकाया जा सके। लकड़ी की सतह वाली मेज का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। यदि मेज लकड़ी की है तो उस पर पहले एस्‍बेस्‍टेस शीट बिछाई जानी चाहिए फिर स्‍टोव रखा जाना चाहिए।
  • उपकरण को सीधे खिड़की के सामने न रखें। यदि हवा का झोंका तेजी से आए तो स्‍टोव की आंच बुझ सकती है और कमरे में एलपीजी जमा हो सकती है।
  • खाना पकाने का उपकरण किसी मेज या स्‍लैब पर रखा जाना चाहिए जहां पर एक सिरा दीवार से सटा हो। स्‍टोव का पिछला भाग एक साधारण दीवार से लगा होना चाहिए। दीवार में कोई भी रैक या अलमारी नहीं होनी चाहिए। ऐसा संभव है कि अलमारी से कुछ सामान जले हुए स्‍टोव पर लटका रह गया तो आग भी लग सकती है।
  • कमरे में दो से अधिक सिलिंडर नहीं रखे जाने चाहिए। रसोई में दो सिलिंडर रखने के लिए रसोई का निम्‍नतम क्षेत्र 10 वर्ग मीटर होना चाहिए।
  • सिलिंडर को हमेशा सीधा खड़ा रखना चाहिए। उसका वॉल्‍व ऊपर की ओर होना चाहिए। यदि सिलिंडर को किसी ओर तरह से लगाया जाएगा तो तरल एलपीजी वॉल्‍व से बाहर आ सकती है और दुर्घटना घट सकती है।
  • गैस उपकरण के आसपास इलेक्‍ट्रिक ओवन, केरोसिन स्‍टोव आदि उपकरण नहीं रखे जाने चाहिए।
  • सिलिंडर को धूप, बारिश, धूल और गर्मी से बचा कर रखना चाहिए।
  • सिलिंडर के ऊपरी भाग पर कोई बर्तन या कपड़ा नहीं रखा जाना चाहिए।
  • सेफ्टी सिक्‍योरिटी कैप को हमेशा टॉप रिंग स्‍टे प्‍लेट के साथ बांध कर रखना चाहिए जिससे यदि वॉल्‍व से सिलेंडर में गैस रिस रही है तो उसे सिक्‍योरिटी कैप से बंद किया जा सके।
  • खाली या भरे हुए सिलेंडर को खुले हुए वॉल्‍व के साथ नहीं रखना चाहिए। उस पर सिक्‍योरिटी कैप लगा कर रखना चाहिए।
  • प्रेशर रेग्‍यूलेटर को प्रयोग करने के लिए प्रेशर रेग्‍यूलेटर के ऊपर दिए गए निर्देशों को पढ़े।

एलपीजी सिलिंडर के प्रयोग के लिए सुझाव

i. खाली एलपीजी सिलिंडर को हटाना

  • खाली एलपीजी सिलिंडर को बदलने से पहले रसोई और उसके साथ वाले कमरों में धूपबत्‍ती, पूजा लैंप, मोमबत्‍ती सहित सभी प्रकार की आग को बुझा दें।
  • स्‍टोव के सभी चूल्‍हे बंद कर दें।
  • रेग्‍यूलेटर के नॉब को ऑन से ऑफ करें।
  • रेग्‍यूलेटर को पकड़ें और नीचे की ओर गोल रिंगनुमा प्‍लास्टिक ग्रिप को ऊपर की ओर थोड़ा सा घुमाते हुए उठाएं। इस प्रकार रेग्‍यूलेटर सिलिंडर से अलग हो जाएगा।
  • सिलिंडर के वॉल्‍व पर सेफ्टी कैप लगा दें। कैप को तब तक धीरे से दबाएं जब तक एक क्लिक की आवाज न आ जाए। अब खाली सिलिंडर को हटाया जा सकता है।

iii. भरे हुए सिलिंडर को लगाना

  • सेफ्टी कैप को हटाने के लिए उसे नीचे की ओर दबाएं, कॉर्ड को खींचें और खींचे रहें, कैप को सिलिंडर के वॉल्‍व से ऊपर की ओर हआ दें।
  • अपनी छोटी अंगुली का प्रयोग कर यह जांचें कि सिलिंडर के वॉल्‍व में सीलिंग रिंग अपनी सही जगह पर है या नहीं। यदि उसमें रिंग नहीं है तो उस सिलिंडर का प्रयोग न करें। सेफ्टी कैप को वापस लगा दें और अपने स्‍थानीय विक्रेता से सिलिंडर बदलने के लिए कहें।
  • भरे सिलिंडर पर रेग्‍यूलेटर लगाने के लिए निम्‍न निर्देशों का पालन करें-
  • सुनिश्च्ति करें कि रेग्‍यूलेटर का नॉब ऑफ की अवस्‍था में है।
  • रेग्‍यूलेटर को पकड़ें और प्‍लास्टिक ब्रश को ऊपर उठाएं।
  • रेग्‍यूलेटर को वॉल्‍व पर सीधा रखें और थोड़ा घुमाते हुए नीचे तब तक रखें जब तक कि वॉल्‍व पर वह ठीक से फिट न हो जाए। प्‍लास्टिक के काले ब्रश को छोड़ दें और उसे नीचे दबाएं (आपको एक क्लिक की आवाज सुनाई दे सकती है।
  • अब सिलिंडर पर प्रेशर रेग्‍यूलेटर लग चुका है।

