राजीव गांधी ग्रामीण एलपीजी वितरक योजना इस योजना का उद्देश्य छोटे स्तर पर एलपीजी की एजेंसियों की स्थापना कर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों और अधिक मांग की संभावना(लगभग 600 सिलेंडर प्रतिमाह वाले क्षेत्र) वाले ग्रामीण क्षेत्रों में इसके उपयोग को बढ़ावा देने के साथ इसकी उपलब्धता को संभव बनाना था। योजना का क्षेत्र आरंभ में इस योजना को 8 राज्यों के 1200 स्थानों पर लागू किया गया जहाँ एलपीजी की पहुँच अत्यंत कम थी। राज्यवार क्षेत्रों का विवरण इस प्रकार रहा- क्रम संख्या राज्यों के नाम राज्य में स्थानों की संख्या 1 मध्य प्रदेश 97 2 उत्तर प्रदेश 290 3 राजस्थान 192 4 पश्चिम बंगाल 175 5 बिहार 251 6 झारखंड 80 7 छतीसगढ़ 39 8 उड़ीसा 101 योजना की मुख्य विशेषताएं राजीव गाँधी ग्रामीण एलपीजी वितरण योजना के अंतर्गत छोटे आकार वाली एजेंसियाँ होंगी जो कम वित्तीय साधनों और आधारभूत संरचना द्वारा स्थापित की जा सकती है। मौजूदा 2500 के बजाय यह 600 सिलिंडर प्रतिमाह रिफिल बिक्री की क्षमता वाली होगी। ये एजेंसियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में दूर तक अपनी पहुँच बनाएगी जहाँ नियमित आपूर्ति करना, संचालन और निवेश के आर्थिक कारणों से संभव नहीं था। राजीव गाँधी ग्रामीण एलपीजी वितरण योजना के अंतर्गत वितरक 1500 उपभोक्ताओं वाले ग्राम समूहों के लिए व्यवहार्य होंगे। ये एजेंसियाँ स्वयं संचालित होंगी। अपने परिवार जनों अथवा एक या दो कर्मचारियों की सहायता से वितरक स्वयं एजेंसी का प्रबंधन करेंगे। इसके अंतर्गत सिलिंडर की होम डिलिवरी (अर्थात् घरों तक पहुँचाने) की व्यवस्था नहीं होगी। वितरकों की आयु 21 से 45 के बीच होंगी जिससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नये अवसर प्राप्त होंगे। इस योजना के अंतर्गत वितरकों को योजना क्षेत्र के ही किसी गाँव का स्थायी निवासी होना आवश्यक है। इस योजना के अंतर्गत सभी एजेंसियाँ पति-पत्नी के संयुक्त नाम से होंगी। अकेले आवेदक की स्थिति में यह प्रावधान होगा कि विवाह के बाद नया सदस्य/नई सदस्या स्वत: एजेंसी में भागीदार बन जाएगा/जाएगी। यह ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण हेतु उठाया गया एक कदम होगा। एक नई राजीव गाँधी ग्रामीण एलपीजी वितरण एजेंसी की स्थापना हेतु संभावित निवेश 3.21 लाख रुपये तथा 20 मी X 24 मीटर आकार का भूमि-खंड उम्मीदवार के स्वामित्व में होना चाहिए। 1800 नये एलपीजी कनेक्शनों के जारी होने तक वितरक अपने निवेश व्यय की प्राप्ति करने में सक्षम होगा।। इस योजना की एक अहम विशेषता यह है कि इसके लिए किसी तरह का साक्षात्कार नहीं लिया जाएगा और वितरक का चयन ड्रॉ के आधार पर उन प्रतिभागियों के बीच से किया जायेगा जिन्होंने वित्तीय क्षमता और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर 80% से अधिक अंक प्राप्त किया हो। संबंधित राज्यों में 25% स्थान अनुसूचित जनजाति/अनसूचित जाति के लिए आरक्षित होंगे। सामान्य श्रेणी में 25% आरक्षण सेनानिवृत रक्षाकर्मियों, शारीरिक रूप से विकलांग एवं उल्लेखनीय खेल प्रतिभाओं को रखा जायेगा। यदि सामान्य श्रेणी में कोई उम्मीदवार नहीं मिलता है तो तो अगली बार विज्ञापन खुले संवर्ग के तहत दिया गया। स्रोत: पीआईबी संबंधित स्त्रोत 1. MNRE