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एग्रो मौसम विज्ञान

एग्रो मौसम विज्ञान कार्यक्रम

मंत्रालय के कृषि मौसम विज्ञानी सेवा कार्यक्रम का कृषि उत्‍पादन पर सीधा असर पड़ता है। ये सेवाएं 550 जिलों  में उपलब्‍ध हैं किसानों को खेती के विभिन्‍न चरणों से पूर्व परामर्श सूचनाएं मिलती हैं। वर्तमान में, लगभग 25 लाख किसान मोबाइल के माध्‍यम से इस सूचना का उपयोग कर रहे हैं। प्रौन्‍नत परामर्श सूचनाओं और राज्‍य सरकार प्राधिकरणों के निकट समन्‍वय से इस कार्यक्रम को, और अधिक कवरेज के लिए जारी रखा जाएगा।

कार्यक्रम का उद्देश्‍य

  1. किसानों को ब्‍लॉक स्‍तर पर फसल और स्‍थान विशेष एएएस  देने के लिए विद्यमान जिला स्‍तर एग्रोमेट परामर्श सूचना सेवाओं को और बेहतर बनाना।
  2. फसल मौसम बीमा के कार्यान्‍वयन के लिए ग्राम स्‍तर पर परामर्श सूचनाओं को जारी करने के लिए इष्‍टतम ऑब्‍ज़र्वेटरी नेटवर्क का डिज़ाइन तैयार करना।
  3. कृषि सेवाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए नोडल केंद्र के रूप में जिला एग्रोमेट इकाइयां स्‍थापित करना।
  4. निजीकृत एग्रोमेट परामर्श सूचना सेवाओं के साथ किसानों को अंतिम मील संपर्कता के माध्‍यम से कस्‍टमाइज्‍़ड परामर्श सूचना बुलेटिन उपलब्‍ध करवाना
  5. पशुधन, खेत खाद्यान्‍न की चराई आदि जैसे संबद्ध क्षेत्रों तक मौसम आधारित परामर्श सूचना सेवा का विस्‍तार करना।
  6. देश में मौसम-आधारित फसल बीमा के लिए समुचित प्रसारण और सहायक प्रणाली स्‍थापित करना।

प्रतिभागी संस्‍थान

भारत मौसम विज्ञान विभाग, नई दिल्‍ली।

कृषि विश्‍वविद्यालय।

कार्यान्‍वयन योजना

agroलक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने के लिए ब्‍लॉक लेवल पर जिला एग्रोमेटइकाइयां (डीएवी) स्‍थापित की जाएंगी। यह आईसीएआर और कृषि विज्ञान केंद्रों के विद्यमान केंद्रों (एसएयू) को सुदृढ़ करेगा। ब्‍लॉक/तालुका स्‍तर पर उच्‍च विभेदन मौसम पूर्वानुमान की तैयारी की आवश्‍यकता है। विशेषकर उप-जिला स्‍तर पर अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्रों में एग्रोमेट सेवा के लिए परामर्श सूचनाएं  पूर्वानुमान जारी करने की शुरूआत करने का प्रस्‍ताव है। परामर्श सूचनाएं प्रसारित करने और और 50% कृषि समुदाय को कवर करने के लिए प्रयास बढ़ाने की आवश्‍यकता है। वाणिज्‍यिक क्षेत्र की फसलों और बागवानी फसलों जिसमें महत्‍वपूर्ण नकदी फसलों जैसे चाय, कॉफी, सेब, आम, गन्‍ना, कपास, अंगूर आदि की फसल उत्‍पादक एसोसिएशनों को शामिल करते हुए खेती में लगे किसानों को ज़रूरत के आधार पर एग्रोमेट परामर्श सूचना सेवाएं प्रदान की जाना हैं। एएएस में सुदूर संवेदन का अनुप्रयोग (जल भार के नीचे के क्षेत्र की फसल, उत्‍पादकता और मृदा नमी स्‍थिति, छोटे क्षेत्रों के लिए पूर्व चेतावनी कृमि और रोग फैलाने की संभावना के साथ अन्‍य जीवीय अथवा अजीवीय स्‍थितियां) का विस्‍तार किया जाना है। जलवायु जागरूकता कार्यक्रमों के साथ विस्‍तार कर्मियों और किसानों को प्रशिक्षण दिया जाना भी महत्‍वपूर्ण है, और इसकी योजना बनाई जानी चाहिए। यह देखने के लिए अध्‍ययन किए जाएंगे कि क्‍या मौसम आधारित परामर्श सूचनाओं का समग्र उपज पर सकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है और खेती की लागत को किस प्रकार न्‍यूनतम किया जा सकता है। ये कार्य सभी क्षेत्रीय इकाइयों और डीएएमयू स्‍टेशनों पर किए जाएंगे।

डेलीवरेबल्‍स

जिला पैमाने पर प्रोन्‍नत एग्रोमेट परामर्शी सेवाएं तथा उप-जिला उप-जिला पैमाने पर एग्रोमेट परामर्शियों का प्रयोगात्‍मक सृजन

पशुधन एवं खेत खाद्यान्‍न की चराई के लिए कस्‍टमाइज्‍ड़ परामर्श-सूचना का विकास (सूखा प्रभावित क्षेत्र में)

विदेशी विनिमय घटक सहित बजट आवश्‍यकता

265.00 करोड़ रु. (करोड़ रु. में)

बजट आवश्‍यकता

स्‍कीम का नाम

2012-13

2013-14

2014-15

2015-16

2016-17

कुल

कृषि मौसम विज्ञान

58.00

52.00

49.00

52.00

54.00

265.00

 

स्रोत: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार

 



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