iv. बर्नर्स को जलाने के लिए

  • रेग्‍यूलेटर के नॉब को घड़ी की विपरीत दिशा में घुमा कर उसे ऑन करें।
  • बर्नर के पास एक जलती हुई माचिस की तीली लाएं और स्‍टोव के नॉब को ऑन करें।

v. अन्‍य

  • खाना पकाते हुए नायलॉन या उसके जैसे कपड़े न पहनें।
  • जब खाना पकाने के उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा हो तो उस पर नजर रखें।
  • गैस में आई किसी खराबी को स्‍वयं ठीक करने की कोशिश न करें या किसी अन्‍य नकली मैकेनिक से भी ठीक न करवाएं।
  • खाना पकाने के बाद रात को रेग्‍यूलेटर को ऑन अवस्‍था में न छोड़ें।
  • स्‍टोव जलाने से पहले हमेशा सुनिश्चित कर लें कि कहीं एलपीजी का रिसाव तो नहीं हो रहा है।
  • जहां तक संभव हो रसोई को साफ रखें ताकि वहां चूहे और तिलचट्टे न हों।

उपभोक्‍ताओं के लिए सामान्‍य सुरक्षा सुझाव-

i. रबड़ ट्यूबिंग और प्रेशर रेग्‍यूलेटर के बारे में याद रखने वाले तथ्‍य

  • सुनिश्चित कर लें कि रबड़ ट्यूब और रेग्‍यूलेटर आईएसआई/बीआईएस मार्क स्‍वीकृत होने चाहिए।
  • बीआईएस स्‍वीकृत रबड़ ट्यूब और एलपीजी रेग्‍यूलेटर को पंजीकृत विक्रेता से ही खरीदें।
  • यह जितना हो सके उतना छोटा होना चाहिए। अधिकतम लंबाई 1.5 मीटर रखी जा सकती है।
  • यह सुनिश्चित करें कि आपके उपकरण का नॉजल रेग्‍यूलेटर और रबर ट्यूब में फिट आए और उसमें उचित बोर प्रयोग किया गया हो। आपका विक्रेता आपको सही आकार के बारे में जानकारी दे देगा।
  • यह ऐसा होना चाहिए कि इसकी जांच आसानी से की जा सके।
  • इसे गर्मी और आग से दूर रखें।
  • ट्यूब को अच्‍छी तरह लगाएं जिससे कि स्‍टोव और रेग्‍यूलेटर के नॉजल को पूरी तरह ढंका जा सके।
  • ध्‍यान रखें की स्‍टोव के बर्नर से ट्यूब को गर्मी न पहुंचे या वह हिला हुआ न हो।
  • इसे सिर्फ गीले कपड़े से साफ करें और नॉजल में रबर ट्यूब को आसानी से घुसाने के लिए साबुन का प्रयोग न करें।
  • नियमित रूप से जांचें कि कहीं इसमें किसी प्रकार के छेद न हों, यह कहीं से फटी न हो या कहीं से मुलायम हो कर गल न रही हो। विशेषरूप से इसके दोनों सिरों को ध्‍यान से जांचे।
  • हर दो साल के अंतराल पर ट्यूब को बदलें।
  • रबड़ ट्यूब को ढंकने के लिए कोई और परत न चढ़ाएं।

