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अवधारणा

वर्षा जल संचयन क्या है?

वर्षा जल संचयन वर्षा के जल को किसी खास माध्यम से संचय करने या इकट्ठा करने की प्रक्रिया को कहा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में छत से प्राप्त वर्षाजल से उत्पन्न अप्रवाह संचित करने के लिए भी बहुत सी संरचनाओं का प्रयोग किया जा सकता है। शहरी क्षेत्रों में इमारतों की छत, पक्के व कच्चे क्ष्रेत्रों से प्राप्त वर्षा जल व्यर्थ चला जाता है। यह जल जलभृतों में पुनर्भरित किया जा सकता है व ज़रूरत के समय लाभकारी ढंग से प्रयोग में लाया जा सकता है। वर्षा जल संचयन की प्रणाली को इस तरीके से अभिकल्पित किया जाना चाहिए कि यह संचयन/इकट्‌ठा करने व पुनर्भरण प्रणाली के लिए ज्यादा जगह न घेरे। शहरी क्षेत्रों में छत से प्राप्त वर्षा जल का भण्डारण करने की कुछ तकनीके इस प्रकार से हैं।

आवश्यक तत्व

वर्षा जल संग्रहण तकनीक के आवश्यक तत्व निम्न हैं:

  • कैचमेंट क्षेत्र जहां से जल एकत्रित किया जा सके जैसे छत, सड़कें, खुले मैदान आदि
  • कैचमेंट क्षेत्र से भंडारण/पुर्नभरण क्षेत्र तक जल का परिवहन सिस्टम
  • वर्षा के पहले दौर को बहाने के लिए प्रथम फ्लश सिस्टम
  • प्रदूषण को हटाने के लिए फिल्टर सिस्टम
  • भंडारण टैंक एवं/अथवा अन्य पुर्नभरण संरचना

वर्षा जल संग्रहण के प्रमुख प्रतिनिधि

वर्षाजल संग्रहण कौन कर सकता है?
वर्षाजल संग्रहण संरचना स्थापित करना मुश्किल नहीं है। वर्षा जल संग्रहण संरचना को सभी अपना सकते हैं, जैसेःव्यक्तिगत घर

  • कॉलोनियां
  • बिल्डर/डवलपर
  • संस्थाएं
  • स्कूल/कॉलेज/विश्वविद्यालय
  • क्लब
  • अस्पताल
  • उद्योग

वर्षाजल संग्रहण के लाभ

  • इससे जल की मांग पूरी होती है।
  • जलापूर्ति का सतत स्त्रोत बन जाता है।
  • लागत कुशल तकनीक जिसे हर आम आदमी अपना सकता है।
  • भूजल के मुकाबले वर्षाजल ज़्यादा शुद्ध एवं प्रदूषण मुक्त होता है।
  • इसमें फ्लोराइड नाइट्रेट और टीडीएस जैसे रसायन होते हैं जो भूजल में आम तत्व है।
  • भूजल का स्तर सुधरता है।

वर्षाजल संग्रहण संरचनाओं का रख-रखाव

वर्षा जल संरचनाओं का रख-रखाव सरल है। यदि आसपास के क्षेत्र और प्रणाली एवं उसके विभिन्न घटकों की सफ़ाई रखी जाय जैसे छत, गटर, फिल्ट्रेशन इकाई एवं भंडारण टैंक तो पूरे समय पीने योग्य गुणवत्ता वाले पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

  • हमेशा जलग्रहण क्षेत्र/टैंक को स्वच्छ एवं स्वास्थ्यकर रखें।
  • मानसून से पहले छत की टाइलों एवं एस्बेस्टॉस की चद्दरों से काई हटा दें।
  • मानसून से पहले टैंक को पूरा खाली कर दें और उसकी भीतर से सफाई करें।
  • वर्षा के मौसम में और विशेषकर मानसून की पहली वर्षा से पहले पानी की निकासी (गटर) को साफ़ करें।
  • वर्षा के पहले दौर का पानी बहा दे। पहली वर्षा के इस पानी को बहाने के लिए पहली फ्लश व्यवस्था का उपयोग करें।
  • हर वर्षा ऋतु में फिल्टर माध्यम बदल दें।
  • बिना वर्षा की ऋतु में जल अंदर लाने वाले और बाहर ले जाने वाले सभी पाइपों को गाढ़ी बुनी नाइलॉन की जाली या पतले कपड़े या ढक्कन से ढक दें ताकि कीड़े, कृमि और मच्छर अंदर न आ सकें।
  • भंडारण टैंक में लीकेज या दरार की तुरन्त मरम्मत करें।
  • ढक्कन पर भारी वज़न न रखें।
  • संग्रहण गड्ढे में जल को निश्चल न रहने दें।
  • नल में ताले की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि जल की चोरी अथवा बर्बादी रोकी जा सके।
  • फिल्टर की बाल्टी बदलने से पहले फिल्टर सामग्री अच्छी तरह धोनी चाहिए।

 

स्त्रोत: जल एवं स्वच्छता सहारा संगठन, राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन, राजस्थान सरकार



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