प्रेशर रेग्‍यूलेटर भी काफी महत्‍वपूर्ण है। यह सिलिंडर वॉल्‍व के आउटलेट से जुड़ा होता है। इसका काम सिलिंडर से स्‍टोव तक जाने वाली गैस की दबाव को नियंत्रित करना होता है।

ii. गैस सिलिंडर लेते समय ध्‍यान रखने योग्‍य तथ्‍य

  • जांच लें कि सिलिंडर पर कंपनी सील और सेफ्टी कैप सही अवस्‍था में हो।
  • यदि उसे प्रयोग करना नहीं जानते तो डिलीवरी वाले व्‍यक्ति को कहें कि वह उसे प्रयोग करने की विधि समझाए।
  • सिलिंडर को जमीन के स्‍तर पर समतल स्‍थान पर लगाना चाहिए।

iii. गैस सिलिंडर का प्रयोग करने से पहले याद रखने योग्‍य तथ्‍य

  • जांच लें कि सिलिंडर के वॉल्‍व के अंदर रबड़ की गोल रिंग मौजूद हो।
  • साबुन के घोल या सूंघ कर जांचें कि गैस का रिसाव तो नहीं हो रहा।
  • रिसाव को जांचने के लिए कभी भी जली हुई तीली का प्रयोग न करें।
  • सिलिंडर को जमीन के स्‍तर पर हमेशा सीधा खड़ा करें और ध्‍यान रखें कि जहां पर सिलिंडर हो वह स्‍थान हवादार हो।
  • केबिनेट में एलपीजी सिलिंडर को न लगाएं।
  • एलपीजी स्‍टोव को हमेशा रसोई की स्‍लैब पर लगाना चाहिए और ध्‍यान रहे कि वह स्‍लैब सिलिंडर से ऊंची हो।
  • सिलिंडर को बाकी ऐसे सभी उपकरणों या स्रोतों से दूर रखा जाना चाहिए जो कि आग या गर्मी से संबंधित हों।

iv. गैस सिलिंडर का प्रयोग करने के बाद क्‍या करें

  • जब सिलिंडर का प्रयोग न किया जा र‍हा हो तो रेग्‍यूलेटर के नॉब को 'ऑफ' (बंद) रखना चाहिए।
  • खाली सिलिंडर को ठंडी और हवादार जगह पर रखना चाहिए और उस पर सेफ्टी कैप लगी होनी चाहिए।

यदि गैस की गंध आए तो क्‍या करना चाहिए?

गैसीय अवस्‍था वाली एलपीजी रंगरहित और गंधरहित होती है इसीलिए इसमें एक विशेष प्रकार की गंध डाली गई है जिससे रिसाव होने पर पहचान की जा सके। इसे हवा में विस्‍फोट होने के 1/5 गुना पहले सूंघ कर पहचाना जा सकता है।

यदि गैस की गंध आए तो,

  • घबराएं नहीं।
  • बिजली के स्विचों का प्रयोग न करें। बिजली के मुख्‍य स्विच को बाहर से बंद कर दें।
  • सुनिश्चित करें कि स्‍टोव के नॉब ऑफ की स्थिति में हों।
  • एलपीजी के रिसाव की जांच करने के लिए भी माचिस की तीली न जलाएं। सभी प्रकार की आंच, लैंप, अगरबत्‍ती आदि को बुझा दें।
  • रेग्‍यूलेटर नॉब को घड़ी की दिशा में घुमा कर ऑफ की स्थिति में करें।
  • सभी खिड़की और दरवाजे खोल दें।
  • यदि गंध आनी बंद नहीं होती तो कार्यालय के समय में अपने गैस विक्रेता से संपर्क करें। अवकाश के समय कृपया पास के आपाताकालीन सेवा केंद्र से संपर्क करें।
  • एक अनुभवी व्‍यक्ति रेग्‍यूलेटर को सावधानी से हटा कर वॉल्‍व पर सेफ्टी कैप लगा सकता है।

सिलेन्डर की समाप्ति

यह तथ्य कइयों को मालूम नहीं होता है कि पुनर्भरण तथा वितरण के लिए भेजने से पहले एलपीजी सिलेंडरों का आवधिक सांविधिक परीक्षण करना होता है| एलपीजी सिलेंडरों की तीन ऊर्ध्वाधर स्टे प्लेटो (साइड स्टेम) में से एक पर एक सावधानी तारीख का उल्लेख किया जाता है|

तारीख को ए या बी या सी या डी और एक दो-अंकीय संख्या के रूप में अल्फा संख्यानुसार कोड दिया जाता है| अक्षर तिमाहियों को दर्शाते हैं – ए मार्च में समाप्त तिमाही के लिए, बी जून में समाप्त हुई तिमाही के लिए, और इसी तरह से बाकी भी| अंक उस वर्ष को दर्शाते हैं जब सिलेंडर को वैधानिक परीक्षण के लिए भेजा जाना हो|

यदि उपभोक्ताओं को पता लगता है कि सांविधिक परीक्षण के लिए भेजने लायक सिलेंडरों की आपूर्ति की जा रही हैं, तो वे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सम्बंधित अधिकारी या विस्फोटक के मुख्य नियंत्रक अथवा पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (http://peso.gov.in) को सूचित कर सकते हैं|

एलपीजी सिलेंडर की समाप्ति की तारीख उपभोक्ताओं के लिए गैस कनेक्शन के साथ स्टोव लेने की बाध्यता नही

गैस वितरकों से किसी भी अन्य ब्रांड का एलपीजी स्टोव या अन्य कोई सामग्री खरीदने के लिए ग्राहकों पर कोई बाध्यता नहीं है। ग्राहक अपने मनपसन्द के किसी भी स्रोत से एलपीजी स्टोव खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। ग्राहकों को यह बात प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापनों के माध्यम से बताई जा रही है,  इसके अलावा एलपीजी सिलेंडर की नकद रसीद में यह सन्देश शामिल करने के साथ-साथ भावी ग्राहकों को सूचना पत्र के द्वारा भी सूचित किया जा रहा है।

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने सूचित किया है कि ग्राहक सेवा को बढ़ाने, अपने ग्राहकों के लिए मूल्य संवर्द्धन करने और सही गुणवत्ता के सुरक्षित और विश्वसनीय उत्पादों को उपलब्ध कराने के लिए वे अपने एलपीजी वितरकों को कुशल एलपीजी स्टोव, सुरक्षा एलपीजी पाइप, ज्वालारोधी रसोईघर कवच, पोर्टेबल अग्निशमन यंत्र, किचन के सामान (प्रेशर कुकर, नॉनस्टिक बरतन, इंडक्शन कुकर आदि), लौ प्रकार का एलपी गैस लाइटर और रसोई घर के अन्य सामान / घरेलू वस्तुओं प्रमुख ब्रांडों के विक्रय की अनुमति दे रही हैं। इस कारोबार पहल का इंडियन ऑइल कॉरपोरेशन (आइओसी) द्वारा "नॉन फ्युएल बिज़नेस एक्टिविटी”, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) द्वारा "बियॉन्ड एलपीजी” और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) द्वारा “अलाइड रिटेल बिज़नेस” नाम दिया गया है।

मंत्री महोदय ने बताया कि जब भी ओएमसी किसी भी नए कनेक्शन की रिलीज के समय किसी भी अन्य उत्पाद/हॉट प्लेट की ज़बरदस्ती बिक्री की शिकायत प्राप्त करती हैं तो इनकी जांच की जाती है। यदि शिकायत जायज़ होती है तो  दोषी एलपीजी वितरक के खिलाफ विपणन अनुशासन के दिशा निर्देशों (एमडीजी) के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही की जाती है।

स्रोत: http://pib.nic.in

अन्य उपयोग

पुनः चक्रित कागज

कागज बनाते समय पुनः चक्रित कागज कम प्राकृतिक संसाधन और कम विषाक्त रसायन का उपयोग करता है। यह बताया गया है कि 100 प्रतिशत अवशेष कागज से एक टन कागज का निर्माण किया जा सकता है।

* यह लगभग 15 वृक्षों को बचाता है।

* लगभग 2500 किलोवाट ऊर्जा की बचत करता है।

* लगभग 20 हजार लीटर पानी बचाता है।

* लगभग 25 किलो ग्राम वायु प्रदूषण को कम करता है।

कृषि में ऊर्जा संरक्षण

कृषि क्षेत्र में ऊर्जा का उपयोग मुख्य रूप से सिंचाई/पानी बाहर पम्पिंग के लिए और अन्य कार्यों के लिए प्रयोग किया जाता है। मामूली सुधार के साथ प्रभावित करने और आईएसआई चिह्नित पंपों के द्वारा इन पंप की दक्षता में 25% से 35% सुधार की संभावना आ जाती है।

  • बड़े वॉल्व के चलते विद्युत /डीज़ल बचाने में मदद मिलती है क्योंकि कुँआ से पानी बाहर निकालने में अल्प ईंधन व ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  • पाईप में घुमाव व गाँठ जितना कम होगा, उसी मात्रा में ऊर्जा को भी बचाया जा सकता है।
  • किसान पाईप की ऊँचाई को 2 मीटर तक कम करके डीजल की बचत कर सकते हैं।
  • पम्प अधिक कारगर तब होता है जब उसकी ऊँचाई कुएं के जल स्तर से 10 फीट से अधिक न हों।
  • अच्छी गुणवत्ता वाले पीवीसी सेक्शन पाईप का इस्तेमाल करें ताकि 20 प्रतिशत तक की ऊर्जा व विद्युत को बचाया जा सके।
  • निर्माणकर्ता के निर्देशानुसार पम्प सेटों में नियमित तौर पर तेल व ग्रीस का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • वोल्टेज व ऊर्जा संरक्षण की स्थिति को सुधारने के लिए मोटर सहित उपयुक्त आईएसआई मार्क वाले कैपासिटर का प्रयोग करना चाहिए।
  • दिन के समय बल्ब को बंद रखें।


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